Tuesday, August 19, 2008

एक चिट्ठी शिवजी के नाम

http://web.archive.org/web/20101229042935/http://hindini.com/fursatiya/archives/501

फ़ुरसतिया

अनूप शुक्ला: पैदाइश तथा शुरुआती पढ़ाई-लिखाई, कभी भारत का मैनचेस्टर कहलाने वाले शहर कानपुर में। यह ताज्जुब की बात लगती है कि मैनचेस्टर कुली, कबाड़ियों,धूल-धक्कड़ के शहर में कैसे बदल गया। अभियांत्रिकी(मेकेनिकल) इलाहाबाद से करने के बाद उच्च शिक्षा बनारस से। इलाहाबाद में पढ़ते हुये सन १९८३में ‘जिज्ञासु यायावर ‘ के रूप में साइकिल से भारत भ्रमण। संप्रति भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत लघु शस्त्र निर्माणी ,कानपुर में अधिकारी। लिखने का कारण यह भ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुरसत है। जिंदगी में ‘झाड़े रहो कलट्टरगंज’ का कनपुरिया मोटो लेखन में ‘हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै‘ कैसे धंस गया, हर पोस्ट में इसकी जांच चल रही है।

27 responses to “एक चिट्ठी शिवजी के नाम”

  1. कुश
    अरे बाप रे.. मैं तो पढ़कर ही हिल गया.. वैसे उनमे से कुछ पकोडे बचे हो तो यहा भिजवा दीजिए.. छाई के साथ नाश्ता हो जाएगा..
  2. Tarun
    अरे इत्ती लंबी पोस्ट कल से ही लिख रहे थे क्या, २-३ किन्ही कारणों से इंटरनेट पर बैठना नही हुआ आज आये तो पता चला कि जैंटलमैन की एकमात्र उपाधि दी जा चुकी है। इसी उपाधि को पाने की वजह से कित्ती शराफत भरे शब्दों में हम चिट्ठा लिखे जा रहे थे। जिधर देखो उधर ही इस मुलाकात का चर्चा है गोया जम्मू काश्मीर में शांति बहाली के लिये ये मीट हुई हो। शुक्र है ये सब जने चिट्ठों में जितनी खींचातानी करते थे उतना मिलने पर नही की। अच्छा है, अब हम भी आयेंगे दिल्ली में और देखेंगे ये ब्लोगर मीट होता क्या है ;)
  3. प्रत्यक्षा
    शिव जी पहले टिप्पणी कर लें ..फिर हम :-)
  4. सुदामा
    हे भगवान कित्ती फ़ुरसत मे रहता है ये तेरा बंदा मेल के जमाने मे इत्ती लंबी लंबी चिट्ठिया .पंगेबाज जी सही कह रहे थे , इस बंदे से बडा ही पंगा लेना पडेगा :)
  5. संजय बेंगाणी
    कित्ते दिनो का स्टोक निकाला है जी :)
    मैथलीजी वाला जिक्र कर घाव हरे कर दिये…
    बाकी चकाचक.
  6. डामर कुम्हार
    .
    भाई, आज का दिन ही ख़राब है । मंगल तो भया नहीं.. और अमंगल से भी हारा,
    मंगल भवन..अमंगल हारी । चिच पर टहल रहा हूँ, हाज़त सटकी हुई है । अब ई
    मैटर देख सुन के मेरा शिखंडी दहाड़ें ले रहा है, लेकिन लिख नहीं सकते..
    ई-स्वामी ने स्टे आर्डर ले रखा है,अब इस्तगासा ख़ारिज़ हो तो कुछ बोलूँ भी !

    सब ठाठ पड़ा रह जायेगा.. जब बाँध चलेगा बंज़ारा
    आदरणीय मुशर्रफ़ जी का हाल देख कर, पहले ही मन
    कैसा कैसा हो रहा है, अब ईहाँ भी… ख़ैर छोड़िये !
    मुसाफ़िर हूँ यारों.. देखें नया ठिकाना
    मुझे तो चलते जाना है..

  7. डामर कुम्हार
    .
    यह थोड़ा रहा सहा भी स्वीकार किया जाये..
    स्वामी ने मेरा जियरा ऎसा धड़का रखा है, कि..
    मैं तो यह भी नहीं कह सकता,कि..

