Saturday, September 27, 2008

काम छोड़ो-महान बनो

http://web.archive.org/web/20140419214950/http://hindini.com/fursatiya/archives/531

39 responses to “काम छोड़ो-महान बनो”

  1. रवि
    एकदम सच्ची बात. मुझे भविष्य दिख रहा है – आज से कोई सौ साल बाद हिन्दी ब्लॉग जगत में बावेला मचेगा तो लोग-बाग दुहाई देंगे – फुरसतिया होते , कुछ मौज मजा लेते तो बात ही कुछ और होती – तस्वीर ही कुछ और होती. :)
  2. seema gupta
    महान वो होता है जो अपने से बाद में आने वालों को अपने से ज्यादा महान बनाये। हम ससुर इत्ते काम छोड़ के जायेंगे कि अगला जो आयेगा वो पटापट महान मन जायेगा।
    ” bhut steek likha, mhan bnne ke liye acccha farmula hai, khud bhee bno or duson ko bhee bnao, krara vyeng”
    Regards
  3. Ramesh Sachdeva
    YAAR YOU ARE ALSO GREAT. YOU HAVE DONE VERY WELL. BUT YOU HAVE DONE JEETE JI. THANKS
  4. अफ़लातून
    क्या बात है ! कविता इतनी पसन्द आई कि प्रिय कवि की एक कविता की कड़ी ठेल दे रहे हैं । आपके अनुसार ‘अफ़लातून का प्रिय कवि’ । लगता है पुष्पमित्र फँसेगा , इस चिट्ठेकारी के यज्ञ में ।
  5. anil pusadkar
    महान बनाने का इस ईलाके का ठेका आप हमको दे देते तो…………………………… देख लिजिये असुविधा ना हो तो,बाकी जो सेवा कहें…………………………………
  6. परमजीत बाली
    आप के इस महान योगदान के लिए अग्रिम धन्यवाद स्वीकारें।;)
  7. Ghost Buster
    आपकी चिट्ठीय महानता पर कौनो शक नाहीं. दूर-दूर तक.
    जबरदस्त पोस्ट.
  8. ताऊ रामपुरिया
    हम चाहते हैं कि हम ऐसी परिस्थितियां छोड़ जायें कि हमसे बाद की जो पीढी आये वो दनादन महान बन जाये। किसी को महान बनने के लिये काम की कमी न रहे।
    बहुत उम्दा ! सही में आपका चिंतन बहुत सही है ! लाजवाब !
  9. संजय बेंगाणी
    खरी बात कहे हो. एकीदम फुरतिया पोस्ट.
  10. masijeevi
    ‘मेगी महान’ वाह क्या संकल्पना है॥
  11. शास्त्री जे सी फिलिप्
    रवि जी ने जो कहा है मैं उसका अनुमोदन करता हूँ!! लगता है कि क्यों इतनी मेहनत की जाय जब फुरसतिया तो कुछ भी नहीं करते!!
    – शास्त्री जे सी फिलिप
    – बूंद बूंद से घट भरे. आज आपकी एक छोटी सी टिप्पणी, एक छोटा सा प्रोत्साहन, कल हिन्दीजगत को एक बडा सागर बना सकता है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!
  12. कुश
    लेख में कही गयी सारी बतो से सहमत हू.. पर टिप्पणी कल करूँगा..
    वो क्या है की महान लोग आज का काम कल पर छोड़ देते है
    :)
  13. जीतू
    बकिया कोई महान बने ना बने, फुरसतिया ’महान’ बनके शहादत जरुर देना चाहते है। निश्चय ही इतिहास मे इनका नाम जरुर लिखा जाएगा (भले ही महीन अक्षरों में)
    अमां छोड़ो! महानता शहानता की बात, परफेक्शन का जमाना गया, फास्ट फूड का जमाना है।
    वो कपड़े की दुकानों पर बोर्ड लगा देखा नही है ?
    फैशन के इस युग मे गुणवत्ता और गारंटी की उम्मीद ना करें।
  14. दीपक
    आप क्या छोड रहे है हमारे लिये ! इतने महान विचार आपका जीते-जी बुत लगाने को जी कर रहा है ! हा हा हा
  15. amit
    लो अच्छा हुआ आप बता दिए महान बनने का तरीका पूरे एनालिसिस के साथ। रवि जी तो कब से महान बनने का तरीका खोज रहे थे!! ;) :D
  16. Zakir Ali 'Rajneesh'
    मैं इसमें एक बात और जोडना चाहूंकि कि चाहे कितना ही नाकारा व्यक्ति क्यों न हो, मरने के बाद लोग उसमें महानता के गुण खोज ही लेते हैं।
