डॉन बास्को म्यूजियम से हम लोग 'शिलांग व्यू पॉइंट' की तरफ़ बढ़े। रास्ते में पुलिस बाजार पड़ा। पास ही में 'यूपी स्वीट मीट' मिठाई की दुकान थी। Anil Upadhyay जी बात ने एक पोस्ट में इस दुकान के बारे में एक टिप्पणी की थी। चौराहे से दुकान लगभग 200 मीटर दूर थी । जिस गली में दुकान थी वहाँ गाड़ियों के लिए 'नो इंट्री' का बोर्ड लगा था।
स्कूटी को चौराहे पर छोड़कर अपन 'यूपी स्वीट मीट' की तरफ़ बढ़े। दुकान पर राजेश कुमार और पूनम मिश्रा दंपति से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि उनकी दुकान सत्तर साल पुरानी है। मूलत: गोरखपुर के रहने वाले हैं। अनिल उपाध्याय जी का सुझाव हमने उनको बताया कि दुकान के नाम में 'स्वीट मीट' शब्द की जगह कुछ और रखा जा सकता है। दुकान के नाम के आगे 'मीट' लिखने से लगता है कि मांस बिकने की दुकान है।
राजकुमार मिश्र जी ने बताया कि 'मीट' शब्द 'स्वीट' से अलग करके पढ़ने से ऐसा लगता है लेकिन दुकान में नाम के अंश 'स्वीट मीट ' का अर्थ होता है -'चीनी से भरपूर भोजन।' इस लिहाज से दुकान के नाम का मतलब 'मिठाई की दुकान' ही है। हालांकि 'स्वीट मीट' का एक मतलब 'मीठा मांस' भी होता है। लेकिन सत्तर साल से जब नाम चल रहा है तो अब उस पर एतराज करने वाले हम कौन होते हैं। वैसे भी दुकान के मालिक गोरखपुर के हैं। उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री का इलाका। कोई एतराज करेगे नाम में तो उनसे कहकर निपटवा लेंगे।
हमने दुकान पर बैठकर रसमलाई खाई। अपने रैपिडो ड्राइवर के लिए भी मिठाई लेकर लौट चले।
दुकान से लौटते समय हमने देखा अपन स्कूटी से उतरकर सीधे सड़क पर चलते चले गए थे दुकान की तरफ़ । हेलमेट लगाए-लगाए। आने वाले समय में क्या पता सड़क पर चलते समय भी हेलमेट पहनना अनिवार्य हो जाये। एक तरह से देखें तो आने वाले समय के लिए तैयार हो रहे थे अपन शिलांग में।
लौटते हुए एक 'दृष्टि बाधित' गायक सड़क पर बैठकर गाना गा रहा था। गायक के सामने रखे स्पीकर पर गाने की धुन बज रही थी । गायक उस धुन पर गाना गा रहा था। पीछे खड़ा एक बच्चा मोबाइल में गाना सेलेक्ट करके ब्लू टूथ के माध्यम से स्पीकर पर उसकी धुन बजाता जा रहा था। गायक गाना गाता जा रहा था। हम वहाँ पहुँचे तो वह कोई अंग्रेजी गाना गा रहा था। अंग्रेजी गाना ख़त्म होने के बाद हमारे अनुरोध पर उसने हिन्दी गाना गाया :
"एक पल का जीना फिर तो है जाना
तोफा क्या लेके जाए दिल ये बताना।"
पूरा गाना करीब पाँच मिनट का था। हमने गाना सुनने के बाद कुछ चंदा दिया। गायक ने उसे टटोल कर देखा और डब्बे में डाल लिया। कुछ और लोगों ने भी चंदा दिया गायक को। पूछने पर गायक ने अपना नाम बताया -डॉन बास्कर।
गाना सुनते हुए हमने उसका वीडियो भी बनाया। गाने का वीडियो यहाँ पोस्ट में अपलोड कर रहे है। आप भी सुन सकते हैं।
उस गायक के बगल में ही एक और गायक आकर अपना अड्डा जमा रहा था। उसके सामने गिटार था। चंदे के डब्बे की जगह उसके सामने 'क्यू आर' कोड रखें हुए था। गाना सुनने के बाद डिजिटल भुगतान की व्यवस्था। 'हाई टेक' गायक था वह।
लौटकर लासन और उसके दोस्त को उसके लिए लाई बर्फी खिलाई। फिर चल दिए आगे। शिलांग व्यू प्वाइंट देखने।
शहर के रास्ते घुमावदार और चढ़ाई-उतराई वाले थे। एक जगह शार्ट कट के चक्कर में ऐसी पतली सड़क से उतरे जैसे लगा किसी सीढ़ी से सरपट उतर रहे हैं। लासन की स्पीड के कारण हर मोड़ पर जी धड़कता कि कहीं रपट न जायें। बार-बार धीरे चलने के लिए टोकने पर वह हँसता। कहता -'आप बहुत डरते हो।' हम कहते -'हाँ, क्योंकि पहले गिर चुके हैं।'
लासन की स्पीड से एक समय ऐसा आया कि हमने उसको पीछे बैठाया और ख़ुद स्कूटी हाँकने लगे। गाड़ी धीमी हो गई। सुकून से गाड़ी चलाते हुए हम आगे बढ़े। आगे चलकर लगा हम बहुत ही आहिस्ते चला रहे हैं। उसने कहा -'इतनी धीमे चलायेंगे तो चार बजे के पहले पहुँच नहीं पायेंगे शिलांग व्यू प्वाइंट।' चार बजे बंद होने का समय है शिलांग व्यू प्वाइंट का।
हमने गाड़ी लासन को दे दी चलाने को। अब मोड़ कम थे। उसने भी स्पीड का ध्यान रखा। मोड़ पर तेज नहीं चलाई गाड़ी। हम क़रीब साढ़े तीन बजे पहुंच गए शिलांग व्यू प्वाइंट।
