चेरापूंजी जाते हुए ड्राइवर ने पाँच-छह जगह जाने की बात कही थी। इनमें रास्ते में पड़ने वाली गुफ़ाएँ, झरने और व्यू प्वाइंट शामिल थे। आते समय एक गुफा सड़क से करीब आधा किलोमीटर दूर थी। ड्राइवर ने कहा -'जाने में थक जाओगे। रास्ता ख़राब है।' चेरापूंजी मुख्य आकर्षण था। हमने वह गुफा छोड़ दी। आगे बढ़ गए।
ड्राइवर एक डायरेक्टर की तरह जहाँ भी कोई बोर्ड देखता, कहता-'इसका फ़ोटो ले लो।' हम उसके निर्देश का पालन करते रहे।
लौटते समय रास्ते में Mawsmai गुफ़ा पड़ी। रास्ते में सड़क के पास ही होने के कारण इसे देखने गए। इस गुफा की खोज उनके शिकारियों ने की थी, जो इस गुफा में रहने वाले जानवरों का शिकार करते थे । खासी भाषा में माव स्माई का अर्थ है - "शपथ का पत्थर"। संभवतः यह नाम स्थानीय महापाषाण स्मारकों में से एक से आया है - खासी भूमि ऐसे स्मारकों से समृद्ध है।
गुफा के प्रवेश द्वार के पास ही एक टेंट लगाए Ki_sur_shynna का संगीत चालू था। गायक सितार बजाता हुआ गाना गा रहा था-'कोई नशा है तेरी बातों में।'
अपन ने खड़े होकर कुछ देर गाना सुना। गायक सीधे हमको देखते हुए जिस तरह गा रहा था उसको देखकर लगा वह कह रहा है -'मुफ्त में गाना सुनोगे?'
हमने उसकी निगाहों से बचते हुए उसके सामने रखे डोनेशन बॉक्स में कुछ सहयोग किया। गायक की मुस्कान देखकर लगा वह कह रहा है -' इतने मुफ्तखोर भी नहीं हो तुम।'
गाना सुनने के बाद गुफा देखने के लिए आगे बढ़े। करीब 150 मीटर लंबी गुफा में कुछ जगहें इतनी संकरी हैं कि लगता है निकलना मुश्किल होगा। लेकिन फिर झुककर, बैठकर निकल ही गए। गुफा के अंदर जगह रोशनी की हुई थी। कहीं-कहीं लकड़ी के पटरे लगाए गए थे ताकि आसानी से आगे बढ़ सकें। कुछ जगहें चट्टानें इतनी चिकनी थीं कि लगा कि फिसल जाएँगे। संभलकर आगे बढ़ते हुए करीब आधे घंटे में गुफा दर्शन कर लिया।
अंदर एक जगह पत्थर पर बैठकर फोटो भी खिंचवाया। कैमरा शायद थोड़ा नाराज था। थक गया होगा दिन भर फ़ोटो लेते-लेते।
बाहर लोग मेघालय की स्थानीय ड्रेस पहने हुए फोटो खिंचवा रहे थे। इनमें जोड़े में और अकेले भी फ़ोटो खिंचवाने वाले लोग थे। एक युवा महिला गंभीर मेघालयी ड्रेस पहने गंभीरता से अपनी सेल्फी ले रही थी। उसको अपनी फ़ोटो ख़ुद लेते देखकर मैंने उससे कहा -' मैं आपकी फ़ोटो खींच देता हूँ।'
उसने धन्यवाद कहते हुए अपना मोबाइल मुझे दे दिया। मैंने उसकी फ़ोटो खींची। शुरुआत गंभीर अंदाज में से करते हुए उसके पोज चंचल और खुशनुमा होते गए। उसके चेहरे पर ख़ुशी की मात्रा बढ़ती गई। उसके तमाम फ़ोटो खींचे मैंने। कैमरा वापस कर दिया। उसने फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद दिया।
फोटो खिंचाने से उसके चेहरे पर आई खुशी देखकर मैंने उससे पूछा -'मैं अपने मोबाइल में भी फोटो खींच लूँ आपकी फ़ोटो?' उसने ख़ुशी-ख़ुशी परमिशन दे दी। हमने दो फोटो अपने मोबाइल कैमरे से खींचे। फोटो उसको बहुत खूबसूरत लगे। उसने कहा -' इसे मुझे भेज दीजिये।' हमने उसके नंबर पर व्हाट्सएप पर भेज दिए। उसने बताया कि तमाम लोग उसके साथ आए हैं। माँ-पिता भी।
