Saturday, February 21, 2026

जैसे चॉकलेट के लिए पानी


 पिछले साल अगस्त महीने में दिल्ली में Ibbar Rabi जी से मुलाक़ात के दौरान Ashok Pande का जिक्र करते इब्बार रब्बी जी ने बताया -"हल्द्वानी वाला अशोक पाण्डे बहुत अच्छा लिखता है। उसका 'लपूझन्ना' न पढ़ा हो तो पढ़ना।"

हमने बताया कि हम अशोक पाण्डे के बहुत बड़े फैन हैं। इतने कि अगर फेसबुक में केवल एक लिखने वाले को पढ़ने की शर्त हो तो हम अशोक पांडे को पढ़ना चाहेंगे।
उन्होंने अशोक पाण्डे द्वारा अनुवादित एक किताब का जिक्र किया -"चॉकलेट एंड मार्गरिटा ।" बताया कि अद्भुत किताब है। अशोक पाण्डे ने इसका अनुवाद बहुत सुंदर अनुवाद किया है। अशोक पाण्डे द्वारा अनूदित इस किताब के बारे मुझे जानकारी नहीं थी।
बाद में अशोक पाण्डे ने बताया -"बीस-पचीस साल पहले यह किताब एक लोकल प्रकाशक ने छापी थी। अब सब कॉपियां खत्म हो गयीं। उन्होंने एक किताब कहीं से खोजकर, जुगाड़कर भेजने का वायदा किया है।"
लोकल प्रकाशक वाली किताब शायद मिल गई थी लेकिन इधर-उधर के लफड़ों के चलते पहुंची नहीं हम तक। इस बीच उस किताब का संभावना प्रकाशन से नया संस्करण आ गया। किताब के छपने और आनलाइन आने में भी कुछ समय लगा। किताब के बारे में इतनी बातें हुईं इस बीच कि पढ़ने की बेताबी हुई। फिर याद आया कि कबाड़खाना ब्लॉग में इसके कुछ अंश लगाए गए थे। हमने उनको पढ़ना शुरू किया। रोचक लगे अंश। इस बीच किताब छपकर आनलाइन उपलब्ध हो गई। हमने फटाक से किताब ख़रीदी और कबाड़खाना वाली पोस्ट को पढ़ना रोक दिया कि अब किताब ही पढ़ेंगे।
इस बीच किताब का नाम भी बदल गया था। पता चला कि जिस किताब को अपन "चॉकलेट एंड मार्गरिटा" के नाम से खोज रहे थे उसका असली नाम था -"जैसे चॉकलेट के लिए पानी।"
यह किताब 'लाइक वॉटर फॉर चॉकलेट' मैक्सिकन उपन्यासकार और पटकथा लेखक लॉरा एस्क्विवेल के द्वारा लिखा गया एक उपन्यास है। मूल पुस्तक 1989 में ''कोमो अगुआ पैरा चॉकलेट'' शीर्षक से स्पेनिश में लिखी गई थी और 1990 में मेक्सिको का सबसे अधिक बिकने वाला उपन्यास बन गया था। इस 256 पेज के उपन्यास को 1994 में ''अमेरिकन बुकसेलर्स बुक ऑफ द ईयर फॉर एडल्ट ट्रेड'' के रूप में भी सम्मानित किया गया था। यह एस्क्विवेल का सबसे मान्यता प्राप्त थाऔर बीसवीं सदी के स्पेनिश में सर्वश्रेष्ठ उपन्यास। तीस भाषाओं में अनुवादित हुई इस किताब की करोड़ से अधिक प्रतियां बिकी थीं।
किताब आने के बाद फौरन उसे पढ़ना शुरू किया। अनोखे ढंग से लिखी गई किताब। सभी अध्यायों की शुरुआत रसोई से। कोई व्यंजन बनाने का किस्सा आगे बढ़ते हुए उपन्यास के पात्रों के बारे में बताता है। इस किताब के बारे में लिखते हुए Sudipti ने लिखा भी है :
"प्रेम, आवेग, स्वार्थ, वासना, फैंटेसी, विद्रोह और वेदना के तत्वों से बुनी गई इस कहानी में सबको एक सूत्र में बांधने वाला तत्व है भोजन।"
