Friday, December 07, 2012

बेचारा वाल मार्ट पधार रहा है

http://web.archive.org/web/20140403051822/http://hindini.com/fursatiya/archives/3685

बेचारा वाल मार्ट पधार रहा है


वाल मार्ट
कल पता चला वाल मार्ट आ रहा है। फ़िर कन्फ़र्म हुआ कि आ नहीं रहा है – पधार रहा है।
अब किसान के दुर्दिन की खैर नहीं। वाल मार्ट किसान की गरीबी को रगड़ के धर देगा। गांवों में पचास-पचास कोस दूर तक किसानों की समस्यायें अपने बच्चों को चुप कराते हुये कहेंगी- चुप हो जा बेटा वर्ना वॉल मार्ट आ जायेगा।

नौकरी की तलाश में शहर में धक्का खाते लोगों को उनके घर वाले कहेंगे- गांव लौट आओ बेटा! वाल मार्ट चच्चा ने यहीं तुम्हारे लिये काम का जुगाड़ कर दिया है
पैसे वाले अपने नालायक बच्चों को किसानी का कोर्स कराने के लिये जुगाड़ भिड़ायेंगे। कहेंगे – बेटा अपन ने तो जैसे-तैसे नौकरी करके गुजार ली। अब तू थोड़ी मेहनत करके किसान बन जा। फ़िर मजे करियो आराम से।
बुंदेलखंड , विदर्भ के किसान आत्महत्या करना बंद करके ऐश करने लगेंगे। यहां के लोग वाल मार्ट के गुण गाते हुये शायद कहें कि -वाल मार्ट जी आप पहले आ जाते तो हमारे बप्पा आज जिंदा होते।
फ़िल्मों में अभी तक किसानों को दीन-हीन दिखाया जाता था। किसान बाप को उनके बच्चे पहचानने से इंकार कर देते थे। अब सीन बदलेगा। किसान मतलब पावरफ़ुल, पैसे वाला दिखायेगा जायेगा। किसान की बेटी से मोहब्बत के चक्कर में नायक गाने-वाने गायेगा। फ़िर बाद में पसीजेगी। गुस्सा होने पर किसान अपने बच्चों को किसानी से बेदखल कर देगा।
नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगेंगे कि चुनाव के पहले वे सिर्फ़ एक अमीर आदमी थे। चुनाव जीतते ही वे किसान बन गये। खुद तो बने ही अपने घर-परिवार वालों किसान बना दिया।
जो लोग आज गांवों में अपनी-अपनी जमीने औने-पौने दाम में बेंचकर शहर भाग रहे हैं। फ़ुटपाथों में जिदगी बसर कर रहे हैं। वे भागकर वापस गांव आ जायेंगे। खेती में पिल पड़ेंगे। एक-एक खेत से पचास-पचास, सौ-सौ लोग नत्थी हो जायेंगे। फ़ुटपाथ पर सोने वाले लोग खेतों की मेड़ों में सोयेंगे। देर रात सोयेंगे, सुबह उठते ही खेतों में जुट जायेंगे।
वाल मार्ट बेचारा शहर से गांव के चक्कर लगाता रहेगा। उस बेचारे पर गांव और शहर दोनों के विकास का जिम्मा थोप दिया गया है। वो गांव से कुली की तरह सामान ढोकर शहर के अपने स्टोर तक ले जायेगा। पलक झपकते उसका सामान बिक जायेगा। वो बेचारा फ़िर भागते हुये गांव आयेगा। सामान उठायेगा शहर भाग जायेगा। उसके देखते-देखते गांव और शहर के लोग अमीर हो जायेंगे। दोनों की गरीबी बेवफ़ा की तरह फ़ूट लेगी और वालमार्ट के पल्ले से चिपक जायेगी। वालमार्ट बेचारा उस दिन को कोसेगा जिस दिन उसने भारत आने की सोची थी।
दिन भर उपभोक्ता और किसान दोनों की नौकरी बजाते हुये थकाहारा वालमार्ट रात को अकेले में चुपचाप बांसुरी पर दर्दीली धुनें बजायेगा। उसको अमेरिका में बिताया अपना बचपन याद आयेगा। उपभोक्ता या किसान उससे जब उसके दर्द का राज पूंछेंगे तब वो बांहों से अपनी आंखे पोंछते हुये कहेगा-नई बाबू जी, कुछ नहीं ऐसे ही जरा घर की याद आ गई। बताइये आपके लिये क्या लाऊं? हरामखोरी या भ्रष्टाचार?
वाल मार्ट के आते ही सारे बिचौलिये फ़ूट लेंगे। अब उपभोक्ता और किसानों के बीच कोई बिचौलिया नहीं होगे। दोनों एकान्त में ऐश करेंगे। वालमार्ट की हालत ढ़ाबे के नौकर सरीखी हो जायेगी। उपभोक्ता उससे जो मन आया सामान मांगेगा। वो बेचारा भागकर किसान के पास आयेगा। वहां से सामान ढोकर उपभोक्ता के पास लायेगा। उपभोक्ता खुश हो गया तो चलते समय पांच-दस रुपये टिप दे जायेगा। किसान का सामान अच्छा बिक गया तो शाम को उससे से भी कुछ बक्शीश मिल जायेगी। किसान कहेगा- ले बेट्टा वाल मार्ट , इससे अपने लिये कुछ ले लेना। गन्दी चीज मत खाना। बीड़ी-सिगरेट मत पीना।
उधर पता चला है कि देश की गरीबी और भ्रष्टाचार की आंखें वालमार्ट के आने की खबर सुनते ही चमकने लगी हैं। अपन का एक और जिगरी यार आ रहा है। :)

