Friday, April 13, 2012

चलो अपन भी बोल्ड हो जायें

http://web.archive.org/web/20140419215850/http://hindini.com/fursatiya/archives/2865

चलो अपन भी बोल्ड हो जायें

भाईसाहब अब आप भी ’बोल्ड’ हो जाइये। हमारे एक दोस्त ने फ़ोन पर आग्रह किया। (वैसे हम लिखना इसरार चाह रहे थे लेकिन इस्पेलिंग में कन्फ़्यूज हो गये एन टाइम कि इशरार लिखें कि इसरार तो मटिया दिये और आग्रह की शरण में आ गये)
हां तो बात दोस्त के आग्रह की हो रही थी। दोस्त बोला बोल्ड हो जाइये। आग्रह इतना तेज था कि उसका अंग्रेजी उल्था किया जाये तो कुछ ऐसा बनेगा- नत्थिंग डूइंग! बी क्विक। बी बोल्ड!
अपन ने सोचा शरमा के कह दें – अब इस उमर में क्या बोल्ड होंगे।
लेकिन फ़िर सोचा अब क्या शर्माना। सो बोल्डली कह दिये- हम तो पैदाइसी बोल्ड हैं! पैदा ही नंगे हुये थे।
दोस्त बोला- मजाक नहीं यार! देख ही रहे होगे सब लोग बोल्ड हो रहे हैं! तुम काहे को पीछे रहो। मौका है बोल्ड हो जाओ।
हमने कहा -अबे बोल्ड होना क्या दफ़्तर जाना है। कि पहन के कपड़े निकल लिये। बोल्ड होने के लिये कविता लिखनी पड़ती है। गुंडागिरी करनी पड़ती है। मां-बहन करनी पड़ती है। रिश्तों की और अकल दोनों की। इत्ती बोल्डनेस कहां से लायें।
दोस्त ने समझाया कि कविता की जिद हम थोड़ी कर रहे हैं। तुम लेख में बोल्ड हो जाओ। सब धर दो खोल के। एकदम नख सिख वर्णन कर दो। एकदम इरोटिक। उत्तेजक। जैसे उत्पादन शालाओं में किसी आपरेशन का फ़्लोचार्ट होता है वैसे ही तुम ’काम’ का फ़्लोचार्ट बना दो। बस हो गयी बोल्डनेस। या फ़िर किसी के लिये अलबेली बहुआयामी गालियां लिख डालो। हो गयी बोल्डनेस।
हम सहम गये। बोले इत्ते बोल्ड हम कहां। लेकिन दोस्त जिद किये हुये था कि बोल्ड बन के दिखाना है। कह भी दिया उसने- बोल्ड बने बिना तेरी खैर नहीं।
फ़िर अपन नेट पर पसरी तमाम बोल्डनेस का जायजा लेते रहे। कविताओं में इशारे-इशारे में बातें होती हैं। लेखों में तो एकदम खुल्ला बोल्डनेस मौजूद है। खुल्लाखेल फ़र्रखाबादी।
कालेज के जमाने में हास्टल में घर से पहली बार बाहर आये लड़के बोल्ड होना सीख रहे थे। अश्लील साहित्य को इज्जत से पढ़ते हुये और बहुआयामी गालियां देते हुये। कालेज से निकलकर वो सब खुशनुमा यादें होकर रह गयीं। खुशनुमा इसलिये कि जो बीत जाता है वो खुशनुमा होकर ही याद आता है। बुरा बीता तो इसलिये खुशनुमा कि बीत गया। अच्छा बीता तो डबल खुशनुमा।
जब नेट से जुड़े तो कुछ दिन बाद ही ब्लॉगिंग शुरु कर दी। आठ साल होने को आये। शुरू में बहुत कम हिंदी थी नेट पर। आज जो हिंदी है नेट पर उसमें हिंदी ब्लॉगिंग का भी काम भर का योगदान है।
नेट पर हिन्दी आने के बाद यौन सामग्री भी आई नेट पर। वह सब भी जिसे लोग उत्तेजक और अश्लील मानते हैं लेकिन छिपकर पढ़ते हैं। उत्तेजक में भी कुछ इतना उत्तेजक हो जाता है कि पढ़ने वाला बोल्ड हो जाता है और कहता है -ये तो अश्लील है।
ऐसा न जाने कितना लेखन समाज में मौखिक/लिखित मौजूद है। रोज रचा जा रहा है। उसको दोहराकर न अपन पहले हो जायेंगे न आखिरी। क्या फ़ायदा ऐसा बोल्ड होने से।
आज समाज में कित्ती गैरबराबरी है। कित्ती परेशानियां हैं। लोगों का जिन्दा रहना मुश्किल है। समर्थ लोग न लोगों को होश नहीं न जाने किधर भागे जा रहे हैं।
हाल ये है जनाबे अली कि दूसरे की समस्या पर किसी को सोचने का समय नहीं है। ऐसा माफ़िक हम न जाने किधर जायेंगे कुछ समझ नहीं आता। कभी-कभी लगता है ये अपने आपमें एक अश्लीलता है कि इस सबसे कन्नी काटे असहाय जिये जा रहे हैं।
इसी तरह की न जाने क्या-क्या बातें मैं दोस्त को बोलता रहा। मेरे शान्त होने के बाद दोस्त बोला – तेरे साथ यही समस्या है। जब देखो गाड़ी पटरी से उतारकर बाबागीरी बनने करने लगते हो। तू छोड़ तुझसे नहीं होने सकता बोल्ड लेखन!
