पिछले कुछ दिनों में अपनी फेसबुक की पोस्ट अपने ब्लॉग (फ़ुरसतिया) पर चढ़ाई। पहले भी कई बार ऐसा कर चुके थे। पिछले कुछ साल की फेसबुक ऐसी थीं जो ब्लॉग में सेव नहीं की थीं। फेसबुक की पोस्ट्स ब्लॉग में रखने का कारण फेसबुक के तमाम नखरे रहे। कई मित्रों का खाता फेसबुक ने हटा दिया। वर्षों के लेख हज़म कर गया फेसबुक।
फेसबुक की पोस्ट ब्लॉगर पर रखना अपना कीमती सामान बैंक के लॉकर में रखने जैसा है। खराब या अच्छा जैसा भी है लेखन तो है। कम से कम ऐसा तो है जो हमें लेखक होने का भरम दिलाये रहता है।
फेसबुक पर लिखने की शुरुआत 16 साल पहले हुई थी। 15 फ़रवरी, 2010 को। इसके पहले अपने ब्लॉग पर ही लिखते थे। ब्लॉगिंग पर लिखने की शुरूआत 20 अगस्त, 2004 को हुई थी। मतलब क़रीब साढ़े 21 साल पहले। इस दौरान कुल मिलाकर लगभग 3284 लिखी। मतलब औसतन लगभग 150 प्रति वर्ष। ब्लॉगिंग के समय पोस्ट लिखने का औसत लगभग 85 पोस्ट प्रति वर्ष था। फेसबुक में आने का बाद यह औसत 180 ( ब्लॉग के मुकाबले लगभग दोगुना) हो गया। इसका कारण शायद फेसबुक पर पोस्ट लिखने में आसानी रही। ब्लॉग पर लिखने के पहले थोड़ा सोचते थे कि क्या लिखें? फेसबुक में लिखने के बाद भी नहीं सोचते -क्या लिख गए।
ब्लॉगिंग के दिनों में इससे कमाई के किस्से सुनते थे। यह कि कई ब्लॉगरों ने नौकरी छोड़कर ब्लॉगिंग से कमाई शुरू की और लखपति हो गए। हमारे ब्लॉग पर आजकल तक एक चवन्नी की कमाई नहीं हुई। उसमें विज्ञापन ही नहीं लगे हैं। फेसबुक पर अलबत्ता आज देखा तो 52 डॉलर की कमाई हुई है। मतलब आज के 4876.31 रुपए। फेसबुक से कमाई के जो तमाम फ़ंडे बताये हैं लोगों ने लेकिन उनको अपनाने का धीरज और मन बन नहीं पाया।
अभी तक अपन फेसबुक पर ही पोस्ट लिखते थे । लेकिन अब ब्लॉग पर भी पोस्ट किया करेंगे। ब्लॉग पर कैटेगरी के हिसाब से पुरानी पोस्ट पढ़ना और खोजना ज़्यादा आसान है। लिंक लगाना भी ब्लॉग पर ज़्यादा सुगम है। फेसबुक पर आप किसी दूसरे प्लेटफार्म का लिंक लगाओ, फेसबुक नखरा करेगा। जबकि ब्लॉगर इस मामले में उदार है। आप यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम या किसी भी साइट का कोई भी लिंक लगाओ ब्लॉग कभी नखरा नहीं करता। अलबत्ता फेसबुक पर मोबाइल से फोटो लगाना आसान है।ब्लॉग पर मोबाइल की फ़ोटो लगाने में अभी मसक्कत करनी होती है। कोई तरीका होगा जरूर। सीखेंगे। लगायेंगे।
ब्लॉगिंग के दिनों से अभी तक पाठक, प्रसंशक, पसंदीदा लेखक लगातार बदलते रहे हैं। कई लोग हैं जिनकी हर पोस्ट पढ़ने का मन करता है। उनमें से कुछ आलटाइम फ़ेवरिट हैं। कुछ लोगों का लिखा टाइप्ड लगने लगता है। मेरे लिखे पर भी लोगों की ऐसी ही कुछ धारणा होगी। मेरे पाठक भी बदलते रहे। कभी हर पोस्ट पर लाइक, टिप्पणी करने वाले कई, कई बार महीनों तक नहीं दिखते।
2004 में ब्लॉगिंग से शुरू करके अब तक मेरी दस किताबें आ गईं हैं। ब्लॉगिंग जब शुरू की थी तो ऐसा कोई इरादा नहीं था। लेकिन मजाक-मजाक में किताबें आती गईं। आने वाले समय में भी अगर आलस्य पर नियंत्रण रहा तो इस साल भी दो-तीन किताबें शायद आ जायें।
इस बीच कई बार पॉडकास्टिंग करने के भी विचार आया। अपना यूट्यूब चैनल नियमित करने की सोची। लेकिन एक तो अपनी आवाज और दूसरे तकनीकी लफड़े और तामझाम के चलते ऐसा हो नहीं सका। अच्छा ही हुआ शायद।
मेरे पाठक मित्रों की प्रतिक्रियाएं, रचनात्मक टिप्पणियां और सुझाव मेरे लेखन का प्राणतत्त्व हैं। इसके लिए मैं अपने पाठक मित्रों का शुक्रिया अदा करता हूँ।

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