Wednesday, December 18, 2013

अरे कुछ् पॉजिटिव सोचो यार

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अरे कुछ् पॉजिटिव सोचो यार

जन्मदिनहम इधर देख रहे हैं कि देश में लोग धड़ल्ले से नकारात्मक चिंतन में लगे रहते हैं। फ़ैशन बना लिया है निगेटिव थिंकिंग को। हर चीज में बुराई देखना। हर जगह खराबी टटोलना। टोट्टल निगेटिव अप्रोच।
अब देखिये एक जज साहब के खिलाफ़ कार्रवाई करने में अपनी अदालत सावधानी बरत रही है तो लोग उसके बारे में नकारात्मक सोचने लगे। हल्ला मचा रहे हैं कि जज को बचाया जा रहा है। जबकि लोगों को अच्छी तरह पता है कि जैसे ही सावधानी हट जाती वैसे ही दुर्घटना घट जाती है। फ़िर भी लोग चाहते हैं कि अदालत जज के खिलाफ़ फ़ौरन कार्रवाई करे। लोग भावुकता के चक्कर में यह भूल जाते है कि कानून ठोंक बजा के न्याय करता है। वह देखता है कि भले 100 अपराधी छूट जायें लेकिन किसी निरपराध को सजा नहीं मिलनी चाहिये। लोग आला अदालत के बारे में नकारात्मक बात सोचते हुये यह भूल जाते हैं कि जब कभी जरूरत होती है तब अदालत सरपट भी काम करती है। अपने खिलाफ़ जरा सा भी बदसलूकी होने पर जजों ने रेलवे प्लेटफ़ार्म तक पर अदालत लगाकर सजा सुनाई है। तो जहां सक्रियता चाहिये वहां सक्रिय हुये , जहां आराम-आराम से काम करना है वहां आराम-आराम से न्याय देते हैं कानून के रखवाले। अदालतों का यह सकारात्मक पहलू लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
अब देखिये एक और हल्ला मचा है कल से। अमेरिका में भारतीय राजनयिक के खिलाफ़ कार्रवाई का बुरा मान गये लोग। अरे भाई अमेरिका सभ्य देश माना जाता है। अपने कानून का सम्मान करता है। पता नहीं उसके द्वारा अपने कानून पालन करने को बेइज्जती क्यों समझा जा रहा है अपने यहां। जो देश उजड्डता का जबरियन लाइसेन्स लिये घूमता है उसकी कानूनी पर कार्रवाई सवाल उठाना नकारात्मक सोच ही तो है। हमको तो इस घटना से पाजिटिव चीजें देखनी चाहिये। उसने हथकड़ी ही तो लगाई राजनयिक को। जेल में गंजेड़ी-भंगेडियों के साथ ही तो रखा। गरदन तो नहीं काट ली पाकिस्तानियों की तरह। गोली तो नहीं मार दी देखते ही दंगाइयों की तरह। लेकिन बाद में अंग्रेजी में सॉरी भी तो बोलेगा। अमेरिका अंग्रेजी में सॉरी बोलता है इससे बड़ी उपलब्धि भला क्या हो सकती है आज के जमाने में? जिस देश के इशारे पर दुनिया चलती है वह किसी बात पर अपनी गलती मांगे। सॉरी बोले इससे बड़ी सकारात्मक बात भला क्या हो सकती है अपने देश के लिये?
उधर राजस्थान में एक जज ने अपनी लड़की को बन्द रखा मनचाहे विवाह से रोकने के लिये। लोग जज के नाम पर थू-थू कर रहे हैं। तमाम नकारात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं। लेकिन लोग यह भूल जाते हैं जहां कुल मर्यादा, सतीत्व और कौमार्य की रक्षा के लिये जलाकर मार दिया जाना सबसे बेहतर उपाय माना जाता हो वहां उस बेचारे ने तो केवल अपनी बच्ची को बन्द ही रखा। लोग बेचारे अपनी लड़की का भला चाहने वाले जज की बुराई में लगे हैं। उसमें तमाम नकारात्मक तत्व खोज रहे हैं। मार डालने, काट डालने के मुकाबले कैद रखना कित्ता सकारात्मक उपाय है। लेकिन लोग समझते नहीं।
पिछले दिनों क्रिकेट टीम के दक्षिण अफ़्रीका में भारतीय क्रिकेट टीम की हार की बड़ी आलोचना हुई। यह नकारात्मक सोच है। लोगों को सोचना चाहिेये कि ऐसे समय में जब वहां नेल्शन मंडेला का निधन हुआ हो अगर भारत जीत जाता है तो कित्ता बुरा लगता उन लोगों को। मंडेला साहब को भारत रत्न दिया है भाई। हमारे हीरो थे भाई वो! भारत अगर अफ़्रीका को हरा देता तो खराब लगता न मंडेला साहब को। क्रिकेट मैच में हार को सकारात्मक सोच के रूप में लेना चाहिये हमे।
लोग देश में इधर हो रहे तमाम भ्रष्टाचार का हवाला देते हुये देश के बारे में नकारात्मक बयान देते रहते हैं। लेकिन लोग उसका सकारात्मक पहलू भूल जाते हैं। अगर भ्रष्टाचार न होता तो हम उससे त्रस्त न होते। फ़िर लोकपाल का हल्ला न मचता। न अनशन होता। न आज लोकपाल राज्यसभा में पास होता। इसे ऐसा समझिये कि भ्रष्टाचार के कीचड़ में लोकपाल का कमल खिला है। यह भ्रष्टाचार का सकारात्मक पहलू है।
कुछ लोग लोकपाल बिल के पास होने को भी नकारात्मक नजर से देख रहे हैं। कह रहे हैं कि यह वो वाला लोकपाल नहीं है जिसके लिये अनशन हुआ था। यह लोकपाल नहीं जोकपाल है।
लेकिन मेरा सोचना इससे अलग है। सकारात्मक सोच के चलते मैं यह सोच रहा हूं कि एक कानून के लिये अनशन किया लेकिन मिले गये दो। एक के साथ एक फ़्री। एक (लोकपाल) भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिये दूसरा (जोकपाल) मजाक के लिये।
भ्रष्टाचार जैसी नकारात्मक चीजों से हंसी मजाक वाले कानून निकल आना कितना सकारात्मक है न!
सोच अगर पॉजिटव हो तो मजाक मजाक में नकारात्मक चीजों से सकारात्मक परिणाम निकल आते हैं।
आप भी कुछ पॉजिटिव सोचो यार !