किताब के पात्रों सभी प्रमुख पात्र मानों अभिशप्त प्रेमी रहे हैं। मामा एलेना उपन्यास में कड़क, अनुशासनप्रिय और क्रूर तक दिखाई गई हैं। लेकिन उनके निधन के बाद पता चलता है कि उनका जीवन भी 'प्रेम वंचित' रहा। जिससे वे प्यार करती थीं उससे शादी न हो सकी। शायद इसीलिए वे क्रूर हो गयीं। तीता का तो जीवन ही रोते हुए बीता। उसके प्रेमी की शादी उसकी छोटी बहन से हो जाती है। यह उसकी माँ की ज़िद के कारण होता है जिसे उसका प्रेमी इस लालच में स्वीकार कर लेता है ताकि वह अपनी प्रेमिका के पास रह सके। बाद में मामा एलेना और बहन रोसाउरा के निधन के बाद तीता का विवाह अपने प्रेमी पेद्रो से होता है और एक-दूसरे को अनंत प्रेम करते हुए उन्होंने उस भावना को जिया जिसे वे बरसों से दबाए हुए थे।
यही शायद उनके जीवन का चरम था। इसी मिलन के बाद पेद्रो का निधन हो जाता है। बाद में तीता भी एक तरह से ख़ुद के लिए मरण चुनती है।
अपने समय के बेस्ट सेलर रहे इस अनूठे उपन्यास का हासिल है प्रेम की परिभाषा। इसके बारे में अशोक पाण्डे कई बार बता चुके हैं :
"हम सब अपने भीतर एक माचिस का डिब्बा लेकर पैदा होते हैं लेकिन एक भी तीली ख़ुद नहीं जला सकते। बिना ऑक्सीजन और मोमबत्ती के वह संभव नहीं होता. ऑक्सीजन उस इन्सान की सांस से आएगी जिसे हम प्यार करते हैं जबकि मोमबत्ती का काम अच्छा भोजन, बढ़िया संगीत, मोहब्बत या प्यार भरे शब्द ही कर सकते हैं।इन्हीं के आपस में मिलने पर वह चमकदार विस्फोट घट सकेगा।वही चिंगारी हमारे भीतर गर्मी पैदा करती है और हमें ज़िंदा रखती है. समय के साथ-साथ यह गर्मी कम होती जाती है। फिर बस एक वैसा ही एक और विस्फोट उसे दोबारा ज़िन्दा करता है।
इन विस्फोटों में हमारी आत्मा के लिए जीवन छिपा होता है। इन्सान को जीवन में यह ढूंढना होता है कि ऐसे विस्फोट उसके भीतर कैसे होंगे।समय रहते नहीं ढूंढ पाता तो उसका माचिस का डिब्बा सील जाता है और फिर एक भी माचिस नहीं जलाई जा सकती। तीलियाँ कभी न जलाई जाएं या सारी की सारी एक साथ जल उठें तो इन्सान की आत्मा या तो बुझ जाती है या पूरी तरह भस्म हो जाती है।
कोमलता, प्रेम और इच्छा मनुष्य-जीवन की अनिवार्य चिंगारियाँ हैं। ज़रूरी है आप ऐसे लोगों से दूर रहें जिनकी सांस ठंडी होती है, जो आपके भीतर की हर आग को बुझा देते हैं।"
यह बात बताने के पहले हर बार अशोक पाण्डे लिखते हैं -"पहले भी लिखा है, आज फिर लिखता हूँ. मोहब्बत के साथ जीना है तो अपने भीतर की माचिस की डिबिया को बचा-सम्हाल कर रखिये।"
इस अनूठे स्पेनिश का अनुवाद अशोक पाण्डे ने किया है। बहुत अच्छा अनुवाद है। पढ़ने लायक किताब है। शानदार काम है। अशोक पाण्डे जी इस पुण्य काम के लिए बधाई के पात्र हैं।
अशोक पाण्डे के लेखन/अनुवाद को हम लोगों तक पहुँचाने के लिए संभावना प्रकाशन के Abhishek Agarwal भी बधाई के पात्र हैं। आशा है आने वाले समय में अशोक -अभिषेक की शानदार जोड़ी और पठनीय सामग्री हम तक पहुँचायेगी।
किताब का नाम : जैसे चॉकलेट के लिए पानी
लेखिका : लॉरा एस्कीवेल
अनुवाद :अशोक पाण्डे
प्रकाशक : संभावना प्रकाशन
पृष्ठ : 163
कीमत : 285/-
किताब अमेजन में उपलब्ध है।ई बुक भी उपलब्ध है। लिंक टिप्पणी में है।

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