Tuesday, November 20, 2007

ब्लागर प्रयाण् गीत

http://web.archive.org/web/20140419213258/http://hindini.com/fursatiya/archives/371

ब्लागर प्रयाण् गीत

सबह हुई,
आंख मल,
बिस्तर से निकल,
चाय चढ़ा।
नेट लगा,
कमेंट देख,
मुस्करा,
खिलखिला।
पोस्ट लिख,
लिंक भेज,
इंतजार कर,
धीरज धर।
देश को रो,
जी का चैन खो,
दुखी हो,
सुख मिलेगा।
फोटो लगा,
ज्ञान-बीड़ी जला,
पुराणिक मसाला खा,
मौज कर।
फ़ुरसत में रह,
पाडकास्ट झिला,
सब झेलाते हैं,
पीछे मत रह।
कविता मत लिख,
पढ़ेगा तो मरेगा,
होगा अपराध बोध ,
ये क्या किया तूने अबोध।
ज्यादा मत बहक,
चिट्ठा-चर्चा कर,
वन लाइनर लिख,
मस्त रह, अलमस्त दिख।
बहुत हुआ,
घड़ी देख,
तैयार हो,
आफिस भाग। :)

31 responses to “ब्लागर प्रयाण् गीत”

  1. arun arora
    पर पंगा मत ले
    वर्ना पंगेबाज आ जायेगा…:)
  2. Rakesh Khandelwal
    एक जोड़
    एक तोड़
    एक कान को मरोड़
    शब्द चुन
    कविता बुन
    बस सुना, मत सुन
    इधर चटक
    उधर मटक
    लिखा है खूब
    लिख जरा
    न पूछ खोटा कौन है
    न पूछ कौन है खरा
    नजर बचा के बास की
    कलम उठा के खास सी
    यूँ पोस्ट रोज कीजिये
    हमें भी हर्ष दीजिये
  3. जीतू
    धीर धर,
    विवादित लिख
    कुछ फ़ड्डा कर
    (अप)यश मिलेगा
    बकिया चकाचक लिखे हो प्रभु।
  4. kakesh
    फुर्सत नहीं
    तो वन लाइनर लिख
    ज्ञान जी को पकड़
    आलोक जी को जकड़
    लिंकित कर
    पोस्ट लिख
    चर्चा कर
  5. प्रत्यक्षा
    “ये क्या किया तूने अबोध”
    आखिर कविता क्यों लिख डाली ?
  6. अफ़लातून
    क्या – क्या ,
    मत कर,मत कर, मत कर ?
  7. मीनाक्षी
    मस्त मस्त सिद्ध हस्त
    जो लिखा है सत्य सब !
    सलाम हे,कलम के भक्त
    हर्षित हुए सुबह के वक्त !
  8. संजय बेंगाणी
    अगड़म बगड़म
    दही रगड़म
    कुछ भी लिख
    पर पोस्ट कर
    धर्म निभा
    हे ब्लॉगर
  9. Shiv Kumar Mishra
    टिप्पणियां देखी
    जिसने भी टिपियाया
    कविता ही लिखी
    ‘हम भी शब्दों से खेलूँगा’
    टिपण्णी की शक्ल में
    कविता ही ठेलूँगा
    एक लाइन की चिटठा चर्चा
    बचाए समय का खर्चा
    एक हाथ में चाय की कप
    फ़ोन पर गप-शप
    सब ऐसे ही चलता रहे
    अनूप भइया, कीप इट अप
    कभी तो भूलिए
    आफिस की देरी
    ब्लॉग पर लिखिए
    बड़ी सी पोस्ट
    सामने रहे की-बोर्ड
    बगल में चाय और टोस्ट
    आज-कल नहीं लिखते
    ‘जबरिया’ कभी भी
    थोडी तो निकालिए ‘फुरसत’
    समय है अभी भी
    अगर ऐसा नहीं हुआ
    तो हम जुलूस लेकर आयेंगे
    हमारे शहर के ‘बुद्धिजीवी’
    आपके घर के बाहर
    नारे लगायेगें
  10. परमजीत बाली
    वाह!वाह!
    आप का लिखना
    हमें भाया
    पढ़ कर बहुत
    मजा आया
    ऐसे ही लिखें
    सदा फुरसतिया जी
    यूहीं फुर्सत में दिखें।
  11. सागर चन्द नाहर
    हम कविता नहीं लिखेंगे!! :)
    वैसे यह तो ब्लॉगर प्रणय गीत है प्रयाण गीत नहीं
  12. सृजन शिल्पी
    चाहे तू खेल
    शब्दों से
    या फिर कोई
    मुद्दा उठा
    कर घमासान
    चर्चा में रह