दोस्त अपना मुंह झोला माफ़िक लटका के चला गया और अपन सोच रहे हैं कि बेमतलब की भावुकता भी कभी-कभी कवच का काम करती है। है न! :)

चलते-चलते

पिछले दिनों एक महिला ब्लागर की कविता पर आई टिप्पणियों के बाद एक ब्लागर ने मर्दानगी दिखाते हुये टिप्पणी करने वाले ब्लागर को जिस तरह मां-बहन की गालियां वर्तनी उलटी करके लिखीं उससे मुझे रवीन्द्र कालिया के उपन्यास खुदा सही सलामत है की महिला पात्र (नाम शायद हसीना बी) याद आयीं जो गालियां उल्टी करके बकतीं थीं ताकि लोग समझ भी लें और गाली भी न कह सकें। जो काम तीस साल पहले कालिया जी के उपन्यास की महिला पात्र ने तीस साल पहले कर डाला वो काम अबके मर्द कर रहे हैं। :)
एक और बात याद आयी। लगभग पांच साल पहले एक ब्लागर ने संजय बेंगानी के लिये आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। टिप्पणी आपत्तिजनक थी उसमें गालियां नहीं। उसके ब्लाग को उस समय के सबसे सक्रिय संकलक नारद से बाहर कर दिया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इस प्रतिबंध के पक्ष-विपक्ष में बहुत बहस हुई । शायद इतनी बहस उसके बाद ब्लागजगत में फ़िर नहीं हुई। लेकिन उसका ब्लाग दोबारा वापस नहीं शामिल हुआ।
इस बार एक महिला ब्लागर की पोस्ट पर बेहूदी टिप्पणियां हुईं उसके बाद खुले आम गाली गलौज होने हुआ। इसके बावजूद इस मसले पर ज्यादा हल्ला-गुल्ला नहीं हुआ। इसका मतलब क्या समझा जाये- ब्लाग जगत परिपक्व हुआ है या फ़िर समझदार और संवेदनहीन। :)
तमाम साथी उस समय ब्लागजगत से जुड़े नहीं होंगे इसलिये उसका लिंक दे रहा हूं- नारद पर ब्लाग का प्रतिबंध – अप्रिय हुआ लेकिन गलत नहीं हुआ :)

76 responses to “चलो अपन भी बोल्ड हो जायें”

  1. सागर नाहर
    हम तो बोल्ड होने के लिये कब से तैयार बैठे हैं पर कम्बख्त जिंदगी के कीबोर्ड में ctrl+b का कमाण्ड बटन नहीं मिल रहा।
  2. विवेक रस्तोगी
    बोल्ड हो जाओ गुरू, बोल्ड लोगों का ही जमाना है।
    हमें तो यही बात समझ में आई कि अब ब्लॉगर संवेदनहीन हो चुके हैं। यह राय शायद मेरे अकेले की भी हो सकती है, परंतु ब्लॉगिंग भी सामाजिक दायरे में आ चुकी है। तो उसके प्रभाव पड़ेंगे ही।
    विवेक रस्तोगी की हालिया प्रविष्टी..ब्रोकरों का शहर मुंबई (City of Brokers, Mumbai)
  3. arvind mishra
    अरे हम डर लगा कि कहीं टंकी …..बहरहाल यह बोल्ड क्रिकेट वाला बोल्ड नहीं है …
    कहाँ चर्चा नहीं हुई जूतम लातम हो गया ..संकोची लोग पहली बार संकोच कम कर कुछ कहते भये …
    और आप भी लिख ही मारे ..इंशा अल्ला हम भी सोच रहे हैं -बाकी तो साईब्लाग में नारी देह देशाटन में सब कुछ कह ही चुके हैं …आपने लिंक नहीं दिया ? गलत बात ..यह समवयी ईर्ष्या ठीक नहीं है !
