Thursday, December 02, 2010

ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बाद

http://web.archive.org/web/20140419215540/http://hindini.com/fursatiya/archives/1759

ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बाद

1.अगर आप इस भ्रम का शिकार हैं कि दुनिया का खाना आपका ब्लाग पढ़े बिना हजम नहीं होगा तो आप अगली सांस लेने के पहले ब्लाग लिखना बंद कर दें। दिमाग खराब होने से बचाने का इसके अलावा कोई उपाय नहीं है।
2.जब आप अपने किसी विचार को बेवकूफी की बात समझकर लिखने से बचते हैं तो अगली पोस्ट तभी लिख पायेंगे जब आप उससे बड़ी बेवकूफी की बात को लिखने की हिम्मत जुटा सकेंगे।-ब्लागिंग के सूत्र
एक महीने से ज्यादा हो गया पिछली पोस्ट लिखे। ब्लॉगिंग के हिसाब से इतने दिन की अनुपस्थिति बाद फ़िर लिखना शुरु करने पर ’प्रिय पाठकों’ से माफ़ी मांगने का रिवाज है। लेकिन मुझे लगता है कि शायद अनुपस्थिति की बजाय फ़िर से उपस्थित होने के लिये माफ़ी मांगकर बात शुरू करना चाहिये। हमारे इतने दिनों तक न लिखने से जो पाठक बेचारे सुकून की सांस ले रहे होंगे वे बेचारे एक बार फ़िर माथा ठोंके लेंगे -ये फ़ुरसतिया फ़िर आ गया। वे पाठक जो सहृदय भी हैं और सुहृदय भी उनका काम ही तो बढाया मैंने फ़िर से लिखना शुरु करके।
जब मैं यह पोस्ट लिखने की सोच रहा था तो मुझे बाबा नागर्जुन की कविता की पंक्तियां याद आ रही थीं- कौवे ने खुजलाई पांखे बहुत दिनों बाद। कविता खोजी बहुत दिनों की जगह कई दिनों था और कविता की पंक्तियां थीं:
दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद
धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद
चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद ।

इस पर पैरोडी भी बनाने का मन किया। लेकिन फ़िर मटिया दिये। वैसे अगर बनाते तो क्या बनाते, क्या कुछ इस तरह:
ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बाद
पोस्टों पर बेमतलब टिपियाया कई दिनों के बाद
भाईचारे का भभ्भड़ देखा फ़िर कई दिनों के बाद
टिप्पणियों से खिल गयीं बांछे फ़िर कई दिनों के बाद।

यहां-वहां लड़-भिड़कर आया वो कई दिनों के बाद
भैया जी ने बेमतलब समझाया कई दिनों के बाद
नखरेवाली के नक्शे देखे फ़िर कई दिनों के बाद
बिना बात सबको हड़काया फ़िर कई दिनों के बाद ।

