Tuesday, May 21, 2013

आइये समय बरबाद करें

http://web.archive.org/web/20140420081734/http://hindini.com/fursatiya/archives/4322

आइये समय बरबाद करें

सुबह उठे दफ़्तर गये, दिन बीता बस यों,
शाम हुई लौट के आये, रात हुई गये सो।
समय आजकल ऐसे ही बीत जाता है। सुबह उठकर चाय पीते हुये लैपटॉप पर खटर-पटर। फ़िर दफ़्तर। फ़िर डेरे पर। फ़िर सोना। फ़िर जगना। बस यही रोज का मर्रा है।
बचपन में एक ठो श्लोक पढ़ते थे-

काव्य-शास्त्र-विनोदेन कालः गच्छति धीमताम् ।
व्यसनेन तु मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा ॥
मतलब बुद्धिमान लोग अपना समय काव्य शास्त्र मनोविनोद में गुजारते हैं। मूर्ख लोग अपना समय नशा, सोने और कलह करने में बिताते हैं।
अब आजकल किसी से कहा जाये कि वो कविताबाजी करता है अत: बुद्धिमान है तो लोग हंसेंगे और कहेंगे- व्हाट अ जोक? कवितागीरी तो फ़ालतू लोगों का काम है। काव्य शास्त्र मनोविनोद कोई काम है क्या? ये तो फ़ालतू का टाइम खोटी करना है। टोट्टल टाइम वेस्ट। कविता से क्या रोजगार मिलता है।
फ़ुल टाइम कविताबाजी करने को तो लोग बेवकूफ़ी का काम बताते हैं आजकल।
मूर्ख लोग अपना समय नशे में , सोने में और कलह में बिताते हैं। तो क्या माना जाये कि प्राइम टाइम बातचीत में बहस करते, कलह मचाते लोग मूर्ख हैं? फ़ेसबुक के नशे में डूबे लोग बेवकूफ़ हैं? सोते तो सब हैं तो क्या सब लोग मूर्ख हैं?
आजकल तो सोशल मीडिया पर ज्ञानीजन भी बहस करते पाये जाते हैं। कलह सी मचाते हैं। गाली-गलौज या फ़िर न हुआ तो गाली-गलौच ही करते रहते हैं। तो क्या माना जाये कि वे ज्ञानी नहीं हैं। मूर्ख हैं?
कुछ समझ में नही आ रहा है कौन बेवकूफ़। कौन ज्ञानी। गड़बड़ है सब। परिभाषायें समय के हिसाब से बदलती हैं। जिस परिभाषा से कल लोग ज्ञानी समझे जाते रहे होंगे उसई कसौटी पर कस के आज लोगों को बौढ़म ठहरा देते हैं।
अच्छा अगर आपसे पूछा जाये कि आप कैसे अपना टाइम वेस्ट करते हैं तो क्या आप बता पायेंगे फ़टाक से? शायद न बता पायें। शायद आप भड़क भी जायें जस्टिस काटजू की तरह और कहने लगें – हम समय का सदुपयोग करते हैं जी बरबाद नहीं करते।
काम करने वालों के बारे में सोचा जाये तो वे काम करते हैं, काम की चिंता करते हैं, काम करते समय काम की चिंता करते हैं। न होने पर डबल चिंता करते हैं। काम हो जाता है तो और काम करते हैं, नहीं होता तो और नहीं करते। सोचते रहते हैं कि काम नहीं हो रहा।
अगर हमसे कोई पूछे कि हम कैसे समय बरबाद करते हैं तो हम आपको बता सकते हैं। हम समय अपना समय का सदुपयोग करने की योजना बताने हुये समय बरबाद करते हैं।