मेरी पसन्द


सिद्धार्थ त्रिपाठी
वालमार्ट जी आइए, वालमार्ट जी आइए
देश हमारा व्याकुल बैठा, पूँजी से सहलाइए

घपलों और घोटालों की तस्वीर यहाँ की झूठी है
बिना विदेशी पूँजी के तकदीर देश की रूठी है
रंक बने राजा ऐसी मनमोहन नीति अनूठी है
बिछी लाल कालीन आइए दो का बीस बनाइए
वालमार्ट जी आइए
तथाकथित विद्वान देश के आपके आगे बौने हैं
बड़े-बड़े मन्त्री भी देखो कैसे भले खिलौने हैं
संसद की लॉबी में भी सब बिकते औने-पौने हैं
यहाँ निलामी सस्ती है अब खुलकर दाँव लगाइए
वालमार्ट जी आइए
बहुत हुई आजादी की सूखी बातें अब ऊब रहे
आम आदमी के सपने केजरीवाल संग डूब रहे
अर्थनीति पर राजनीति के कन्फ़्यूजन भी खूब रहे
भटक रहे सन्‌ सैतालिस से पटरी पर लौटाइए
वालमार्ट जी आइए

-सिद्धार्थ त्रिपाठी के सत्यार्थमित्र से (12.12.12)

23 responses to “बेचारा वाल मार्ट पधार रहा है”