  17. सतीश पंचम
    अभी-अभी पता चला कि दिल्ली में फिर बम फटा है …..यानि जो लोग पिछली बमबारी का काम अधूरा छोड कर गये थे उसे इन कम्बख्तों ने पूरा किया है या पता नही अभी और कितना बाकी है कि करेंगे…..जामिया वाले जरा ध्यान देना ईधर…..आखिर अधूरे काम छोडे महान लोगो की पैरवी करने जा रहे हो जनाब हसन साहब…..फुरसतिया फार्मूला से यदि आपको भी शर्म लगे तो महान बन जाओ और अपना काम अधूरा छोड इस्तिफा दे दो….आखिर किसी महापुरुष की महानता उसके द्वारा अधूरे छोड़े काम की समानुपाती होती है।
  18. anitakumar
    अनूप जी सौ बार नमन है आप को, मौज ही मौज में इतनी गहरी बात कह डाली है आप ने। ज्यादा कुछ न बोलेगे, अगली पीढ़ी के लिए भी कुछ कहने का काम छोड़ना है न। अब तक हम बेकार में अपराध बोध की भावना से ग्रस्त थे कि कित्ते काम बकिया पड़े है लोग क्या कहेगे एक्दम निठ्ठले हो गये है हम। अब पता चला ये तो हमारे महान होने की निशानी है। धन्यवाद धन्यवाद्।
  19. डा. अमर कुमार
    .
    अब टिप्पणी भी करवाओगे क्या ?
    आज रहे देते हैं, आने वाली ब्लागर पीढ़ी करेगी !
    बुरा मान भी जाओ तो क्या, अभी अभी तो मुझपर
    महान टिप्पणीकार होने का तमगा लगते लगते बचा है !
  20. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    आज हम आपकी राय पर अमल कर रहे हैं; काम छोड़ कर।
  21. manvinder bhimber
    अपने कई गलतफहमियां दूर कर दी बातों ही बातों में …..कई बार गुमान तो होता ही है…..ओरों को महान बनते देखेंगे ……खुशमिजाज पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें
  22. समीर लाल ’उड़न तश्तरी वाले’
    कितने महान हैं आप और कितने महान हैं आपके विचार, जो मन की तलहटी से खरो‍च कर महानतम कविता निकाल लाया-लालमन!!
    वाकई, आनन्द आया आपके महान लेखन को पढ़कर!!
  23. Santosh K Aggarwal
    आप सचमुच महान हो. पढ़कर मजा आ गया.
  24. अनिल रघुराज
    अनूप भाई, आपकी फाइल मंगवाकर देखनी पड़ेगी कि आप में महान होने के कितने लक्षण हैं। वैसे जिस तरह की फुरसत आप इनजॉय करते हैं, उससे तो लगता है कि वाकई आप महान हैं..:)
    वैसे, जबरदस्त लिखा है। धारदार…
  25. Raj Sinh
    Bhaya,
    arse se aap ko padh anandit rahe.alas me tipiyane se bache.aaj pata chala ki baithe baithaye ham bhee mahano me samay gaye.
    vaise guru aapke yahan kya bhav tutpunjia teepakon ka ?jab itane mahan log tokare pe tokre tipiya rahe hon to ? lekin khujalee khansee khoon khair vagairah kee tarah hee apnee khushi ko thame thame ham ! manhooson kee mahanata nibhate bhee to kab tak ? surrender karate hain ! VAH VAH ! HA HA !………LAGE RAHO……..vo bhee fursat se………!
  26. - लावण्या
    इतनी लम्बी हिन्दी चिठ्ठाकारी और आज भी वही सधा हुआ लेखन आपको
    शीष स्थान पर रखने के लिये काफी है ..लिखते रहीये ..
    बहुत अच्छा लगा ये आलेख और कविता भी !
    - स्नेह,
    - लावण्या
  27. दिनेशराय द्विवेदी
    हमने भी तिरेपन साल की उमर में कई बार सोचा की चलो महान बन लिया जाए। कई बार लोग हमें महान बनाते बनाते रह गए। अब आप ने महानता का जो भुरकस निकाला है। कान पकड़ लिया है कि कभी ऐसी गलत बातें सपने में भी न सोचेंगे। बन ने वाले बनते रहें। औरों की ऐसी किसी मुहिम का भी भुरकस निकाल देंगे जो हमें महान बनाने को चले। हाँ एक बात और कि जिस से दुश्मनी निकालनी हो उसे जरूरी में महान बना दो।