यह काम हम सुबह से ही करने लगते हैं। सुबह जब जग जाते हैं तो सोचते हैं कि उठे कि न उठें? काफ़ी देर तक इसी सवाल-जबाब में डूबे रहते हैं। जब तय हो जाता है कि उठना है तो सोचते हैं कि अभी उठें कि थोड़ी देर में उठें। जब थोड़ी देर में तय हो जाता है तो फ़िर सोचते हैं कि कित्ती देर में। होते-होते देर इत्ती होती जाती है कि सब समय बरबाद हो जाता है। फ़िर मजबूरी में महात्मा गांधी बन जाते हैं। उठ जाते हैं।
हम इसी तरह हर जगह अपना समय बरबाद करते हैं। कोई काम तभी करते हैं जब उसके करने के अलावा और कोई विकल्प न रहे। इसीलिये कोई भी हमसे कोई काम कहता है हम फ़ौरन हामी भर देते हैं -हां करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि हमारा और उसका ’संयुक्त आलस्य’ काम को शुरु करने की घड़ियां धकिया के इत्ती दूर कर देगा कि काम शुरु ही न होगा। जब शुरु ही न होगा तो खतम तो कैसे होगा आप खुदै समझ सकते हैं।
अब आपको इसई पोस्ट के बारे में बतायें कि हमने इसे कई बार लिखा। आधा-अधूरा। पहले सोचा देश के हालिया करप्शन कथा पर लिखें। लेकिन फ़िर नहीं लिखे। सोचे कि हम लिख देंगे तो फ़िर व्यंग्यकार क्या लिखेंगे? उनके पेट पर काहे लात मारें। फ़िर सोचा एक ठो कार्टून बनायें लेकिन सोचा कार्टूनिस्टों पर आइडिया चोरी का आरोप लगेगा। नहीं बनाये। फ़िर सोचा कि जरा भ्रष्टाचार पर उदास होकर एक ठो रोतीली पोस्ट लिखकर देश खरा हालत पर रोना-धोना मचा दिया जाये। लेकिन फ़िर यह सोचकर रुक गये कि गर्मी के मौसम में वर्षा ऋतु आ जायेगी। मटिया दिये।
इसी तरह कम से कम दस ठो पोस्टों के मसौदे दो-दो लाइन लिखे फ़िर मिटा दिये। एक आइडिया यह भी आया कि सब मसौदे एक साथ पोस्ट कर दिये जायें लेकिन गठबंधन के मसौदों की सरकार का प्रधानमंत्री नहीं तय हुआ सो वह भी नहीं किये। जब ये नहीं कर पाये तो एक विचार यह भी आया कि यही लिखा जाये कि कैसे लिखना टलता जाता है। लेकिन विचार को बेवकूफ़ी की बात मानकर न लिखने की बड़ी बेवकूफ़ी कर डाली।
अब करते-करते हम अपने पास का लिखने वाला सारा समय बरबाद करके उस स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां बरबाद करने के लिये और समय नहीं बचता।सो मजबूरन इस लिखे को पोस्ट कर रहे हैं मतलब पोस्ट को चढ़ा रहे हैं।
हमने तो यह बता दिया कि हम अपना समय कैसे बरबाद करते हैं। यह खुलासा केवल ब्लॉग लिखने तक सीमित है। बाकी हरकतों में समय की बरबादी के पत्ते हमने अभी नहीं खोले हैं।
अब क्या आप बतायेंगे कि आप अपना समय कैसे बरबाद करते हैं? आई.पी.एल. देखते हुये समय बरबाद करने का विकल्प भूलकर भी न बताइयेगा- पुलिस पूछताछ के लिये बुला सकती है।
यह कहना और बड़ी हंसी का मसौदा होगा अगर आप कहेंगे कि – यह पोस्ट पढ़कर समय बरबाद किया। :)