  4. सतीश सक्सेना
    बोल्डनेस मुबारक हो गुरु….
    सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..तेरी याद में -सतीश सक्सेना
  5. चंदन कुमार मिश्र
    इन दिनों ई सब का हल्ला मचा है ब्लागलोक में ? कई जगह देखा खाली प्रवचन चालू है।
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..भगतसिंह के चौदह दस्तावेज
  6. सलिल वर्मा
    हमें लगा कि बोल्डनेस के नाम पर हमको भी कुछ ऐसा पढ़ने को मिलेगा जो रुप्पन बाबू अपने कमरे में पढ़ा करते थे.. मगर जो मिला वो वास्तव में बोल्ड था.. निराश नहीं हुए!! इस मामले में पंडित अरविन्द मिश्र जी की शिकायत वाजिब है.. जोक्स अपार्ट.. उन्होंने जिस परकार इस विषय को अपने साईं-ब्लॉग या फिर क्वाचिन्द्यतोsपि पर भी अन्य सन्दर्भ में लिखा है वह सराहनीय है..!
    अभी हाल ही में मैंने एक अश्लील उपन्यास समाप्त किया है.. एक विशुद्ध नारी विषय पर एक पुरुष द्वारा लिखा.. किसी महिला ने बोल्डनेस के नाम पर वह विषय नहीं उठाया!! हमेशा की तरह लाजवाब पोस्ट!!
    सलिल वर्मा की हालिया प्रविष्टी..मेरा साया!!
  7. संतोष त्रिवेदी
    हम तो ‘बोल्ड’ कभी नहीं रहे,न दिखने में न लिखने में !अगर ब्लॉगिंग में आने से पहले बुढ़ापा न आ जाता तो हमें भी इस बोल्डनेस का मजा आता.वैसे चुप-चुपकर नेट पर खूब मजे लिए हैं,पर ऐसी भी बोल्डनेस किस काम की जिसकी ढोल न बज जाए !
    ब्लॉगिंग में लगता है कि हिट होने के लिए टंकी पर चढ़ने के बजाय अब बोल्ड-कविता लिखने का फार्मूला ज्यादा सही है.
    यहाँ मर्द होने के लिए ऐसा ब्लॉगर हिट है जो हसीनाओं को प्यारे से स्नैप दिखाकर और बुड्ढो और खूसट चेहरों पर लात-घूँसा जमाकर मजमा लूट ले !
    …ब्लॉगिंग अब सुविधाजनक और साधनपरक आइटम बनती जा रही है,आप में दम है तो बचा लें !
    संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..तुम आओ तो आ जाओ !
