Saturday, August 30, 2008

खराब लिखने के फ़ायदे

http://web.archive.org/web/20101228224544/http://hindini.com/fursatiya/archives/513

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

42 responses to “खराब लिखने के फ़ायदे”

  1. - लावण्या
    अब इत्ती काम की बात आप लेकर आये हैँ अनूप भाई की
    आगे से ध्यान रहेगा कि क्या करेँ क्या ना करेँ –
    As Shakespear said,
    ” To be or not to be” :-) )
    - लावण्या
  2. - लावण्या
    और नँदनजी की कविता भी बढिया है !
    - लावण्या
  3. Geet
    भोत ख़राब. अपन से भी जास्‍ती.
    नुसताच ख़राबेस्‍ट का राड़ा शुरू हो जाएंगा. सबके वांदे लग जाएंगे.
  4. डा. अमर कुमार
    .
    हे प्रभु, हे दीनबंधु ( ई जो सामने कैलेंडर में से थप्पड़ दिखाते हुये मुस्की मार रहे हैं, उनके लिये )
    ये हमारे हाथों क्या हो गया ? राम रे राम..
    अपनी समझ में एक धंस्सउवल्ल पोस्ट तैयार कर के तकिया के नीचे रख के खुसी खुसी सोवे गये । पोस्ट इतना दमदार होय गवा कि रात में दुईये बजे ठेल के उठा दिहिस.. कि पहले हम्मैं ठेलो फिर चैन से बेचैनी की नींद सोओ, अबकी बार टिप्पणी न गिनना, अपनी ही टोक लग जाती है ।
    सो, हरि इच्छा मान ठेलन आये..
    आये थे हरि भजन को पढ़न लागै ब्लाग… पढ़न लागै ब्लाग वहू गुरु फ़ुरसतिया की
    ’अहमक’ कविराय करी पोस्ट की फ़ुरसत…बेदम पड़ा कराहे,करे ऊ बप्पा दैय्या की
    अउर अब…
    चिंता ये है कि घाट से तो गये ही
    रात भर क्या किया, पंडिताइन को क्या बतावेंगे
    सो, समझो सबेरे घर से भी गये