मेरी पसंद

पैंतालीस साल पहले , जबलपुर में
परसाई जी के पीछे लगभग भागते हुये
मैंने सुनाई अपनी कविता
और पूछा
क्या इस पर इनाम मिल सकता है
अच्छी कविता पर सजा भी मिल सकती है
सुनकर मैं सन्न रह गया
क्योंकि उस वक्त वे
छात्रों की एक कविता प्रतियोगिता की
अध्यक्षता करने जा रहे थे।
आज चारों तरफ़ सुनता हूं
वाह, वाह-वाह, फ़िर से
मंच और मीडिया के लकदक दोस्त
लेते हैं हाथों हाथ
सजा कैसी,कोई सख्त बात तक नहीं करता
तो शक होने लगता है
परसाई जी की बात पर नहीं
अपनी कविता पर।
-नरेश सक्सेना

20 responses to “आइये समय बरबाद करें”

  1. मीनाक्षी
    हमने तो आपकी पोस्ट बाँच कर समय बिताया…. बरबाद कैसे करते हैं यह बताएँ कि न बताएँ इस पर विचार कर रहे हैं… :)
    मीनाक्षी की हालिया प्रविष्टी..सुधा की कहानी उसकी ज़ुबानी (4)
  2. प्रवीण पाण्डेय
    हमें तो समय व्यर्थ करना आता ही नहीं, कुछ न कुछ क्रिया में रत रहते हैं।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..नदी का सागर से मिलन
  3. विवेक रस्तोगी
    वैसे समय बर्बाद करना भी एक कला है, और यह सीखने में ही बहुत समय लग जाता है
  4. aradhana
    बहुतै मज़ेदार पोस्ट :) हमारी मनपसंद लाइनें हैं-
    “काम करने वालों के बारे में सोचा जाये तो वे काम करते हैं, काम की चिंता करते हैं, काम करते समय काम की चिंता करते हैं। न होने पर डबल चिंता करते हैं। काम हो जाता है तो और काम करते हैं, नहीं होता तो और नहीं करते। सोचते रहते हैं कि काम नहीं हो रहा।
    अगर हमसे कोई पूछे कि हम कैसे समय बरबाद करते हैं तो हम आपको बता सकते हैं। हम समय अपना समय का सदुपयोग करने की योजना बताने हुये समय बरबाद करते हैं। ”
    आलस, खलिहरी, काहिली, समय बर्बाद करना ये सब हमारे प्रिय काम है. हम तो फेसबुक पर आज यही स्टेटस भी लिखने वाले थे कि भई हमको कुछ नहीं करना अच्छा लगता है. आपको क्या तकलीफ़ है ?
    aradhana की हालिया प्रविष्टी..क्या किया जाय?
  5. दिनेशराय द्विवेदी
    अच्छी कविता पर सजा भी मिल सकती है। क्या पता वही सर्वश्रेष्ठ ईनाम भी हो।
    दिनेशराय द्विवेदी की हालिया प्रविष्टी..गिरवी रखे जेवर न लौटाना अमानत में खयानत का अपराध है।
  6. वाणी गीत
    माने कि आपका लिखा पढना कोई काम नहीं है :)
    वाणी गीत की हालिया प्रविष्टी..चुन चुन करती आई चिड़िया ….
  7. akash
    सबसे ज्यादा तो यही सोचकर समय बर्बाद होता है कि जो कल समय बर्बाद किया आज वो नहीं होने देना है |
  8. PN Subramanian
    भाई साहब हमारी या आपकी क्या कूबत है कि टाइम वेस्ट कर सकें. टाइम अपनी जगह है और वेस्ट तो हम हुए जा रहे हैं.
    PN Subramanian की हालिया प्रविष्टी..यह उपासक कौन है
  9. नीरज दीवान
    आज चारों तरफ़ सुनता हूं/वाह, वाह-वाह, फ़िर से/मंच और मीडिया के लकदक दोस्त/लेते हैं हाथों हाथ/सजा कैसी,कोई सख्त बात तक नहीं करता/तो शक होने लगता है/परसाई जी की बात पर नहीं/अपनी कविता पर।
    अद्भुत रचना सक्सेनाजी की।
    शब्दों के चयन पर उठा विवाद हास्यास्पद है। आपकी लाइन क्लियर हमें तो यही लग रहा है।
    साहित्यकारों के गैंगवार में जावेद अख़्तर का लिखा याद आ गया.-
    जानता हूं मैं तुमको जौक़-ए-शायरी भी है
    शख़्सियत सजाने में इक ये माहिरी भी है
    फिर भी हर्फ़ चुनते हो, सिर्फ़ लफ़्ज़ सुनते हो
    इनके दरम्यां क्या है, तुम ना जान पाओगे।
  10. Anonymous
    खत्म होने से एक पैराग्राफ़ पहले हमने सोचा कि ये लिखेंगे कि आपकी पोस्ट पढ़ के समय बरबाद किया, पर अन्तिम लाइन में आपने ये भी लिख दिया… अब इत्ती लम्बी पोस्ट पढ़ के टाइम बरबाद करने के बाद टिप्पणी में क्या लिखें, ये सोच के टाइम बरबाद नहीं करेंगे.. वैसे भी इतनी लम्बी टिप्पणी लिखने में तो टैम बरबाद हो ही रहा है… अब आगे भी हम आपकी पोस्ट पर टाइम बरबाद करने आएँगे कि नहीं, ये इस पर निर्भर करता है कि आप अगली पोस्ट लिखने में कितना टाइम बरबाद करेंगे…