  8. सतीश पंचम
    बोल्ड होना भी एक कला है :)
    सबसे पहले सात्विक पोस्टें लिखीं जाय कि हम तो सीधे साधे हैं। उसके बाद थोड़ा चिंतित हो जांय की समाज में अश्लीलता बढ़ रही है। तत्पश्चात उस चिंता में खुद को घुलाना शुरू कर देना चाहिये जब तक कि खुद के मुंह से वैसी ही अश्लीलता मुखर न हो जाय। बाद में अपनी इस अश्लीलता को दूसरे पर ओढ़ा देना चाहिये कि उसने मुझे अश्लील होने पर मजबूर किया।
    इसके बाद नंबर आता है कि खुद ही मैदान में पिल पड़ो। अश्लीलता-वश्लीलता गई तेल लेने। अब पूरे मैदान में आप हो औऱ आपकी अश्लीलता। लगो बोल्डनेस भांजने कि आये जिसमें दम हो। इस अश्लीलपंती का एक लाभ यह होगा कि जो वाकई अश्लील होगा वह आपको अपना मित्र समझने लगेगा और जो मुद्दा अब तक श्लील-अश्लील के झूले पर झूल रहा था, पलक झपकते ही सम पर आ जायगा, झगड़ा खत्म :)
    अंत में एक अश्लील दूसरे अश्लील से बॉर्डर फिल्म के जैकी श्रॉफ और सन्नी देओल की तर्ज पर एक दूसरे को कहेगा – हम हीं हम हैं तो क्या हम हैं, तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो :)
    ——————
    पोस्ट झकास है, एकदम राप्चिक :)
    सतीश पंचम की हालिया प्रविष्टी..‘परमा’
  9. अविनाश वाचस्‍पति
    देखिए अब हम भी फुरसत में आ गए हैं और हो गए हैं अनबोल्‍ड
    निर्मल बाबा से बोल्‍ड नहीं मिला आज तक कोल्‍ड में भी बोल्‍ड
    अब चाहे वह गोल्‍ड हो, या हो रोल्‍ड गोल्‍ड (सोना)
    सोने का ही खेल सारा है
    पर जग सारा जग कर ही खेलता है
    सोते हुए आज तक बोल्‍ड खेल कोई नहीं खेल पाया है
    पर गोल्‍ड बनता है, रात को सोना, जब नींद न आए तो
    बोल्‍ड, बोल्‍ड किसिम किसिम के
    कोई किस करके बनता है
    कोई घिस करके बनता है
    कोई पिस करके बनता है
    जो शोर मचाकर छिप जाता है
    आज ब्‍लॉगिंग में वही बोल्‍ड कहलाता है
    हम तो अब सोने जाता है
    वहीं पर बोल्‍ड होंगे।
    अविनाश वाचस्‍पति की हालिया प्रविष्टी..निर्मल बाबा का निर्मल मन : दैनिक हरिभूमि में 13 अप्रैल 2012 के अंक में प्रकाशित
  10. अविनाश वाचस्‍पति
    कहां चला गया, बहुत बोल्‍ड कमेंट बॉक्‍स है, सब कुछ हजम कर गया है।
    देखिए अब हम भी फुरसत में आ गए हैं और हो गए हैं अनबोल्‍ड
    निर्मल बाबा से बोल्‍ड नहीं मिला आज तक कोल्‍ड में भी बोल्‍ड
    अब चाहे वह गोल्‍ड हो, या हो रोल्‍ड गोल्‍ड (सोना)
    सीना नहीं सोना, लोगों को गलतफहमी है कि सीना चौड़ा होना
    बोल्‍ड होना है, सीना सीने में कितनी देर लगती है
    इस गलतफैमिली से महफूज रहो, तो बेहतर
    सोने का ही खेल सारा है
    पर जग सारा जग कर ही खेलता है
    सोते हुए आज तक बोल्‍ड खेल कोई नहीं खेल पाया है
    पर गोल्‍ड बनता है, रात को सोना, जब नींद न आए तो
    बोल्‍ड, बोल्‍ड किसिम किसिम के
    कोई किस करके बनता है
    कोई घिस करके बनता है
    कोई पिस करके बनता है
    जो शोर मचाकर छिप जाता है
    आज ब्‍लॉगिंग में वही बोल्‍ड कहलाता है
    हम तो अब सोने जाता है
    वहीं पर बोल्‍ड होंगे।
    अविनाश वाचस्‍पति की हालिया प्रविष्टी..निर्मल बाबा का निर्मल मन : दैनिक हरिभूमि में 13 अप्रैल 2012 के अंक में प्रकाशित
  11. vineeta sharma
    बहुत बोल्ड पोस्ट है :)
  12. भारतीय नागरिक
    बोल्डनेस और अश्लीलता में बहुत बड़ा अंतर है. टीवी चैनलों, वेबसाइट और फिल्मों में बोल्डनेस के नाम पर धडल्ले से अश्लील चित्रण दिखाया जाता है.
    कुछ लोगों का काम ही है उलटी सीधी टिप्पणियां करना, शायद इसीलिए मोडरेशन एक अच्छा विकल्प है.
    भारतीय नागरिक की हालिया प्रविष्टी..प्रलय तो भारत ही में होगी …थोड़ा सा इंतजार करें….
