Monday, October 21, 2013

खजाने के दावेदार

http://web.archive.org/web/20140420081423/http://hindini.com/fursatiya/archives/4998

खजाने के दावेदार

खजानाउन्नाव में खजाना खुद रहा है। कई दावेदार अब तक दावा ठोंक चुके हैं। सपना देखने वाले बाबा जी हैं, खुदाई करने वाली सरकार है, राजाओं के वंशज हैं, आसपास के लोग हैं। सबके अपने तर्क हैं। सब जायज हैं। महीने भर खुदाई होनी है। वारिस बढते जा रहे हैं। ऐसा ही रहा तो कुछ दिन में वारिसों के मुकाबले ऐसे लोग गिनना ज्यादा आसान होगा जिन्होंने दावा नहीं ठोंका।
इस बीच खबर आई है कि पाकिस्तानी फ़ौज ने कल घुसपैठ के लिये जान लगा दी। 25 जगह से घुसने की कोशिश की। सेना के जवानों ने घुसपैठियों पर गोली बरसाने के साथ-साथ चिल्लाते हुये कहा- अबे काहे जान आफ़त में डालते हो। तू नया फ़ौजी है क्या? सुना नहीं क्या हमारा नारा-
दूध मांगोगे खीर देंगे,
कश्मीर मांगोगे चीर देंगे।
इस पर पाकिस्तानी फ़ौजी बोला। अरे भाई कश्मीर के लिये नहीं हम खजाने में अपने हिस्से के लिये आये हैं। आजादी के पहले का गड़ा है। हमारा भी हक बनता है उसमें।
पता चला है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति को फोन करके इस मामले में हस्तक्षेप करने की बात कही है। उनकी बातचीत के अंश यहां पेश हैं:
पाकिस्तान: सर जी, तीन दिन हुये खुदाई शुरु हुये। आपने अभी तक कोई बयान नहीं दिया। ऐसे कैसे चलेगा?
अमेरिका: हम क्या बयान दें भाई। ये भारत का अपना आन्तरिक मसला है। जहां मन आये खोदते रहें।
पाकिस्तान: अरे सरजी, आपका दखल देना बहुत जरूरी है। आपने दखल न दिया तो आपका हिस्सा तो जायेगा ही। हमारा भी दाब लेगें हिन्दुस्तान वाले।
अमेरिका: हमारा कैसे हिस्सा भाई? हिन्दुस्तान कोई अरब मुल्क तो है नहीं। वहां हमारा हिस्सा जो है वो हमें मिलता ही है।
पाकिस्तान: अरे भाई आपके पूर्वज बरतानिया वाले हिन्दुस्तान से भागते समय अपना माल वहीं छोड़ आये थे। वही वे अब खोद रहे हैं। जब आपके पूर्वजों ने लूटा तो हक तो आपका ही बनता है न!
अमेरिका: बात तो ठीक है लेकिन दावा कैसे ठोंक सकते हैं भाई अपन?
पाकिस्तान: अरे आप कहिये कि अगर आपके पूर्वज न होते तो खजाना राजा लोग खल्लास कर देते। उनकी लूट के चलते ही अब तक बचा रहा। इसलिये आपका हक तो बनता है।
अमेरिका: सही है। इस बारे में सोचते हैं।
पाकिस्तान: अरे सोचते रहे तब तो आपका हिस्सा गोल हो जायेगा। इधर आपके हाल भी खस्ता ही हैं। डेट्रायेट दीवालिया हो गया। अमेरिका का शटडाउन होने-होने को हो रहा था। ऐसे ही गफ़लत में रहे तो आपके हाल हमारे नबाबों सरीखे हो जायेंगे।
अमेरिका: लेकिन आप हमको क्यों दखल करने को कह रहे हैं?
पाकिस्तान: अरे आपके हाल देखकर बड़ा तरस आ रहा है मुझे। बड़ा खराब लग रहा है यह देखकर कि जिससे मांगकर हम खाते हैं उसके हाल ऐसे हो जायें कि शटर गिराने की नौबत आ जाये। सच में तीन रूमाल भीग गये आपके हाल देखकर। आप कुछ करिये वर्ना आप और हम कहीं के न रहेंगे। खजाने में अपना हिस्सा मांगिये।
अमेरिका: सही कहते हैं आप। हम अभी फ़ोन लगाते हैं भारत।
इस बीच फ़ोन की घंटी बजी। हमें लगा कि अमेरिका से हैं। तो थोड़ा जीभ घुमाकर टेढ़ा हेल्लो बोले। उधर से अर्दली बोला साहब आज आफ़िस नहीं आयेंगे क्या?
अर्दली की आवाज से सपना टूट गया। सोचते हैं कि सबको बतायें। लेकिन यह भी सोच रहे हैं किसको बतायें? कौन भरोसा करेगा हमारे सपने का? हम कोई शोभन सरकार थोड़ी हैं।

4 responses to “खजाने के दावेदार”

  1. संतोष त्रिवेदी
    फिर एक धोबीपाट:-)
  2. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    यह घोड़े का क्या कनेक्शन है?
    सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की हालिया प्रविष्टी..दशहरे के दिशाशूल
  3. प्रवीण पाण्डेय
    थोड़ी खुदाई से जीडीपी बढ़ी जा रही है तो काहे की लड़ाई और काहे की शरमाई।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..कितनी पहचानें
  4. suman
    सटीक व्यंग्य :)

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