बात करते हुए अचानक उसको कुछ ख्याल आया। उसने मुझसे कहा -' आप प्लीज़ मेरी फ़ोटो मेरे पापा के फ़ोन पर भेज दीजिए। मेरा नम्बर डिलीट कर दीजिये।' हमने कहा -'ठीक है।'
हमने उसके पिता के नम्बर पर उसको फ़ोटो भेजे। उसका नम्बर डिलीट किया। फोटो भेजने के बाद फ़ोटो भी डिलीट कर दिए। यह सब करते हुए महिला अपने बारे में बताती रही। उसने बताया -' मैं NRI हूँ। मेरे पति को पसंद नहीं कि किसी को फ़ोटो भेजूँ। आप प्लीज़ मेरी स्थिति समझिए। बुरा मत मानियेगा।' कुछ देर पहले की खुश, उत्साहित महिला एक परेशान स्त्री में तब्दील हो गई। उसकी फ़ोटो, नंबर डिलीट होने के बाद उसके चेहरे पर सुकून की साँस पसर गई। उसने मुझे फिर से धन्यवाद देकर मेरा मोबाइल मुझे वापस कर दिया। हम उसको शुभकामनाएं देकर वापस चल दिए।
उसके नाम की मेरी एक फेसबुक दोस्त थी जो कभी नियमित पोस्ट करती थी। अब उसने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते फेसबुक खाता निष्क्रिय कर दिया है। उससे जुड़ीं तमाम बातें याद आईं।
रास्ते में मैंने देखा कि उसके पिता को भेजे गए नेट कनेक्शन धीमें होने के कारण अभी तक गए नहीं थे। धीरे-धीरे जा रहे थे। कुछ देर में चले भी गए। नीला टिक आ गया। उसके फ़ोटो अभी भी मेरे मोबाइल में था। अपनी समझ में उसने फ़ोटो डिलीट करवा दी थी लेकिन तकनीकी लफड़े के कारण वे अभी भी मेरे मोबाइल में थी। हमने उसकी खूबसूरत फ़ोटो एक बार फिर से देखी और उनको डिलीट कर दिया। हमको अनायास किशन सरोज का गीत का मुखड़ा याद आ गया :
कर दिए लो आज गंगा में प्रवाहित
सब तुम्हारे पत्र, सारे चित्र, तुम निश्चिंत रहना।
अभी यह लिखते हुए किशन सरोज जी का बहुत प्यारा यह गीत यू ट्यूब सुनते हुए लगा कि एक गीत कैसे-कैसे लोगों की यादों से, भावनाओं, स्थितियों से जुड़कर कितनी-कितनी यात्राएँ करता हुआ लंबे समय तक जीता है। गीत का लिंक टिप्पणी में दिया है। सुनियेगा। अच्छा लगेगा।
माव स्माई गुफ़ा स्थल से बाहर आकर हम आगे बढ़े। नोंगसावलिया प्रेस्बिटेरियन चर्च (Nongsawlia Presbyterian Church) दिखा। 1846 में स्थापित यह चर्च मेघालय का सबसे चर्च है। 180 साल पुराना, खूबसूरत बुजुर्ग चर्च सड़क किनारे चुपचाप खड़ा था। दोपहर का समय होने के कारण चर्च बंद था। हमने बाहर से ही उसकी फ़ोटो ली और आगे बढ़ गए।
रास्ते में नोहकलिकाइ झरना होने की बात बतायी Synrap ने। यह भी कहा कि उसमें पानी नहीं होगा। हमने सर्च किया तो पता लगा कि नोहकलिकाइ झरना एक प्रसिद्ध और भारत का सबसे ऊंचा झरना (340 मीटर/1115 फीट) है। हमने कहा -'चलो देख लेते हैं।'
इस झरने का नाम 'का लिकाई' नामक एक स्थानीय खासी महिला की दुखद कहानी से जुड़ा है, जिसने अपने दूसरे पति के हाथों अपनी बेटी की हत्या के बाद इस झरने से कूदकर अपनी जान दे दी थी।
झरने से जुड़ी दुखद कहानी पता लगने का बाद कि इससे अनजान लोग कितनी ख़ुशी -ख़ुशी इसे देखने आते हैं। फोटो खिंचाते हैं। सुखद यादों के रूप में संजोते हैं।
झरने में पानी कम था। पतली धार के रूप में बह रहा था। लोग दूर से उसको देखते हुए उसको फ़ोटो के केंद्र में रखते हुए फ़ोटो खिंचा रहे थे। इनमें पारिवारिक लोग, माँ-बेटी, सहेलियाँ, दोस्त, मियाँ-बीबी सभी लोग शामिल थे। वहाँ खड़े होकर लोगों को फ़ोटो खिंचाते देखते हुए हमने भी झरने का वीडियो बनाया। फोटो खींचा। कुछ लोगों के अनुरोध पर उनके फोटो खींचे। कुछ लोगों के ख़ुद से कह कर फ़ोटो खींचे।