लेकिन वहाँ पहुँचकर पता चला कि वुधवार को बंद रहता है शिलांग व्यू प्वाइंट। हम एक बार फिर शिलांग व्यू प्वाइंट देखने से महरूम रह गए। मन को समझाने के लिए कहा -' शिलांग व्यू प्वाइंट से शिलांग ही तो दिखता है। उसे तो हम साक्षात देख ही रहे हैं।'
कुछ देर वहाँ खड़े होकर हमने शिलांग को देखा। फोटो खिंचाये और पास की दुकान पर चाय पीने के लिए चल दिए।
चाय के नाम पर 'रेड टी' ही उपलब्ध थी। लाल चाय मतलब बिना दूध की चाय। चाय पी गई और चाय पीते हुए आसपास के नज़ारे को देखा गया।
चाय पीते समय वहीं की एक बच्ची अनानास बेचते हुए आ गई। हमने उससे अनानास ले लिए। बीस रुपए का एक छुटका, बच्चा पैकेट। बच्ची कक्षा तीन में पढ़ती है। अमेका (Ameka) नाम बताया उसने। स्कूल से छुट्टी होने पर शाम को अनानास बेचती है शिलांग व्यू प्वाइंट पर।
कक्षा तीन में पढ़ने की बात सुनकर हमने उससे 'ए बी सी डी' सुनी। इसके बाद गिनती भी। बच्ची ने सुनाया। हमने उसका एबीसीडी और गिनती सुनाते हुए वीडियो बनाया। उसको उसी का अनानास खिलाया। ख़ुद खाया। बाक़ी बचा हुआ अनानास भी उसको ही दे दिया खाने के लिए।
एबीसीडी और गिनती सुनाने के इनाम के रूप में भी हमने उसको दस रुपए दिये । बच्ची खुश हो गई। उसकी मुस्कान देखकर हमें भी बहुत ख़ुशी हुई।
चाय पीकर हम लौट लिए। रास्ते में स्थानीय लोग सड़क पर आते-जाते दिखे। उनके फोटो खींचे। रास्ते में एक लाल रंग की एक मारुति 800 गाड़ी का नया रूप दिखा। उसका फ़ोटो भी लिया। नीचे उतरते हुए शाम को गई थी। हम All saints cathdral charch देखने गए।
एक प्रमुख और ऐतिहासिक एंग्लिकन चर्च है। शिलांग में पुलिस बाज़ार के पास, राज्य केंद्रीय पुस्तकालय के सामने स्थित है। यह चर्च 1870 के दशक के उत्तरार्ध (लगभग 1877) में स्थापित किया गया था, जो औपनिवेशिक वास्तुकला, लकड़ी के ढांचे और सुंदर स्टेन ग्लास खिड़कियों के लिए जाना जाता है, जो शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है।
पता चला कि चर्च एक बार भूकंप में और दूसरी बार आग में नष्ट हो गया था। इसके बाद फिर से मरम्मत करके उसको ठीक किया गया।
चर्च बंद हो चुका था। हम लौट लिए। लेकिन गेट पर एक बच्चा दिखा तो उससे पूछा -'खोलकर दिखा सकते हो क्या?' उसने मना किया। कहा -'अब संभव नहीं।' हमने फिर कहा -' लखनऊ से आए हैं। कल सुबह चले जायेंगे। हो सके तो दिखा दो।'
बच्चे ने फ़ोन पर किसी से पूछा। अनुमति ली। चर्च खोलकर हमको दिखाया। हमने चर्च के प्रार्थना हाल के फ़ोटो लिए। बालक का भी फ़ोटो लिया। बालक का नाम Judicious है। कक्षा पाँच तक पढ़ाई की है। उन्नीस साल की उम्र है। पास में उसका गाँव है। पिता रहे नहीं। जीविका के लिए चर्च में देखभाल का काम करता है। बच्चे के चेहरे पर पिता के असमय न रहने पर आ जाने वाली गंभीरता की छाया दिखी मुझे। जब तक हम चर्च देखते रहे, बच्चा अपने जूते के फीते ठीक करके बाँधता रहा।
बच्चे को धन्यवाद देकर हम चर्च के बाहर आ गए। वहाँ से हम अपनी मेस आ गए। हमको छोड़ते हुए लासन ने हमने कहा -'काफ़ी देर आपके साथ रहे। अगर संभव हो तो कुछ और दे दीजियेगा।'
लासन हमारे साथ क़रीब पाँच घंटे रहा था। इस बीच करीब पचास किलोमीटर ऊँची-नीचे रास्ते पर चला था। आठ सौ रुपए तय हुए उससे। हमने मन में पहले ही सोच रखा था कि उसको एक हज़ार रुपये दे देंगे। उसने हमारे देने से पहले ही ख़ुद ही माँग रख दी। अतिरिक्त पैसे देने के लिए प्रयास का क्रेडिट हमसे छीन लिया। अब हम यह नहीं कह सकते थे कि हमने उसे अपनी तरफ़ से तय पैसे से ज्यादा दिया। अतिरिक्त पैसे उंसने ख़ुद से माँगकर लिए।
हमने उसे एक हज़ार रुपये दिए। उसने धन्यवाद दिया और जाने लगा। हमने उससे चाय पीकर जाने के लिए कहा। उसने चाय के लिए मना करते हुए कहा -'अभी थोड़ी देर और कमाई का मौक़ा है। जाने दीजिये मुझे।' हमने उसे जाने दिया। अभी सब बातें सोचते हुए लग रहा है कि युवा पीढ़ी पर कितना दबाब है काम का।
यह शिलांग में मेरा चौथा दिन था।
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