चालीस दिन तक हमीदा बानो ना-नुकर करती रहीं। जन्नत आशियानी हुमायूँ बादशाह की सौतेली माँ दिलदार बेगम ने नसीहत दी,"आखिर किसी से तो शादी करनी है। बादशाह से अच्छा कौन है?"
हमीदा बानो बोली-"हां किसी से तो शादी करूंगी। लेकिन वो ऐसा आदमी हो जिसका गरीबाँ पकड़ सकूं, ना कि वो जिसका दामन भी न छू सकूं।"
-शाजी जमाँ की किताब 'अकबर' से। किताब पर लेखक से रवीश कुमार की बातचीत का लिंक कमेंट बॉक्स में।
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