  13. Khushdeep Sehgal
    महागुरुदेव,​​
    ​इधर आप बोल्ड हुए, और उधर आपके एजीएम बनने की ख़बर आई…यानि डबल बधाई…​​
    ​​
    ​जय हिंद…
    Khushdeep Sehgal की हालिया प्रविष्टी..क्यों कहते हो फिर बेटियों को लक्ष्मी…खुशदीप
  14. ali syed
    इसरार को मटिया दिए हैं ! अब जनाबे अली को भी तनि घस दीजिये :)
    तीस साल पहले रवीन्द्र कालिया के उपन्यास की स्त्री पात्र सलीके से गालियां बकने लायक उम्र की रही होंगी ! बस इसी लिहाज़ से अर्ज़ किया है कि हसीना बी ? बे औलाद तो ना रही होंगी :)
    ali syed की हालिया प्रविष्टी..जिस क़दर अफ़साना-ए-हस्ती को दोहराता हूं मैं…
    1. संतोष त्रिवेदी
      …बे-औलाद का सवाल तो तब उठता है,जब यह पक्का हो जाये कि वह बे-मर्द तो नहीं थी !!
      संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..तुम आओ तो आ जाओ !
  15. सतीश सक्सेना
    क्या खली पिली पोस्ट चेम्प रखी है :) :)
    ए जी एम् का फुल फॉर्म बताओ और लड्डू खिलाओ …
    चकाचक बधाई हो गुरु…
    सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..तेरी याद में -सतीश सक्सेना
  16. Gyandutt Pandey
    बोल्ड इज गोल्ड। आप बोल्ड हो जाइये तो बता दीजियेगा। तब आपका ब्लॉग फीडरीडर से निकाल देंगे और अगर पढ़ना होगा तो इनकॉग्नीटो विण्डो में खोल कर पढ़ेंगे जिससे कम्प्यूटर पर उसकी हिस्ट्री-कुकीज़ बाकी न रहें!
    बोल्डत्व के लिये शुभकामनायें!
    Gyandutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..हिन्दी वाले और क्लाउट
  17. Gyandutt Pandey
    हां कोई कह रहे हैं कि आप बड़े अफसर बन गये। हमें सुनाई नहीं पड़ा। अफसरी तो वाया मोती हलवाई आनी चाहिये।
    Gyandutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..हिन्दी वाले और क्लाउट
  18. sanjay jha
    बोल्डनेस का ये आपका पहला प्रयास अच्छा लगा……….यूँ, अभी प्रयासरत रहने होंगे ……….. गर, वाकई अपने में बोल्डनेस लाना चाहते हैं तो………….. वैसे, अईसी बोल्डनेस हमें पसंद नहीं …………. जो दिखने के
    बाद ढकना परे…………….
    और हाँ, प्रत्येक सामाजिक प्राणी को ये पता होना चाहिए के उसके घर भी………….मां, बहु एवं बेटिया हैं. उत्तेजना पर विना उत्तेजित शब्द-विम्ब के भी विमर्श संभव है……………..
    चलते-चलते ‘अफसरी तो वाया मोती हलवाई ही आनी चाहिए’.
    सुभकामनाओं का गिफ्ट पैक स्वीकार हो.
    प्रणाम.
  19. Anonymous
    बोल्डनेस और अश्लीलता में बड़ा फर्क है अनूप जी :)
    लेकिन शायद लोगों ने अश्लीलता को ही बोल्डनैस का पर्याय मान लिया है. जिसने जितना अश्लील लिखा, वो उतना ही बोल्ड हो गया :) लेकिन अगर तथाकथित बोल्डनैस दिखा ही दी हो, तो फिर अपनी बात पर अड़े रहना चाहिए, ये क्या की लोगों सही-गलत बताया और आप भाग लिए मैदान छोड़ के :) लिखने वाले को मालूम है तो होगा ही कि इस कविता/लेख के बाद कैसी थुक्का फजीहत हो सकती है? अच्छा हुआ, आप बोल्डनैस से क्विट कर गए :) :) :)
  20. महफूज़ अली
