Thursday, March 12, 2015

किधर गये ओ ‪सूरज‬ भाई

सुबह हुई न दिये दिखाई,
किधर गये ओ ‪#‎सूरज‬ भाई।


धरती को बादल ने धोया,
फ़सलें भींग गई मुरझाईं।

किरणें किधर खेलती भैया,
कहीं इधर नजर न आईं।

राजनीति में गदर कटा है,
ये कित्ती और गिरेगी भाई।

जनता हक्की-बक्की तकती,
लगती है वो बेचारी बौराई।

ये किरणें आई खिलखिल करती,
मन करता है बस करें पिटाई।

चाय ले आओ फ़ौरन दो ठो,
देखो आये हैं #सूरज भाई।

-कट्टा कानपुरी

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