15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। आजादी के मौके पर दिया भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के संबोधन का शुमार दुनिया में बेहतरीन भाषणों में होता है। पाकिस्तान एक दिन पहले आजाद हुआ था। पाकिस्तान के कायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना जी ने 11 को पाकिस्तान की संविधान सभा (Constituent Assembly) में भाषण दिया गया था। इसे जिन्ना की 'विजनरी स्पीच' माना जाता है।
आजादी के समय भारत-पाकिस्तान की संयुक्त आबादी क़रीब 39 करोड़ थी (भारत 33 करोड़, पाकिस्तान 6 करोड़)। आज इन देशों की संयुक्त आबादी 192 करोड़ हो गई है (भारत 148 करोड़, पाकिस्तान 26 करोड़, बांगलादेश 18 करोड़)। यह दुनिया की कुल आबादी (830 करोड़ ) की लगभग एक चौथाई (23.13 %) है।
आजादी के बाद दोनों देशों के संबंध खराब होते गए। 1971 में पाकिस्तान और बांगलादेश अलग हुए। बांगलादेश के निर्माण में भारत की अहम भूमिका थी। उससे भी संबंध धीरे-धीरे कम अच्छे होते हुए ख़राबी की सीमा तक पहुँचे।
आजादी के बाद भारत-पाकिस्तान महासंघ बनाने के प्रयास भी हुए। यूरोपीय महासंघ की तर्ज पर प्रस्तावित इस महासंघ के प्रमुख पैरोकारों में डॉ राममनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय थे।नेहरू जी और लालकृष्ण आडवाणी भी भारत-पाक महासंघ के हिमायती थे। पाकिस्तान के भी तमाम चुनिंदा लोग भी इसका समर्थन करते थे। शेख अब्दुल्ला इसी महासंघ (परिसंघ) के प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान गए थे ताकि दोनों देशों के बीच कड़वाहट खत्म हो सके। लेकिन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने शेख अब्दुल्ला के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
नेहरू जी ने एक इंटरव्यू में कहा था -"अगर हम महासंघ की बात करते हैं, तो वे (पाकिस्तान) डर जाते हैं और सोचते हैं कि हम उन्हें निगल जाना चाहते हैं।"
वास्तव में, पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने नेहरू जी के इस महासंघ के विचार को यह कहकर खारिज कर दिया था कि यह पाकिस्तान की संप्रभुता को खत्म करने की भारतीय चाल है।
पाकिस्तान के शासन में सेना का नियंत्रण शायद भारत-पाक महासंघ की राह में प्रमुख रोड़ा रहा। पाकिस्तान में पिछले 79 वर्षों में से 33 वर्ष सीधा फ़ौजी शासन रहा :
1. जनरल अयूब खान (1958–1969)
2. जनरल याहिया खान (1969–1971)
3.जनरल जिया-उल-हक (1977–1988)
4. जनरल परवेज मुशर्रफ (1999–2008)
इसके बाद भी पाकिस्तान की सत्ता पर वहाँ की सेना का ही नियंत्रण रहा। हाल की ईरान-अमेरिका की लड़ाई में जनरल मुनीर की सक्रियता वहाँ सेना के जलवे की कहानी बताती है।
भारत के लिए भी पाकिस्तान वीरता, देशभक्ति, शौर्य प्रदर्शन का सहज साधन है। आए दिन फ़िल्में बनती हैं जिनमें पाकिस्तान की साजिशों को नाकाम बनाने की कहानी दिखाई जाती है। देश के नेता अपने से आबादी में देश के छठे हिस्से के बराबर देश के ख़िलाफ़ गरजते हुए बयान बाजीकरते रहते हैं। पाकिस्तान हमारे देश के लिए पंचिग बैग की तरह है। अपने से कई गुना कमज़ोर देश से तुलना करते हुए उसके मुक़ाबले ख़ुद को बेहतर बताने में गर्व करते हुए अपनी तमाम कमज़ोरियां छिप जाती हैं। अपने बराबर के किसी देश से तुलना करने में वो मजा नहीं आता।
कभी हर वर्ष होने वाले इंडो-पाक मुशायरे भी अब बंद हो गए हैं। ऐसे में भारत-पाकिस्तान महासंघ की बात गए जमाने की बात हो गई।
लेकिन दुनिया में कई देश जिनमें कभी आपस में कट्टर दुश्मनी थी, बाद में एक हुए हैं। पूर्वी जर्मनी-पश्चिमी जर्मनी, उत्तरी वियतनाम-दक्षिणी वियतनाम, उत्तर यमन और दक्षिण यमन ऐसे प्रमुख उदाहरण हैं। इसी तर्ज पर क्या भारत-पाकिस्तान-बांगलादेश फिर से मिलकर एक हो सकते हैं? कम से कम मिलकर एक महासंघ बन सकते हैं?
फ़िलहाल की स्थिति देखते हुए ऐसा होना संभव नहीं लगता। पाकिस्तान के कई हिस्सों में अलगाववादी आंदोलन की ख़बरें आती रहती हैं।
लेकिन आने वाले समय इन देशों के लोग फिर से मिलकर रहने की बात सोच सकते हैं इस बात से एकदम इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों देशों की युवा पीढ़ी पुरानी कटुताओं को उतनी तल्ख़ी से शायद न याद करे जितनी तल्खी से दोनों देशों के हुक्मरान सत्ता में बने रहने के लिए दोहराते रहते हैं।
क्या पता आने वाले समय में दोनों की युवा आबादी इस बात के लिए प्रयास करे कि भारत-पाकिस्तान और बाँगलादेश को मिलाकर एक महासंघ बनाना चाहिए। सबको मिलकर रहना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो इन देशों के हुक्मरान क्या करेंगे?
अगर इस तरह की कोई पहल होती है तो क्या आप इसका समर्थन करेंगे?
फ़िलहाल तो आप सभी को आजादी की वर्षगांठ मुबारक हो। मंगलमय हो।
भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश का वर्तमान नक्शा (AI से बनाया)

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