इस बीच हमने अपनी पुरानी पोस्टें देखीं। कई को देखकर बहुत शरम आयी। मन किया किसी पोस्ट में मुंह छिपा लें। लेकिन स्क्रीन टूटने के डर से मन पर काबू रखा। मुझे लगा कि जब मुझे खुद इनको पढ़ने में इत्ता अटपटा लग रहा है तो बेचारे मासूम और सहृदय पाठक पर क्या बीतती होगी। एक से एक लफ़्फ़ाज पोस्टें। एक से एक बेसिर-पैर की बातें। कुछ में तो लगा जैसे वह कोई पोस्ट न हो टीवी पर बहस हो रही हो- भ्रष्टाचार की बात के जबाब में भाई-भतीजा वाद पर सवाल, भाई-भतीजा वाद की बात पर कानून और व्यवस्था पर सवाल, कानून और व्यवस्था की बात पर भारत में विषम लिंगानुपात पर और लिंग अनुपात की बात चलने पर बिग बॉस की अश्लीलता के आयामों पर चर्चा होने लगती है। वो तो कहिये ब्लॉग पर टिप्पणी का विकल्प मौजूद था जिसके चलते पाठकों ने टिपियाकर अपनी जान बचाई वर्ना न जाने कित्तों के वकील सम्मन लिये घूम रहे होते कि उनके मुवक्किल के स्थायी सरदर्द की वजह मेरा ब्लॉग है।
अपने लेखन से शर्माये हम इस बीच दूसरों के ब्लॉग देखते रहे। देखकर मन कभी जलता-भुनता और कभी खुश होता रहा। लोग कित्ता अच्छा-अच्छा लिखते हैं। इत्ती भली-भली और अच्छी -अच्छी बातें लोगों के ब्लॉग पर देखीं तो लगा कि उनके ब्लॉग कांजी हाउस हैं जहां उन्होंने अच्छाइयां और भलाइयों के जानवर कैद कर रखे हैं। कई बार लगा यहां हर तरह भलमनसाहत का जलजला आया हुआ है। हर तरफ़ अच्छेपन की बाढ़ आयी है, इन्सानियत की हवायें चल रही हैं। अच्छेपन की बाढ़ में सारी बुराइयां डूब गयी हैं, भाईचारे की तलवार ने मनमुटाव का सर कलम कर दिया है, इन्सानियत की हवाओं में मोहब्बत का लाल दुपट्टा मलमल का, उड़ता जा रहा है।
अपनी इतनी अधोगति देखकर हम भी वही किये जैसा महापुरुष लोग करते थे। उदाहरण के लिये महात्मा गांधीजी को ही ले लीजिये । गांधी जी हर गलती के प्रायश्चित के लिये उपवास रख लेते थे। हमने भी सोचा ब्लॉग उपवास किया जाये। सो किये रहे महीने भर से ज्यादा। पोस्ट नहीं लिखी। टिपियाये नहीं। लड़ाई होते देखकर भी ताली नहीं बजाये न भड़काये। लोगों के नखरे देखकर भी अनदेखा सा किये रहे। कही टिपियाने को मन मचलता तो बरज देते। एक हाथ की बोर्ड की तरफ़ बढ़ता तो दूसरे से रोक लेते। कठिन तपस्या कर डाली ब्लॉग उपवास के रूप में। ब्लॉग तपस्या से तेज तो खैर क्या आया उल्टे मन कुम्हला गया। रही सही अकल भी बोल गयी। कुछ सूझ ही नहीं रहा अब कि लिखा क्या जाये।
इस बीच कलकत्ते गये थे। वहां सोचा शिवकुमार मिसिरजी से चर्चा करेंगे अपने ब्लॉग का स्तर उठाने के लिये लेकिन उनको लगता है कि हमारे आने की भनक लग गयी थी सो वे बचने के लिये इलाहाबाद सरक गये। जित्ते दिन हम कलकत्ता में रहे उत्ते दिन वे बाहर रहे कलकत्ता को प्रियंकर जी के हवाले करके। हम प्रियंकर जी से मिलने गये तो वे मंच पर चढ़कर भाषण देने लगे और हमसे कट लिये। हम अनमने से बने रहे और ब्लॉग लिखने से जी उचाट हो गया।
लेकिन आज जब नागार्जुन जी की कविता देखी तो मन किया ब्लॉगिंग रोकनी नहीं चाहिये। न अच्छा सही तो खराब ही लिखते रहना चाहिये। आखिर खराब लिखने के भी फ़ायदे हैं। इन्हीं के चलते ही तो -ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बाद!
पुनश्च: ऊपर की फोटो पिछले दिनों के कलकत्ता प्रवास के हैं। इनमें ’कैप्शन/विवरण ’ देखने के लिये फ़ोटो के नीचे माउस धरें।
बाकी की फोटुयें इधर हैं।

मेरी पसन्द

साहब की सेटिंग और मेमसाहब की चैटिंग
बदस्तूर जारी है
क्या हुआ
जे मियां बीबी के बीच है दंगल
बाकी सब कुशल मंगल

सरकारी फाईलों में
पेड़ लगाने लगवाने का कार्यक्रम
बदस्तूर जारी है
क्या हुआ
जो कट रहे हैं जंगल
बाकी सब कुशल मंगल
कुछ घर फुंक चुके हैं
और घर के चिराग से
मरघट सी शांति बदस्तूर जारी है
क्या हुआ जो डाकूओं ने छोड़ दिया है चंबल
बाकी सब कुशल-मंगल
बस्तियाँ उजड़ रही हैं
विस्थापनों के सैर में
बिजली और सिंचाई के आंकड़ों की चांद मारी
बदस्तूर जारी है
क्या हुआ जो सूख रहा भांखड़ा नंगल
बाकी सब कुशल मंगल।

