Wednesday, March 18, 2026

ऑटोमैटिक गाड़ियों का लफड़ा

 सुबह चाय बनाने के लिए गैस चूल्हा ऑन किया। स्पार्क हुआ लेकिन चूल्हा जला नहीं। पता चला गैस सप्लाई बाधित है। सोसाइटी के व्हॉट्सएप ग्रुप में देखा । घंटे भर पहले का मेसेज था -'गैस पाइप लाइन रिपेयर का काम चल रहा है। चार-पाँच घंटे गैस सप्लाई बाधित रहेगी।'

सुबह की चाय के बनाने के विकल्प सोचे। बिजली की केतली में पानी और दूध गर्म किया। थोड़ी देर में दूध उबलने लगा। फौरन स्विच बंद किया। लेकिन तब तक प्लेटफार्म गीला हो गया था। बाद में आहिस्ते-आहिस्ते चाय बनाई। गैस सप्लाई शुरू होने का इंतजार करते हुए ब्रेड,बटर का नाश्ता किया। फल खाये। दोपहर तक गैस सप्लाई बहाल हो गई। इस बीच गैस सप्लाई न होने पर कई विकल्प सोच डाले।
अखबार में एक पूरा पन्ने पर गैस की किल्लत के समाचार दिखते हैं। कई नामी रेस्तरां बंद होने के भी समाचार हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर कई लोग इस किल्लत को फर्जी बताते हुए पोस्ट लिख रहे हैं। पता नहीं सच क्या है?
अमेरिका-ईरान-इजरायल की लड़ाई पता नहीं कितने दिन चलती है। इसका दुनिया पर क्या असर पड़ेगा यह आने वाला समय बताएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) का हल्ला मचाते हुए अमेरिका को पीछे धकेलते हुए पता नहीं किस समय में ले जाना चाहते हैं। कम से कम उस समय तक ले ही जाना चाहता होंगे जब खाना बनाने के लिए गैस का चलन शुरू नहीं हुआ होगा।
दोपहर को कुछ सामान लेने गए। गाड़ी से। गाड़ी रोककर सामान लिया। लौटने के लिए गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश की। गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई। मेसेज आ रहा था -' गाड़ी की चाबी नहीं है।' जबकि चाबी हमारे हाथ में गाड़ी में ही थी। लेकिन डैशबोर्ड पर मेसेज के हिसाब से गाड़ी में चाबी नहीं थी। अजब बवाल।
सोचा कि साथ के बालक को घर भेजकर दूसरी चाबी मंगाई जाए। लेकिन फिर लगा कि शायद इसकी बैटरी खलास हो गई हो। संयोग की बात जिस दुकान के बाहर गाड़ी खड़ी थी वह बिजली की दुकान थी। पूछने पर उसके पास चाबी का बैटरी सेल मिल गया। नया सेल लगते ही गाड़ी स्टार्ट हो गई। चल दी। घर आ गए।
ऑटोमैटिक गाड़ियों का ये लफड़ा बड़ा अजीब है। गाड़ी कहीं भी खड़ी हो जाये और कह दे -'चाबी नहीं है।'
सेल खत्म होने के बाद गाड़ी एकदम मुक्त अर्थव्यवस्था की तरह हो जाती है। हर दरवाजा बिना ताला चाबी का हो जाता है। सुविधा की चीज कैसे असुविधा का कारण बन जाती है इसका कल एक बार फिर एहसास हुआ। सेल भी दो महीने पहले ही डलवाये हैं।
लोगों ने सुझाव दिया एकाध सेल स्पेयर में रख के चलिए। सेल ज्यादातर चीनी हैं। उनका भी कोई भरोसा नहीं। कब गोली दे जायें।
आटोमैटिक गाड़ी (समान) के साथ यह समस्या है। आटोमैटिक चलती है तो अपने आप खड़ी भी जाती है। गाड़ी में बैठी हुई सवारी बाहर नहीं निकल सकती अगर चाबी गाड़ी से दूर हो। मैनुअल मोड वाली गाड़ी में यह समस्या नहीं होती। इसी सिलसिले में आज ही एक खबर पढ़ी अखबार में जिसमें घर के लोग आग में जल गए। दरवाजा खुल नहीं पाया क्योंकि उसमें डिजिटल लॉक लगा था। आधुनिक होते सामानों के साइड इफ़ेक्ट हैं ये।
ऐसे में हमने एक बार फिर से सैंट्रो सुंदरी की याद आई। कहीं रुकी तो धक्का देने पर चल देती थी। गाड़ी की चाबी अंदर बंद हो गई तो बड़े स्केल से खिड़की खोल ली। और भी तमाम यादें। लेकिन अब तो वह यादों में ही रहेगी।
सैंट्रो सुंदरी के शीशे पर जली धूल पर Suman की लिखाई -'Anup You are always late' 👇

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