Friday, March 28, 2008

सम्मान का एरियर

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सम्मान का एरियर


कन्हैयालाल नम्दन
कल मामाजी को फोन किया तो पता चला वे मुम्बई में थे। पता यह भी चला कि उनको सन २००६ का महाराष्ट्र हिन्दी सेवा सम्मान दिये जाने की घोषणा हुई है। उसी सिलसिले में वे मुम्बई आये हुये थे। वहीं बान्द्रा इलाके के किसी गेस्ट हाउस में ठहरे हुये हैं।
हमने उनसे कहा भी-आपको सम्मान भी एरियर की तरह मिल रहा है। सही है।बधाई।
पिछ्ले तीन सालों के सम्मान एक साथ किये जा रहे हैं। सम्मान समारोह २९ मार्च को पटकर सभागार में होगा।
मैंने रेडियोवाणी के युनुस जी को मामा जी का फोन नम्बर दे दिया है। उनसे यह भी कहा है कि संभव हो सके तो उनका विस्तृत इंटरव्यू लेकर अपने ब्लाग पर पढ़वायें। और भी मुम्बईकर अगर हो सकें तो उनसे ब्लागर मीट टाइप का कुछ करें। :)
मामाजी के संघर्षों के शुरुआती दिन इलाहाबाद में गुजरे हैं। मुम्बई में नौकरी का लम्बा समय गुजरा जब वे धर्मवीर भारती जी के बुलावे पर धर्मयुग में गये। अपनी आत्मकथा गुजरा कहां कहां से मैं में उन्होंने मुम्बई पहुंचने तक के दिनों का जिक्र किया है।
पिछले दिनों इलाहाबाद से जुड़े तमाम लोगों के बारे में पढ़ा-सुना। इरफ़ानजी के ब्लाग पर पंकज श्रीवास्तव कापाडकास्ट, फिर अजित जी के ब्लाग पर विमल वर्मा की आपबीती इसके अलावा और भी बहुत कुछ।
दो दिन से ज्ञानरंजन जी की किताब कबाड़खाना बांच रहा हूं। उनके जीवन का भी बहुत बड़ा हिस्सा इलाहाबाद में गुजरा। हिंदी लेखकों में लोग कहते हैं उनके जैसा गद्य लिखने वाले विरले हैं। उनके बारे में विस्तार से फ़िर कभी। सिर्फ़ दो उद्धरण दे रहा हूं-

१. एक अत्युत्तम सर्वोत्कृष्ट की रचना करने से ज्यादा जरूरी है कि आप सामान्य जनता को मानव- स्पर्श और जीवन के रहस्यों से ज्ञात कराते चलें।
२.भाषा गहरे संस्कार, सरोकार और फ़क्कड़ी से मिलती है। विपुल सहचर वृत्ति और आवारगी से वह समद्ध होती है। जीवन को देखना ही नहीं होता, पकड़ना भी पड़ता है अन्यथा उसे जाने में देर नहीं लगती। दूर और पार और अनन्त और अतल में भाषा होती है, वह मनुष्य के भीतर भी होती है। उसे बटोरना पड़ता है।
फिलहास बस्स!
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15 responses to “सम्मान का एरियर”