    जगा सोते को
    या फिर बहला
    सबके मन को

    कर टिप्पणी
    टिप्पणी पा।
    पाठक बढ़ा
    फैन-फोलोइंग बना
    लोकप्रिय बन
    छप पत्र-पत्रिकाओं में।
    किताबें पढ़
    देख सिनेमा
    समीक्षा छाप।
    ब्लॉगर मीट कर
    फोटो-वर्णन छाप।
    घर-दफ्तर का काम छोड़
    पोस्ट पढ़
    पोस्ट कर
    ब्लॉगिंग कर
    खुश रह।
    कोई कोसे
    कोई डाँटे
    परवाह मत कर
    तू है आजाद
    कर अभिव्यक्ति
    पहली बार
    मिला है
    यह मंच
    धड़ाधड़ छाप
    बकबक कर।
    दूसरों की सुन,
    अपनी भी सुना।
    तारीफ कर
    तारीफ पा।
    कर खिंचाई
    गाली खा।
    अहा !
    क्या है मजा।
    रोजमर्रा के खाली वक्त को
    चिट्ठाकारी में खपा।
    क्या पता
    किसने देखा कल
    हो सकता है
    कल तू बन जाए प्रेमचंद
    परसाई को भी दे पछाड़
    या फिर होने लगे कमाई
    एडसेंस से
    और तू हो जाए मालामाल।
  13. रवि
    फुरसतिया का यह पोस्ट
    फुर से उड़ गया
    क्या ब्लॉगिंग ने
    एक और परसोना
    बदल दिया??????????????????
  14. anita kumar
    जल्दी से घर आ, नेट लगा, पोस्ट पढ़,
    फ़ुरसतिया के वन लाइनर पे
    पुराणिक मसाले में लेफ़्ट का किवाम,
    ज्ञान बीड़ी से चलती कबाड़ी की कार, साइकल की रेलम पेल,
    छोड़ ये वन लाइनर, थोड़ी फ़ुर्सत निकाल,
    पुराणिक का पुराना मसाला निकाल,
    लंबी सी पोस्ट में
    थोड़ा मल्लिका, थोड़ा राखी को ढाल,
  15. प्रियंकर
    क्या बात है !
    विस्तारित गद्य के बाद कोडीफ़ाइड कविताएं .
    अच्छा लगा यह प्रयाणगीत — नित्यक्रिया और नेटक्रिया के पश्चात ऑफ़िस जाने के लिए प्रेरित-उत्तेजित करता प्रयाणगीत . अरे तो अब और कौन सा कुरुक्षेत्र के लिए कूच करना है . अब तो ऑफ़िस ही कुरुक्षेत्र है .
  16. Aarchi
    aap logo ki kavita likhen ka andaz bilkul alag hai..
    aam bhasha ko bhi kitna mazedar bana dete hai..
    yun hi jari rakhiye..
  17. Sanjeet Tripathi
    दोपहर हुई,
    ब्लॉग्स देखे,
    कभी मुस्काए,
    कभी झुंझलाए,
    और
    टिपियाए।
    मन हुआ तो पोस्टाए भी।
    मस्त लिखे हो प्रभो!!
  18. rachana
    कई दिनो बाद आपके ब्लॉग पर आई,
    छोटी सी पोस्ट देख, बहुत हर्षाई!
    कविता तो है ही खूब,
    टिप्पणियाँ भी भाईं!!
    सभी को काव्यमय देख,
    मैने भी कलम चलाई!!
  19. neelima sukhija
    ब्लॉग न लिख पाये तौ
    कोई बात नही
    ओर कुछ नही
    तौ कमेंट ही सही
  20. Gyan Dutt Pandey
    वाह!
    पोस्ट मस्त!!
    टिप्पणियाँ मस्त!!!
    गलती हमारी जो आये लेट
    और सारा मसाला भाई लोग गये ठेल!!!! :-)
  21. अजित वडनेरकर
    अरे, अद्भुत कविता लिख डाली आज आपनेमैं देख नहीं पाया थावाह वाह वाह….
    कुछ कुछ अमर घर चल …..और कुछ कुछ – उसने कहा था में ….वजीरा , ला पानी पिला जैसे संवादों का लुत्फ है इसमें।
    सूबेदारनी की धत् वाला पार्ट हम लिख देते हैं…:)
  22. आलोक
    मस्त
    मस्त
    (इतनी ही कविता आती है)