मनोज अग्रवाल

*मनोज अग्रवाल हमारे कालेज के जमाने के मित्र हैं। हम दोनों से इलाहाबाद से एक साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। आजकल (पिछले साल से) रेलवे में इलाहाबाद में उसी आफ़िस में हैं जहां ज्ञानजी हैं।

39 responses to “ब्लॉगिंग करने को फ़िर मन आया कई दिनों के बाद”

  1. arvind mishra
    मैंने तो यही सोचा फुरसत हो लिए आप …मगर इत्ती जल्दी यह उम्मीद न थी -वैसे फुरसतियाना ही है देर सबेर आपको ,हमको और सभी को ..काहें कोई गुमान पाले ..
    आप इत्ते दिनों बाद लिक्हे तो हम भी इत्मीनान से पडधे…शब्द दर शब्द ..
    बस इत्ता बता दीजिये कि कौए ने किस चीज से पांखे खुजलाये ? तब हम जान जायं कि सचमुच वजन है आपकी समझ में .न जाने काहें ये डाउट ससुरा बना ही रहता है आपको लेकर !
    दुसरे कई और प्राणी गायब हैं ….जो हम सरीखे बिचारों के विचारों को तरह तरह कुरेदता है …….
  2. arvind mishra
    मैं जानता था कि आप यही गलत सलत जवाब देगें क्योंकि अबके कवि कोई बाबा तुलसी या नागार्जुन नहीं हैं जो प्रकृति ,पशु पक्षियों का सूक्ष्म निरीक्षण करते हैं -कौए ने अपनी चोंच से पंख खुजाये …..आप कौए को भी भैंस समझ गए :) कुत्ता होता तो वह अपने दायें पैर खुजाता ….थोड़ा पशु पक्षियों के भी हाव भाव निहारा करिए न शुकुल जी ..केवल ब्लॉग जगत पर ही गिद्ध दृष्टि ठीक नहीं .. :) हा हा
  3. अविनाश वाचस्‍पति
    सही में बहुत जल्‍दी लौट आए हैं आप
    सोचा था कि आपने ब्‍लॉगिंग से ले लिया है संन्‍यास
    ब्‍लॉग व्रत, ब्‍लॉग क्रोध, ब्‍लॉग अवरोध,
    ब्‍लॉग जगत हर्षित था
    आपने उनकी खुशियों को लगाया है ग्रहण
    अब फिर से करना होगा ब्‍लाग पोस्‍ट वरण
    वरना हो जाएगा टिप्‍पणियों का क्षरण
    एक दिन की प्रेम कथा जो किसी के साथ कहीं भी घट सकती है
    छिपकलियां छिनाल नहीं होतीं, छिपती नहीं हैं, छिड़ती नहीं हैं छिपकलियां
    फुरसतिया हैं आप
    इसलिए दे रहा हूं लिंक दो
    आप भी छिपी हुई कलियों से बात कर लो
  4. देवेन्द्र पाण्डेय
    …..अच्छी -अच्छी बातें लोगों के ब्लॉग पर देखीं तो लगा कि उनके ब्लॉग कांजी हाउस हैं जहां उन्होंने अच्छाइयां और भलाइयों के जानवर कैद कर रखे हैं। …
    ……बड़ी जानदार पंक्तियाँ हैं। मेरा खयाल है कि भविष्य में यह ब्लॉगिंग आलेख में सूत्र वाक्य बनेगा।
    ……बहुत दिनो बाद आए मगर आए पूरी दमदारी से। फोटो में साफा-पानी वाला फोटो अपने बनारस का लग रहा है…सच-सच बताना पड़ेगा।
    ……नागार्जुन की कविता के साथ तुकबंदी नहीं जमी। शायद इसके पीछे नागार्जुन की कविता का अधिक वजनी होना हो।
    ……मनोज अग्रवाल जी की कविता पसंद आई।
  5. अविनाश वाचस्‍पति
  6. प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
    वाह बहुत *खराब* लिखा है !
    बधाई !
    खराब लिखने की शुभकामनाएं !
    .
    .
    .
    ब्लॉग ना लिखने के अलावा कौन और दूसरे व्रत लिए थे ?
