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| अरविंद तिवारी जी का 14 वाँ व्यंग्य संग्रह |
जमीन से 11887 मीटर की ऊँचाई ‘ लेखक, आलोचक और गोलगप्पे वाला’। अरविंद तिवारी जी का यह नया व्यंग्य संग्रह मलेशिया एयरलाइंस के जहाज से ya 879 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से यात्रा कर रहा है। बाहर का तापमान शून्य से 53 डिग्री नीचे है। Arvind Tiwari
अधिकतर लेखकों की किताबें आजकल बिना रॉयल्टी की छपती हैं। अरविंद तिवारी जी हालांकि हाल में ही नेशनल बुक ट्रस्ट से तगड़ी रॉयल्टी पाये हैं। लाखों में। आगरा एक्सप्रेसवे से कार से आते हुए सोचा था कि गाड़ी घुमा लें शिकोहाबाद की तरफ़। रॉयल्टी की मिठाई खाते चलें। लेकिन रात हो रही थी इसलिए सीधे नोयडा की तरफ़ बढ़ लिए।
बाली यात्रा के दौरान साथ ने केवल दो किताबें लाए हैं। उनमें से एक अरविंद तिवारी जी का यह व्यंग्य संग्रह भी है। पेन भी साथ में लाए हैं ताकि पढ़ते हुए पंच पर निशान लगा सकें। संग्रह के पहले व्यंग्य लेख गड्ढों का विद्रोह के कुछ पंच:
* गड्ढों और सड़क का रिश्ता आग और धुँए के रिश्ते की तरह होता है। जहाँ गड्ढा होगा , वहाँ सड़क का अस्तित्व है। जहाँ गड्डा नहीं है , वहाँ सड़क नहीं हो सकती।
* जैसे प्रेमी प्रेमिका एक दूसरे में पूरक होते हैं, उसी तरह गड्डे और सड़क एक दूसरे में पूरक होते हैं।
* गड्डे और सड़क का मिलन शाश्वत मिलन है। दोनों का एक दूसरे को स्पर्श करना ही दिव्य स्पर्श कहलाता है।
* सड़क की नियति है बह जाना। उसे बहते हुए ये गड्डे बड़ी लाचारी से देखते रहते हैं। कर कुछ नहीं पाते।
* बिना गड्ढों के सड़क की कल्पना करना बेमानी है।
इतनी ऊँचाई और इतना तेज गति से चलते हुए कम ही किताबें पढ़ी जाती हैं। इससे साबित होता है कि अरविंद तिवारी जी किताबें ऊँचे लेखक हैं।
अरविंद तिवारी जी को उनके 14 वें व्यंग्य संग्रह की बधाई।

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