    लरज़ते लबों से निकले.. “ओह यू आर नाटी, बेबी ! “, पर भला
    हज़ार ज़ैंटलमैनी कुर्बान करने का किसके दिल में ‘ मन डोले.. तन डोले ‘ नहीं होने लगेगा ?
    लेकिन मैं तो साढ़े चार में से साढ़े चार घटाने में ही अपना माथा पटक रहा हूँ, स्वामी !
  8. rakhshanda
    बहुत सुंदर पोस्ट, प्यारी सी चिठ्ठी….बहुत अच्छी लगी पढ़ कर…दिल से लिखा है ये लफ्ज़ बताता है. बहुत खूब…
  9. neelima
    बढिया लिखा है हमेशा की तरह !
  10. balkishan
    ये चिठ्ठी है या चिट्ठा.
    बहुत ही भयंकर.
    लिखी तो शिवजी को और साथ में लपेट लिए समीरजी, ज्ञान दद्दा और भी कईयों को.
    भाई गजब है.
    समीर भाई के स्वस्थ और ज्ञान दद्दा के अस्वस्थ होने का राज बता दिया आपने अच्छा किया. बहुत चिंता लगी थी.
    भविष्य में हमें क्या करना है ये बताने के लिए भी धन्यवाद.
    आनंद आ गया.
  11. anitakumar
    जनाब अभिनंदन, यकीनन पिछले छ: महीनों की बेहतरीन पोस्ट, वही चिरपरिचित ख्ट्टा मीठा फ़ुरसितयापन। ये पोस्ट जल्दी जल्दी गटकने वाली नहीं आराम से जुगाली करते हुए स्वाद लेने वाली है। मजा आ गया।
    ॰और हमारी तारीफ़ ज्यादा मत किया करें भाई। ये ठीक है लेकिन फ़िर भी क्या एक ही सच बार-बार दोहराना?”
    “खासकर समीरलाल जैसे महान ब्लागर की जिनकी श्रंगार रस की कविता भी पाडकास्टित होकर रौद्र रस से शुरू होती होकर वीर रस की धरती पर ही टहलती है, तो पहले तो अपने लैपटाप का आडियो पहने न्यूनतम पर कर देते हैं फ़िर उसको ’म्यूट’(आवाज बंद) करके तब सुनते हैं। सबसे बढिया इफ़ेक्ट आता है ऐसे में पाडकास्ट का।”
    धांसू
    आज कल आलोक पुराणिक की जगह समीर जी आप की फ़ायरिंग लाइन में हैं? आलोक जी क्या चारों खाने चित्त हो गये?
    एक्सेलट पोस्ट
  12. समीर लाल ’मधुर पॉडकास्टर’
    सुबह सुबह अति आनन्दित उठे, नहाये, पाउडर लगाये और सज कर बैठे देखने कि शिव जी की क्या खिंचाई भई. मुस्कुराते हुए पढ़ना शुरु किया. गली मुड़े, तुड़े पढ़ते गये और देख रहे हैं कि नाम शिव जी का और लपटियाये हम..वाह!! महाराज!! वैसे एक जमाने बाद खुल कर रगेदे हो. ज्ञान जी अगर फुल वाल्यूम पर सुनते तो सारे रोग भगाने की क्षमता वाली पॉडकास्ट का ये हश्र न होता. यही होता है जब काम के वक्त लुका छिपी में सुनों. :)
    पूरा मन लगा कर पढ़े हैं कविता और उसकी एसिन उपयोगिता-वाह!! यह तो कालजयी रचना बन पड़ी लगे है..साधुवाद फुरसतिया जी का.
    पाडकास्ट की बात चली तो एक सच्चा किस्सा और सुनाते हैं। हमारे बहुत अच्छे मित्र हैं।
    कोई कन्फ्यूजन बाकी न रहे, यह भी हम ही थे. :) तब दो ठो कविता भेजे थे इनको. उसमें जिसे पॉडकास्ट किया, उसे कम खराब बताया गया था अतः पॉडकास्ट की गई.
    अब हिम्मत आ गई है तो नया पॉडकास्ट तैयार किया जा रहा है विरह गीत का-गा कर. :) ज्ञान जी को निश्चित उससे आराम लगेगा और आप को तो जरुरे ही.
    जैन्टलमैन की परिभाषा डायरी में नोट कर लिया हूँ. काम आयेगी.
    मजा आ गया.आज अरसे से इन्तजार था जिस आईटम का, वो आपने पेश करके आपने सिद्ध कर लिया कि असल राखी सावंत आप ही हैं ब्लॉग जगत के (आईटम ब्लॉगर) बाकी के सारे फाल्स.