यहाँ भी एक विवाहित जोड़े का फोटो खींचा। मध्यम उम्र का जोड़ा। मुंबई से आया जोड़ा। फोटो खिंचाते हुए इतना गंभीर था मानो किसी शोक सभा में आया हो। हमने उससे मुस्कराते हुए फ़ोटू खिंचाने को कहा। वे मुस्कराये और थोड़ा पास भी आए। उनके फोटो खींचते हुए मुझे आते समय युवा बंगाली जोड़े के फोटो खींचने की याद आई। लेकिन इनकी गंभीरता देखकर मुझे लगा कि इनको उत्साहित किया तो ये नाराज हो जाएँगे। हमने उनके फ़ोटो खींचकर कैमरा वापस किया। उनका धन्यवाद ग्रहण किया और वापस चलने को तैयार हुए।
गाड़ी के पास आए तो देखा ड्राइवर साहब नदारद थे। फ़ोन बंद आ रहा था। हमने इधर-उधर देखा। चक्कर लगाकर खोजा। कहीं दिखे नहीं ड्राइवर साहब। हम वहीं बैठकर झरने की फोटो लेते लोगों और सामने की दुकानों को देखते रहे। कुछ देर में ड्राइवर साहब लपकते हुए आए। पूछने पर बोले -'खाना खाने चले गए थे।' चावल और मीट खाया था। हमसे पूछा -' तुम लंच नहीं लेगा?' हमने कहा -'नहीं। आगे चाय पियेंगे।'
आगे एक जगह रुककर चाय पी मैंने। ड्राइवर से कहा तो वोला -'हमने अभी लंच किया है। चाय नहीं पियेंगे। यू टेक।' ड्राइवर की अनुमति मिलने पर हमने सड़क के पास थोड़ा ऊपर बने रेस्तरां में मसाला चाय पी। ड्राइवर इस बीच मोबाइल पर कोई रील देखता रहा।
रास्ते में ड्राइवर ने वह जहाँ दिखाई जहाँ से पाँच किलोमीटर दूर वह जगह है जहाँ सोमन रघुवंशी ने अपने पति राजा रघुवंशी के क़त्ल कराने की कहानी मीडिया में बहुत दिन तक चर्चा में रही। मेघालय के लगभग हर ड्राइवर ने बातचीत में इस घटना का जिक्र किया। ड्रोन से राजा रघुवंशी का शव खोजा गया था। यह बताते हुए सबका एक ही सवाल था कि इंदौर से इतनी दूर आकर मेघालय में आकर अपने पति का क़त्ल करने की बेवक़ूफ़ी उसने क्यों की? इस सवाल का कोई जबाब नहीं।किसी भी बेवक़ूफ़ी का कोई गणित नहीं होता।
लौटते हुए रास्ते के ख़ूबसूरत नज़ारे देखते हुए आये। सिनरिप ने अपने घर परिवार के बारे में भी बताया। यह भी कि उसकी साली का पति शराबी निकल गया तो उसने उसको भगा दिया। अब दूसरी शादी करने से डरती है कि दूसरा पति भी उसी तरह नशेड़ी न निकल जाये। यह पूछने पर कि उसकी साली का भी कोई दोस्त, पुरुष मित्र है सिनरिप ने कहा -' हो सकता है। कह नहीं सकते।'
नज़ारे देखते, बातें करते हुए हम शिलांग वापस पहुँचे।सिनरिप ने मुझे मेरे रहनी की जगह पर छोड़ा। हमने उनको भुगतान किया। हम दोनों अपने-अपने रास्ते चल दिए। यह मेघालय में मेरा तीसरा दिन था।
पहले की पोस्ट यहाँ देखें : https://www.facebook.com/share/p/1Cb4eJoeEz/
इसके आगे के विवरण की पोस्ट यहाँ पढ़ें : https://www.facebook.com/share/p/1MoV3YP7w5/
किशन सरोज जी का गीत टिप्पणी में दिए लिंक में सुने :
कर दिए लो आज गंगा में प्रवाहित
सब तुम्हारे पत्र, सारे चित्र, तुम निश्चिंत रहना।
https://www.facebook.com/share/p/1B8rhUuJgU/

No comments:
Post a Comment