    अनूप जी… मैंने अविनाश वाचस्पति को.. गाली वंदना गुप्ता जी के पोस्ट के लिए नहीं दी… मेरा वंदना गुप्ता से कोई लेना देना नहीं है… उसे तो मैंने अपने पर्सनल ग्रजेस के लिए दी हैं… उसके बेसिर पैर के चुतियापे के लिए दी है… हाँ! वंदना गुप्ता को मैं पर्सनली जानता हूँ…अच्छी लेडी हैं… और कोई इतना बुरा भी नहीं लिखा था कि गाली दी जाए… उन्हें… बस! एक खुंदक उतारने का मौका और मिल गया… अभी देखिएगा इसकी मैं और कैसे बैंड बजाऊंगा.. देखते जाइये… अब.. गालियाँ तो अभी उलटी कर के लिखी हैं… मैं तो सीधी भी और मूंह पर भी दे सकता हूँ उसको… गालियाँ…
  21. महफूज़ अली
    यह बड़ी ग़लतफ़हमी फैली हुई है कि मैंने वंदना गुप्ता के लिए गाली दी… मैंने गाली खुद के लिए दी… कभी तो यह हत्थे चढ़ेगा … ही चढ़ेगा… ही ही ही … बुढापे में जवान से लात खाने में बहुत दर्द होता है… मैं इतना बड़ा बेवकूफ नहीं हूँ कि किसी के लिए लाठी लेकर चल पडूं…
    :)
  22. Anonymous
    अरे बधाई देना तो रह ही गया :(
    जानते हैं अनूप जी, अभी दस-पंद्रह दिन पहले ही एक परिचित से आपका ज़िक्र हो रहा था. अब चूंकि केवल रचना-कर्म को तो हमारे यहाँ कुछ करना माना नहीं जाता, सो उसने पूछा क्या करते हैं शुक्ल जी? मैंने कहा- आयुध निर्माणी में एजीएम हैं :) :) :) देखा? बातें किस तरह घड़ी में पड़ती हैं? :) :) :)
  23. Anonymous
    लीजिये…बधाई देना तो फिर रह गया :)
    बहुत-बहुत-बहुत बधाई हो. बोले तो हार्दिक बधाईयाँ स्वीकार करें.
    हाँ, ये मेरा नाम क्यों नहीं आता यहाँ?
  24. Nishant
    बधाई हो, सर जी.
    दो-तीन दिन इंटरनेट खराब-सा रहा और बोल्डत्व बांचने से रह गए. अच्छा ही हुआ.
    Nishant की हालिया प्रविष्टी..दीवार
  25. शिव कुमार मिश्र
    पोस्ट बढ़िया है. टिप्पणियां बोल्ड हैं.
    आंसू कविता…जाने दीजिये:-)
    शिव कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..विधायक जी
  26. प्रवीण पाण्डेय
    कृत्रिम बोल्ड होने का प्रयास बहुत पहले किया, रास नहीं आया। अब जीवन में कई बोल्ड निर्णय ले रहा हूँ, असली आनन्द आ रहा है।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..विधि की व्यवस्था
  27. Eswami
    खुशनुमा इसलिये कि जो बीत जाता है वो खुशनुमा होकर ही याद आता है। बुरा बीता तो इसलिये खुशनुमा कि बीत गया। अच्छा बीता तो डबल खुशनुमा।….
    बाकी झाम का तो पता नहीं लेकिन ये ज़ेन दर्शन क्लीन-बोल्ड कर गया हैगा.
  28. देवेन्द्र पाण्डेय
    लिंक लम्बा है(नारद जी वाला) पूरा नहीं देख सका। यह वाला उसकी तुलना मे छोटा मगर अधिक जानदार है।:)
  29. Kajal Kumar
    [im]http://3.bp.blogspot.com/-xLP4PgAIRhE/TsPuhkQbs6I/AAAAAAAACZ4/SHicEsQ8vzU/s220/Clipboard01.jpg[/im]
    मुझे भी स्‍ट्रॉंगली लगता है कि‍ फुसफुसे कार्टून बनाना छोड़कर खुल्‍लाखेल-फरूक्‍खावादी-कार्टून बनाना शुरू कर दूं पर कोई गारंटी नज़र नहीं आ रही कि‍ प्रकाशक मेरे दरवाज़े गि‍रते-पड़ते भगदौड़ मचा देंगे या राष्‍ट्रीय/अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोई फोड़ू धमाका हो जाएगा सि‍वाय इसके कि‍… आगे क्‍या लि‍खूं
  30. pawan mishra
    बोल्ड के का मतलब हते पान सिह तोमर या राखी सावंत?
  31. ghughutibasuti
    पढ़ा. अब बोल्ड की परिभाषा खोजनी होगी. शायद अंग्रेजी के बोल्ड और हिन्दी के बोल्ड की अलग अलग हो.
