Wednesday, February 04, 2015

स्मार्टफ़ोन की बेवकूफ़ी

हमें तो लूट लिया सैमसंग फोन वालों ने।

न,न,न हम कोई गप्प नहीं हांक रहे ।

गप्प हांकना होता तो चुनाव न लड़ लिए होते। खड़े हो जाते चुनाव में और करने लगते लगते देशसेवा। भारतमाता तो बहुत दिन से पुकार रही हैं। कहती रहती हैं -"बेटा,फटाक देना आ जाओ मेरी सेवा करने के लिए।देर करोगे तो दूसरे लोग मेरी सेवा कर डालेंगे।तुम टापते रह जाओगे। फिर न कहना कि बताया नहीं।देश सेवा का स्टॉक सीमित है। फौरन कोई भी सवारी पकड़ो और भागते चले आओ 'जयहिंद' और 'वन्देमातरम' चिल्लाते हुए।"
हम भारतमाता से हर बार कह देते हैं-"माताजी,आपकी आवाज सुनाई नहीं दे रही।आप फोन रखो। हम मिलाते हैं इधर से।" इसके बाद भारतमाता वाला फोन बंद कर देते हैं। कितना झूठ बोलें बार-बार भारतमाता से।अगली बार जब बात होगी तो कह देंगे-"माताजी,बैटरी डिस्चार्ज हो गयी थी।"

देशसेवा के मामले में बड़े-बड़ों की बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है।उसको फिर से चार्ज करवाना पड़ता है, चुनाव लड़कर।

खैर बात सैमसंग फोन की हो रही थी।स्मार्ट फोन है।अब आप पूछेगे कि स्मार्ट बोले तो क्या? तो जनाब स्मार्ट माने मंहगा। यह बात आदमी और फोन दोनों पर लागू होती है। स्मार्ट है मतलब मंहगा तो पक्का होगा।आदमी मंहगा होने का मतलब जो काम एक आम आदमी 5 रूपये में करेगा उसी काम को स्मार्ट आदमी से कराने में 500 ठुक जाएंगे।दिन भर जितना स्मार्ट दिखने के लिए एक आम आदमी 1000 रूपये के कपड़े पहनकर काम चला लेगा उससे कम स्मार्ट दिखने के लिए स्मार्ट आदमी एक बार में 10 लाख फूंक देगा।

बहरहाल। बात सैमसंग फोन की हो रही थी।

तो हुआ यह कि कल अपन रात सोये सुबह 6 बजे का अलार्म लगाकर। सोचे सुबह बजेगा अलार्म तब उठ जाएंगे। सुबह 4 बजे एक बार नींद खुली। सोचा उठ जाएँ। लेकिन नहीं उठे।लगा फोन बुरा मान जाएगा और कहेगा-"जब आपने मुझे 6 बजे जगाने का काम सौंपा है तो 4 बजे कैसे उठ सकते हैं?"

यह भी सोचे क्या पता ज्यादा बुरा मान जाये तो यह भी कह दे-"आपकी हिम्मत कैसे हुयी 6 बजे के पहले उठने की?" आजकल के सेवक बहुत आक्रामक हो गए हैं। सेवा कार्य में कोई भी विघ्न पड़ने पर मालिक तक का 'भरत मिलाप' करवा देते हैं।

खैर, हम सो गये फिर से।इस बार जगे तो सुबह के 6 बजकर पांच मिनट हो गए थे। हमने सोचा शायद फोन अलसा गया होगा। एकाध मिनट में जगा देगा। लेकिन नहीं। वह तो शांत ही रहा। चुनाव में किये गए वायदे भूल जाने राजनेता की तरह बेशर्मी से मुझे ताकता रहा। बज के नहीं दिया अलार्म। मन तो किया मारे दो कंटाप होश ठिकाने आ जाएँ। लेकिन 'हिंसाबाद' ठीक नहीं है यह सोचकऱ और कम से कम 10 हजार रूपये फिर ठुकने की बात सोचकर कंटाप मारने की बात मटिया दिए।

बाद में सोचा कि देखें कि यह ससुरा फोन बजा क्यों नहीं सुबह 6 बजे। तो पता लगा कि हम अलार्म कुछ गलत लगाये थे। हुआ यह कि कल छुट्टी थी तो हम समझे इतवार है। छुट्टी और इतवार कुछ इस तरह संरक्षित है अपने दिमाग में जैसे कि कुछ तमाम लोगों के दिमाग में 'विधर्मी/विपक्षी मतलब देशद्रोही' वाला पवित्र भाव सरंक्षित होता है।

तो जब हम कल मतलब मंगलवार को इतवार समझकर अगले दिन 6 बजे जगने के लिए अलार्म लगाये तो सोचा कि जगा देगा सुबह।लेकिन वह तो सोमवार को बजेगा। हम वुधवार को जगने के लिए अलार्म बजने का इन्तजार कर रहे हैं। जबकि उधर फोन इन्तजार कर रहा था कि सोमवार आये तो मालिक को जगाएं।

आप कहेंगे कि खुद बेवकूफी करते हैं और दोष फोन को देते हैं। तो भाई हम अपनी गलती मानते हैं लेकिन ये ससुर फोन भी क्या कम बेवकूफ है। अलार्म लगाने का मतलब मामला घँटो का होगा। ये थोड़ी कि हफ्ते भर बाद का कोई अलार्म लगाये तो वह बिना सवाल पूछे कहे-"ठीक है साहब,जगा देंगे।" फिर तो वह बुड़बक हुआ हमारी तरह।


अगर किसी फोन की हरकतें किसी अंधभक्त स्वयंसेवक सरीखी हो तो वो काहे का स्मार्ट फोन हुआ? 25000 रूपये में मिलने वाला फोन 200 रूपये दिहाड़ी पर मिलने वाले इंसान से भी ज्यादा बेअक्ल की हरकतें तो करेगा तो काहे का स्मार्ट हुआ फोन?

इसीलिए हम कहे शुरू में कहे -"हमें तो लूट लिया सैमसंग फोन वालों ने।"

आपै बताइये कोई गलत कहे?

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