Thursday, February 18, 2010

मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता

http://web.archive.org/web/20110905200601/http://hindini.com/fursatiya/archives/1257

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

36 responses to “मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता”

  1. arvind mishra
    श्रोत -नहीं स्रोत -कृपया इसे सुधार लें
    कवि शिरोमणि रमानाथ अवस्थी जी के तो कहने ही क्या
    संस्मरण भाव भीना है
  2. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'
    हमें तो साफ सुनाई दिया और साथ बहा ले गया. आपका बहुत आभार…आनन्द आ गया.
  3. गिरिजेश राव
    उन्हें सुनना सम्मोहक है।
    इस पोस्ट के लिए आभार। ऑडियो नहीं सुन पा रहा – धीमा कनेक्सन है लेकिन पंक्तियों को उनके स्वर से जोड़ गुनगुना सकता हूँ।
  4. suman
    nice
  5. सतीश पंचम
    अभी तो मैं पढ और गुन रहा हूं । बहुत अच्छा लगा यह गीत और उसकी बातें।
    आज तो नहीं पर जल्दी ही आपके ब्लॉग पर इनके गीतों को सर्च करते हुए खोजूंगा यह तय है।
    मेरी आज की शाम तो मुंबई के रीगल थियेटर में आराधना के नाम है। 1969 की आराधना फिल्म को थियेटर में 2010 में देखने जा रहा हूँ देखता हूं कैसा फील होता है :)
  6. suman
    nice…………………………………………………………………….
  7. प्रवीण पाण्डेय
    बहुत ही सुन्दर और मन को छूने वाला गीत है । कृपया और गीत डालें ।
  8. ज्ञानदत पाण्डेय
    रमानाथ अवस्थी जी को पढ़ना और गेय स्वर में वाचन करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। उनकी कविता – झील में भी रहता हूं, वीराने के सहारे – मुझे लगता है मानो मेरे मन की बात लिखी हो!
    कविता हो तो उनके जैसी हो! तरल। वर्ना ब्लॉगजगत में जो पढ़ने में आता है, उसमें कई कई गांठें होती हैं।
    यह ऑडियो पूरा न सुन पाये। नेट कनेक्शन और न्वायज के चलते।
  9. संजय बेंगाणी
    जोरदार!
    गीत सुना नहीं पढ़ लिया है.
  10. गौतम राजरिशी
    अवस्थी जी के दो-तीन गीत एक संकलन में हमारे पास भी हैं। एक अनुग्रह ये है कि यदि उनकी रिकार्डिंग डिजिटल फार्मेट हो तो हमें मेल में भेजने की कृपा करें प्लीज।
    आज सुबह से हम बिल्कुल फुरसतियामय हो रखे हैं कि ये चौथी पोस्ट पढ़ रहे हैं लगातार और एकदम तन्मयता से।
  11. kanchan
    रामनाथ अवस्थी जी की कुछ ही कविताएं पढ़ी हैं और बहुत प्रभावित हुई हूँ। उनके विषय में इतनी जानकारी देने एव इस गीत को बाँटने का धन्यवाद
  12. Saagar
    हुजूर से दरखवास्त कभी अपनी आवाज़ में भी कुछ सुनवाया जाये :)
  13. seema gupta
    behd sundar rochak prstuti..
    regards
  14. Ranjana
    उत्कृष्ट सार्थक लेखन की तो पहचान ही यही है कि यह निकलती एक ह्रदय और कलम से है…लेकिन बहकर असंख्य ह्रदय की बात बन जाती है….
    आपका कोटिशः आभार इस सुन्दर मुग्धकारी प्रविष्टि के लिए….
  15. Dr.Manoj Mishra
    रमानाथ जी की रचनाओं का मैं भी प्रशंसक हूँ ,बहुत मन से लिखी है आपनें यह पोस्ट .बहुत आनंद आया .कभी मौका मिला तो सस्वर सुनाऊंगा.
  16. dr anurag
