करीब पच्चीस साल पहले की बात है। हमारे महाप्रबंधक ने फैक्ट्री से संबंधित कुछ आँकड़े मुख्यालय को बताये थे। मुख्यालय के लोग हमारे महाप्रबंधक की हाँकू प्रवृति से परिचित रहे होंगे। उन्होंने हमसे उसी बावत पूछा। हमने सच बता दिया। मुख्यालय से कुछ कहा गया होगा महाप्रबंधक को। उन्होंने मुझसे फ़ोन करके कहा :
"अरे यार तुमको इतना सच बोलने की क्या जरूरत थी?"
हमने उनसे कहा -"आपने यह भी तो नहीं बताया मुझसे कि झूठ कितना बोलना है।"
हाल ही में हुई AI समिति के समय गलगोटिया विश्वविद्यालय का झूठ पकड़े जाने से देश की भद्द पिटने की खबर से यह क़िस्सा मुझे याद आया।
गलगोटिया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रही महिला ने शानदार अंग्रेजी में अपनी यूनिवर्सिटी को रिप्रेजेंट किया। झूठ पकड़े जाने पर विश्वविद्यालय ने शायद उनको नौकरी से निकाल दिया। एक अच्छी ख़ासी, फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली, प्रतिभाशाली महिला की छवि एक विलेन जैसी बना दी। सारी कमियों का ठीकरा उनके ऊपर फोड़ दिया गया।
इसी घटना पर रिपोर्टिंग करते हुए सुबह से आज तक न्यूज़ चैनल की एंकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी के किए धरे पर लीपा पोती करने की कोशिश कर रही हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय की गलती के चलते देश को कमतर न आंकने की बात कर रही हैं। साथ ही चीन की परमाणु क्षमताओं का जिक्र कर रही हैं। चीन भारत के लिए कितना बड़ा ख़तरा हो सकता है यह भी बता रही हैं।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की चूक और झूठ को एंकर ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी की गलती बताते हुए कहा -'गलती पकड़ी जाने पर उनको सॉरी बोलना चाहिए। माफ़ी मांगने की बजाय वे और बड़ा झूठ बोल रही हैं।'
ऐसा कहते हुए आज तक की एंकर अपने चैनल के माध्यम से बोले अनेक झूठ पचा गई जो उन्होंने एकरिंग करते हुए बोले थे। आपरेशन सिंदूर के समय दूसरे चैनलों के साथ भारत की फौज द्वारा पाक़िस्तान के लाहौर पर कब्जा करने, वहाँ चाय पीने जैसी रिपोर्टिंग की थी। उन खबरों पर कभी माफ़ी मांगने जैसा पवित्र काम नहीं किया।
इस बेइज्जती से प्रभावित ABP न्यूज चैनल की वाइस प्रेसिडेंट ने गलगोटिया विश्विद्यालय की मान्यता रद्द करने की माँग करते ट्वीट किया था :
,"जिस भारत की यूनिवर्सिटी ने चाइना का सामान अपना बताकर AI समिट में देश का मजाक बनाया है. तत्काल प्रभाव से उसकी मान्यता रद्द कर देनी चाहिये. इन लोगों के घटिया आचरण से देश की छवि धूमिल होती है.
जब इतना बड़ा झूठ इतने बड़े प्लेटफार्म पर बोल रहे हैं तो ये बच्चों को कैंपस में क्या पढ़ाते…"
(खबर का स्रोत Khushdeep Sehgal की पोस्ट
बाद में पता लगा वह ट्वीट भी डिलीट कर दिया गया। जो काम किया नहीं जा सकता उसका आह्वान करके लोगों को वैसी ही माँग के लिए उकसाना ठीक नहीं।
संयोग की इस नकल कांड में बदनाम होने वाली तीनों लोग महिलायें हैं। खबरें ऐसी चल रही हैं मानों इन महिलाओं ने ही सब बवाल किए। जबकि असलियत यह है कि ये महिलायें तो चेहरा हैं। ये तो इस मीडिया का चेहरा है। मुझे सबसे ज़्यादा सहानुभूति तो गलगोटिया विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर रही महिला से है।
इस बात अपना मत रखते हुए Sudhir Tewari जी ने लिखा है :
"गलगोटिया विश्वविद्यालय द्वारा जो कुछ भी किया गया है, वह उभरते हुए 'विकसित भारत' की प्रतिष्ठा बढ़ाने के उद्देश्य से सर्वोच्च राष्ट्रीय हित में है! इसलिए, यदि उसकी ओर से कोई चूक हुई है, चाहे वह जानबूझकर या सोच-समझकर ही क्यों न हुई हो, तो उसे संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए और क्षमा कर दिया जाना चाहिए।"
आगे उन्होंने शंका जाहिर की :
"यह पूरी तरह संभव है कि जहां गैलगोटिया विश्वविद्यालय ने एआई इम्पैक्ट समिट की प्रत्याशा में एआई एप्लिकेशन (जो अब विचाराधीन है) विकसित किया हो, वहीं चीन ने अपनी कुख्यात एआई निगरानी प्रणाली का उपयोग करके इसकी नकल की हो!"
सुधीर तिवारी जी की देश भक्ति लहालोट पूरी पोस्ट से आप यहाँ (https://www.facebook.com/share/p/1B2XSzxpAX/) पढ़ सकते हैं ।
हमारा कहना है AI का मतलब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मतलब कृत्तिम मेधा होता है। तो कृत्तिम मेधा की प्रदर्शनी में हुई नकल में पकड़े जाने पर परेशान होने की क्या जरूरत। इसमें हुई बदनामी को कृत्तिम बदनामी समझकर आगे नए कांड की तैयारी की जाये।
नाम न बताने की शर्त पर कुछ लोगों ने मुझे बताया कि बतर्ज रागदरबारी गलगोटिया कांड से उन लोगों के बांछे वे शरीर में जहाँ कहीं भी होती हों , खिल गईं होंगी।बड़ी बात नहीं यह सारा रायता उन्होंने ही फैलवाया हो जिसे आजतक की एंकर बड़े मेहनत से समेटती दिख रही हैं।
हमने उनको बहुत तेज ऊँची आवाज में सहमते हुए हड़काया -'इस तरह की देश विरोधी बात सोचते हुए तुमको शर्म नहीं आती।'
भाई साहब ने फौरन अपनी बात को X के ट्वीट की तरह मन से ही डिलीट कर दिया। गला फाड़ आवाज में भारत माता की जय बोला। वंदे मातरम का नारा लगाया और तेज आवाज में गाने लगे -'सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा।'
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