    लगे रहिये-इसी तरह एक ही अखाड़े में कईयों को पछाड़ते. :) जय हो, फुरसतिया महाराज की!!!
  13. समीर लाल ’उड़न तश्तरी वाले’
    अनिता जी हमारी खिंचाई पर कितना पुलकित नजर आ रही हैं..ऐसा ही होता है..हा हा!!
  14. Gyan Dutt Pandey
    हमारी एबसेंस में शिवकुमार जेण्टील से नहा लिये। बहुत बड़ी प्रगति है!
    मैं तो अपेक्षा कर रहा था कि समीर लाल “उड़न तश्तरी वाले” यह पोस्ट पढ़ कर अपनी विनम्रता त्याग स्लिम ट्रिम हो जायेंगे। पर ऊपर की उनकी टिप्प्णियां देख कर लगता है कि उनसे उनका विनम्रत्व कोई छीन नहीं सकता। लिहाजा; उनके स्लिम होने की आशा करना व्यर्थ है। उल्टे प्रसन्नमन उन्होंने कुछ छंटाक चोला बढ़ा ही होगा!
    हमसे अस्वस्थ होने पर भी टिप्पणी करवा लेना इस पोस्ट की सफलता है और समीर लाल जी को नाराज न कर पाना इस पोस्ट की भीषण विफलता! :-)
    वाह, सावन में हरियराई फुरसतिया पोस्ट!
  15. anitakumar
    समीर जी पुलकित तो हम हमेशा ही होते हैं जब मैच देखने को मिलता है वो चाहे फ़िर ज्ञान जी के मैदान में खेला जाए या कहीं और, आप काहे अंडर आर्म खेल रहे हैं जी मैच में थोड़ा रंग जमाइए जी
  16. अजित वडनेरकर
    उफ !!!
    बड़ा खयाल !!!!
    :0
  17. parul
    ha ha ha…kanpuriyon ki lekhni ko naman
  18. garima
    ओल्ले बाबा.. आपने तो पकड-पकड के अच्छे से लपेटा, मै दूर से ही हँस-हँस के लोट पोट हो लेती हूँ, और चलती हूँ, मतलब कि इत्ते भारी-भरकम नाम आ गये तो बीच मे कही लोट-पोट होने से घोटाला हो सकता है न!!!
  19. bhuvnesh
    :)
  20. अनूप भार्गव
    गुड़्गाँवे के गाँव में भई ब्लागर की भीर
    शिवजी तो ’जेन्टील’ भये, मारे गये समीर ।
  21. eswami
    मजा आया पढ कर!
  22. प्रभात
    हमारी पत्नीजी हमको निहारते हुये कह रही हैं- सच, तुम कित्ते अच्छे हो जी। हमारा कित्ता ख्याल रखते हो। :)
    खूब लपेट-२ के मारा है सबको और क्या कहने एक आर्द्श पति की परिभाषा भी खुद ही रच ली :)
  23. लावण्या
    अनूप भाई ( सुकुल जी बनाम फुरसतिया जी )
    आप भी ना – अब क्या कहेँ!
    और समीर भाई की पुस्ट पे टीप्पणी वर्षा तो थमने का नाम ही नहीँ ले रही –
    आप भी हँसे या नहीँ ? :)
    अनूप भार्गव जी का दोहा ओरीजीनल है – नोट किया जाये !
    ज्ञान भाई साहब,
    ये आपको दुबारा ब्लोग लेखन से जोडने का उपाय ही दीखे है मुझे तो !
    अब शिव भाई और प्रत्यक्षा जी कहाँ चले गये ? पूरी रामायण तो आपके
    “राम -भरत मिलाप ” से शुरु हुई ..और प्रियँकर भाई का नाम नहीँ दीख रहा !!!
    वे कहाँ हैँ ?
    - लावण्या
  24. Abhishek Ojha
    पढ़ते गए और ये पोस्ट है की समीर लाल जी की विनम्रता की तरह ख़त्म ही नहीं हो रही :-) उनके स्वास्थ का राज बड़ी देर से पता चला.
  25. Pramendra Pratap Singh
    आपने तो अपने ब्लाग का रूप ही सवॉर दिया, आपकी पोस्ट काफी अच्छी लगी । :)
  26. लक्ष्मीनारायण गुप्त
    सुकुल जी,
    क्या ग़ज़ब का लिखा हो। हमारे तो छक्के ही छूट गए।
  27. सतीश सक्सेना
    आपका अंदाज़ गज़ब का है अनूप भाई ! और मासूमियत का तो जवाब ही नही !

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