  23. सारथी चिट्ठा अवलोकन 10 | सारथी
    [...] अनुभव अपनी नीयत साफ रखना….. अवलोकन लुच्ची नजर, चुनिंदा नजारे- चश्मा आलोक पुराणिक का अनुभव अपनी नीयत साफ रखना….. काव्य ओस की एक बूँद खबर आज़ादी एक्स्प्रेस ओह! तो अब ताजमहल नहीं रहेगा….. खोजी लेख बढ रहा देह व्यापार कैसे चलता है देह व्यापार का धंधा? गजल जब कभी बोलना वक्‍त पर बोलना, मुद्दतों बोलना मुख्‍तसर… चिट्ठाकारी ब्लोग लेखक और लेखक ब्लोगर (२) ब्लागर प्रयाण् गीत (काव्य विधा में) जाल-संगणक अपने लेख को अखबारी लेख की शक्ल दें देशज औषधि शास्त्र डायबीटीज : सही औषधीय गुणो से युक्त कोहा वृक्ष पत्रकार/पत्रकारिता पत्रकार या बेकार पर्यावरण मोटापे से ग्‍लोबल वार्मिंग का क्‍या संबंध? भाषा यह पक्षपात क्यों? वर्णन कोहरा या अम्बर की आहें ! विश्लेषण फतवा और मुस्लीम औरत दुनिया के 200 अच्छे विश्वविद्यालयों में एक भी भारत का नहीं है विज्ञान जूँ (जी हां, शीर्षक में एक ही अक्षर है) औषधि गुण मुलेठी के जारी है संजीवनी बुटी ,सोम की खोज ……! (श्रंखला) सफल जीवन साधारण सी पीठ पर न लादें जॉब स्ट्रेस का शैतान साहित्य-परिचय छायावाद की सबसे बड़ी देन हास्य हिन्दी चिट्ठाकारों का वर्गीकरण (हास्य+गंभीर लेख) हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी क्यों नहीं है?? [...]
  24. Isht Deo Sankrityaayan
    कर दिया साहब, जो-जो आपने कहा सब कर दिया.
  25. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] ब्लागर प्रयाण गीत [...]
  26. संतोष त्रिवेदी
    गज़ब अवलोकन और प्रस्फुटन है :-)
    संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..जुगनू बन जलता हूँ !
  27. चंदन कुमार मिश्र
    प्रवाह कम लगा।
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..भारत में बौद्ध धर्म की क्षय – दामोदर धर्मानंद कोसांबी
  28. i was reading this
    When will i notice a variety of users blog posts I prefer with web search, even though just became a Blog writer membership, it functions decent. I remember there exists a way, although i am not looking at it now. Many thanks for your facilitate..
  29. Fender FA-100
    Hello! I just wanted to ask should you ever have any issues with hackers? My last blog (wordpress) was hacked and I ended up losing numerous months of hard work due to no backup. Do you might have any solutions to protect against hackers?
  30. click here now
    I have got got word of web blogs and kind of figure out what they are really. My real question is what things you write down using a internet site, like products thats on your mind or just regardless of what? And what websites am i allowed to logon to to commence blogs? .
  31. like it
    How can you unearth many different weblogs on Blogger with keyword and key phrase or lookup?

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