  1. समीर लाल
    मामा जी “श्रद्धेय श्री कन्हैया लाल नन्दन जी” का “सन २००६ का महाराष्ट्र हिन्दी सेवा सम्मान” से नवाजे जाने पर हार्दिक अभिनन्दन, बधाई एवं अनेकों शुभकामनाऐं.
    इस खबर को हम सब के साथ बांटने के लिये आपका अति आभार.
  2. संजय बेंगाणी
    मामाजी सम्मानित हो रहे है, बधाई.
  3. kakesh
    ये फुरसतिया को किस की नजर लग गयी. फुरसतिया टाइप पोस्ट के जगह यह मुन्नी पोस्ट. यह ज्ञान जी के सत्संग का नतीजा तो नहीं कि अब आप भी राखी, मल्लिका के चक्कर में लग गये. हमें शक है आप पर. निवारण करें.
  4. manish joshi
    अनूप – बधाई – कविता (या लेखन माने) की सबसे सरल परिभाषा “नंदन” जी की दी हुई है, आपको शायद याद हो – बीस पचीस साल पहले उन्होंने दूरदर्शन में अपने किसी साक्षात्कार में कहा था – “कविता मेरी संवेदना को तुम्हारी संवेदना से जोड़ती है” मेरे अपने ऊपर पराग के समय से, याने छुटपन से, नंदन जी का बहुत बहुत प्रभाव रहा है – कालांतर में सारिका तक चला – उनकी कविता में नागफनी को अर्घ्य चढाने में तुलसी की याद कभी बासी नहीं पडी – उनके आपके मामा होने का मुझ बुद्धू ने कल ही जाना पढ़ा – (आपकी बोधिसत्व जी के ब्लॉग की टिप्पणी पढ़ कर) – अभी साहस जुटाने की कोशिश कर ही रहा था कि मरुभूमि में बरसात की तरह – आज आपने पुराने लिंक भी दे दिए – फिर और अच्छा यों रहा क्योंकि आज अरब देश में जुम्मे की छुट्टी रहती है इफरात से पढ़ना होता है – १ जुलाई २००६ वाली पोस्ट आद्योपांत पढी – उसके बाद तीन वाली तलाशी, और कविताएँ भी बुकमार्क कीं – आपने बहुत ही अच्छा लिखा/ संकलित किया है – उनके अपने और बाकी के विचार नंदन जी के विषय में इतनी जानकारी पहले कहीं नहीं पढी – आप कानपुर के हैं, वहीं (शायद) बाईस -एक साल पहले गिरिराज किशोर जी ने एक नंदन जी के आगमन की गोष्ठी अपनी “लैब” में करवाई थी उसमे नंदन जी से साक्षात भी हुआ था, सुना भी था – आपके मामा जी – नंदन जी उन लोगों में हैं जो न जानने पर भी आत्मीय लगते हैं अपने शब्दों, बोली और लहिजे से – बहुत धन्यवाद एक बार फिर – साभार – मनीष
  5. vimal verma
    मामाजी को मेरी भी बधाई.
  6. Gyandutt Pandey
    कबाड़खाने में तो ये दो मोती निकले जो आपने उद्धृत किये हैं। पढ़ कर जोश आ गया। बस “फक्कड़ी कैसे लायें अपने में” – इस पर एक पोस्ट ठेल दीजिये अगर पहले न ठेली हो तो। लिंक का इंतजार रहेगा।
    कन्हैयालाल नन्दन जी के विषय में बम्बई वालों के लिखे की प्रतीक्षा करते हैं!
  7. anitakumar
    मामा जी को सम्मान दिया जा रहा है जान कर अच्छा लगा। ऐसे लोगों ने ही बम्बई को अपनी कर्म भूमि बनाया तो बम्बई समर्र्द्ध हुई। पराग और सारिका ने तो हमारे बचपन में भी बहुत बड़ा रोल प्ले किया है। चलिए हम उनको पर्सनली नहीं जानते तो कोई बात तो नहीं आप को तो जान लिया और आप के ब्लोग से उन्हें भी और गहराई से जान लेगें।
  8. mamta
    मामाजी को बधाई !
    और आपको भी बधाई।
  9. दिनेशराय द्विवेदी
    नन्दन जी को सम्मान के एरियर पर बधाई।
  10. राकेश खंडेलवाल
    आदरणीय नंदनजी तो हमारे ह्रदय के शीर्ष पर हैं ही.
    महाराष्ट्र को गौरवान्वित होनाही चाहिये उन्हेम सम्मान प्रदान कर राज्य अपने आपको ही तो सम्मानित कर रहा है. समाचार बाँटने के लिये धन्यवाद
  11. डा० अमर कुमार
    धन्यवाद गुरु
    आपने याद दिला दिया
    पराग से धर्मयुग तक का मेरा सफ़र
    साहित्यिक चाव उत्पन्न करने में नंदन जी की परोक्ष प्रोत्साहन
    मेरे जीवन की उपलब्धि है,वह आरंभिक दिग्भ्रमित दिन,सदैव स्मरण रहेगा
    वह सम्मानित हो रहे हैं, याकि उनसे स्वयं सम्मान ही गौरवान्वित हो रहा है
    बधाई के परे का व्यक्तित्व, फिर भी मेरी बधाई तो क्या चरणस्पर्श प्रेषित कर दें
  12. अनूप भार्गव
    नन्दन जी से दो बार मिलने का सौभाग्य रहा । अद्भुभुद व्यक्तित्व है उनका । एक अन्दर तक उतर जाने वाली आत्मीयता और सरलता । उन तक ढेर सारी शुभ कामनाएं और प्रणाम पहुँचायें ।
  13. फुरसतिया » मुन्नी पोस्ट के बहाने फ़ुरसतिया पोस्ट
    [...] कल की पोस्ट पर काकेश की टिप्पणी थी- ये फुरसतिया को किस की नजर लग गयी. फुरसतिया टाइप पोस्ट के जगह यह मुन्नी पोस्ट. यह ज्ञान जी के सत्संग का नतीजा तो नहीं कि अब आप भी राखी, मल्लिका के चक्कर में लग गये. हमें शक है आप पर. निवारण करें. [...]
  14. आभा
    मामा जी को बधाई कहें पर मामा जी से मुलाकात कैसे हो देखती हूँ।
  15. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] सम्मान का एरियर [...]

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