Tuesday, August 18, 2026

कैम थान नारियल जंगल


 स्वीमिंग पूल में एक दिन एक कोच पानी में लट्टू की तरह तैरने लगा। लोगों की मांग पर कई बार अपनी जगह घूमते हुए तैराकी का प्रदर्शन किया। उसको देखकर मुझे वियतनाम के दानांग प्रवास के दौरान घूमने वाली बाँस की नाव की याद आ गई।

दानांग के मार्बल माउंटेन (https://www.facebook.com/share/p/1DeCDxx392/) के बाद हम लोग पास ही स्थित (करीब 20 किलोमीटर) कैम थान नारियल जंगल देखने गए। नारियल का यह जंगल थू बोन और उसकी सहायक नदियों के पास स्थित है।
कैम थान नारियल जंगल में पानी में बाँस कटोरी के आकार के टोकरी नुमा नाव चलती हैं। एक नाव में दो से तीन लोग बैठ सकते हैं। डगमगाती हुए नाव में बैठकर पानी की संकरी सड़क से होते हुए झील नुमा पानी के मैदान में पहुँचे। छोटी नहर नुमा पानी का रास्ता इतना संकरा था कि आते-जाते नावें एक-दूसरे से टकरा रही हैं। अगल-बगल अधिकतम दो नावें जा सकती थीं।
एक प्लेटफार्म से नीचे उतरकर हम लोग नाव में बैठे। बैठते समय नाव डगमगाई। जैसे हिलते हुए हमारा स्वागत कर रही थी। नाव में बैठने के बाद लोग पानी के मैदान की तरफ़ जा रहे थे। नाव चालकों में पुरुष और महिला दोनों थे। कुछ महिला नाव चालक वियतनामी हैट लगाए थीं।
करीब सौ-सवा सौ मीटर संकरी पानी की नहर में चलने के बाद नाव पानी के विस्तृत मैदान में पहुँची । रास्ते का पानी मटमैला था। जैसे किसी नाले में नावें चलने से पानी गंदा हो गया हो। उतना गंदा नहीं था फिर भी मुझे कानपुर का गंदा नाला याद आया।
रास्ते में एक जगह पानी में नारियल दिखा।यहाँ उगने वाले नारियल सामान्य नारियल जैसे गोल या हरे नहीं होते, बल्कि एक बड़े नुकीले फुटबॉल जैसे गुच्छे (Cluster) के रूप में दिखाई देते हैं। जब इन्हें काटा जाता है, तो इसके अंदर से सफेद रंग का पारदर्शी और जेली जैसा मीठा गूदा निकलता है।
पानी की नहर से पानी के विशाल मैदान में पहुँचने में क़रीब पाँच मिनट लगे होंगे। वहाँ सैकड़ों सैलानी नौका विहार कर रहे थे। जोड़े से, दोस्तों के साथ। कुछ लोग अकेले भी थे। सभी लोग इस नज़ारे का फ़ोटो भी लेते जा रहे थे।
सामान्य नौकाओं के अलावा कुछ नावें वहाँ ऐसी भी थीं जो लोगों को तेज चकरघिन्नी की तरह घूमती दिख रही थीं। नाव चलाने वाला सवारी को बैठाकर चप्पू की सहायता से नाव को पानी में लट्टू की तरह घुमा रहा था। काफ़ी देर तक दूसरों को घूमती नाव में बैठे देखने के बाद अपन भी बैठे उस नाव में। साथ में मित्र राजेश अग्रवाल थे। राजेश और हमारा साथ ऑर्डनेंस फैक्ट्री का साथ है। हम लोगों ने एक ही दिन (30.03.1988) एक ही जगह (OFC, कानपुर) आर्डनेस फ़ैक्ट्री ज्वाइन की थी। 38 साल का साथ है हमारा।
नाव में बैठने के बाद नाविक ने नाव घुमाना शुरू क्या। तेज होती गई नाव। रोलर कोस्टर में बैठने पर जैसा लगता होगा कुछ उसी तरह। धीरे-धीरे नाव का घूमना तेज होता गया। घूमती नाव के सर चकराने लगा। हमने नाव वाले से रोकने के लिए कहा। वह मुस्कराते हुए रुक गया।
घूमने वाली नाव से वापस अपनी नाव में आए। कुछ देर और घूमने के बाद हम वापस चल दिए।
लौटते हुए नाव वाले को पता चला तो उसने वंदे मातरम् बोला। इसके बाद ओले ओले गाना का मुखड़ा भी गया। भारत माता की जय के जबाब में वंदे मातरम। टूरिस्ट से जुड़ने का यह तरीका अनूठा है।
नाव से उतरकर हम लोगों ने पास ही एक रेस्टोरेंट में खाना खाया। खाना खाने के बाद हम लोग अगली मंजिल के लिए चल दिए।
बात शुरू हुई थी स्वीमिंग पूल में कोच के चकरघिन्नी के तैरने की। नाव का घूमना तो देख लिया आपने। स्विमिंग पूल में कोच का घूमना भी दिखायेंगे कभी।
यह किस्सा 7 अप्रैल, 2026 का है। वियतनाम से जुड़े और किससे पढ़ने के लिए इस कड़ी पर पहुँचिये।

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