    न घर के न घाट के..
    उधर इलाहाबादी न हुआ सगा
    इधर कनपुरिया ने भी ठगा

  5. दिनेशराय द्विवेदी
    सीख रहे हैं आप से खराब लिखना। आज एक टेस्ट पोस्ट डालने का इरादा है। नंदन जी की कविता बहुत पसंद आई।
  6. MEET
    बहुत अच्छी कविता डॉ. कन्हैयालाल नन्दन की. आभार.
  7. Dr.Arvind Mishra
    आपके आज तक के लेखन का सबसे घटिया /खराब आलेख ..अब आप चुक रहे हैं शुक्ल जी !सच काहा आपने जो शीर्ष पर पहुंचे हुए होते हैं उन्हें दुश्चिंताएं घेरे रहती हैं -लुढ़क जानें की …..घबराएं नहीं मैं अब टीपता रहूंगा आप को जमींदोज होने से बचाने के लिए —त्रिशंकु तो बनही रहेंगे हमारे टिप्पणी बल से …..अब आपण तेज संभालो आपही -दूसरों को टिप्पणी बल देने का समय अब खत्म हुआ आपका -अपनी गद्दी बचाईये !
  8. अभय तिवारी
    दुविधा में हूँ कि क्या टिप्पणी की जाय.. यदि कहूँ कि “आप ने राह दिखाई है.. हम अनुसरण करेंगे..” तो घमण्ड झलकता है कि हम तो हमेशा अच्छा ही लिखते हैं.. और यदि कहूँ कि “जी हम तो हमेशा ही घटिया लिखते हैं” तो इस इनवर्स स्नाबरी में और ज्यादा घमण्ड झलकता है…. कुछ “ही ही ही टाइप” टिप्पणी ठीक रहेगी.. नहीं?
  9. Dr Prabhat Tandon
    अगर आप अच्छा लिखते हैं तो आप एक खराब लिखने वाले के मुकाबले अपने को श्रेष्ठ मानने लगेंगे। आपकी गरदन में बढि़या लेखन स्पांडलाइटिस हो सकता है। गरदन अकड़ी रह सकती है।
    यह डाक्टरों के हित मे आपने बात कही :)
  10. Gyan Dutt Pandey
    ये फोटो वाला फाउण्टन पेन कितने में लिया, मंहगा लगता है।
    ऐसा कलम लें, तब तो लिखें।
  11. Rachana
    खराब लेखन पर् अच्छा लिखा आपने.:) ये टिप्पणी अच्छी है या खराब? आप तय कर् ले‍!
    कविता बहुत ही अच्छी है. शुक्रिया.
  12. arun prakash
    maine to sochaa tha aap kharab writing ke baare me kuch likhne jaa rahe hai lekin ye to lagata hai meri post aur blog ke baare mein hi lakh hai aapne . subhkaamnaayen yeh gurumantra dene ke liye
  13. राजीव
    खैर एक I.C.U. की बात कहें मेरा मतलब सीरियस से है, जो एक बार आप के ब्लॉग पर अगर गलती से भी आ जाए तो समझो उसकी लाइफ बरबाद हो गई. अरे रोज़ आप उसकी जिंदगी से कुछ मिनट चूसते रहोगे.
    आप महान हैं , आप के बड़े- बड़े कान हैं.
    आप ब्लॉग जगत के हाथी के समान हैं.
  14. bhuvnesh
    सच्‍ची आप बहुत खराब लिखते हैं :)
  15. G Vishwanath
    अनूपजी,
    खराब लिखने के फ़ायदे तो आपने बता दिए।
    अब सुनिए बिलकुल नहीं लिखने के फ़ायदे:
    १)आपका अमूल्य समय बच जाएगा
    २)पाठकों का और भी अमूल्य समय बच जाएगा
    ३)आपको विषय की तलाश नहीं करनी पढ़ेगी। चुप्पी के लिए विषय की आवश्यकता नहीं है।
    ४)ब्लॉग्गरों की मच्छरों से भी ज्यादा बढ़ती आबादी में कमी होगी और सारे संसार को राहत मिलेगी
    ५)हम टिप्पणीकारों का भी समय बच जाएगा
    ६)हम टिप्पणीकारों को शिष्टाचार के जाल में फ़ँसकर, लेख की झूठी प्रशंसा नहीं करनी पढ़ेगी
    ७)प्रिंट मीडिया वाले संतुष्ट होंगे, (आखिर पढ़ने वाले उनके छपे लेख फ़िर से पढ़ने लगेंगे)
    ८)आप जैसे पुराने, स्थायी, अडियल ब्लॉग्गर मित्रों के पाठकों की गिनती में कोई कटौती नहीं होगी और आप चैन की साँस ले सकेंगे
