आज स्विमिंग सीखना शुरू किए हुए तीन महीने हुए। तीस मई को पहली बार पूल में उतरे थे। लगता था पता नहीं कब सीख पायेंगे।
कई बार लगता था कि तैरना आना चाहिए। लेकिन कंधे की समस्या के कारण हिम्मत नहीं हुई। लगता कहीं पानी में कंधा न उखड़ जाये। लेकिन अक्टूबर में लक्षद्वीप टूर के दौरान स्कूबा डाइविंग के बाद बेटे अनन्य Anany ने कहा -'पापा स्वीमिंग सीख लीजिए।' उसी पल हमने तैराकी सीखने को अपनी 'विश लिस्ट' में शामिल कर लिया।
अक्टूबर में 'विश लिस्ट' में शामिल करने के बावजूद सीखना शुरू करने में सात महीने लग गए। 30 मई से राम मनोहर लोहिया स्विमिंग पूल में सीखना शुरू किया। कंधे की समस्या के चलते ब्रेस्ट स्ट्रोक सीखना शुरू किया। लेकिन पैर फ्री स्टाइल में ही चलाते रहे। पैर फ्री स्टाइल में चलाने का कारण कूल्हे की हड्डी का दर्द था। पाँच-सात मीटर बिना पानी में सांस लिए तैरने लगे तो लगा सीख गए। लेकिन बाद में पता चला यह तो हसीन भ्रम था। असल चीज तो पानी में तैरते हुए साँस लेना था।
बाद में कूल्हे का दर्द , शायद स्विमिंग के कारण ही, ख़त्म हो गया। हमने गठबंधन स्ट्रोक छोड़कर ब्रेस्ट स्ट्रोक की सरकार बनाई। सीखने लगे। जब हमें लगे कि हम सीख गए तब कोच कोई कमी बता देते।
हमने सैकड़ों वीडियो देखें। उनसे सीखा।याद किया लेकिन अमल में लाने में गड़बड़ाते रहे। तमाम बाधाएँ आयीं। कई बार लगा कि हमसे न हो पायेगा। लेकिन लगे रहे। अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔंध' जी की कविता याद करते :
'देखकर बाधा विविध, बहु विध्न घबराते नहीं।'
हमको अपने गुरु जी की कही बात भी याद आती रही -' दुनिया में कोई ऐसा काम नहीं जो दूसरे कर सकते हैं और तुम नहीं कर सकते।'
तैराकी के किस्से हम अपने लिए लिखते रहे। एक चुनौती थी ख़ुद के लिए कि तैरना सीखना है। सीखना ही है। इन किस्सों को पढ़कर कई मित्रों ने भी सीखना शुरू किया। दोस्त लोग उत्साह भी बढ़ाते रहे।
आज तीन महीने होने पर हमने पूल की चौड़ाई कई बार पार की। 12 मीटर का पूल है। एक बार विकर्ण पर चलते हुए तैरे -करीब 14 मीटर। साँस नहीं फूली। हाथ -पैर थोड़ा गड़बड़ हुए लेकिन अगली बार ठीक कर लिया। मुँह में थोड़ा पानी गया लेकिन उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। एक बार सामने कोई आया तो तैरते हुए ही ठहर कर उसको निकलने दिया। पहले सिटपिटा के खड़े हो जाते थे।
तीन महीने के दौरान चार पूल में तैरे। सबसे ज़्यादा RML में । लेकिन सीखा सबसे ज़्यादा दूसरे, छोटे कहे जाने वाले पूल में। इन पूल के कोच ने व्यक्तिगत रूप से टिप्स दिए। किसी न कुछ सिखाया, किसी ने कुछ। सभी का शुक्रिया।
आप सभी मित्रों का आभार।
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