Wednesday, August 22, 2012

…और ये फ़ुरसतिया के आठ साल

http://web.archive.org/web/20140420081204/http://hindini.com/fursatiya/archives/3290

…और ये फ़ुरसतिया के आठ साल

फ़ूल
तीन दिन पहले जबलपुर से कानपुर जा रहे थे। ट्रेन कानपुर के पास पहुंचने वाली थी। मोबाइल पर नेटवर्क दिखा तो फ़ेसबुक पर संदेशा सटा दिया-मजाक-मजाक में ब्लॉगिंग के 8 साल पूरे हो गये। आज के ही दिन 2004 में लिखी थी पहली पोस्ट! उस दिन तारीख थी उन्नीस अगस्त!

बाद में याद आया कि ये सूचना तो एक दिन पहले सटा दी थी। ब्लॉगिंग तो हमने 20 को शुरु की थी। बहरहाल अब जो हो गया सो हो गया। बधाईयां और उलाहने आ गये थे। अब उनको मटिया के नया स्टेटस क्या डालते।

सोचा था कि 20 को एक पोस्ट लिखी जायेगी जिसमें पिछ्ले साल का लेखा-जोखा दिया जायेगा। कुछ ब्लॉगिंग प्रवचन दिये जायेंगे। ब्लॉगिंग की स्थिति के बारे में बयान जारी किये जायेंगे। कोई माने या न माने लेकिन हमें यह मानने से कौन रोक सकता है कि हम ब्लॉगजगत के सबसे पुराने लोगों में हैं।

लेकिन घर में ऐसा हो न सका। बिजी-उजी हो गये। फ़िर लौटने का समय हो गया। लौट आये। आज सोचते हैं एक पोस्ट घसीट ही दी जाये। मौका-दस्तूर तो है जी। सुबह जल्दी उठ गये तो टाइम भी है काम भर का।

ब्लॉगिंग से जुड़ी अपनी पिछली सालगिरह वाली पोस्टों में पहले के किस्से हम बता ही चुके हैं। अब उनको क्या दोहरायें। बात पिछली ब्लॉगिंग सालगिरह से। पिछले साल जब हमने फ़ुरसतिया की सालगिरह पोस्ट लिखी थी तो हमको रविरतलामी जी ने साल भर का “ब्लॉगवर्क” दिया था- इस साल आप १०० फुरसतिया टाइप पोस्ट लिखेंगे. पूरा मौलिक. रीठेल नहीं चलेगा.

हमने रविरतलामी के कहने पर रिठेल वाली पोस्टें तो एकदम बन्द कर दीं। जो पुरानी पोस्ट सटानी हुयी उसे फ़ेसबुक पर सटा दिया लेकिन ब्लॉग पर रिठेल टोट्टली स्टाप कर दिया। लेकिन 100 लेख वाला काम 60 तक ही हो पाया। अब इसका मतलब क्या समझा जाये कि हम फ़र्स्ट डिवीजन पास हुये कि एकदम फ़ेल।

कुछ मित्रों ने दिलासा देते हुये कहा कि संख्या नहीं गुणवत्ता जरूरी होती है। इसका मतलब यह लिया जाये क्या कि साठ कूड़ा लेख लिखने के लालच में फ़ंसने की बजाय एक लेख भी कायदे का लिखा होता।

ब्लॉगिंग के आठ सालों के अनुभव मजेदार रहे हैं। शुरुआती दिनों में हालत यह थी कि ब्लॉगिंग के बारे में कहीं भी कुछ छप जाये तो उसकी चर्चा हफ़्तों करते थे। आज हाल यह है कि लगभग हर अखबार माले-मुफ़्त-दिले-बेरहम बना ब्लॉग से मसाला उठाकर छाप लेता है। ब्लॉगर मस्त कि हम अखबार में छपे। अखबार मस्त कि पैसे बचे। अखबार बेचारे बहुत गरीब हो गये हैं। वे पत्रकारों को पैसा नहीं देते, लेखक को मानदेय नहीं देते। बस देश-दुनिया की भलाई में लगे पैसा-पावर कमाते रहते हैं।

जो हो लेकिन अब ब्लॉग उपेक्षित माध्यम नहीं रहा। बड़े-बड़े लोग अब अपने ब्लॉग लिखते हैं। उनकी चर्चा मीडिया में होती है। उसके लिंक इधर-उधर होते हैं। यहां भी गुटबाजी-गिरोहबाजी जैसी सांस्कृतिक गतिबिधियां होती हैं। हर गुट गिरोह के अपने-अपने सबसे अच्छे ब्लॉगर हैं।