    ९)दफ़तर में काम लिए अधिक समय निकाल सकेंगे और बॉस खुश रहेंगे और तरक्की होगी
    १०)अपने keyboard पर wear and tear कम होगा
    ११)अंतरजाल पर और अपने कंप्यूटर पर disk space बच जाएगा
    १२)Internet traffic कम होगी और सबको इससे राह्त मिलेगी
    १३)hits गिनने में या उसकी गिनती में कमी पर चिन्ता से मुक्त हो सकते है
    १४) क्या कोई मेरा यह ब्लॉग पढ़ेगा भी? क्या कोई टिप्पणी करेगा? आधी रात को यह सब सोचते सोचते अपनी नींद हराम करके कंप्यूटर ऑन करके चेक करने की आवश्यकता नहीं पढेगी
    १५)क्या मैं वाकई अच्छा लिख सकता हूँ जैसा मेरे ब्लोग्गर मित्र कह रहे हैं ? स्कूल और कोलेज में मेरे शिक्षकों को यह क्यों पता नहीं चला था? इतने कम नम्बर क्यों देते थे ? ऐसे प्रश्नों से जूझने नहीं पढेंगे
    १६)आजकल ब्लॉग लिखने वाले ज्यादा और ब्लॉग पढ़ने वाले कम हैं। Demand & Supply position का खयाल रखकर लिखना छोड़ देना ही बेहतर है
    १७)टीवी पर आजकल इतने अच्छे अच्छे और उपयोगी Ads देखने के लिए समय मिल जाएगा
    १८)पान पराग, बनारसी पान, Wills Filter और Johny Walker/Diplomat वगैरह और गली की अपने पुराने यारों के संग गप शप लडाने या रम्मी खेलने के लिए खोया हुआ समय वापस मिल जाएगा
    १९)डाइनिंग टेबल पर भोजन / नाश्ते के लिए जब हैरान पत्नि का बुलावा आता है तो यह “अभी दो मिनट में आया ” का झूठ नहीं बोलना पढेगा
    २०)घर में इतना सारा काम जो बाकी पढ़ा है, उसके लिए समय निकाल सकेंगे
    २१)बीवी खुश रहेगी और आपका विवाहित /पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा
  16. anitakumar
    नन्दन जी की कविता सबसे बड़िया है इस पोस्ट में, पोस्ट तो हमेशा की तरह बड़िया है, लेकिन सब से बड़ी राहत विश्वनाथ जी की टिप्पणी से मिली। आह! कितना अच्छा लग रहा है जान कर कि ब्लोगजगत में सक्रिय न हो कर भी हम कितना बड़ा योगदान कर रहे है॥
    एक बात बताये आप ये रोज रोज खुराफ़ाति आइडिया कहां से जुटा लाते है। अब कोई आप की कलम मांग रहा है तो कोई गब्बर बना हाथ मांग रहा है। लगे हाथों हम भी डिमांड कर ही डालते हैं हमें तो जी रोज एक ऐसा फ़ड़कता धांसू आइडिया दे दिया किजिए
  17. Abhishek Ojha
    अरे मालिक हम तो बहुते ख़राब लिखते हैं लेकिन लोग तब भी कह जाते हैं… बहुत खूब ! उनकी मंशा पर शक तो पूरा होता है लेकिन कई लोग कह जाते हैं की अच्छा… बहुत अच्छा ! तो थोड़ा डाउट हो जाता है की कहीं सही में तो अच्छा नहीं लिख दिया था… एक बार फिर से पढता हूँ तो साफ़ हो जाता है की सब लोग फेंक रहे हैं ! इसका कोई इलाज बताइये.
  18. Dr .Anurag
    अरे बाप रे हमें नही मालूम था की आपके यहाँ भी हर बात पर सहमत होना जरूरी है …….हम तो सोचे बैठे थे की आप व्यंग्य लिख रहे है?ओर हाँ जरा अनुवाद सुधारिये ….ग़लत है……
  19. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    बाप रे बाप, यहाँ तो उल्टी हवा चल रही है। डरते-डरते दुबारा आया तो विश्वनाथ जी पलीता लगाते पाये गये, हम अदने से ब्लॉगरों की हसरत पर…। यहाँ से खिसक लेने में ही भलाई है।
  20. kanchan
    hame to aap ki pasand pasand aati hai bas
    मरने में मरने वाला ही नहीं मरता
    उसके साथ मरते हैं
    बहुत सारे लोग
    थोड़ा-थोड़ा!
    waah
  21. khetesh