    नाइस पढ़कर हमने बहुत कोशिश की सुनने की.पर सफल नहीं हुए..उस ज़माने के लोग वाकई अच्छे थे .जैसे असल जीवन मे थे वैसा ही लिखते भी थे….
  17. काजल कुमार
    आज की गोष्ठियों में कहां किसी के पास समय है इतनी बात सुनने का. सब सुपरफ़ास्ट हो गया है साथ ही नौटंकिया गया है सो अलग… एसी दुर्लभ मिठाई बांटने के लिए साधुवाद. चले जाने के बाद जाने वालों की याद कहीं अधिक सालती है.
  18. वन्दना अवस्थी दुबे
    अनमोल खजाना है आपके पास. हम सब को इसी प्रकार लाभान्वित करते रहें . बार-बार सुनने की इच्छा हो, इतनी सुन्दर रचना. अवस्थी जी की आवाज़ तो अकम्पित, सधी हुए थी ही.
  19. Abhishek
    हमने तो पहली बार ही सुना अवस्थीजी को. बहुत अच्छा लगा सुनना. आभार इस परिचय के लिए.
  20. Arvind Chaturvedi अरविन्द चतुर्वेदी
    गीत शिरोमणि प.रमानाथ अवस्थी जी को सुनना एक ऐसाअनुभव है जिसे व्यक्त करना मुश्किल है.
    इंडिअन ओयल द्वारा आयोजित एक कवि सम्मेलन में उन्हें सुना था. शायद वह आखिरी बार का अनुभव था. उस कवि सम्मेलन में उन्होने विशेष फरमाइश पर यह गीत सुनाया था. साथ ही ‘ भीड़ में भी रहता हूं वीरान के सहारे …” ( ऊपर अपनी टिप्पणी में ज्ञानदत्त जी ने शायद भूलवश इसे -झील में भी रहता हूं…लिख दिया है).
    यह गीत कानपुर के एक कवि सम्मेलन में ( जब में कुल 12-13 वर्ष का था) सुना था. अब तक कानों में आवाज़ गूंजती है.
    पंडितजी का पढने का पना अन्दाज़ था.
    मेरे पंख …सुनकर भरपूर आनन्द आया. धन्यवाद.
  21. प्रवीण पाण्डेय
    कल से इस कविता को लगातार सुन रहा हूँ । मेरे मन की कथा कोई और गा रहा है । संबल मिल रहा है । कृतज्ञता व्यक्त करने के शब्द नहीं हैं ।
    मेरे पास वह नहीं है
    जो होना चाहिये था,
    मैं मुस्कराया तब भी
    जब रोना चाहिये था।
  22. Shiv Kumar Mishra
    कविता पाठ शुरू करने से पहले अवस्थी जी ने जो कुछ भी कहा, वह अद्भुत है. सच में निश्छल मन के थे वे.
    पूरा पाठ सुन पाया. अच्छी तरह से सुन पाया. अद्भुत पॉडकास्ट है.
  23. amrendra nath tripathi
    बस शुरुआत की वार्ता को लिख दीजिये , जो
    स्वयमेव काव्य है ! बाकी सब बहुत सुन्दर है !
  24. हिमांशु
    रमानाथ अवस्थी और रामावतार त्यागी दोनों मेरे अत्यन्त प्रिय गीतकार हैं । अक्सर अपनी बेकली, हतोत्साह के क्षणॊं, नैराश्य आदि में इनकी रचनायें धीर बनाती हैं ।
    आप इसलिये ही प्रिय हैं कि आपके पास इस सम्पदा का मूल्य संरक्षित है ! अवस्थी जी के स्वर में इस गीत को सुनना अत्यन्त प्रीतिकर है ! प्रारम्भ की ये पंक्तियाँ टंकित होने से छूट गयी हैं शायद -
    “मेरा वश कहीं जो चलता
    तेरे सामने मैं आता ।”
    आशा करूँ, आपके गीतागार में रामावतार त्यागी जी का स्वर भी होगा ! अभिप्सा मुखर है ।
  25. अमिताभ त्रिपाठी ’अमित’
    इस गीत को हमसे बाँटने के लिये आभार! शेष बातें शेष टिप्पणीकारों ने पहले ही कह दी हैं।
  26. aradhana
    बहुत दिन से लिंक ढूँढ़ रही थी इस ब्लॉग का. मिल नहीं रहा था, आज मिला है. इसके पहले चिट्ठाचर्चा में एक बार “टुकुर-टुकुर ताके बेइमनवा” का लिंक मिला था.