  1. प्रवीण पाण्डेय
    अब इतना हल्ला हो चुका है कि वालमार्ट को भी लग रहा होगा कि जब बातों की तलवारें चल गयी हैं तो लातों की झालरें ही मिलेगी।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..संस्कृति बुलाती है
  2. संतोष त्रिवेदी
    वाकई आ रहा है और एफडीआई भौजी को अपने संग ला रहा है !
  3. Anonymous
    @ नई बाबू जी, कुछ नहीं ऐसे ही जरा घर की याद आ गई। बताइये आपके लिये क्या लाऊं? हरामखोरी या भ्रष्टाचार? …… अरे एक के साथ दूजा फ्री में खुद्दे आ जाएगी………….
    प्रणाम.
  4. Kajal Kumar
    लोग यूं ही डरे बैठे हैं और राजनीति‍ज्ञ रोटि‍यां सेक रहे हैं, मुझे तो वॉलमार्ट में ऐसा कभी कुछ ख़ास नहीं लगा कि‍ टूट कर ख़रीद डालता बल्‍कि‍ वि‍देश प्रवास के दौरान मैंने जब भी जो भी ख़रीदा दूसरी ही दुकानों से ख़रीदा… हां ये बात दूसरी है कि‍ मैंने कइयों को फ़ैशन के तौर पर वॉलमार्ट जैसी दुकानों में आते जाते ज़रूर पाया
    Kajal Kumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- FDI का साइड इफ़ेक्‍ट
  5. देवांशु निगम
    इस बार मामला चेंज है , वालमार्ट आकर देख ले, दौड़ा दौड़ा के परेशान करेंगे यहाँ के लोग :)
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..कहानी कोफ्ते की !!!
  6. Alpana
    आप ने तो बड़े फायदे बता दिए वालमार्ट के..इसके माध्यम से किसानों की फिल्मों में पावरफुल एंट्री भी!
    क्या गारंटी है कि यह भारत देश का ही माल बिकवायेगा ..’चुपके से’ आयातित सामान नहीं?
    वैसे भी भारतियों में आज भी अंग्रेज़ों का डाला हुआ इन्फीरियर कोम्प्लेक्स है उसी को भुनाएंगे और वालमार्ट से खरीदना स्टेटस सिम्बल बनेगा !आयातित सामान और पश्चिम मोहर लगा सामान आज भी लोगों की कमजोरी बना हुआ है..उसी का फयदा उठाया जायेगा.
    अफ़सोस है जहाँ अन्य देश अपने देश के सामान को प्रोत्साहन दे रहे हैं वहीँ हमारे खाद्य पदार्थों में आत्म निर्भर देश के राजनेता बाहर के देशों को भारत से पैसा कमाने की छूट दे रहे हैं .दुखद !
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..बरसे मेघ…अहा!
  7. dhirusingh
    जब वालमार्ट पधार ही गया है तो यह शर्त लगनी चाहिए की उसे तहसील स्तर तक अपने स्टोर खोलने पड़ेंगे .अगर यह हो जाए तो वालमार्ट क्या उसके बाप तक भारत नहीं आयेगे ……………
    dhirusingh की हालिया प्रविष्टी..आज मेरे पिता जी का ७५ वां जन्मदिन है
  8. shikha varshney
    पता नहीं वालमार्ट को इतना पोश क्यों बनाया जा रहा है …सबसे घटिया समान मिलता है वहाँ.
  9. देवेन्द्र पाण्डेय
    इत्ता दीन-हीन थोड़ी न होगा वाल मार्ट! कोई अकेले आ रहा है?
  10. Padm Singh पद्म सिंह
    वालमार्ट लाखों नौकरी भी तो देगा…. लोगों की दुकान जब बंद होगी … तो वालमार्ट की वाचमैनी तो मिलेगी ही… पहले दिन भर दुकान पर मेहनत करना होता था…. अब बस डंडा ले के कुकुर ही तो भगाना है …. और महीने मे एकमुश्त 3000 रुपैया खटाक !!
    Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ
  11. Radha
    अच्छा लेख है , पता नहीं वाल मार्ट आते आते क्या साथ लाता है :)
  12. Rekha Srivastava
    वाल मार्ट – आएगा और अपनी मुहर लगा कर हमारे ही सामान को अपनी मर्जी के दामों पर बेचेगा और हम जो अपने मोहल्ले की दुकानों से जो सामान लेकर आते हैं वे सब बंद हो जाएँगी. एक वाल मार्ट ही तो सरे बुनियादी ढांचे को तहस नहस करके के लिए काफी है लेकिन उसको साथ जिनका चाहिए था वो तो मिल ही गया न. देखते जाइए अभी देश और तरक्की के रस्ते पर जायेगा अभी २०१४ के आने में देर है.
  13. shalini kaushik
    .
    सही कह रहे हैं आप .विचारणीय अभिव्यक्ति .बधाई
    प्रयास सफल तो आज़ाद असफल तो अपराध [कानूनी ज्ञान ] और [कौशल ].शोध -माननीय कुलाधिपति जी पहले अवलोकन तो किया होता .पर देखें और अपने विचार प्रकट करें
    shalini kaushik की हालिया प्रविष्टी..आत्महत्या-प्रयास सफल तो आज़ाद असफल तो अपराध .
  14. shalini kaushik
    .
    सही कह रहे हैं आप .बधाई
    प्रयास सफल तो आज़ाद असफल तो अपराध [कानूनी ज्ञान ] और [कौशल ].शोध -माननीय कुलाधिपति जी पहले अवलोकन तो किया होता .पर देखें और अपने विचार प्रकट करें
    shalini kaushik की हालिया प्रविष्टी..आत्महत्या-प्रयास सफल तो आज़ाद असफल तो अपराध .
  15. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    देश की मूर्ख जनता इतने फायदों को समझ क्यों नहीं पा रही है? लानत है… :(
    सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की हालिया प्रविष्टी..वालमार्ट जी आइए… स्वागत गीत
  16. Anonymous
    समय की पुकार को देखते हुए भारत माँ ने एक ऐसे सपूत को गढ़ा जिसमे भगत सिंह जैसा देशप्रेम, शास्त्री जी जैसी सादगी, पटेल जैसे निडरता, गाँधी जी जैसा स्वावलंबन
    और अभूतपूर्व दूरदर्शिता है. भगवान् अरविन्द केजरीवाल को उम्रदराज करे क्योंकि इस समय वही इस देश की एकमात्र आशा की किरण हैं.
  17. नीरज दीवान
    भारत में वालमार्ट आने तो दीजिए। डंकल का हल्ला भी बहुत किया गया था। भारत अमेरिका या यूरोप नहीं है। यहां वालमार्ट आए ना आए। अग्रवाल मार्ट बहुत से हैं।
  18. देवेन्द्र पाण्डेय
    इसकी चर्चा यहाँ भी है…
    http://merecomment.blogspot.in/2012/12/blog-post.html
  19. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    ओहो, तो आपने सटा दिया…! :)
    सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की हालिया प्रविष्टी..वालमार्ट जी आइए… स्वागत गीत
  20. प्रियंकर
    वालमार्ट में सामान क्या राशनकार्ड से मिलेगा ? यूं ही एक छोटी-सी जिज्ञासा . या वह भी पैसा सीधा उपभोक्ता के अकाउण्ट में भेजेगी जैसे अभी लौबीइंग के लिए सीधा भेजा होगा . धाँसू सटायर !
    प्रियंकर की हालिया प्रविष्टी..तुम थे हमारे समय के रडार / राजेंद्र राजन
  21. सतीश चन्द्र सत्यार्थी
    अब तो न पधारे हैं.. जल्दी पधारें तो बिगड़े काम बनें…
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