Friday, November 07, 2008

तो क्या होगा?

http://web.archive.org/web/20140419214649/http://hindini.com/fursatiya/archives/553

38 responses to “तो क्या होगा?”

  1. सतीश सक्सेना
    पता नहीं आप इतने दिनों से कैसे टिके हो अनूप भाई ? भविष्य के लिए शुभकामनायें…
  2. - लावण्या
    सुकुलजी,
    आप एक पुस्तक छपवायेँ – ऐसी ही सुध्ध “सुकुल छाप ” कवित्ताई की -
    आपसे सानुरोध निवेदन है !!
    बिलकुल सीरीयसली कहए रहे हैँ – चूँकि
    आप के बनाये नये उपमान वाकई मेँ लाजवाब हैँ –
    जैसे,
    ” कोई मजनू थपड़िया देगा तो क्या होगा?”
    “सागर कहीं तऊआ गया तो क्या होगा?”
    “ओबामा सावले चेहरे पे बईठा दिहिस तो क्या होगा?”
    हाहाहाहाहाहा :-)))
  3. manvinder bhimber
    anup ji..
    aap likhte rahe…..bheeter kuch baat ho to use chipana nahi chaahiye……blogger bekrar rahte hai aapki furstya padne ke liye…
    bahut achcha likha hai
  4. anil pusadkar
    वाह-वाह्।
  5. दिनेशराय द्विवेदी
    कुछ नहीं होगा, दुनिया अपनी गति से चलती रहेगी।
  6. ताऊ रामपुरिया
    चांद की आवारगी है बढ़ रही प्रतिदिन
    किसी दिन पकड़ा गया तो क्या होगा?

    हर गोरी के मुखड़े पे तम्बू तान देता है
    कोई मजनू थपड़िया देगा तो क्या होगा?

