Wednesday, November 06, 2019

अमेरिका भारत से ढाई गुना तेज चलता है

 


न्यूयार्क हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही Saurabh मिले। दो दिन पहले ही पिता बने हैं। अस्पताल से अभी घर आना है बच्चे को। उसको छोड़कर हमको लेने आये। बाप बनते ही इंसान ज्यादा जिम्मेदार हो जाता है।
फ्लाइट कुछ देर आई। कुछ समय इम्मीग्रेशन में लगा। सौरभ की गाड़ी का पार्किंग समय बढ़ता गया। बाहर निकले तो कुल जमा 18 डॉलर धरा लिए गए पार्किंग के। 18 डॉलर मतलब 1280 रुपये करीब।
पार्किंग में खड़ी गाड़ी में हम आदतन बाईं तरफ बैठने को हुए। लेकिन फिर सौरभ ने याद दिलाया कि अमेरिका में ड्रॉइवर दाईं तरफ बैठता है। हमने मतलब निकाला अमेरिका मूलतः दक्षिणपंथी है।
कुछ देर में ही हम न्यूयार्क-न्यूजर्सी के जीटी रोड मतलब हाई वे पर आ गए। हडसन नदी पड़ी पहले। चलती गाड़ी से देखे नदी किनारे कोई पंडा तख्त डाले नहीं दिखा। न ही कोई फूल माला नदी में बहती दिखी। साफ भले हो लेकिन पवित्र नहीं होगी नदी। पवित्र होती कुछ फूल-पत्ती , हवन सामग्री दिखती नदी में।
नदी पर बना पुल आठ लेन का। चार आने की , चार जाने की। कानपुर का जाजमऊ का नया पुल चार लेन का है। नदी नीचे बह रही थी । मन किया रुककर थोड़ा नदी भी देख लें।लेकिन उसको बाद के लिए छोड़ दिये।
आगे एक टोल नाका पड़ा। लेकिन गाड़ी उसको सर्र से पार करके आगे निकल गयी। हमको लगा पैसे बचा लिए गए। लेकिन ऐसा था नहीं। गाड़ी के सीसे में एक डिबिया नुमा डिवाइस लगी है। गाड़ी टोल नाके से गुज़रते ही इंटरनेट के माध्यम से टोल के पैसे गाड़ी वाले के क्रेडिट कार्ड से कट जाते हैं। एक बार का चार्ज 6 डॉलर मतलब 430 रुपये करीब। हमारे लखनऊ टोल पर आने जाने के 110 रुपये लगते है। मतलब यहां टोल आठ गुना मंहगा।
अलग-अलग टोल के अलग दाम। न्यूयार्क वाले टोल के तो शायद 20 $ लगते हैं। बीस डॉलर मतलब 1400 रुपये करीब।
गाड़ी में लगी डिवाइस से पैसे सीधे कटने की सुविधा चकाचक लगी। किसी के छूटने की कोई गुंजाइश नहीं। कोई दाएं-बाएं करके निकल जाए यह लफड़ा भी नहीं। टोल नाके पर झिकझिक भी नहीं कि डिफेंस के अफसर हैं। जाने दो। कोई जाने देता, कोई पैसे धरा लेता। यहां ऐसा कोई बवाल ही नहीं। पैसा कटाओ, निकल जाओ। समय की बचत अलग।
तकनीक के उपयोग से किस तरह टोल चोरी और समय बच सकता यह एक छुटकी डिवाइस देखकर लगा।
अपने यहां इसे चालू किया जाए अभी तो क्या पता कभी बिजली गोल, कभी इंटरनेट गायब। लाखों का नुकसान हो जाये। गाड़ियों की लंबी लाइन लग जाये टोल प्लाजा के सामने या अखबार की खबर बने -'टोल प्लाजा पर इंटरनेट न होने के चलते करोड़ो का घपला।' अभी समय लगेगा अपने यहां ऐसा होने में।
आगे बड़ा हाइवे मिला। 12 लेन का हाइवे। 4 - 4 कारों के लिए। 2- 2 ट्रकों के लिए। सड़कों पर गाड़ियां और बड़े-बड़े ट्रक तेज गति से चलते चले जा रहे थे।
लेकिन जितने भी ट्रक देखे हमने उनमें से किसी पर भी
'अस्सी के फूल, नब्बे की माला
'बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला'
वाली रचनात्मक शायरी नहीं देखने को मिले। अमेरिका का ट्रक साहित्य कमजोर दिखा मुझे। आगे शायद दिखे। अमेरिकन लोगों को इस मामले में ध्यान देना चाहिए।
गति सीमा 65 मील/प्रति घण्टा लिखी हुई थी। 65 मील मतलब 100 किमी से ऊपर। अपने यहां गति सीमा जहां लिखी देखी वह 40 किमी ही दिखी। मतलब अमेरिका लिखा-पढ़ी में अपने यहां से ढाई गुना तेज चलता है। आगरा एक्सप्रेस हाई वे की बात हम नहीं कर रहे। हम उधर से गये नहीं कभी।
तेजी और धीमे की बात पर रामदरश मिश्र जी का शेर याद आ गया:
जहां तुम पहुंचे छलांगे लगाकर
वहीं मैं भी पहुंचा मगर धीरे-धीरे।
सड़क की बांई तरफ पीली पट्टी बनी हुई थी। पीली पट्टी के सबसे नजदीक वाली लेन पर सबसे तेज गति वाली गाड़ियां चलती हैं। पट्टी से जितनी दूर गाड़ी , उतनी तेज स्पीड। जिस सड़क पर एक ही तरफ पीली पट्टी बनी है मतलब वह एकल मार्ग है।
घण्टे भर करीब में हम न्यूजर्सी पहुंच गए। खा-पीकर सोये तो नींद खुली शाम को। रात को नींद कम आई। सुबह भी जल्ली उठ गए।
सुबह सात बजे हैं यहां। तापमान 5 डिग्री। कानपुर में इस समय साढ़े पांच बजे हैं। तापमान करीब 29 डिग्री। मतलब साढ़े दस घण्टे और 24 डिग्री का अंतर।
बाहर सूरज भाई निकल आए हैं। अभी जरा जाते हैं उनसे भी मिलने। सड़क पर गाड़ियों की आबादी बढ़ गयी है। देखते हैं जरा उनका भी हाल-चाल।

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