    प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI की हालिया प्रविष्टी..अशोक की कहानी – 1
  7. भारतीय नागरिक
    इस बार स्लाइड शो ने चार चांद लगा दिये..
  8. प्रवीण पाण्डेय
    एक तो आप आ गये, तो अच्छा पढ़ने वालों की उम्मीद पुनः जग उठी है। स्वघोषित उपवास में चले जाने का गुण तो सीख लिया है पर गाँधीजी के अन्य गुण सीखने के पहले तनिक दूरगामी परिणाम सोच लीजियेगा। पता नहीं गाँधी बाबा की ड्रेस में कैसे लगेंगे आप।
    मनोज जी को पढ़ना बहुत अच्छा लगा, शेष कुशल मंगल है।
  9. ajit gupta
    आखिर वर्धा जाकर आए थे तो गांधी जी वाले उपवास तो करने ही थे। अब हाजमा दुरस्‍त हो गया होगा? अच्‍छे-बुरे को पचाने के लिए उपवास जरूरी है। कांजी हाउस वाली बात पसन्‍द आयी।
  10. satish saxena
    अच्छा किया उपवास कर लिया यह भी पता है कि अकेले ही किया होगा मुझे नहीं लगता कि कोई “भला आदमी” आपके साथ शामिल हुआ होगा ! कलकत्ते चले गए शिव जी पर भरोसा करके इससे तो सतीश भैया के पास दिल्ली आ जाते तीर्थयात्रा भी हो जाती और हम गुरु शिष्यों में मिलन भी ! खैर शिवजी से शिकायत मैं भी करूंगा की ऐसा नहीं करना चाहिए मासूम अनूप भाई के साथ !
    अनूप भाई ,
    निर्मल हास्य में आप यकीनन बेजोड़ हो ! अपनी कलम द्वारा , अपना ही मज़ाक बनाने के लिए बड़ा कलेजा चाहिए और वह भी हिंदी ब्लॉग जगत में जहाँ लोगों को व्यंग्य की पहचान ही नहीं है !
    अभिनन्दन आपका
  11. amrendra nath tripathi
    लगे रहिये आये हैं तो !
    वैसे भी आपका न लगना अहले-लगना है !
  12. deepak dudeja
    एक महीने का उपवास समाप्त हुवा…. और एक पोस्ट द्वारा उसे तोडा गया (कोई नेता वेता नहीं आये …. जूस पिला कर उपवास तोड़ने के लिए .) दुःख हुवा…….. चलो फुर्सत से दुबारा गाडी चलेगी – इस बात की खुशी भी.
  13. shikha varshney
    अब क्या कहें आप ही गए हैं तो आपका लिखा भी झेल ही लेंगे :)
    जोक्स अ पार्ट ..व्यंग लेखन में आपका कोई सानी नहीं .
    शुभकामनाये.
    shikha varshney की हालिया प्रविष्टी..चोरी हुआ आखिरी सलाम
  14. Tausif Hindustani
    जब नाम ही फुरसतिया है तो जब फुर्सत मिलेगा तभी ब्लोगिंग करेंगे और अच्छा करेंगे
    dabirnews.blogspot.com
  15. सम्वेदना के स्वर
    बिना बताये कहां फुर्र हो गये थे आप, वो तो कहिये?
  16. dr.anurag
    देखा कित्ते लोग “मिस” कर रहे थे आप को ?जीवन निरर्थ हो गया था उनका…..
    सोच रहा हूँ जिस दिन गूगल ब्लॉग बंद करने की घोषणा करेगा ……कित्ते लोगो को हार्ट अटक पड़ जायेगा ?
    dr.anurag की हालिया प्रविष्टी..इत्तेफाको के रिचार्ज कूपन नहीं होते दोस्त !!!!
  17. Anonymous
    चलो गनीमत है टिप्पणी का आप्शन है तो टिपियाकर अपनी जान बचाई जाए..बढ़िया पोस्ट..
  18. Gyan Dutt Pandey
    अरे वाह! आपका नाम क्या है सुकुल? :)
