आज सबेरे से अपने कविता संग्रह “अंधेरे का बड़प्पन” के लिए कवर पेज बना रहे थे। कई बार कोशिश करके कई ग़लतियाँ की तब आख़िरी में ये बना। इसमें भी अँधेरे में ‘ अ ‘ के अपर बिंदी रह गई। चैटजीपीटी से बना रहे थे। हमने कहा -“ अ के ऊपर बिंदी लगा दो। दिया थोड़ा घुमा दो” तो बोला बदमाश कि आपका आज का मुफ्त में काम करने का कोटा खत्म हो गया। अब 24 घण्टे बाद कोशिश करना।
हमने सोचा , मजाक कर रहा होगा। पाँच मिनट बाद कोशिश की तो बोला -“23 घंटे 55 मिनट बाद कोशिश करियेगा।” हमने सोचा अजीब मजाक है। दुनिया में सबसे ज़्यादा अब आबादी ( मुफ़्तखोर ) के साथ इतना बड़ा मज़ाक़।
बहरहाल चैट जीपीटी से तो बाद में निपटेंगे। आप तो ये बताओ कि कवर पेज कैसा बना है? यह भी कि नाम कैसा है -कविता संकलन का ? पढ़ने के बारे में हम पूछकर आपको डराना नहीं चाहते। वैसे भी आज के समय में लोग कविता के नाम पर जितना बुरा मानते हैं उतना तो अमेरिकी टैरिफ़ का भी बुरा नहीं मानते।
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