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  22. khetesh
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  23. Shashi Singh
    विश्वनाथ जी की अनुशंसाओं को सबसे पहले (उनके मन में अनुशंसा के विचार आने के काफी पहले) पालन करने का श्रेय तो मुझे ही मिलना चाहिये। ठीक कहा न शुकुलजी?
  24. taaU rampuria
    शुक्ल जी ! तबियत गद गदा गई है यहाँ आके तो !
    इतना ढेर सारा ज्ञान तो सारी उम्र में नही मिला
    जितना यहाँ आकर तुंरत मिल गया ! इतने ज्ञान से
    हमारी तो खुपड़िया उंची हो गई है ! और सारा टेंसन
    ख़त्म ! बुजुर्ग सही कह गए हैं की गुणी जनो की
    संगत करो ! हम भी इतने सालो कहाँ भटकते रहे ?
    देर आयद दुरुस्त आयद !
  25. neeraj tripathi
    ख़राब लिखने के फायदे अगर पहले मिल गए होते तो न जाने हम कित्ता लिख डाले होते अब तक …
    खैर अच्छी चीज जब समझ में आ जाए तभी ठीक …अब देखिये हमारे चिठ्ठे में कैसे आते हैं लेख पर लेख
  26. A. N. Nanda
    Anupjee,
    Pranam.
    अब हमें जीवन के सभी पहलुओं में अपने लाभ का जायजा लेना चाहिए। न केवल ब्लॉग लिखने या न लिखने में । बच्चों को अब परीक्षा छोड़ना अच्छा लगता है । यह पेड़ बचा सकता है । कैसे सच!
    Ps: This is the best I could produce using Google Translate and cutting n pasting letter by letter to correct it!! So very cumbersome!!!
    नंदा
    http://ramblingnanda.blogspot.com
    http://remixoforchid.blogspot.com
  27. दीपक
    आपने हमारा आत्मविश्वास बढा दिया अब हम खराब लिखने के फ़ायदे समझने लगे है और लगता है खराब लिखकर हम नफ़े मे ही है !!
  28. Pramendra Pratap Singh
    आज बहुत दिनों बात आपको पढ़ा काफी अच्छा लगा, आपके ब्लाग पर काफी परिवर्तन हो गया है, मुझे तो खोजने पर यही सबसे नवीनतम पोस्ट लगी। काफी धासू शोध किया है मजा आ गया। आज कल इलाहाबाद विवि शोधर्थियों को 5000 प्रतिमाह दे रही है, अपना यह शोध प्रस्तुत कर दीजिए, जो पैसे मिलेगें, यही इलाहाबाद में पार्टी में खर्च किये जायेगे, आपके पुराने दिन याद आ जायेगे, हम भी बड़ होने पर पुराने दिये नये करेगे। :)
  29. Smart Indian
    बड़े भाई, आपकी पोस्ट पढ़कर बहुत प्रेरणा मिली. अपनी एक पोस्ट आपके पास मरम्मत के लिए भेज रहा हूँ. कृपया चलने लायक बनाकर वापस भेज दें. धन्यवाद!
  30. कविता वाचक्नवी
    वाह वाह, वाह वाह, वाह वाह….
  31. Zakir Ali ‘Rajneesh’
    ब्‍लॉग लिखने के फायदे तो बडे जानदार हैं। प्रत्‍येक अच्‍छा लिखने वाले को भी इस ओर भी ध्‍यान देना चाहिए। वैसे आपने इस बारे में कभी सीरियसली सोचा है?
  32. सागर  नाहर
    हिन्दी चिट्ठाजगत में भी एक नई शुरुआत हो ही गई और वो है घोस्ट राइटिंग की, यानि फुरसतियाजी अब ठेके पर लिखवाने लगे हैं।
  33. supratim banerjee
    नए मिज़ाज की रचना। मुझे तो बहुत अच्छा लगा, ‘बहुत बुरा’ लिखा हुआ।
  34. Neera
    क्या झाडू लगाई है अच्छा और बुरा ब्लॉग लिखने वालों पर, मजा आ गया. अभी हाल ही में ब्लॉग लिखना शुरू किया है आपने तो एक्स रे दिखा दिया यह बीमारी केंसर से भी भयंकर है…
    नंदन जी की कविता लाजवाब है
  35. ANYONAASTI
    मैं यहाँ फुरसतिया ही से परिचय बढाने आया था बड़ा गूढ़ ज्ञान मिला , वैसे अर्थ जगत का भी यही सिद्धांत है , जो जितना अच्छा रिजल्ट कम्पनी का, उतनी ही जल्दी शेयर सचुरेट और प्रगति ठहर गयी ,कुछ दिन बाद नीचे गिरने लगेंगे , नियम है शिखर पर गए को नीचे तो आना ही है और ज्यादा अच्छा लिखने पर कुछ दिनों बाद आप कि पोस्ट पर लोग आयेंगे तो अवश्य पोस्ट पढेंगे भी ध्यानसे , पर अच्छाईयों का सार तत्व निचोड़ कर आप की अच्छाईयों को मौन प्रणाम कर आप की महानता को स्वीकार कर चुप -चाप सरक लेंगे , अब इतनी अच्छी पोस्ट और इतने महान ब्लॉगर इ पोस्ट पर टिप्पीयाने की उनकी हैसियत [औकात कहने पर भाई लोग मेरी ही औकात नाप देंगे ] कहाँ सोच कर टिप्पीयाने का साहस भी नही कर पायेंगे |
    ” बहुत अच्छा लिखतें आप सबसे बडे ब्लॉगर हैं ; आप तो ब्लागरों के शिखर हैं ” धन्य धन्य भाsssss ग हम [आरे]!!!!
  36. Dr. Vijay Tiwari " Kislay "
    भाई अनूप जी
    नमस्कार
    आपके द्बारा लिखा गया बहुआयामी आलेख से हर शख्स
    अपने हिसाब से फायदा उठा लेगा. उसकी अपनी मर्जी है.
    नन्दन जी की रचना भी अच्छी है.
    आपका
    विजय तिवारी ” किसलय ”