    Gyan Dutt Pandey की हालिया प्रविष्टी..भाग ४ – कैलीफोर्निया में श्री विश्वनाथ
  19. Deepak Saini
    आज पहली बार आया हूँ प्रणाम स्वीकार करे
    आप उस्तादों के उस्ताद हो ये तो पोस्ट पढ़ कर ही पता लगा गया
    उपवास ख़तम करने के लिए धन्यवाद
  20. dhiru singh
    फोटो देख समझ आया कानपुरी रिवाल्वर कलकत्तिया पिस्तोल से मिलन सम्मलेन था कोलकाता में
    dhiru singh की हालिया प्रविष्टी..बचपन की यादे – वह लहडू का सफ़र
  21. manoj kumar
    इतने दिनों से गाय्ब थे। तो आज ही आपसे पूछा कि ब्लॉग बंद कर दिया क्या?
    तब तक आपके दो पोस्ट ब्लोग्स पर आ चुके थे। कभी-कभी खुद के लिए भी फ़ुरसतिया लेना चाहिए। चाहे वह उपवास ही क्यों न हो!
    कविता पढना (पैरोडी और पसंद, दोनों) एक सुखद अनुभव रहा।
    manoj kumar की हालिया प्रविष्टी..आँच-46 समीक्षा – माँ की संदूकची
  22. manoj kumar
    … और हां, कोलकाता आए, सूचना नहीं दी।
    manoj kumar की हालिया प्रविष्टी..आँच-46 समीक्षा – माँ की संदूकची
  23. anitakumar
    आप उपवास कर रहे थे या सुस्ता रहे थे? खैर जो भी हो हमें खुशी है कि आप वापस लौट आये।देखिए आप की अनुपस्थिति में कुछ भी नहीं बदला है आज भी अरविंद जी आप के इत्ते बड़े फ़ैन हैं सबसे पहले वो ही एक एक शब्द पूरे ध्यान से पढ़े और टिपियाये। हम तो एक बार फ़िर मजेदार व्यंग पढ़ने को और टिप्पणी मैच देखने को तैयार बैठे हैं।
  24. वन्दना अवस्थी दुबे
    सुना था उपवास के बाद आदमी सात्विक हो जाता है :) …. लेकिन यहां तो आप तीरन्दाज़ी सीख आये :D वो भी ऐसी, कि निशाना चूके नहीं :)
    “इस बीच हमने अपनी पुरानी पोस्टें देखीं। कई को देखकर बहुत शरम आयी। मन किया किसी पोस्ट में मुंह छिपा लें।”:)
    “भाईचारे की तलवार ने मनमुटाव का सर कलम कर दिया है,…..” क्या बात है! कुछ तो बात है!!
    अब इतना लम्बा उपवास न रखियेगा, कुछ अच्छा पढने को तरस जाते हैं हम तो :(
    वन्दना अवस्थी दुबे की हालिया प्रविष्टी..सब जानती है शैव्या
  25. ePandit
    पाँच कोस दूर तक जब गाँव में कोई बच्चा रोता है तो माँ कहती है बेटा सोजा नहीं तो फुरसतिया की पोस्ट पढ़वा दूँगी। अव्वल तो डर के मारे बच्चे को नीन्द आ जाती है नहीं तो लम्बी पोस्ट पढ़ते-पढ़ते सो जाता है। एक पोस्ट चार-पाँच बार सुलाने के काम आ जाती है। :-)
    इतने दिनों बाद आपको पढ़कर अच्छा लगा।
    ePandit की हालिया प्रविष्टी..IAST-देवनागरी-IAST परिवर्तक जारी
  26. sanjay
    आपके पोस्ट रूपी लेमनचूस के लिए बालक ही नहीं बल्कि तरुण और जवान भाई लोग, और कुछ-कुछ बुजुर्ग भी कित्ते तो मचल रहे थे ….. इब दिख ही रहा है…… और आप हैं की सबको धता बताते हुए …… महीने भर का उपवास धर लिए ….. कित्ती तो ख़राब बात है …… जाईये अब और आपको नहीं टिपियाते ……… ऊं..ऊं…ऊं
    पाई लागूं.
  27. Sanjeet Tripathi
    बड़े दिन बाद पढ़कर मजा आ गया आपको. पोस्ट से ज्यादा मजेदार तो अरविन्द जी और आपकी टिप्पणी रहीं
