जब हमने स्वीमिंग सीखना शुरू किया था हाथ और पैर अलग-अलग स्टाइल में चलते थे। हाथ ब्रेस्ट स्ट्रोक और पैर फ्री स्टाइल में। कोच ने भी कहा था -‘ जैसे आपको सहूलियत हो वैसे करें।’
बाद में पैर भी ब्रेस्ट स्ट्रोक स्टाइल में ही चलाने लगे। लेकिन इस बदलाव में दो-तीन हफ़्ते बर्बाद हुए। बाद में पता चला की ब्रेस्ट स्ट्रोक में पैर की किक से ही मूवमेंट होता है। फ्री स्टाइल में पैर चलाने में आगे बढ़ने में समस्या होती।
आज मंगलवार को दूसरे पूल गए। हमारा पूल बंद रहता है। साढ़े बारह मीटर चौड़ा है पूल। पहले इसे ढाई से तीन बारे में पार कर पाते थे। आज दो बार में पार किया। मतलब करीब छह मीटर तैर लेते हैं। मेरा लक्ष्य महीने के अंत तक कम से कम पच्चीस मीटर तैरने का है।
आज कोच ने बताया आपका सर अब ठीक उठ रहा है। पैर का मूवमेंट भी ठीक है। कई बार देखकर उसने कहा -‘ पहले से बढ़िया है मूवमेंट। प्रैक्टिस से और बेहतर होगा।’
उसने यह भी बताया कि साँस लेना , किक और हाथ के मूवमेंट के सही कम्बिनेशन से ही तैराकी बेहतर होगी। चलते समय हमने वीडियो बनवाया। देखकर लगा कि सर उठ रहा है पानी के ऊपर। साँस भी ले रहे हैं। लेकिन पैर अभी ठीक से नहीं चल रहे। पैरों का ‘ मेढकीकरण’ होना है। सर भी थोड़ा देरतक पानी में ऊपर रहना है ताकि सांस ठीक से ले सकें। यह भी हो सकता है कि सांस जल्दी लेकर सर अंदर कर लें।
स्विमिंग के किससे आपन अपनी याद के लिए लिखते हैं ताकि सनद रहे कि सीखने में कितने पापड़ बेले। कितनी ग़लतियाँ कीं।
एक कारण यह भी कि हमारी पोस्ट्स पड़कर कुछ दोस्तों ने भी स्वीमिंग शुरू की। कुछ सीख रहे हैं, कुछ सीख चुके। कुछ अपने बच्चों को सिखाने के बारे में सोच रहे हैं। एक तरह से स्वीमिंग का प्रचार हो रहा है।
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