Thursday, May 08, 2008

कानपुरनामा बोले तो झाड़े रहो कलट्टरगंज!

http://web.archive.org/web/20140419215730/http://hindini.com/fursatiya/archives/432

कानपुरनामा बोले तो झाड़े रहो कलट्टरगंज!

काफ़ी दिन से मैं अपने शहर कानपुर के बारे में लिखने की सोच रहा हूं। बचपन से इस शहर में रहा, पला, बढ़ा और आज संयोग कि रोजी-रोटी के लिये इसी शहर में नौकरी कर रहा हूं। कानपुर के बारे में नेट पर जानकारी है लेकिन जितनी है या और जो होगी जिसका मुझे पता नहीं उसमें कुछ और जोड़ सकूं इसका प्रयास करने का मन है।
काफ़ी पहले अतुल अरोरा ने प्रस्ताव रखा था कि कानपुर और आसपास के बारे में जानकारी देने वाली एक साइट बनाई जाये। हां, हौ, अच्छा, बहुत अच्छा, चलो करते हैं, लगते हैं, लगेंगे के बाद हम लोग उस पर आगे कुछ नहीं कर पाये। इसके बाद हम लगातार व्यस्त और मस्त होते चले गये। पस्त क्यों लिखें जी?
अभी हमने एक नया ब्लाग शुरू किया है। नाम हम रखना चाहते थे कानपुर लेकिन वो मिला नहीं। कानपुरियम सोचा और ब्लाग भी बना लिया लेकिन राजीव टंडन जी ने सुझाया कि कानपुरनामा सही रहेगा। कानपुरियम नाम की एक संस्था भी है कानपुर में । इसलिये और भी कानपुरनामा पर मन पक्का हुआ।
इस ब्लाग पर अभी फिलहाल मैंने अपने कुछ पुराने लेख पोस्ट किये हैं। आगे और लेख लिखे, पोस्ट किये जाने का मन है। देखिये कब, कितना कैसे हो पाता है।
इस ब्लाग के पीछे हमारी मंशा कानपुर के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की है। मौलिकता की कोई दुहाई और आग्रह नहीं है। यह भी कोई दावा नहीं कि जो छपे वो सबसे पहले हमारे यहां छपे। हम तो जहां से भी कानपुर के बारे में सामग्री मिलेगी उठा के टीप लेंगे। अनुमति लेकर, आभार देकर और इसके बाद न मामला बना तो जबरिया। :)
अपने कानपुर से जुड़े तमाम सथियों से अनुरोध है कि वे अपने लेख, सुझाव और सहयोग के साथ इस ब्लाग से जुड़ें। ब्लाग की प्रकृति सामूहिक रहेगी। हमारे ब्लाग पूर्वज आलोक, देबा्शीष, रविरतलामी और आदि-आदि से अनुरोध है कि इस पर अपने सुझाव दें। तरकशियों को इस ब्लाग को चमकाने की ठेका दिया गया है। जीतेंन्द्र, अतुल अरोरा, लक्ष्मी शंकर गुप्त जैसे कनपुरियों तमाम लोगों से अनुरोध है कि वे आयें और अपना आलस्य त्याग कर कुछ गली -मोहल्ले के अपने हो-हल्ले के दिन याद करें। जिनके नाम नहीं लिखे वे जानबूझकर इस लिये ताकि वे उलाहना दे सकें। बिना शिकवा-शिकायत भी कोई ब्लाग चलता है भला! :)
ब्लाग की पंचलाइन कैसी है? झाड़े रहो कलट्टरगंज!
आपके सुझाव , सहयोग और आलोचना का स्वागत है। इधर भी औरउधर भी।

13 responses to “कानपुरनामा बोले तो झाड़े रहो कलट्टरगंज!”

  1. yunus
    मुबारक हो । अब तो हम सबको अपने अपने शहरों का ब्‍लॉग शुरू करना होगा भई ।
  2. मसिजीवी
    अरे वाह।।
    यह पहल शानदार है। शहरों के अनौपचारिक इतिहासों में हमारी रुचि काफी समय से रही है। शुभकामनाएं
    हमने तो कई सारी जगहों में टांग फंसा रखी है इसलिए खुद शुरू नहीं कर पाएंगे पर कोई उत्‍साही जन दिल्‍लीनामा शुरू करे तो हम तैयार बैठे हैं सहयोग के लिए।
  3. kakesh
    हम को भी नालायक समझते हैं हो तो जोड़ लें. कभी कहीं कोई भूली भटकी याद तो ताजा कर ही देंगे.
  4. bhuvnesh
    वाह….मजा आयेगा जब कनपुरियों की महफिल जमेगी :)
  5. पिरमोद कुमार गंगोली
    झड़े रहो कलट्टरगंज क्‍यों नहीं?
  6. आलोक
    झड़े रहो कलट्टरगंज क्‍यों नहीं?
    लगता है कभी कानपुर रहे नहीं।
  7. Gyandutt Pandey
    बढ़िया! कानपुरनामा का फीड संजो लिया है।
  8. दिनेशराय द्विवेदी
    पढ़ कर लौट आए हैं। सच्ची मुच्ची शानदार है। अनेक कानपुरियो से साबका पड़ा है, पड़ता रहता है और पड़ता रहेगा। आप ने उन्हें समझने के लिए अच्छा औजार दिया है।
  9. mamta
    बधाई और शुभकामनाये।
  10. समीर लाल
    एक बेहतरीन सार्थक पहल. अनेकों बधाई एवं शुभकामनाऐं.
    ————————
    आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.
    एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.
    शुभकामनाऐं.
    -समीर लाल
    (उड़न तश्तरी)
  11. kanchan
    ham samajh rahe hai.n ki hamara naam kyo.n nahi liya jaa raha kanpuriyo.n me.n …. lekin ham ulahan nahi de.nge..virodh ka hamara ye apna tarika hai:)
  12. sanjay mishra
    apne sahar ke bare me pad kar achcha lagega. me greater noida se badhi deta hoo.
  13. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176

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