काजीरंगा में हाथी सफारी के बाद हम होटल वापस लौटे। नहा-धोकर नाश्ता किया। नाश्ता मतलब जमकर नाश्ता।
होटल में आमतौर पर सुबह का नाश्ता होटल के किराए में जुड़ा रहता है। माल-ए-मुफ्त दिल-ए-बेरहम का पालन करते हुए अधिकतर यात्री दो-तीन दिन के बराबर नाश्ता कर लेते हैं ताकि लंच की जरूरत न पड़े।
जमकर नाश्ता करने के बाद कमरे में आए। वापस लौटने की तैयारी करने लगे। सामान जमाया।
सामान जमाने के बीच ही कमरे की घंटी बजी। बाहर होटल की महिला स्टॉफ़ थी। वो होटल की साफ़-सफ़ाई का इंतज़ाम देखती थीं। बातचीत होने लगी।
उसने पूछा -'आपको कैसा लगा काजीरंगा? होटल का स्टे?'
हमने कहा -'अच्छा। बहुत अच्छा।'
सुनकर उसके चेहरे पर ख़ुशी आ गई। उसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि वह होटल 2014 में ज्वाइन किया। अपने पति की जगह। पति होटल में ही काम करते थे। 2014 में नहीं रहे। एक दुर्घटना में नहीं रहे। पति की जगह होटल में काम मिल गया।
हमने पूछा कि पति के न रहने पर दूसरी शादी नहीं की?
उसने बताया -'दो छोटे-छोटे बच्चे थे। शादी करते तो उनकी जिंदगी पर असर पड़ता। इसलिए शादी नहीं की।'
बच्चों के बारे बताया कि दो बच्चे हैं। बेटी छब्बीस साल की है। चार साल पहले उसकी शादी की। बेटा फोटोग्राफर है। 23 साल का है। उसकी भी शादी होने वाली है।
हमने कहा -' बेटी की उमर छब्बीस साल। तुम्हारी इतनी उमर तो नहीं लगती।'
किसी महिला से बातचीत करते हुए 'आपकी उमर इतनी तो नहीं लगती' बातचीत आगे बढ़ाने का सबसे सहज तरीका होता है। इंदिरा रॉय के बारे में तो सच में ऐसा लगा मुझे।
उसने बताया -'मेरी उमर 45 साल की हो गई।'
बेटी की हाल ही में 26 साल की उम्र में शादी की। इसका मतलब इंदिरा रॉय की शादी के समय 17-18 साल रही होगी।
होटल के पास ही के गांव रहती हैं इंदिरा रॉय । बेटा पास के क़स्बे में काम करता है। वहीं रहता है। माँ के पास आता-जाता रहता है। वे अकेली ही रहती हैं।
मुझे होटल की यह बात अच्छी लगी पति के न रहने पर उनकी जगह उनकी पत्नी को काम दे दिया।
आम तौर पर जीवन साथी के न रहने पर पति-पत्नी के नजरिये अलग-अलग रहते हैं। अधिकतर आदमी इस लिए दूसरा विवाह कर लेते हैं कि बच्चे पालने हैं। वहीं आमतौर पर महिलाएं इसलिए दूसरी शादी नहीं करती क्योंकि बच्चे पालने हैं। पता नहीं दूसरा जीवन साथी कैसा मिले। कारण और भी होंगे जो कि तात्कालिक समय , आसपास के परिवेश और समाज पर निर्भर रहते हैं।
फिर कभी आने पर पर मिलने की बात कहकर हम सामान लेकर चल दिए। हमारी आगे की मंजिल शिलांग थी।
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इंदिरा रॉय 

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