  37. Dr. Vijay Tiwari " Kislay "
    भाई अनूप जी
    नमस्कार
    आपके द्बारा लिखा गया बहुआयामी आलेख से हर शख्स
    अपने हिसाब से फायदा उठा लेगा. उसकी अपनी मर्जी है.
    नन्दन जी की रचना भी अच्छी है.
    आपका
    विजय तिवारी ” किसलय “
  38. अब तो कुछ कर गुजरने को दिल मचलता है
    [...] ब्लागिंग की मूल भावना से हट जाते हैं। खराब लिखने के फ़ायदे भूल जाते हैं। ब्लागिंग का प्रतिभा या [...]
  39. K M Mishra
    पहले तो आप बहुत अच्छा और सबसे अच्छा लिखने के नुकसान गिन लें। आपने देखा होगा कि जो लोग सबसे अच्छा लिखते हैं लोग उनके जैसा लिखने की कोशिश करने लगते हैं। आम लोगों में भेड़चाल और नकल की भावना का प्रसार होता है। लोगों में हीनभाव आता है कि -हाय, हम इत्ता अच्छा काहे नही लिख पाते हैं।
    “हाय मैं गिरिजेश राव जैसा क्यों नहीं लिख पाता हूं । (जलने की बू)”
  40. पदम सिंह
    वाह ! मज़ाक मज़ाक में मज़ा आ गया ….. हम जैसे नए ब्लॉगर के लिए अच्छा विषय है … बात भले व्यंग्य में लिखी गयी है लेकिन कभी कभी ये बातें मन में आती हैं कि और अच्छा कैसे लिखूं …. और इस टेंशन में खराब लिखना भी मुश्किल हो जाता है … अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आ कर :)
  41. : …एक बेमतलब की पोस्ट
    [...] ही हुआ। खराब लिखने के यही फ़ायदेतो देख ही चुके हैं। अब बेमतलब लिखने के [...]
  42. : ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बाद
    [...] तो खराब ही लिखते रहना चाहिये। आखिर खराब लिखने के भी फ़ायदे हैं। इन्हीं के चलते ही तो -ब्लॉगिंग करने को [...]

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1 comment:

  1. अब जाकर पता लगा कि हम तो पहिले से ही इत्ता खराब लिख रहे हैं। बस आपने हौसला अफजाई कर दी है, सो पेलते रहेंगे यूँ ही।
    कोई तो है, हमारी योग्यता समझने वाला। अबकी बार खराब लेखन पर भी पुरस्कार घोषित होना चाहिए।लिखे कोई, मिले किसी और को, अब ये नहीं हो सकता।

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