Thursday, March 12, 2026

अमेरिका ईरान इजरायल युद्ध


 अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में परस्पर विरोधी ख़बरें पढ़ने को मिल रहीं हैं। सभी पक्ष अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। इजरायल-अमेरिका समर्थक के अनुसार तेहरान धुंआ-धुंआ हो रहा है। ईरान के साथ खड़े लोगों ने अनुसार इजरायल और अमेरिका की हवा ख़राब है। दुनिया में तेल की किल्लत शुरू हो गई है। पाकिस्तान में वर्क फ़्राम होम शुरू हो गया है। स्कूल बंद हो गए हैं। हिंदुस्तान में कुछ शहरों में होटल बंद हो गए हैं। कमर्शियल सिलेंडर की क़िल्लत है। रसोई गैस के लिए लाइन। नोटबंदी के समय की लाइनों की याद दिला रही हैं। लड़ाई चलती रही तो आने वाले समय में परेशानियाँ बढ़ेंगी।

अमेरिका के राष्ट्रपति परस्पर विरोधी बयान दे रहे हैं। कभी कहते हैं कि युद्ध लंबा चलेगा कभी कहते हैं लड़ाई जब मन आए ख़त्म कर दूँगा। ईरान के लोग कह रहे हैं लड़ाई ईरान ख़त्म करेगा। इज़रायल और ईरान दोनों देशों में लड़ाई की खबरें देने पर पाबंदी है। दुनिया में लोग अपने-अपने स्रोतों से खबरें बता रहे हैं।
खबरों से पता चलता है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ठीक-ठीक बता नहीं पा रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान पर हमला क्यों किया। कोई कहता है अमेरिका दुनिया के ऊर्जा स्रोतों पर कब्जा करना चाहता है। कुछ लोगों का कहना है कि इपस्टीन फाइलों से ध्यान हटाने के लिए हमला करने के आदेश दिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की लड़कियों के साथ अश्लील फोटो तैर रहे हैं। पीड़ित लड़कियों ने उनके बोले डायलॉग भी बताए हैं।
आज अमेरिका अख़बार वासिंगटन पोस्ट में छपे एक लेख के अनुसार ट्रम्प की अश्लील मुद्रा में वायरल तस्वीर फर्जी है और ईरान के इशारे पर सर्कुलेट हो रही है ताकि ट्रम्प को बुरा बताया जा सके।
एक कहानी यह भी चल रही है कि ट्रम्प को उनके यहूदी दामाद ने ईरान पर हमला करने के लिए सलाह दी। ट्रम्प का दामाद इजरायल का मोहरा है। एक तरह से ट्रम्प इजरायल की कठपुतली है। वह इजरायल के इशारों पर नाच रहे हैं। इजरायल के नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा चल रहा है। लेकिन वह देश के शासक बने हुए हैं और लड़ाई कर रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने चुनाव प्रचार करते हुए वायदा किया था कि वो दुनिया में लड़ाई बंद करवा देंगे। रूस-यूक्रेन लड़ाई ख़त्म हो जायेगी। गाजा में शांति स्थापित हो जायेगी। रूस-यूक्रेन अभी चल ही रहा है। गाजा में अभी भी कभी भी बमबारी की खबरें आती रहती हैं। अब वह ख़ुद लड़ाई में कूद पड़े हैं। 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' का नारा देने वाला राष्ट्रपति दुनिया को बर्बाद करने में जुट गया है।
एक खबर के अनुसार अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने पिछले कुछ वर्षों में कई मुस्लिम देशों के लोगों को आतंकवादी होने का नैरेटिव गढ़कर लाखों मुस्लिम लोगों को मरवा दिया। बमबारी में निरीह लोगों की हत्याएं की। उनके समर्थन में बेशर्म और बयान बयान दिए। परसाई जी कहते थे -" अमरीकी शासक हमले को सभ्यता का प्रसार कहते हैं।बम बरसते हैं तो मरने वाले सोचते है,सभ्यता बरस रही है।"
अमेरिका की करतूतों के अनगिनत पढ़ने को मिलते हैं। लोकतंत्र की हिमायत करने वाला देश दुनिया में अराजकता फैलाने में जुटा है। ये अजीब विकसित देश है जिसके विकास की नीव दूसरे देशों के संसाधनों की लूट और मनमानी पर आधारित है।
ईरान-इजरायल-अमेरिका की लड़ाई का क्या हस्र होगा कहना मुश्किल है लेकिन यह साफ़ है कि दुनिया में चंद लोग अपनी सनक में दुनिया को बर्बाद करने पर तुले हुये हैं। ताक़त के केंद्रीकरण कितना ख़तरनाक हो सकता है दुनिया के लिए यह साफ़ देखने में आ रहा है।
इस बारे में अपने देश की भूमिका के बारे में कुछ कहना ठीक नहीं। अंतर्राष्ट्रीय फ़ोरम पर इतनी बेइज्जती पहले कभी हुई हो याद नहीं आता। कोई इसे अपना साहब का मास्टरस्ट्रोक बताता है। कोई कहता है वे भी कंप्रोमाइज्ड हैं। उनकी भी कोई फाइल्स दबी हैं। लोग यह भी कहते हैं कि अपने कॉर्पोरेट साथियों के हित साधन के कारण साहब चुप हैं।
एक आम नागरिक के रूप में हमारी जानकारी के स्तर की सीमायें हैं लेकिन जो सुनते हैं उनसे लगता है कि क्या कारण है जिन फाइल्स में नाम आने पर दुनिया के लोगों के अपने पद छोड़ दिए उसी इपस्तीन फ़ाइल में नाम आने पर मंत्री ने अपना पद छोड़ा न उनको निकाला गया। लगता है अपने राजनीतिक गुरु से भी कुछ नहीं सीखा साहब ने जिन्होंने जैन हवाला कांड में नाम आने पर लालकृष्ण आडवाणी ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और घोषणा की थी कि जब तक अदालत से बेदाग साबित नहीं हो जाते, तब तक चुनाव नहीं लड़ेंगे। तीस साल में पार्टी की नैतिकता की परिभाषाएँ इतनी बदल गईं।
लड़ाई कितने दिन चलेगी, कहना मुश्किल है। जितनी देर चलेगी उतनी बर्बादी होगी। लोग मारे जाएँगे। उजड़ेंगे। किसी भी देश के हों युद्ध किसी के लिए अच्छा नहीं होता। जितनी जल्दी यह बंद हो उतना दुनिया के लिए अच्छा होगा।
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