Friday, September 18, 2026

हमारा बाली का पहला दिन

Hotal Tijili बाली। हमारा पहले दिन का  ठिकाना।

 हवाई अड्डे से होटल की तरफ़ आते हुए सड़क के नज़ारे देखते हुए आए। सड़कें बहुत अधिक चौड़ी नहीं। बाइक पर चालक और सवारी दोनों हेलमेट लगाए हुए। बहुत इमारतें बहुत ऊँची नहीं। जगह-जगह हिंदू धर्म के पौराणिक आख्यान की मूर्तियां दिखीं। शहर कुछ-कुछ गोवा जैसा लगा।

एक जगह सड़क किनारे तार पर विजिटिंग कार्ड जैसा लटका दिखा। विवरण पढ़ने पर पता चला कि यह एक इंटरनेट प्रोजेक्ट है। यह 'MyRepublic' इंटरनेट प्रदाता द्वारा चलाया जा रहा एक फाइबर-टू-द-होम (FTTH) प्रोजेक्ट है)।
इंटरनेट केबल के नेटवर्क प्रोजेक्ट का परिचय पत्र किसी बड़े होर्डिंग की जगह इंटरनेट केबल पर ही लटका है। रोचक अंदाज़।
होटल में छठी मंजिल पर कमरा मिला। दो स्विमिंग पूल हैं होटल में। एक छठी मंजिल पर, दूसरा पहली मंजिल पर। दोनों का मुआयना करके तय किया छठी मंजिल पर स्विमिंग करेंगे। बाली आकर दो सौ रुपए प्रति दिन के हिसाब बचाएंगे।
Hotal तिजिली की लॉबी।


पूल देखकर आए तो होटल में हमारे साथी बाहर खड़े थे। उनकी समस्या यह कि वे कमरे के बाहर निकल आए और कमरे का दरवाजा बंद हो गया। चाबी मेरे पास थी। हमको नेपाल का किस्सा याद आ गया। वहाँ हम कमरे के बाहर निकल आए थे। चाबी अंदर रह गई थी। मास्टर की से खुलवाना पड़ा था कमरा।
तय हुआ कि कमरे की डुप्लीकेट चाबी भी ली जाए। होटल वाले ने चाबी तो दे दी लेकिन सिक्योरिटी के 50000/- IDR जमा करवा लिए। हमने एक लाख इंडोनेशिया के रुपये दिए। उसके पास वापस देने के फुटकर पैसे नहीं थे। उसने एक लाख रुपए जमा करवा लिए। ( करीब 539 रुपये)।
मुद्रा विनिमय में भारतीय रुपए का कोई जिक्र नहीं।

कमरे में पहुँचने पर यह भी पता चला कि हमारे चार्जर यहाँ चलते नहीं। दो चार्जर चाहिए थे। एक तो लाबी में टहलते बालक ने मुफ्त में दे दिया। दूसरे के लिए बताया कि होटल लॉबी में मिलेगा। लॉबी में जाने पर चार्जर मिला तो लेकिन उसके भी पचास हज़ार IDR जमा करने की कहा गया। हमारे पहले से जमा थे इतने रुपये। हम नोट कराकर चले आए।
जिस चार्जर को लाबी में काम करने वाले बच्चे ने मुफ्त ने दे दिया उसी के लिए लॉबी वाले लोगों ने पचास हज़ार रुपए धरा लिए। इसीलिए कहा जाता है कि नीचे के स्तर पर जुगाड़ करके काम निकाल लेना हमेशा बेहतर होता है। मामला जितना ऊपर जाता है , उतना बिगड़ता है।
इंडोनेशियाई स्टोर

शाम को खाना खाने निकले। होटल के पास ही , क्वींस ऑफ़ इंडिया , एक भारतीय रेस्टोरेंट में खाना खाया। इस होटल का उद्घाटन 2011 में इंडोनेशिया ने भारत के राजदूत ने किया था।
होटल में काम करने वाले स्टाफ नए-नए दिखे। वेटर से पूछने पर पता चला कि हर तीन-चार साल में मैनेजमेंट स्टाफ बदल देता है। हिंदी बहुत कम जानते हैं लोग। केवल ‘ अच्छा, अच्छा’ बोल पाते हैं।
क्वींस ऑफ़ इंडिया रेस्टोरेंट का उद्धाटन 2011 में
इंडोनेशिया में भारतीय राजदूत ने किया था।

रास्ते में कई करेंसी बदलने की दुकानें दिखीं। कई देशों की करेंसी बदलने के रेट लिखे थे। भारतीय रुपए का जिक्र बहुत कम दिखा। यह तब है जबकि एक भारतीय रुपया 186 इंडोनेशियाई रुपए के बराबर है। हमने सोचा -‘ ग़ज़ब बेइज्जती है भारतीय रुपये की। मुद्रा में रूप ने इसका जिक्र ही नहीं।’
एक इंडोनेशियाई स्टोर ओर इंडो मार्ट लिखा था। लगा यह भारतीय स्टोर है। लेकिन लगने और होने में अंतर होता है।
क्वीन्स इंडिया होटल के गेट पर भारत से आए लोग।


होटल का खाना लजीज था। इंडीनेशिया में आकर भी लोग पनीर, दाल मखानी, तंदूरी और गाजर का हलवा खा रहे हैं। पकौड़े के साथ चाय भी पी लोगों ने। इंडोनेशिया का खाना किसी ने पूछा तक नही।

खाने की मेज़ पर खाने का इंतज़ार

होटल समुद्र के एकदम बगल में है। समुद्र की लहरें उठ- गिरकर अपना राग गा रही हैं। रात भर उनका आर्केस्ट्रा चलता रहेगा।
बाली की सड़क का नजारा


आज का यह हमारा बाली का पहला दिन था।
आर्ट स्टोर पर पानी ख़रीदने के बाद लोग पानीदार हो गए।


आर्ट गैलरी में मॉडल मैनिक्विन



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