गुटबाजी-गिरोहबाजी कहना शायद ठीक नहीं होगा। इसकी जगह यह लिखना ठीक होगा कि यहां भी लाइक-माइंडेड लोग होते हैं। लोग एक-दूसरे का लिखा हुआ पढ़ते हैं। लाइक करते हैं। फ़िर लिखने वाले को लाइक करते हैं। फ़िर उसके लेखन से बोर होते हैं। लिखने वाले से बोर होते हैं। फ़िर अनलाइक करते हैं। लाइक और अनलाइक करने के बीच आपस में एक दूसरे के बारे में कुछ पोस्टें भी निकाल लेते हैं। ब्लॉगिंग को समृद्ध करते हैं।

कुछ भले मन वाले लोग ब्लॉगिंग में आई गिरावट से चिंतित रहते हैं! कभी-कभी तो उनकी चिंता देखकर ऐसा लगता है कि काश कोई ऐसा जैक होता जिससे कि नीचे गिरती ब्लॉगिंग को उचका के ऊंचा कर दिया जाता।
इस बीच ब्लॉग से शुरु करके अखबार-सखबार में छपने वाले साथियों के बयान भी सुनने में आये कि – अब मैं ब्लॉग में नहीं अखबार में लिखता हूं। कुछ दिन बाद बयान आया कि बहुत गुटबाजी है अखबारों में। :)
अब देखा जाये तो कहां नहीं गुटबाजी! आदमी के अपने मन के अंदर तक गुटबाजी है। मन की भली ताकतें जूझती रहती हैं बुरी ताकतों से। जब सब जगह है गुटबाजी तो इससे इत्ता हलकान काहे हुआ आये। मस्त होकर गुटबाजी मतलब लाइक मांइडेडनेस के नजारे देखे जायें।

बहरहाल अभिव्यक्ति की इस अद्भुत विधा में आठ साल पूरे होने के मौके पर इस सफ़र के शुरुआती साथियों रविरतलामी, देबाशीष, पंकज नरूला, ई-स्वामी, जीतेंन्द्र चौधरी, रमन कौल, अतुल अरोरा आदि को फ़िर से याद करता हूं।

रविरतलामी का लेख न पढ़ा होता तो ब्लॉग बनाने का विचार न आता। ई-स्वामी न मिले होते हो ये साइट न होती। देबाशीष के ब्लॉगजगत में योगदान के से आज के लोग अपरिचित हैं यह भी ब्लॉगिंग की प्रवृत्ति की निशानी है। जीतेंद्र चौधरी हमेशा की तरह अब भी एक ई-मेल की दूरी पर हैं लेकिन उनका पन्ना अब नया नहीं होता। हमारा जी-मेल का ई-मेल खाता हमको पंकज नरूला उर्फ़ मिची सेठ ने दिया था जब जी-मेल का खाते पर राशनिंग थी।
अतुल अरोरा और रमन कौल के लेखों का हम अभी भी याद, इंतजार और मिस करते हैं। लेकिन लगता है सब लोग रोटी-पानी की चिंता में व्यस्त हो गये हैं।

अपने तमाम पाठकों का शुक्रिया कि वे हमको पढ़ें न पढ़ें लेकिन अपनी टिप्पणियों से मेरे मन में यह भ्रम पैदा करने में सहयोग करते रहे कि हमारा लिखा पढ़ने वाले कुछ लोग हैं।

जब तक यह भ्रम बना रहेगा हम ब्लॉगिंग करते रहेंगे। :)

सूचना: एक , दो ,तीन , चार , पांच , छह और सात साल के पूरे होने के किस्से।

44 responses to “…और ये फ़ुरसतिया के आठ साल”