    बहरहाल, मैंने बहुत सुना था अवस्थी जी के बारे में आज थोड़ा विस्तार से जाना. धन्यवाद !!
  27. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
    मेरे पंख कट गये हैं
    वरना मैं गगन को गाता।
    निःशब्द !
  28. अजित वडनेरकर
    बहुत शानदार पॉडकास्ट। रमानाथ जी का शुरुआती कथ्य महत्वपूर्ण है। इसे कलमबद्ध कर पढ़वाइये। मंचीय कवियों की सतही आत्मप्रशंसा से हटकर अनुभवों का संसार होता था उनका कथ्य, जो उनके रचनासंसार को समझने में मदद करता रहा है।
    रमानाथ जी अद्भुत गीतकार थे।
  29. अशोक स्‍वतंत्र
    तुम्‍हीं हो जो संभाले हो
    वरना बुजुर्गों की निशानी कौन रखता है।
    सार्थक प्रयास है अवस्‍थी जी को सदा जीवित रखने का, साधुवाद
  30. अनूप भार्गव
    इतने सुन्दर गीत को बाँटने के लिये आभार …
  31. विजेंद्र एस विज
    अनूप जी …स्व. रमानाथ अवस्थी जी के बारे में आपके ब्लॉग पर पढ़कर बड़ा ही सुखद लगा..
    2005 में अशोक जी (चक्रधर) के एक कार्यक्रम के लिए मुझे अवस्थी जी की कविता “चन्दन है तो बरसेगा ही..”
    पर एक फ्लैश फिल्म जैसा कुछ करने का सौभाग्य मिला था..तब काफी कुछ जानकारी मुझे अशोक जी के
    माध्यम से उनके बारे में मिलीं..स्व. बच्चन साहब के वह काफी करीब थे ..उनकी शादी का कार्ड अशोक जी ने
    दिखाया..जो बच्चन साहब के चाणक्य पुरी दिल्ली के निवास पर सम्पन्न हुई थी..बड़ा रोचक किस्सा था..
    अवस्थी जी जितना खूबसूरत लिखते थे उतनी ही मधुर आवाज उनकी थी..जिससे उनकी सरलता, सहजता
    का अनुमान लगाया जा सकता है..सुखद बात तो यह है की वह हमारे ही जिले फतेहपुर उ.प्र. के थे..
    आपके माध्यम से उनके बारे में और जानकारी मिली..बहुत बहुत धन्यवाद..
    संभव हो तो उनके आडियो भी ब्लॉग में लगाएं..
    सादर,
    -विज
    -
  32. rajeshri panchal
    wonderful
  33. SHUAIB
    बहुत ही सुन्दर है गीत मगर सुनने से पढ़ना अच्छा लगा मुझे।
  34. Dr.Manoj Mishra
    आदरणीय शुक्ल जी ,
    आज आपनें मेरी सभी पोस्ट देखी-अपनी राय से अवगत कराया.
    इतनी व्यस्तता में आपनें इतना समय दिया मैं आपका बहुत आभारी हूँ.
    इसी तरह स्नेह बनाये रखियेगा,
    सादर.
    मनोज.
  35. जीवन पथ पर मिले इस तरह जैसे यह संसार मिला
    [...] दिन पहले रमानाथ अवस्थीजी के गीतों का कैसेट मिला तो उसी के साथ एक [...]
  36. rajendra awasthi.
    वाह सर जी,आज आपके माध्यम से पहली बार “पूज्य स्व.रमानाथ अवस्थी जी” की कुछ रचनाओं को पढ़ने का सुअवसर मिला, जैसे….”मेरे पंख कट गये हैं वरना मैं गगन को गाता” की प्रस्तुत पंक्तियों ने तो मेरे ह्रदय को हर् लिया है
    “मुझे सबने शक से देखा
    मैं किसको क्या बताता?
    मेरे पंख कट गये हैं
    वरना मैं गगन को गाता। ”
    वास्तव में उनकी प्रत्येक रचना मर्मस्पर्शी,सार गर्भित है सत्य कहूँ तो मेरे पास उचित शब्दों की गरीबी है इसलिए मै कितना भी कहूँ,कह नहीं पाउँगा………..
    आपको कोटि कोटि धन्यवाद…..
    rajendra awasthi. की हालिया प्रविष्टी..अंग्रेजी में हगीस हिंदी में हगासMy ComLuv Profile

Post Comment

Post Comment

No comments:

Post a Comment

Google Analytics Alternative