    आपकी बिना गारंटी के पढ़ कर भी हम मुस्करा रहे हैं और मजे ले रहे हैं ! बहुत जोरदार ! शुभकामनाएं !
  7. Shiv Kumar Mishra
    वाह वाह!
    आईडिया ऐसे ही भुनभुनाते रहें. और आप ऐसे आईडिये भुनाते रहें. आईडिया आता रहे, कुटकुट, चिरकुट या बगटुट हों.
  8. संजय बेंगाणी
    आत्मा हमारी भी कचोटने लगी है, कुछ न कुछ लिखना ही पड़ेगा. वरना हमरे चिट्ठे की रेटिंग का क्या होगा? :)
  9. sameer yadav
    क्या…अनूप जी फाउल खेलते हैं….हम तो किसी तरह गंभीर नहीं …पर आप
    ….हल्का कहकर भारी परोसते है. चाँद के बहाने पता नहीं किस किस को कोसते है.
  10. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    यह तो हमारी पोस्ट है, आपके कलम से कैसे निकल गयी?! :-)
  11. कुश
    आईला शुरू हुई नही की ख़तम… लगता है आप अब दूसरो के बारे में सोचने लगे है.. अपने आइडिया से कहिए चुप छाप बैठे रहे वरना एयर टेल का दामन थाम लेंगे…
  12. seema gupta
    हर गोरी के मुखड़े पे तम्बू तान देता है
    कोई मजनू थपड़िया देगा तो क्या होगा?
    ha ha ha ha ha ha hahaha ha ha ha ha ha h दिमाग में पड़े तमाम चिरकुट आईडिये भुनभुनाते हैं- shee hai idea to kmal ka aaya hai…… in chirkute idea ka jvab bhee nahee mashaalah hume aise idea kyun nahee aaty………… deemag mey na shee dil jiger mey yee aa jayen ha ha ha..”
    Regards
  13. कविता वाचक्नवी
    अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे – वाली पंक्ति ही याद आई है अभी टिप्पणी करने में काम आने को। सोचा, चलो इसी से काम पूरा कर लें।
  14. मिहिरभोज
    कै होंण हाळा है …जो होँणा है हौँणे दो …काहे टैंशन लेत हो
  15. ranjana
    हा हा हा ……..
    लाजवाब कविता है.पढ़कर आनंद आ गया.
    आपकी पोस्ट बोझिल मन के सारे बोझ झाड़ झूड़कर एकदम मन प्रफ्फुलित कर देती हैं.
  16. Dr.Anurag
    चलिए इस ग्लोबल कवि की जिम्मेदारी को आपने तो समझा…वरना कविता कहने वाले को कई लोग कवि कहकर छेड़ते है…गध वाले कहते है की समाज में परिवर्तन हम ला रहे है लेखो से ..तुम सिर्फ़ लफ्फाजी कर रहे हो….कविता ससुरी बहुत वजन उठाती दिख रही है सारा ग्लोबल समेट लिया है …..काफ़ी वजन दार है…..
  17. समीर लाल
    हा हा!! बेहतरीन. अब करें क्या-सब जगह टीवी पर, अखबार में छा गये तो कहाँ तक छुपायें. :)
    कविता तो बहुत उम्दा उभर कर आई है. बधाई हो महाराज!!
  18. Abhishek Ojha
    जब तक कर सकते हैं मस्ती करेंगे,
    काहे को डरें जो होना होगा वही होगा !
  19. gagansharma09
    किस-किस को देखें, किस-किस को रोएं।
    आराम बड़ी चीज है मुंह ढक के सोयें।
    जब जो होगा देखा जाएगा।
  20. कविता वाचक्नवी
    अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे – वाली पंक्ति ही याद आई है अभी टिप्पणी करने में काम आने को। सोचा, चलो इसी से काम पूरा कर लें।
  21. दीपक
    अगर फ़ुरसतिया ना लिखे तो क्या होगा ?हा हा हा
    एक शेर पढिये मेड बाई गालिब ब्राट टु यु बाइ दीपक
    डुबोया मुझको होने ने
    ना होता मै तो क्या होता ?
  22. राकेश खंडेलवाल
    अब आप प्रसन पूछ ही लिये हौ क्या होगा तो बताये रहे हैं कि अब हम तो कविताई वविताई छोड़ के सीधे साधे फढ़ौ ही करेंगेम ऐसी शुद्ध कविताई के सामने टिकें. न बाबा न
  23. anitakumar
    haa haa ekdum fursatiya kavita….guruwar bhejafry ka ek tukda humein bhi chaahiye prasaad mein jab baaton toh mere liye sahej ke rakh dena….:)
  24. राज भाटिया
    माननीय कविवर समीरलाल जी जो कि अभी हाल ही में समलैंगिकों के साथ देखे गये। कब??
    :)
  25. neeraj tripathi
    बढ़िया है . डर भी लग रहा है दो दिन बाद फिर क्या होगा :)
  26. anupam agrawal
    आपकी इस पोस्ट को देखकर मैंने ध्यान से देखा और पाया कि आपके लिए इस तरह का लिखना कोई नयी बात नहीं है . आपके ब्लॉग पर ही लिखा है —ऐसे अन्य लेख .
    इसी तरह के एक लेख में तैयार टिपण्णी भी है जो फिट बैठ रही है.
    पेश है ;
    मैंने कविता की खेती के कारण उपजे श्रम सीकर सुखाते हुये अपने लड़के की तरफ देखा.वह मुस्कराता हुआ बोला -पिकअप तो अच्छा है पर अब मुझे डर लग रहा है कि कहीं लोग आपकी तुकबंदियों की तारीफ न करने लगें और आप गलतफहमी के शिकार न हो जायें.
  27. कार्तिकेय
    आदरणीय शुक्ला जी,
    बड़ा गहन चिंतन है. सीरियस लिखने वाले सुन लें,
    मगज के पेंच ढीलीयाने वालों ज़रा सोच लो,
    फुरसतिया रिसिया गया तो क्या होगा.
  28. जि‍तेन्‍द्र भगत
    सभी ब्‍लॉगर आपकी इस बात पर एकमत होंगे- दो दिन पोस्ट न लिखो तो अखरने लगता है।
    कवि‍ता आप बड़ी मौज में लि‍खते हैं। मजेदार, खासकर-
    उधार की रोशनी पर चमकता, ऐठता है,
    सूरज समर्थन खैंच लेगा तो क्या होगा?
  29. GIRISH BILLORE
    उधार की रोशनी पर चमकता, ऐठता है,
    सूरज समर्थन खैंच लेगा तो क्या होगा?
    ISASE AAGE KYAA KAHEN
  30. पुनीत ओमर
    अरे समीर जी पहले ही काफी सफाई दे चुके हैं..
    अब काहे उनको और शर्मिंदा कर रहे हो आप.. :)
  31. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    पोस्ट लिखने में देरी तो अँखरती ही है, टिपियाना भी छूट जाय तो मन में खटकता है। जैसे एकदम्मै गड़बड़ा रहे हैं।
    आप इलाहाबाद आकर लौट गये, तो हम बहुत दूर तक सोच बैठे हैं। का हम एतनौ लायक नहीं?
  32. स्मार्ट इंडियन - Smart Indian
    सुकुल जी,
    कविता तो बहुतै बढिया है (कविता के पिताजी को न बताइये कि हमने कविता के बारे में कुछ कहा है) हमकौ ऐसन लगत है जैसे कि यह कविता हम पहले पढ़े हैं कहीं – देजा-वू होगा शायद!
  33. Tarun
    कविता जाजवाब पेली है इसलिये हमने पिछली चर्चा में पेल मारी थी।
  34. कानपुर से नैनीताल
    [...] है। पहाड़ों पर झिलमिलाती रोशनी। सोचा तालाब में चांद झिलमिलाता दिखेगा। लेकिन मुआ दिखा [...]
  35. puja upadhyay
    वैसे तो ये कविता ताऊ के ब्लॉग पर काफ़ी दिनों पहले पढ़ी थी…आज पूरा सन्दर्भ भी देख लिया…आपकी चेतावनी के बावजूद पूरी कविता पढ़ी. बहुत गंभीर चिंतन किया है आपने…आज ब्लॉगजगत को आप जैसे गहरा सोचने वाले लोगन की जरूरत है…हमारे विचार एकदम दौड़ने भागने लगे पढ़ कर…कभी कभी बहुत अच्छे ब्लोग्स भी नज़र से बचे रह जाते हैं. और फ़िर टिपियाने में डर भी लगता है की बड़े लोग हैं पता नहीं क्या समझ लें. तो आज डरते डरते शायद पहली बार आपके ब्लॉग पर टिपियाये हैं…उम्मीद है की कमेन्ट पब्लिश होगा :)
  36. ना बोले तुम ना मैंने कुछ कहा : चिट्ठा चर्चा
    [...] 18. अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे – वाली पंक्ति ही याद आई है अभी टिप्पणी करने में काम आने को। सोचा, चलो इसी से काम पूरा कर लें। – कविता वाचक्नवी [...]
  37. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
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  38. : अरे चांद अब दिख भी जाओ
    [...] अपन को कभी जमीं नहीं। देखिये कभी कहा भी था अपन [...]

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