  1. आशीष श्रीवास्तव
    शीर्षक पर आपत्ति दर्ज की जाये! सही शीर्षक होना चाहीये “आठ साल के फुरसतिया तराने लेकिन दिन लेट! ”
    आशीष श्रीवास्तव की हालिया प्रविष्टी..हिग्स बोसान मिल ही गया !
  2. आशीष श्रीवास्तव
    वैसे इस लेख मे “मजा” नही आया, फुरसत का नही जल्दीबाजी मे की गयी खानापूरी लगती है! :-(
    आशीष श्रीवास्तव की हालिया प्रविष्टी..हिग्स बोसान मिल ही गया !
    1. रवि
      सही में ये आठ वर्षीय खानापूर्ति लग रही है. बहरहाल, बधाई!
      रवि की हालिया प्रविष्टी..महंगाई से कौन साला दुःखी होता है?
  3. संतोष त्रिवेदी
    हमने तो यह पढ़के यही निष्कर्ष निकाला कि आपने बड़ी बारीकी से दूसरों के लेखन में ताक-झाँक की है बनिस्पत इसके कि खुद बढ़िया लिखते और अपने काम से काम रखते.ताक-झाँक करने का ही फायदा ये रहा कि ‘अंडर-वर्ल्ड’ के सब गिरोहों और गिरहकटों की जानकारी सबको हो गई !
    ….आपको साल में साठ पोस्ट लिखने पर सठियाने की बधाई !
    संतोष त्रिवेदी की हालिया प्रविष्टी..अमन की अपील !
  4. सलिल वर्मा
    आठ के ठाठ निराले हैं.. और कितने ही साल आने वाले हैं.. हमारी शुभकामनाएं.. ये तो सच है की आप चंद उन लोगों में से हैं जिनसे हम जैसे नए लोग प्रेरणा ग्रहण करते हैं!!
    सलिल वर्मा की हालिया प्रविष्टी..तुझपे दिल कुर्बान!!
  5. arvind mishra
    सब लोग रोटी-पानी की चिंता में व्यस्त हो गये हैं।-व्यंगकार इस नग्न यथार्थ से कैसे निपटेगा?
    arvind mishra की हालिया प्रविष्टी..मैंने कब किसी को कहा ब्लागरा या ब्लॉग वालियां!?
  6. देवेन्द्र पाण्डेय
    इत्ते बड़े मौके पर इत्ता लिखने से काम नहीं चलेगा। पाठक निराश हुए। अगली पोस्ट जोरदार आनी चाहिए। ईश्वर फुरसतिया को फुरसत के पल दे।..शुभकामनाएँ।
  7. ismat
    बधाई हो !!!
  8. Dr. Gayatri Gupta
    पढेंगे तो हम जरूर और जहाँ तक भ्रम पैदा करने की बात है तो वो भी गाहे-बगाहे करते रहेंगे, आखिर आप को ब्लॉग्गिंग की दुनिया में जो बनाये रखना है…
  9. संजय अनेजा
    सही है सरकार, बिना पढ़े ही टिपिया रहे हैं ताकि भ्रम बना रहे:)
    अब देखते हैं रवि साहब कित्ता टार्गेट देते हैं अगले साल के लिए, सौ चाहियें तो कम से कम एक सौ सड़सठ का टार्गेट देना पड़ेगा|
    संजय अनेजा की हालिया प्रविष्टी..किस्साकिस्से
  10. संजय अनेजा
    अरे बधाई तो रह ही गई थी, बधाई हो!!
    संजय अनेजा की हालिया प्रविष्टी..किस्साकिस्से
  11. rachna
  12. सतीश चंद्र सत्यार्थी
    ई निपटाऊ पोस्ट लग रही है चचा… अइसे काम नहीं चलेगा…
    बधाई-शधाई तो है ही लेकिन थोड़ा और फुरसतियाइये अगली पोस्ट मे…
    अपने बारे में कहूँ तो आपका ब्लॉग उन पहले ब्लॉगों में था जिन्हें पढ़ना शुरू किया था…
    और अब भी मैं इसे हिन्दी के उन चुनिन्दा बेहतरीन ब्लॉग्स में से एक मानता हूँ जिनपर घंटों बिना बोर हुए बिताए जा सकते हैं..आपकी ब्लॉग पर से यह सोच के नहीं जाता है पाठक कि अब कुछ है नहीं पढ़ने को बल्कि यह सोचकर जाना पड़ता है कि कितना पढ़ें… बहुत माल बचा है.. अब बाकी बाद में देखेंगे… अभी भी पुरानी दसियों पोस्टें बची हैं आपकी जिन्हें नहीं देखा पर देखने का मन है..
