Monday, October 01, 2007

कादम्बिनी में ब्लागिंग की चर्चा और कुछ ब्लाग


http://web.archive.org/web/20140419215812/http://hindini.com/fursatiya/archives/346

कादम्बिनी में ब्लागिंग की चर्चा और कुछ ब्लाग

ब्लॉगिंग एक ऐसा माध्यम है जिसमें लेखक ही संपादक है और वही प्रकाशक भी। ऐसा माध्यम जो भौगोलिक सीमाओं से पूरी तरह मुक्त, और राजनैतिक-सामाजिक नियंत्रण से लगभग स्वतंत्र है। जहां अभिव्यक्ति न कायदों में बंधने को मजबूर है, न अल कायदा से डरने को। इस माध्यम में न समय की कोई समस्या है, न सर्कुलेशन की कमी, न महीने भर तक पाठकीय प्रतिक्रियाओं का इंतजार करने की जरूरत। त्वरित अभिव्यक्ति, त्वरित प्रसारण, त्वरित प्रतिक्रिया और विश्वव्यापी प्रसार के चलते ब्लॉगिंग अद्वितीय रूप से लोकप्रिय हो गया है। बालेंदु शर्मा
बालेंदु शर्मा दाधीच ने हिंदी ब्लागिंग से संबंधित विस्तृत लेख लिखा है। यह लेख् कादम्बिनी के अक्टूबर अंक में प्रकाशित हुआ है। इस लेख में ब्लागिंग के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुये हिंदी ब्लागिंग से जुड़े हुये तमाम मुद्दों, जिनमें विवादित मुद्दे भी शामिल हैं, की भी निष्पक्ष जानकारी देने की ईमानदार कोशिश की गयी है। संपादक की कैंची की मेहरवानी से कादंबिनी में छपे लेख में इस मूल लेख के कुछ अंश नहीं शामिल हैं लेकिन फिर भी ब्लाग से संबंधित जानकारी के लिये सात पेज कादम्बिनी पत्रिका ने दिये हैं।
ब्लागिंग से जुड़े तमाम लोगों से बातचीत करके बहुत मेहनत से लिखे गये इस लेख के अंश देना आपको उस सुख से वंचित करना होगा जो आपको खुद इस लेख को पूरा पढ़ने के दौरान मिलेगा। आप अगर ब्लागिंग से संबंधित एक सार्थक और मौजूं लेख को पढ़ना चाहते हैं तो यहां जायें और आनंदित हों। लेख के बारे में प्रतिक्रिया आप बालेंदु शर्मा balendu@gmail.com को भेज सकते हैं।
ब्लागिंग संबंधी इस लेख को पढ़्ने के साथ आप एक और ब्लाग पढ़िये तो शायद मजा आये। विधि चर्चा के नाम से शुरू किया गया यह ब्लाग लखनऊ विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफ़ेसर डा. अशोक कुमार अवस्थी के लेखों को प्रकाशित करने के लिये शुरू किया गया है। इन लेखों समाज में घटने वाली समसामयिक घटनाओं को कानून की नजर से देखने का प्रयास किया जायेगा।
एक ब्लाग और शुरू हुआ है कल ही। हमारे ही मोहल्ले में रहने वाले डा. लक्ष्मी शंकर त्रिपाठी भी बातों बातों में हमारी ब्लागर पार्टी में शामिल हो गये। डा. त्रिपाठी ठेलुहा नरेश इंद्र अवस्थी के मामा हैं सो ठेलुहई के कुछ न कुछ अंदाज बातों बातों में भी मिलने चाहिये।

16 responses to “कादम्बिनी में ब्लागिंग की चर्चा और कुछ ब्लाग”

  1. समीर लाल
    आपके द्वारा बताये दोनों ब्लॉग पर अभी जाता हूँ. कादम्बनी के लेख के बारे में आज ही बालेन्दु जी से जानकारी प्राप्त हुई. आपका आभार आपने इसे सबके साथ बांटा. अच्छा लगा अपना नाम वहाँ देखकर.
    आपका लेखन क्यूँ रुका हुआ है?? यह चिंता का विषय बनता जा रहा है. कृप्या हम सब की भारी डिमान्ड पर अपने पुराने अंदाज में लौटें. इन्तजार है, भाई.
  2. अनिल रघुराज
    बालेंदु जी का लेख पूरी हिंदी ब्लॉगिंग का इतिहास भूगोल बता देता है। अभी सिर्फ देखा है, पढ़ूंगा इत्मिनान से। अपना नाभी तलाशूंगा कि अभी गिनती में शुमार करने लायक बना हूं कि नहीं।
    विधि चर्चा जैसा ब्लॉग बहुत जरूरी था।
    वाकई ब्लॉगिंग ने उत्तर भारत के मध्यवर्ग को जबरदस्त अभिव्यक्ति का माध्यम दिया है। जितने लोग आ जाएं, उतना ही अच्छा है।
  3. संजय बेंगाणी
    हिन्दी चिट्ठाकारीता पर इतना विस्तृत व निश्पक्ष लेख पहली बार पढ़ा. लिंक देने के लिए आपका आभार.
  4. Kavita
    आलेख उपलब्ध कराने के लिए आभार।
  5. sanjay tiwari
    बालेन्दु शर्मा ने लेख नहीं पूरा थिसिस लिखा है. अच्छा है.
  6. ज्ञानदत पाण्डेय
    ये पत्रिकायेँ और अखबार बासी लगते हैं. ब्लॉगर इनको इतनी अहमियत क्यों देते हैं. :-)
  7. Sanjeet Tripathi
    बहुत ही बढ़िया लेख लिखा है बालेंदु जी ने!!
  8. बोधिसत्व
    कादम्बिनी
    मैं देख नही पाया हूँ ……मेरी भी कुछ चर्चा है वहाँ…..
  9. नीरज दीवान
    इंद्र अवस्थी ठेलुहा नरेश जी को कैसे भूला जा सकता है। हमें तो उनकी तलाश है क्योंकि उनके वामपंथियों पर प्रकाशित एक लेख ने ही हमें उनमें अपार संभावनाएं दिखाईं दे रही थीं। अब तो दिखाई ही नहीं देते। खुशी की बात यह है कि डॉक्टर मामा ने बातों बातों में ब्लॉगिंग शुरू कर दी है।
    कादम्बिनी का अंक आज ही मंगवाया है। जैसी ही आएगा स्कैन कर प्रकाशित किया जाएगा।
  10. जीतू
    एक अच्छा लेख। बालेन्दू चिट्ठाकारी और पत्रिकारिता से काफी समय से जुड़े हुए है, उनसे इसी तरह के उत्कृष्ट लेख की आशा थी। बालेन्दू को एक अच्छे लेख के लिए धन्यवाद।
  11. rachana
    एक पठनीय लेख की जानकारी देने के लिये शुक्रिया. आपका अपना लेख पढने का इन्तजार है.
  12. श्रीश शर्मा
    लेख पढ़ा, वाकई अच्छा लिखा है।
    ठेलुआ नरेश जी के मामा जी को पकड़ लाए आप, बहुत अच्छा। उम्मीद है कुछ धांसू पढ़ने को मिलेगा। :)
  13. डा.मनोज रस्तोगी
    सारगर्भित लेख के लिए बधाई
  14. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
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