    घुघूतीबासूती
    ghughutibasuti की हालिया प्रविष्टी..माँ का जन्मदिन
  32. देवांशु निगम
    क्लीन बोल्ड कर दिए हैं एकदम , जिस पोस्ट की बात हो रही है वहां से कमेन्ट गायब हैं !!!
    और यहाँ पे कमेंट्स की बाढ़ है :) :) :)
    बड़ी ताम झाम वाली पोस्ट है :) :) :)
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..भईया हम तो तगड़ा गुंडा बनिहों!!!
  33. rachna
    इसके बावजूद इस मसले पर ज्यादा हल्ला-गुल्ला नहीं हुआ। इसका मतलब क्या समझा जाये-
    बोल्ड होना इतना आसान नहीं हैं हां क्लीन बोल्ड जरुर कर दिया कुछ लोगो को वंदना की कविता ने . महिला ब्लोगर की मोरल पुलिसिंग करना एक शगल हैं हिंदी ब्लॉग में लेकिन अगर मे वही पुरुष ब्लॉगर के साथ करती हूँ तो मै “रडार ” पर होती हूँ .
    और हल्ला इस बार भी कम नहीं हुआ हैं और ब्लॉगर ने खुल कर भर्त्सना भी की ही हैं .और खुल कर की हैं बिना ग्रुप बनाए . एक परिपक्व मेंटल सेट उप के साथ
    पहले लोग ग्रुप देखा करते थे और अगर उनके ग्रुप से कोई गाली गलोज कर रहा हैं तो उसको वो बचाते थे लेकिन इस बार सही तरीके से अपशब्दों का विरोध हुआ हैं .
    नारी का चरित्र हनन इस लिये होता हैं क्युकी उसके पास एक चरित्र होता हैं !!!
    rachna की हालिया प्रविष्टी..इस कविता का किसी ब्लॉगर से कोई लेना देना नहीं हैं
  34. rachna
    इसके बावजूद इस मसले पर ज्यादा हल्ला-गुल्ला नहीं हुआ। इसका मतलब क्या समझा जाये-
    बोल्ड होना इतना आसान नहीं हैं हां क्लीन बोल्ड जरुर कर दिया कुछ लोगो को वंदना की कविता ने . महिला ब्लोगर की मोरल पुलिसिंग करना एक शगल हैं हिंदी ब्लॉग में लेकिन अगर मे वही पुरुष ब्लॉगर के साथ करती हूँ तो मै “रडार ” पर होती हूँ .
    और हल्ला इस बार भी कम नहीं हुआ हैं और ब्लॉगर ने खुल कर भर्त्सना भी की ही हैं .और खुल कर की हैं बिना ग्रुप बनाए . एक परिपक्व मेंटल सेट उप के साथ
    पहले लोग ग्रुप देखा करते थे और अगर उनके ग्रुप से कोई गाली गलोज कर रहा हैं तो उसको वो बचाते थे लेकिन इस बार सही तरीके से अपशब्दों का विरोध हुआ हैं .
    नारी का चरित्र हनन इस लिये होता हैं क्युकी उसके पास एक चरित्र होता हैं !!!
    rachna की हालिया प्रविष्टी..इस कविता का किसी ब्लॉगर से कोई लेना देना नहीं हैं
  35. Swapna Manjusha 'ada'
    पोस्ट तो कुछ पुराना है आपका, बाक़ी हम देख नहीं पाए थे…ऐसे देखते रहते हैं और फासलों से गुज़रते रहते हैं…बाकी आज हमरे मिजाजे शरीफ़ में कुछ सवाल और कुछ जवाब आ ही गए तो सोचे…बोल्डनेस की ई जो आज कल, महती गंगा बह रही है, हम भी डुबकी लगा ही लेवें…आपकी पोस्ट, और टिप्पणियों को पढ़ने के बाद तो हम महा कन्फ्यूजिया गए हैं…
    माने कि एतना हो-हल्ला, और लाठी बल्लम निकला, लोगन का १३वीं तक मन गया….ऊ सब किसी महिला के लिए कहे गए, अपशब्दों के लिए नहीं था…उसको सिर्फ़ बहाना बनाया गया था….एतना गारी-गुप्ता जो हुआ…ऊ था अपना व्यक्तिगत खुन्नस निकालने का वास्ते …और हम सब बुड़बक लोग, इस पूरे प्रकरण को, किसी ब्लोगर की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते रहे, किसी महिला ब्लोगर का चारित्रिक हनन मानते रहे,
    तो कुल मिला कर, गोया कि चुनांचे,ब्लॉग जगत, अब व्यक्तिगत खुन्नस निकालने का आखाडा हो गया है…???? बहुते कन्फ़ुसियन है….जाए दो, हमरे बाप का का जाता है…दिमाग अब काम नहीं कर रहा है…हाँ नहीं तो..!!