6 responses to “अरे कुछ् पॉजिटिव सोचो यार”

  1. प्रवीण पाण्डेय
    पता नहीं कि सच्ची और अच्छी सोच हमें कब आयेगी, इतना पॉसटिव कि सामने वाला अधीर हो जाये।
    प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..चलो रूप परिभाषित कर दें
  2. Swapna Manjusha
    हम तो पूरा पोजीटीवियाए रहते हैं । अब अभी देखिये न १५ दिन पहले हमरा गोड़ टूट गया पूरा पिलास्टर लगा हुआ है, पिलास्टर लगले में भारत से कनाडा तक का सफ़र, सफरियाते हुए किये लेकिन का मजाल कि एक बार भी नेगेटिवयाये हों !
    पूरा रास्ता पॉजिटिविटी से ओत-प्रोत हो सोचते रहे, धन भाग हमरे कि गोड़े टूटा कहीं जे गर्दन टूट जाती तो का होता :):)
    अरे भाई बी पॉजिटिव :)
    Swapna Manjusha की हालिया प्रविष्टी..नामालूम सी ज़िन्दगी की, तन्हाई पिए जाते हैं…..
  3. सतीश सक्सेना
    वैसे अब काफी लोग, आपको पॉजिटिव लेने लगे हैं अनूप भाई !!
    सतीश सक्सेना की हालिया प्रविष्टी..तुम भी कौन समझ पाए थे, धत तेरे की -सतीश सक्सेना
  4. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    पॉजिटिव का प्रचार करके अपने पैर में कुल्हाड़ी काहें मार रहे हैं?
    व्यंग्य विधा का नाश कराएंगे क्या? :P
    सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी की हालिया प्रविष्टी..दहलीज़ पे बैठा है कोई दीप जलाकर (तरही ग़जल)
  5. sanjay jha
    सकारात्मकता के आर में काफी नकारात्मकता परोसा गया है…………..लेकिन हम इसे सकारात्मक रूप में ग्रहण कर रहे हैं उम्मीद करते हैं हैं के आप भी हमारे नकारात्मक विचारों को सकारात्मक रूप में लेंगे (:(:(:
    प्रणाम.
  6. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    […] अरे कुछ् पॉजिटिव सोचो यार […]

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