Friday, August 28, 2026

दस मीटर के तैराक


 कल सुबह स्विमिंग के लिए गए। 6-7 के बैच में।पहुंचे तो देखा पूल आधा खाली था। पता चला एक दिन पहले शाम को किसी बच्चे ने पूल के पानी में कई उल्टियाँ कर दीं। पूल का पानी बदला जाना है। रात आधा ही ख़ाली हो पाया। दो दिन लगेंगे पूल खाली होने और फिर भरने में।

तैराकी के लालच ने हमने आसपास के कई स्विमिंग पूल खोजे। गूगल की सुविधा -swimming pool near me का उपयोग करके। जो पूल मिले उनमें से कुछ काफ़ी दूर थे। पास के पूल अधिकतर बंद हो चुके थे। एक पूल खुला था। हमने सोचा 8-9 वाले बैच में जायेंगे वहाँ तैरने। अभी घंटा भर बाक़ी था। इसलिए घर लौट आए।
आठ बजे के हिसाब से पूल के लिए निकले। कार से। मैप देखते हुए पूल पहुँचे तो देखा तो पूल बंद था। मतलब हम गलती से उस पूल पर पहुँच गए थे जिसने पहले ही बता दिया था कि पूल बंद है।
अपनी गलती पर ख़ुद को थोड़ा हड़काया। फिर उस पूल की तरफ़ गए जिसने खुला होने के बारे में बताया था। लोकेशन पर पहुँचे तो वह पूल splash पूल के बगल में था जहाँ अपन दो बार पहले भी आ स्विमिंग कर चुके हैं। इस पूल का नाम था - Summer Wind Swimming Academy. स्प्लैश और समर विंड मिलकर पहले एक ही पूल था। दो भाइयों का पूल। बंटवारा हुआ तो पूल के बीच दीवार उठ गई। एक पूल दो भागों में बंट गया। अम्बुजा सीमेंट वाली दीवार की तरह।
कल देर हो गई थी। फिर शाम को जा नहीं पाये। आज पूल शाम को 7-8 खुलना था। गए तैरने। पूल की अधिकतम गहराई पाँच फीट है। लंबाई 13 मीटर , चौड़ाई 10 मीटर । हम पानी में उतर गए। हमारे अलावा एक बच्चा , एक महिला और एक युवा पूल में थे। कोच कहीं टहलने गया था।
शुरुआत में पूल की चौड़ाई दो बार ने तय की। अब सर ठीक से उठने लगा है। साँस लेने लगे हैं। पैर भी ठीक चलने लगे। लेकिन शुरुआत में आधी दूरी पर रुकते रहे। कभी मुँह में पानी चला जाता, कभी हाथ ग़लत चल जाता। कभी पैर।
कोच शिव ने बताया कि पैर पीछे ले जाते समय पंजे मिलाइये। हमने ध्यान से मिलाया। इसके बाद तैरे तो दस मीटर की दूरी तय कर ली। साँस भी नहीं फूली। कई बार पूल की चौड़ाई तैर कर पार की।
मतलब अब हम सवा छह मीटर के तैराक से दस मीटर के तैराक हो गए। यह करीब पचास प्रतिशत का सुधार है।
वापस आते हुए देखा कि कार का अगला शीशा खुला था। हम मोबाइल कार में छोड़कर गए थे। लगा मोबाइल विदा हो गया। जी धक्क से हुआ। लेकिन देखा कि मोबाइल कार में आराम फ़रमा रहा था। एक बार फिर जी धक्क से हुआ। एक मिनट में दो बार जी धक्क से हुआ। एक डर के मारे दूसरी बार संतोष के मारे। दिल ने हड़काया दिमाग़ को कि जरा ध्यान से कार का दरवाज़ा बंद किया करो।
दिमाग़ ने मुस्करा कर दिल को लव यू बोला। दोनों मुस्कुराते हुए आपस में बतियाने लगे।
फ़ोटो रक्षाबंधन के मौक़े पर परिवार के साथ। लंबे अरसे बाद दोनों बेटे एक साथ घर पर आए। इस घर में तो पहली बार। आप को रक्षा बंधन की शुभकामनाएँ।

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