    एक ठो और सवाल है आपसे…क्लीन बोल्ड जो खेलाडी हो जाता है, ऊ मैदान में रहता है..कि अपना बैट-पैड का दोकान बन्द करके, मैदान से बाहर जाता है…हमको किरकिट का ओतना आइडिया नहीं है..शुकुल जी…
    हाँ एक बात और कहेंगे हम आपसे…आप ‘बोल्ड’ ही नहीं ‘महाबोल्ड’ हैं..अपने दोस्त को समझाए दीजिये…वर्ना …..;)
    Swapna Manjusha ‘ada’ की हालिया प्रविष्टी..नाम में क्या रखा है…!!!!
  36. sanjay @ mo sam kaun...?
    ‘खुदा सही सलामत है’ अभी तक पढ़ा नहीं था, अब उत्सुकता हो रही है सो ढूंढेगे और ढूंढेंगे तो मिल जाएगा| अपने सामने इता बोल्ड ब्लोगीय प्रकरण ये वाला पहला था(बे-बेनामी) और इन्हीं दिनों अपना नेट कनेक्शन उड़ गया था, इसे blessing in disguise माने ले रहे हैं:) शायद सबको अजीब लगे लेकिन मुझे इस सब में एक बात जो थोड़ी सी सकारात्मक दिख रही है वो ये कि लिखने वालों ने अपने विचार अपने सही प्रोफाईल से लिखे हैं\थे| इतना तो इस दुनिया को जान ही चुके हैं कि जो भी होता है उसकी कुछ न कुछ पृष्ठभूमि होती है और वो दिखने वाली चीज से जुदा होती है| एक मुद्दा जिसे आप और बहुत से लोग छोड़ गए वो प्रेम, अमन, इंसानियत के स्वनामधन्य मसीहाओं के द्वारा इस मौके का शरारती इस्तेमाल करना था| पोस्ट का नाम बदलकर महिला ब्लॉगर का चित्र लगाकर इस तरह से लिंक दिए गए कि आपकी एक पुरानी पोस्ट याद आ गयी जिसमें गूगल सर्च करने पर आपका नाम सबसे ऊपर आता था| उन महिला ब्लॉगर को लगे या न लगे लेकिन ये एक बहुत गंभीर बात लगी मुझे| इसे नाम रोशन करना कहते हैं कि बदनाम करना, नहीं मालूम लेकिन बोल्डनेस के चक्कर में ये कीमत कम नहीं| मोटी बात ये है कि सबने अपने हिसाब से खूब रोटी सेंकी और यूं भी इन बहानों से अपने मतलब सिद्ध करना चलता ही रहा है यहाँ| पहले भी यही मानना रहा है अपना कि क्या कहा गया से ज्यादा मायने इधर ये रखता है कि किसने कहा है?
    ये मोती किसी हलवाई का नाम है? कानपुर का है या जबलपुर का, कैसे पता चलेगा? बधाई स्वीकार कर लीजिये, लड्डू वगैरह की तो देखी जायेगी|
    sanjay @ mo sam kaun…? की हालिया प्रविष्टी..A syndrome that is called …..(ladies, excuse me please this time) बवाल-ए-बाल
  37. satyavrat shukla
    बोल्डनेस बड़ी ही खतरनाक है युवा लोगों के लिए तभी तो स्वर्गीय श्री अदम गोंडवी जी ने कहा था ….
    यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढी सदी
    ये प्रतिक्षा की घडी है क्या हमारी प्यास की
    इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया
    सेक्स की रंगीनियां या गोलियाँ सल्फास की
    रूह क्या है जिस्म तक सब कुछ खुलासा देखिये
    आप भी भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये
    जो बदल सकती है दुनिया के मौसम का मिजाज़
    उस युवा पीढ़ी के चहरे की हताशा देखिये ……
    भई अपने तो ऐसे ही सही ,,,जादा बोल्ड होने की जरूरत ही नहीं वरना अपनी सभ्यता से ही बोल्ड हो जायेंगे ….
  38. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] चलो अपन भी बोल्ड हो जायें [...]

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