    ब्लॉगिंग में कितने लोगों की लिखने की शैली को आपने प्रभावित किया है इसका अंदाजा आपको खुद नहीं होगा.. मैं खुद उनमें से एक हूँ… कभी कभी अपनी कोई पोस्ट ‘डुप्लिकेट मार्का फ़ुरसतिया पोस्ट’ लगती है…. हालांकि कोई-कोई पोस्ट ही.. बाकी उस लेवल तक भी नहीं पहुँच पाती…
    सतीश चंद्र सत्यार्थी की हालिया प्रविष्टी..टर्किश लैंगुएज सेल्फ स्टडी – तुर्की भाषा अल्फाबेट
    1. blog-pathak
      :):):)
      दिल करता है बधाई-सधाई वापिस ले जाऊं …….. लेकिन लोक-समाज इसे ब्यव्हारिकता में तंग-दिल कहेंगे.
      ई पोस्ट हम जैसे पाठकों के लिए ‘हवाई मिठाई’ है जो लोग खा तो लेते हैं समझ नहीं पाते…….तमाम सुधि प्रशंसकों के तरह हम भी ‘फुरसतिया-भाईजी’ को इस्तकबाल करते हैं के ओ अपने ‘प्राकृतिक मौजिये शैली को ब्लॉग जगत में अक्षणु रखें……………
      हम उन सभी ‘कारकों’ का घोर भर्त्सना करते हैं जो हमारे ‘फुरसतिया-भाईजी’ को उनके मौलिक लेखन पर
      वक्तिगत लानत-मलानत कर उनके लेखनी से हमें दूर करना चाहते हैं……….
      बकिया, इस पोस्ट पर हम आज जो कहना चाहते थे….ओ बात/जज्बात पिछले पोस्ट सॉरी जन्मदिन सॉरी ब्लॉग की’ ……… पोस्ट पर ‘लहरों वाली पूजाजी’ ने कह दी है………
      प्रणाम.
  13. देवांशु निगम
    गुरुदेव बधाई हो !!!!
    आठ की ख़ुशी में साठ, तो नौ की ख़ुशी में सौ पोस्टें लिख डालिए :) :)
    देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..दोस्त…
  14. प्रवीण पाण्डेय
    जो भी कारण रहे, आप लिखते रहे..
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..स्तब्धता
  15. Alpana
    बहुत-बहुत बधाई.
    यह भी हिम्मत का काम है कि बिना रीठेल निरंतरता बनाये रखी.
    वो भी पूरे आठ साल!
    ब्लॉग रिपोर्ट कार्ड में फर्स्ट डिविशन या पोस्ट के अंकों की बात न करें क्योंकि आप के एक लेख से एक औसत क्षमता का ब्लोगर कम से कम अपनी ५-६ पोस्ट आराम से बना सकता है .इसलिए जितनी छपी है उन्हें ५ से गुना कर दिजीये.वही आप का फाईनल स्कोर होगा .
    बेशक आप ने हिंदी ब्लॉग्गिंग को सकारात्मक रूप से समृद्ध किया है.
    आगे भी आप की कलम यूँ ही चलती रहे .शुभकामनाएँ
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..कुछ बातें बस ऐसे ही…
  16. shikha varshney
    बहुत बहुत बधाई हो ..
    @. अब मैं ब्लॉग में नहीं अखबार में लिखता हूं। कुछ दिन बाद बयान आया कि बहुत गुटबाजी है अखबारों में”।इंसान का स्वभाव है जहाँ रहता वहाँ से कभी संतुष्ट नहीं रहता .और खासकर फ्री में मिली हुई चीज में तो खोट ही नजर आता है :) तो सोचने का नहीं, बस लिखने का.ब्लॉग्गिंग जिंदाबाद :)
  17. चंदन कुमार मिश्र
    कोई माने या न माने लेकिन हमें यह मानने से कौन रोक सकता है कि हम ब्लॉगजगत के सबसे पुराने लोगों में हैं।
    हमको मानना तो पड़ेगा हुजूर! आखिर बात सही है।
    ६० हो गया तो पास हो गए, मेरी तरफ से पास।
    लाइक और अनलाइक करने के बीच आपस में एक दूसरे के बारे में कुछ पोस्टें भी निकाल लेते हैं। ब्लॉगिंग को समृद्ध करते हैं।
    बढिया फलसफा।
    लेकिन लगता है सब लोग रोटी-पानी की चिंता में व्यस्त हो गये हैं।
    पुराने लोगों के साथ तो यह सही लगता है हमें भी।
    भ्रम बरकरार रहेगा।
    हा हा हा।
