Tuesday, February 03, 2015

बिछुड़ी हुई चप्पल का शोक

बिछुडी चप्पल
आज ट्रेन से उतरते हुए दोनों चप्पलें बैग में धर लीं।घर आकर देखा तो अपनी एक चप्पल के साथ में दूसरी चप्पल दूसरे की आ गयी। साइज अलग-अलग होने के चलते उनको पहनकर चलना कठिन है।

यह तो कुछ ऐसे ही हुआ कि केंद्र और राज्य की सरकारें अलग-अलग होने से विकास की रफ़्तार बाधित हो जाये।


घर में हंसी हो रही है। कहा जा रहा है -'उमर हो गयी,भूलने लगे हो चीजें।'

कोई यह नहीं देख रहा की साल भर पहले दोनों चप्पलें भूल आये थे। इस बार तो दो साथ लाये हैं। जोड़ी बेमेल है तो क्या हुआ। जब इंसान बेमेल जोड़ियां निभाते हुये जिंदगी गुजार लेता है फिर यह तो चप्पले हैं। निभा लेंगी। बेमेल होने के चलते अब तो निठल्ला ही रहना है।

यह तो अच्छा हुआ कि पुरानी चप्पलें जिनको 'मार्गदर्शक चप्पलें' समझकर घूरे में फेंकने का निर्णय घर वाले ले चुके थे वो अभी तक फेकी नहीं गयीं थी। अब वही मेरी ' पैर संगिनी' बनी कठिन समय की साथी साबित हो रही हैं।

सोच तो यह भी रहा हूँ कि जिसकी चप्पलें गलती से उठा लाये वह क्या सोच रहा होगा? क्या पता दोनों चप्पलें हाथ में लिए हमें खोज रहा हो सोचते हुए -मिल भर जाए बस।

क्या पता मेरी खोयी हुई चप्पल किसी पार्टी के संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों को बताती हुई मिले- 'अनूप शुक्ल के अराजक व्यवहार से आजिज आकर मैंने उनका साथ छोड़ा।वे हमेशा अपनी पुरानी चप्पलों के ऊपर एकदम नए जूते को तरजीह देने लगे थे। जब जूते पहनते थे तो उतारते नहीं थे। लेकिन जब हमको पहनते थे ,जहां  तहाँ उतार देते थे। आज ही जूते उतारे तो बैग में रखे। लेकिन हमें उतार कर जमीन में घर दिया। ठिठुर गयी जाड़े में।'
आगे शायद वह कहे-'एक सपर्पित चप्पल होने के चलते उनके पास मेरा दम घुटने लगा था। इसलिए उनका साथ छोड़ा। अब आजाद होकर अच्छा लग रहा है।'

क्या पता शाम को किसी चैनल की यह खबर बने-'एक बड़ी खबर आ रही है कानपुर से। एक दो साल पुरानी चप्पल ने एक पचास साल पुराने पैर का साथ छोड़कर नया पैर ज्वाइन कर लिया है।बताया जाता है पैर के रवैये से चप्पल को नाराजगी थी। पैर चप्पल को पार्टी में कभी नहीं ले जाते थे। सिर्फ घर में ही टहलाते थे चप्पल को।'
हो तो यह भी सकता है कि शाम को इस पर कोई प्राइम टाइम चैनल इस पर बहस आयोजित करते हुए दिल्ली विधान सभा चुनाव में इसके प्रभाव का अध्ययन करे।

कल की अखबारों की खबर हो सकती है-
' पुरुष चप्पल, महिला चप्पल के साथ फरार'
'पुरुष चप्पल महिला चप्पल के साथ धराई'
'नई चप्पल चोरी जाने से पुरानी के दिन बहुरे'
अब जो होगा सो देखा जाएगा।फिलहाल तो बिछुड़ी हुई चप्पल का शोक मना रहे हैं।

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1 comment:

  1. हे भगवान ..यहाँ तो डिज़ाईन तक अलग है... एक ने टोपी भी लगा रखी है ...फिर भी बदल गईं.....
    जैसे चप्पल न हुई आम नेता /नेत्री हों ..... :-)

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