गाड़ी में पढाई सौ किलोमीटर तक के लिए पेट्रोल था। लखनऊ में इतने पेट्रोल में हफ़्ता आराम से गुज़र जाता। लेकिन हमको लखनऊ से नोयडा आना था। कार से। करीब साढ़े पाँच सौ किलोमीटर चलने भर का पेट्रोल चाहिए था। मतलब क़रीब तीन सौ किलोमीटर चलने का पेट्रोल कम था गाड़ी में।
पेट्रोल पंप में भीड़ थी। लेकिन इतनी नहीं कि 'कई किलोमीटर लंबी लाइन' कहा जा सके। हड़बड़ी में जिस लाइन में लगे वह सीएनजी लेने वालों की लाइन थी। हमारे आगे टेम्पो लगे थे। दो मिनट बाद पीछे भी टेम्पो लग गए। 'गाड़ी के आगे कुछ टेम्पो, गाड़ी के कुछ पीछे टेम्पो' वाला सीन हो गए। आगे बढ़ने का कोई फ़ायदा नहीं था। पीछे हटने का रास्ता नहीं।
कुछ देर बाद हमारी समस्या समझकर एक ऑटो वाले ने लाइन से बाहर आने में हमारी सहायता की। हम पेट्रोल वाली लाइन में लग गए। हमारे आगे करीब सात-आठ गाड़ियाँ थीं। हम अपनी बारी का इंतजार करने लगे।
हमारे आगे वाली गाड़ी में एक बुजुर्ग हड़बड़ाते हुए गाड़ी से निकलते ही बोले -'गाड़ी फुल कर दो।' उसने बताया -'बीस लीटर से अधिक नहीं मिल पाएगा।' बुजुर्गवार ने भुनभुनाते हुए कहा -'भर दो बीस लीटर ही।'
बुजुर्गवार के जाने के बाद हमारा नम्बर आया। हमने कहा -'बीस लीटर हमें भी दे दो।'
हमारे गाड़ी की टंकी में नोजल घुसाते हुए पंप आपरेटर ने कहा -'पेट्रोल की कोई कमी नहीं। बिल्कुल चिंता न करें। मिलता रहेगा।'
आपरेटर की तसल्ली बक्श आवाज़ सुनकर हमें लगा -' माननीय प्रधानमंत्री की आपदा के लिए तैयार रहने वाली थकी आवाज के बजाय इस पंप आपरेटर का वीडियो चलाया जाता तो ज़्यादा भरोसेमंद लगता। फिर लगा कि ऐसा होता तो कुछ दिन बाद यह भी भाइयों-बहनों करने लगता। फिर पेट्रोल कौन भरता?
दूसरे दिन बाक़ी बचा पेट्रोल भराने गए। दूसरे पेट्रोल पंप। वहाँ एकदम सन्नाटा था। लगा शायद पेट्रोल के न होने की वजह से पम्प बंद है। लेकिन ऐसा नहीं। हम अकेले थे पेट्रोल भराने वाले। उसने कहा -'दो दिन पहले यहां सांस लेने की फुर्सत नहीं थी। आज सन्नाटा है।' पेट्रोल डालते हुए उसने भी आश्वस्त किया कि पेट्रोल की कोई कमी नहीं है।
करीब पंद्रह लीटर पेट्रोल भराने के बाद ऑटो कट हो गया। पेट्रोल भरना बंद हो गया। हम भुगतान करके चले आए। ढाई सौ किलोमीटर चलने भर के पेट्रोल के बाद 35 लीटर भरवाने के बाद गाड़ी में कम से कम छह सौ किलोमीटर चलने भर का पेट्रोल होना चाहिए। लेकिन गाड़ी का फ़्यूलमीटर साढ़े चार सौ किलोमीटर यात्रा तक का ही पेट्रोल बता रहा था। हम चकराये कि डेढ़ सौ किलोमीटर का पेट्रोल कहाँ गया? क्या पेट्रोल टंकी भी भ्रष्टाचार में लिप्त होकर कमीशन खोरी करती है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि पेट्रोल पंप वाले ने पेट्रोल डाला ही न हो। गड़बड़ कर दिया हो।
नेट पर चेक किया तो पता चला कि टंकी की क्षमता साठ लीटर है। सोचा अभी पूरा नहीं भरा होगा टैंक। भरवा लेते हैं। दूसरे पेट्रोल पंप गए। वहाँ भी हम अकेले भरवाने वाले थे। हमने फुल करने को कहा। नोजल से पेट्रोल अंदर जाते ही हमारी गाड़ी ने पेट्रोल की उल्टी करनी शुरू कर दी। मतलब पहले वाले पेट्रोल पंप पर हमारा शक फ़िज़ूल था। टंकी पूरी भरी थी।
टंकी पूरी भरी होने के बावजूद गाड़ी साढ़े चार सौ किलोमीटर का पैट्रोल ही बता रही थी। हमने सोचा जो होगा देखा जाएगा।
कल नोयडा आए तो आधे रास्ते में एहतियान दस लीटर पेट्रोल और भरवा लिए। नोयडा पहुंचकर देखा कि पेट्रोल की टंकी 60% फुल है।लखनऊ से नोयडा तक की 515 किलोमीटर की यात्रा के बाद अभी देखा कि गाड़ी में 361 किलोमीटर चलने का तेल है। मतलब कुल 575+361 = 876 किलोमीटर चलने लायक तेल होने के बावजूद गाड़ी ने 450 किलोमीटर के ऊपर चलने की गारंटी नहीं ली।
यह देखकर लगा कि आधुनिक कहलाने वाली गाड़ियाँ भी लोकतांत्रिक देशों की तरह झूठ बोलने लगी हैं। ट्रम्प कहते हैं -'दस दिन हमला नहीं करेंगे लेकिन ईरान पर बम बरसाने लगते हैं। इजरायल से खबरें आतीं हैं कि सेना थकने लगी है लेकिन वहाँ का प्रधानमंत्री कहता -हम दुनिया के किसी भी देश पर आक्रमण कर सकते हैं।
अमेरिका का राष्ट्रपति कहता है ईरान से बातचीत अच्छी चल रही है लेकिन ईरान कहता है उससे बात ही नहीं चल रही तो अच्छी क्या होगी?' अपने कर्णधार के बारे में कुछ न हो कहा जाये तो बेहतर। उनके मन की बात वही समझ सकते हैं।
आज दुनिया के आधुनिक कहे जाने वाले देशों के कर्णधारों ने दुनिया की ऐसे हाल बना दिए हैं कि क्या ही कहा जाये? अपने-अपने देश को महान बनाने के नाम पर देश और दुनिया को बर्बाद कराने पर आमादा हैं। कई विकसित देशों के अंदरखाने की कहानियाँ बाहर आने पर लगता है कि उनके विकास के मूल में कार्यकुशलता, वैज्ञानिक उन्नति से ज़्यादा बड़ा योगदान उनकी लूटमार का है। पिंडारियों की तरह दुनिया को लूटना और पिछड़ा बनाए रखना ताकि वे विकसित कहला सकें।
गाड़ी में पेट्रोल भरवाने की बात से बात शुरू करके अपन विकसित देशों की लूटपाट तक पहुंच गए। पूरी दुनिया में यही चल रहा है। अपन दुनिया से कोई अलग थोड़ी हैं।

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