    हम इसी तरह हर जगह अपना समय बरबाद करते हैं। कोई काम तभी करते हैं जब उसके करने के अलावा और कोई विकल्प न रहे। इसीलिये कोई भी हमसे कोई काम कहता है हम फ़ौरन हामी भर देते हैं -हां करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि हमारा और उसका ’संयुक्त आलस्य’ काम को शुरु करने की घड़ियां धकिया के इत्ती दूर कर देगा कि काम शुरु ही न होगा…. ये लाइन सबसे मजेदार थीं…
    वैसे हमारा इतना टाइम बरबाद करने के लिए धन्यवाद… :))
  11. डॉ. गायत्री गुप्ता ‘गुंजन’
    खत्म होने से एक पैराग्राफ़ पहले हमने सोचा कि ये लिखेंगे कि आपकी पोस्ट पढ़ के समय बरबाद किया, पर अन्तिम लाइन में आपने ये भी लिख दिया… अब इत्ती लम्बी पोस्ट पढ़ के टाइम बरबाद करने के बाद टिप्पणी में क्या लिखें, ये सोच के टाइम बरबाद नहीं करेंगे.. वैसे भी इतनी लम्बी टिप्पणी लिखने में तो टैम बरबाद हो ही रहा है… अब आगे भी हम आपकी पोस्ट पर टाइम बरबाद करने आएँगे कि नहीं, ये इस पर निर्भर करता है कि आप अगली पोस्ट लिखने में कितना टाइम बरबाद करेंगे…
    हम इसी तरह हर जगह अपना समय बरबाद करते हैं। कोई काम तभी करते हैं जब उसके करने के अलावा और कोई विकल्प न रहे। इसीलिये कोई भी हमसे कोई काम कहता है हम फ़ौरन हामी भर देते हैं -हां करेंगे। हमें पूरा भरोसा है कि हमारा और उसका ’संयुक्त आलस्य’ काम को शुरु करने की घड़ियां धकिया के इत्ती दूर कर देगा कि काम शुरु ही न होगा…. ये लाइन सबसे मजेदार थीं…
    वैसे हमारा इतना टाइम बरबाद करने के लिए धन्यवाद… :))
  12. डॉ. गायत्री गुप्ता ‘गुंजन’
    क्या खतरनाक शक्लें आती हैं, ब्लॉग पर कमेंन्ट करने के बाद… इनका वास्तविकता से तो कोई लेना-देना नहीं है ना…??
  13. सतीश सक्सेना
    बरबाद लोगों के
    बरबाद जीवन की
    बरबाद गप्पें भी
    समय की बर्बादी है …
    बरबाद पोस्ट पर
    बरबाद टिप्पणी ,
    बरबाद लोगों को
    रद्दी आशीष देने की
    बरबाद कोशिश हैं !
    बरबाद लेखों पर
    टिप्पणी भी बरबाद
    ही मिलेगी !
    सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..भ्रष्टाचार हमारे खून में -सतीश सक्सेना
  14. दीपक बाबा
    बहुत भारी भरकम लिंक सजाये हैं, फुर्सत से ही सही….:)
    दीपक बाबा की हालिया प्रविष्टी..कविता, औरत और क्रांति
  15. आशीष
    अभी समय नहीं है , जब मिला तब आयेंगे बर्बाद करने :)
    –आशीष
  16. shikha varshney
    हो …हमने तो पोस्ट पढ़ ली पूरी ..अब समय को कैसे बचाते बर्बाद होने से .:):).
  17. मनोज कुमार
    अपनी तो आजकल बोलती ही बंद है। श्रीमती जी कहती हैं मै आजकल ब्लॉग और फ़ेसबुक पर बहुत समय बरबाद करता हूं। शायद सबसे ज़्यादा।
    मनोज कुमार की हालिया प्रविष्टी..हिंद स्‍वराज्‍य-4
  18. धीरेन्द्र पाण्डेय
    ब्लॉगर हो न निराश करो मन को ,
    समय बर्बाद करो बर्बाद करो ||
    चाय पी पी कर बर्बाद करो ,
    फेसबुक पढ़ लिख कर बर्बाद करो ||
    ये जन्म हुआ किस अर्थ कहो,
    जब समय न बर्बाद किया ||
    दफ्तर गये सब काम किया
    तो फिर क्या बोलो नाम किया ||
    घर आकर के टीवी खोलो ,
    बस खाली पीली चैनल बदलो ||
    जब ऊब जाओ मोबाइल खोलो ,
    बिलावजह नंबर देखो ||
    उठ उठ कर पानी बारम्बार पियो
    बारम्बार उसका निकास करो ||
    धीरे से रात करीब आये ,
    झुलवा चरपैय्या में लेटो ||
    गुड़ नाईट की जगह बोलो
    ब्लॉगगिंग ने निकम्मा कर डाला
    वर्ना थे हम भी काम के ||
  19. SUNIL PATIDAR
    वाह साहेब ऑफिस में बेठे बेठे कब ये पढ़ गया पता ही नहीं चला ………….वाकई बहुत मजेदार है
    समय की बर्बादी कोई आसान काम नहीं है………
  20. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
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