    Sanjeet Tripathi की हालिया प्रविष्टी..प्राण गंवा दिए पर नहीं ली एलोपैथी दवा
  28. aradhana
    हमें तो आपकी कमी खली ही नहीं क्योंकि हम खुदै इधर थोड़े दिनों से गायब हैं. इसलिए ये नहीं कहेंगे कि आपकी वापसी बड़ी भली लग रही है.
    सुनकर अच्छा लगा कि आप ब्लॉग उपवास पर थे :-) . अच्छाइयाँ तो इधर सच में बहुत बढ़ गयी हैं. लोग उपदेश पर उपदेश लिखे जा रहे हैं. अब तो लगता है कि हम जैसे जवान लोग भी संन्यास लेकर इनकी मंडली में शामिल हो जायं और राम-राम जपें क्योंकि रोमैंटिक लिखने वाले हमारे कुछ ब्लॉगर मित्र भी इस समय अघोषित अवकाश पर ही हैं.
    वैसे बड़े दिनों के बाद ये लाइनें पढ़कर हँसते-हँसते पेट में दर्द हो गया…
    ” इत्ती भली-भली और अच्छी -अच्छी बातें लोगों के ब्लॉग पर देखीं तो लगा कि उनके ब्लॉग कांजी हाउस हैं जहां उन्होंने अच्छाइयां और भलाइयों के जानवर कैद कर रखे हैं। कई बार लगा यहां हर तरह भलमनसाहत का जलजला आया हुआ है। हर तरफ़ अच्छेपन की बाढ़ आयी है, इन्सानियत की हवायें चल रही हैं। अच्छेपन की बाढ़ में सारी बुराइयां डूब गयी हैं, भाईचारे की तलवार ने मनमुटाव का सर कलम कर दिया है, इन्सानियत की हवाओं में मोहब्बत का लाल दुपट्टा मलमल का, उड़ता जा रहा है।”
    aradhana की हालिया प्रविष्टी..चाकू एक कहानी
  29. Sourav Roy
    जान कर सच में ख़ुशी हुई कि आप हिंदी भाषा के उद्धार के लिए तत्पर हैं | आप को मेरी ढेरों शुभकामनाएं | मैं ख़ुद भी थोड़ी बहुत कविताएँ लिख लेता हूँ | हाल ही में अपनी किताब भी प्रकाशित की | आप मेरी कविताएँ यहाँ पर पढ़ सकते हैं- http://souravroy.com/poems/
  30. K M Mishra
    अनुप दादा को सादर प्रणाम । आप को भी लगता है मेरा वाला गुप्तरोग लग गया है । बैठे बैठे लुप्त हो जाने का । मजे की बात है मैं भी एक महीने बाद आपके ब्लाग पर आया । क्या को इनसिडेंट हैं या टैलिपैथी वाला हिसाब । प्यारे लिख दिया है आकर पढ़ लो । कहीं बासी न हो जाये । कलकत्ता प्रवास की फोटू बुलंद भारत को रिप्रेजेंट करती हैं ।
    सादर आपका
    कृष्ण मोहन मिश्र
  31. अल्पना
    बोलती तस्वीरें हैं ..कुल्हड़ के चायवाली[खासकर]
  32. Abhishek
    ओके, माफ़ किया.
    आपको इस सुन्दर पोस्ट पर माफ़ी मांगने के लिए प्रणाम . :)
    Abhishek की हालिया प्रविष्टी..खिली-कम-ग़मगीन तबियत
  33. सतीश चन्द्र सत्यार्थी
    आप एक महीने में आये हमने तो पता नहीं कितने महीने का उपवास रखा…
    अब और मुश्किल हो गया था जारी रखना :)
    सतीश चन्द्र सत्यार्थी की हालिया प्रविष्टी..ब्लॉगिंग- ये रोग बड़ा है जालिम
  34. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] [...]
  35. कविताओं के बीच में एक दिन
    [...] हमने उनमें से एक यहां सटा दी। पहले भी एक कविता पोस्ट की थी उनकी। आगे भी करने का इरादा [...]
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