  28. ई-गुरु राजीव
    अरे फुरसतिया चच्चा, कब्बों हमका भी महान बताय देयो, हमहूँ कम नाय हैं. ;)
    अऊर यू का होत है “मैगी महान” ?
    टेस्टी लागत है, यहै बनाय देयो. :)
    हमार महानता ठीक से द्याखौ, १ महिन्ना में २० पोस्ट लिखिन रहै, अउर ई महिन्ना मा फीरो पब्लिक का ऊही पढ़इबै.
    कित्ते महान हैं, बोरा लाय के नापौ तो ज़रा. :)
  29. Brijmohanshrivastava
    महोदय ,जय श्रीकृष्ण =मेरे लेख “”ज्यों की त्यों धर दीनी “”की आलोचना ,क्रटीसाइज्, उसके तथ्यों की काट करके तर्क सहित अपनी बिद्वाता पूर्ण राय ,तर्क सहित प्रदान करने की कृपा करें
  30. अशोक पाण्‍डेय
    हम भी महान बननेवालों की कतार में हैं, कौन काम छोड़ें- जमीनी खेती-बाड़ी या आभासी खेती-बाड़ी :)
  31. honey awasthi
    wow yaar kya likha hi agar asa he or kuch ho to mje btana koki me 11th me ho so pdne me achch lgta hi
  32. amrendra nath tripathi
    @ ” …. अगर सबकी फ़ाइल मंगवा के देखी जाये सब मामला सामने आ जायेगा। अब चूंकि जाने के
    बाद केस बंद हो जाते हैं वर्ना सब लोग नप जाते अपने काम में लापरवाही के चार्ज में। ”
    ——— कफ़न के पहले के सारे कपडे छोटे होते हैं .. दाग धब्बे दिख जाते हैं .. कफ़न सबको ढँक
    देती है .. महान बना देती है !!!
  33. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] काम छोड़ो-महान बनो [...]
  34. : एक ब्लागर की डायरी
    [...] कहा कि समय का कुछ पता नहीं कि कौन कब महान बन जाये। और जब कोई महान बन जाता है तो उसके [...]
  35. चंदन कुमार मिश्र
    महानता पर कल प्रवचन कर ही चुके हैं…महान बनने का एक से एक उपाय है हमारे पास…चाहिए तो कुछ दान नहीं घूस दीजिए…वैसे आप ही कौन कम हैं जो इधर घूस पहुँचने देंगे, सब झटक लेंगे पहले ही…
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..इधर से गुजरा था सोचा सलाम करता चलूँ…
  36. चंदन कुमार मिश्र
    अफ़लातून जी के यहाँ उस कविता पर लिख आए—’हम सोएँ और लोग आगे आएँ…पुराना गाना…तुम आ गए हो, नूर आ गया है…हमारे आने की कोई जरूरत नहीं है…’
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..इधर से गुजरा था सोचा सलाम करता चलूँ…
  37. चंदन कुमार मिश्र
    रवि जी की टिप्पणी पर तो एक लेख लिखने का मन होता है माने विज्ञान गल्प नहीं चिट्ठा गल्प…
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..इधर से गुजरा था सोचा सलाम करता चलूँ…
  38. Dr. Anwer Jamal
    व्यंग्य विधा का सटीक इस्तेमाल.
    करारी और कारगर पोस्ट.
    शुक्रिया.
  39. धीरेन्द्र पाण्डेय
    “”किसी महापुरुष की महानता उसके द्वारा अधूरे छोड़े काम की समानुपाती होती है।
    “” ये लेओ हमका तो पता ही नहीं था की हमही सबसे महान है ,(कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे बन माहि ) आज तक कौनो काम नहीं पूरा किये सब शुरू करके छोड़ दिए तमाम रायता फैला दिए हैं अब दूसरी पीढ़ी आवेगी और समेटेगी और हमसे भी महान बनेगी लेकिन जैसे गाँधी के साथ गोडसे याद किया जाता है वैसे ही हम भी याद किये जायेंगे की हमारा अधूरा काम पूरा करके लोग महान बन गए |:) धन्यवाद फुरसतिया हमरा बल याद दिलाने के लिए

Post Comment

Post Comment

No comments:

Post a Comment

Google Analytics Alternative