मेरे सुपुत्र Anany Shukla अपने इंस्टाग्राम पर अक्सर रील्स पोस्ट करते रहे हैं। उनमें उनकी यात्राओं के किस्से और अपने विचार रहते हैं। उनकी एक रील 58 लाख लोगों ने देखी है। देखने और टिप्पणी करने वालों में अधिकतर युवा लोग हैं।
पिछले हफ़्ते लखनऊ आने पर मैं अनन्य को लेने एयरपोर्ट गया। घर से चार किलोमीटर दूर है एयरपोर्ट। फ्लाइट दिल्ली से साढ़े आठ बजे की जगह दस बजे चली। लखनऊ आते-आते साढ़े ग्यारह बज गए। अनन्य ने मुझसे बार-बार कहा -"मैं कैब करके आ जाऊँगा। आप परेशान मत हो।" लेकिन मैंने कहा -"मैं लेने आऊंगा। परेशान होने की कोई बात नहीं।"
एयरपोर्ट पर फ्लाइट के लखनऊ आने पर जहाज़ से सामान आने में लगे समय का उपयोग करते हुए अनन्य ने रील बनाई। रील बनाते हुए अपने मन के भाव व्यक्त करते हुए अनन्य ने रिकार्ड किया :
"इस समय रात के साढ़े ग्यारह बजे हैं। मैं अभी-अभी लखनऊ में उतरा हूँ। इंडिया में यह प्लेन उतरने का यह कोई odd टाइम नहीं है। वैसे भी मैं हमेशा यात्राएँ करता हूँ, मैंने दुनिया घूमी है। मैंने अलग-अलग समय में, कठिन परिस्थितियों में यात्राएं की हैं। लोगों से मिलता रहा हूँ।
मैं अभी उतरा हूँ यहाँ पर। मेरे पापा पिछले 45 मिनट से बाहर एयरपोर्ट पर मेरा इंतजार कर रहे हैं। मेरी फ़्लाइट लेट हो गई थी। मैंने उनसे कहा-' नहीं, आप मत आइए। मैं कैब से आ जाऊँगा। आपको इतनी देर तक जागने, आने की जरूरत नहीं है।' लेकिन बेटा होने के नाते मुझे पता है कि मैं उनके साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता कि आप मत आओ। मुझे पता है कि वो आएँगे ही। यह उनका लगाव दिखाने का, प्यार जताने का तरीका है। पिता लोग ऐसे ही होते हैं (that is how dads are) । छोड़ना एयरपोर्ट, स्टेशन।
तीन साल पहले अपना काम शुरू करने पर मैंने जब पहली बार ट्रेन ली थी सोलो ट्रिप पर निकलने के लिए तब वो वहाँ थे। बीच में जब मैं ट्रिप पर जाता थे, वे वहाँ मौजूद रहते थे। एयरपोर्ट पर छोड़ने के लिए , रिसीव करने के लिए। और यह कभी बदला नहीं । पिछले तीन साल में मैंने 70 यात्राएँ की हैं। चीजें बदल गई हैं, लोग बदल गए हैं, मैं बदला हूँ, मेरा सोचने का तरीका बदला है लेकिन यह भावना, यह सोच नहीं बदली है।"
इतना रिकार्ड करने के बाद अनन्य अपना सामान लेकर बाहर आए। मैंने फ़ोन पर बता दिया था कि मैं कहाँ इंतज़ार कर रहा हूँ। मैं कार में बैठा गाड़ियों को आते-जाते देख रहा था। मुझे पता नहीं लगा कब अनन्य एयरपोर्ट से बाहर आकर गाड़ी के बाहर से मेरा वीडियो बनाने लगे। जब मैंने कार के शीशे से अनन्य को चुपचाप वीडियो बनाते हुए देखा तो उसकी तरफ़ देखकर मुस्कराने लगा। अनन्य ने वह भी रिकार्ड किया वीडियो में।
अगले दिन सुबह अनन्य ने अपने मोबाइल पर मुझे इंस्टाग्राम पर अपनी रील दिखाई। रील के आख़िरी हिस्से में अनन्य की लरजती हुई आवाज़ सुनकर एक क्षण को मैं भी भावुक हुआ लेकिन फिर मुस्कराकर मोबाइल वापस कर दिया।
बाद में मैंने अनन्य की रील पर उसके दोस्तों की टिप्पणियाँ देखी। कई लोगों ने रील देखकर अपने-अपने पिता को याद किया। कुछ लोगों ने अपने पिता के न रहने की बात करते हुए उनको मिस किया था। टिप्पणी करने वालों में सिनेमाजगत के कुछ प्रसिद्ध एंकर भी थे। युवाओं की संवेदनशील टिप्पणियाँ देखकर अच्छा लगा। कई लोगों ने मेरे बारे में अच्छी-अच्छी टिप्पणियाँ भी कीं। कुछ ने मुझे अपना प्यार, आदर भी भेजा।
देखते-देखते रील को देखने वालों की संख्या एक लाख पार गई। हमने सोचा हम भी कुछ टिपिया दें। हमने मजे लेते हुए टिप्पणी लिखी -" (Ghar pass tha isliye aa gaya lene
. Need not be taken so seriously 

. घर पास था इसलिए आ गया लेने। इसको इतना गंभीरता से लेने की जरुरत नहीं।"
मेरी इस टिप्पणी को अनन्य ने पिन
कर दिया। उसके दोस्तों ने मेरी टिप्पणी को देखकर लाइक करते हुए और अनन्य से मजे लेते हुए uncle rockes anany shocks जैसी कई मजेदार टिप्पणियाँ की हैं। अभी तक मेरी टिप्पणी को 775 लोग लाइक कर चुके हैं। अभी भी लोग इस रील को देख रहे हैं। टिप्पणी कर रहे हैं। अभी तक चार लाख लोग इस रील को देख चुके हैं।
टिप्पणी और लाइक से अलग सोशल मीडिया पर इस तरह पोस्ट का पसंद किया जाना यह दर्शाता है कि लोग पारिवारिक रिश्तों वाली पोस्टों को सहज रूप में पसंद करते हैं। जुड़ाव महसूस करके टिप्पणी करते हैं। अनन्य की पोस्ट की हुई इंस्टाग्राम की रील का लिंक नीचे/ टिप्पणी बाक्स में दिया हुआ है। आप रील और उस पर आई हुई टिप्पणियाँ पढ़ेंगे तो युवा पीढ़ी की संवेदनशीलता का एहसास होगा।

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