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्रविष्टी..‘अंग्रेजी ग्लोबल है’ (लघुकथा)
  18. amit srivastava
    बड़ी फुर्सत से निकले आठ साल | बधाई |
    amit srivastava की हालिया प्रविष्टी.." बहुत कठिन है डगर …….ब्लागिंग की …….."
  19. VD Ojha
    वेसे तो आप का लिखा एक एक शब्द सार्थक होता है फिर भी यहाँ जो बहुत अच्चा लगा वो ये था “……………..आदमी के अपने मन के अंदर तक गुटबाजी है। मन की भली ताकतें जूझती रहती हैं बुरी ताकतों से। जब सब जगह है गुटबाजी तो इससे इत्ता हलकान काहे हुआ आये। मस्त होकर गुटबाजी मतलब लाइक मांइडेडनेस के नजारे देखे जायें।…………………”
    आपका पिछले दिनों एक लेख पढ़ा था जहाँ बंगलोरे को कंग्लोरे कर दिया गया था व्यवस्था अनुभाग के अनुभव के आधार पर मेरा विचार है की ऐसा कभी कभी जन बुझ कर भी किया जाता है मतलब फाइल पर काम पूरा लेकिन फर्म को पत्र मिले ही नहीं
  20. Pankaj
    और लगता नहीं की फुरसतिया इतने पुराने हैं… अभी भी एकदम नए-ताज़े ही लगते हैं जैसे कोई नौजवान ब्लॉगर :) | इतनी ऊर्जा हमेशा रहे… :)
  21. aradhana
    हमारी ओर से भी बधाई ले लीजिए :)
    हम भी रोटी-पानी की चिन्ता में व्यस्त हो जाते हैं बीच-बीच में…लेकिन जब भी समय मिलता है लिख लेते हैं, कोई पढ़े या ना पढ़े.
  22. Abhishek
    झाडे रहिये :)
    कलक्टरगंज वाली पोस्ट का शीर्षक याद है मुझे . अब ये तो आपको मानना पड़ेगा की पूरी पोस्ट याद रहे न रहे शीर्षक और कुछ लाइने तो याद रहती ही हैं :)
  23. amit
    आठ वर्ष तक कीबोर्ड ठोकने और नियमित टाईम-पास करने (और कराने) की बधाई! :)
    लेकिन लगता है सब लोग रोटी-पानी की चिंता में व्यस्त हो गये हैं।
    या बोर हो गए हैं या राईटर्स ब्लॉक आ गया है! ;)
    amit की हालिया प्रविष्टी..मैं भारतीय…..
  24. राहुल सिंह
    टिप्‍पणी न हो तब भी हम मान कर चलते हैं कि, समझदारों ने पढ़ ही लिया होगा, लेकिन कई टिप्‍पणियां ऐसी होती हैं, जिन्‍हें देख कर लगता है कि बिना पोस्‍ट पढ़े ही आ गई हैं.
  25. उन्मुक्त
    आठ दसल पूरे करने पर बधाई।
    उन्मुक्त की हालिया प्रविष्टी..नैनीताल झील की गहरायी नहीं पता चलती
  26. manish
    हैप्पी ब्लॉग बड्डे – आठा तो पाठा तो आपके भ्रम को बरकरार रखने में सहृदय सहयोग प्रेषित है :-) जमे रहें सरकार :-)
    manish की हालिया प्रविष्टी..काव्यशेष आकाश
  27. वाणी गीत
    बहुत बधाई है जी …
    अच्छा याद दिलाया कि हमें भी तीन वर्ष पूरे हो गये , बस बधाई लेना ही भूल गये !
    वाणी गीत की हालिया प्रविष्टी..ऐसा भी कोई मित्र होता है भला ?
  28. आशीष श्रीवास्तव
    टिप्पणी हाज़िर है हुजूर … हम पढ़ रहे है .. लिखते रहिये…
    ८ वर्ष पूरे होने पर बधाइयाँ :) :)
    ये वाला आठ (८) देख कर मज़ा आ गया
    आशीष श्रीवास्तव
  29. shefali pande
    बधाई बहुत बहुत …..
    shefali pande की हालिया प्रविष्टी..सुगम के माने सौ – सौ ग़म, यह मान लीजिये
  30. : फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] …और ये फ़ुरसतिया के आठ साल [...]
  31. : …और ये फ़ुरसतिया के नौ साल
    [...] एक , दो ,तीन , चार , पांच , छह , सात और आठ साल के पूरे होने के [...]

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