Saturday, December 12, 2015

अकेले मत रहिये

सुबह सैर पर निकलने में सबसे बड़ी बाधा कपड़े बदलना होती है। आलस्य लगता है रात वाले कपड़े उतारकर पैन्ट-शर्ट पहनने में। फिर ऐसे ही समय निकलता जाता है और अक्सर निकलना निरस्त हो जाता है।

आज रात के ही कपड़ों के ऊपर स्वेटर डांटकर निकल लिए। पुलिया पर दो आदमी बैठे बतिया रहे थे। मन्दिर में घण्टे बज रहे थे टन्न-टन्न। आज शनिवार का दिन होने के चलते मन्दिर में भीड़ ज्यादा होती है।

एक आदमी सड़क पर बीड़ी पीते हुए चला जा रहा था। दायें हाथ से साइकिल पकड़े बाएं हाथ में बीड़ी थामे उसकी अदा से लग रहा था कि वह बीड़ी अपनी साइकिल से अधिक-अधिक से अधिक दूर रखना चाह रहा था ताकि साइकिल को बीड़ी की लत न लग जाए। कुछ ऐसे जैसे घरों में कुछ लोग नशा अपने बच्चों से छुपकर करते हैं।
चाय की दुकान वाले बच्चे ने हमको देखते ही चाय बनाई। सुबह 4 बजे आ गया था वह दुकान पर। चाय बढ़िया बनाई सुनकर खुश हो गया।

चाय की दुकान रामलीला मैदान के पास ही है जहां पिछले शुक्रवार को कम्बल वाले बाबा का कैम्प लगा था। हमने पूछा तो बताया गया-'यहां परमिशन नहीं मिली कल। जीएम ने कैंसल कर दी।' रिछाई में लगा था कैम्प। दसियों हजार लोग आये थे।


कम्बल वाले बाबा का रामलीला मैदान में कैम्प कैंसल करने में हमारा भी कुछ योगदान रहा। पिछले शुक्रवार को जब पता चला तो मैंने अपने महाप्रबन्धक को बताया कि इस तरह बाबा अन्धविश्वास फैलाते हुए कमाई कर रहा है। इसमें फैक्ट्री भी अप्रत्यक्ष सहयोग कर रही है। कल को भीड़ में कोई हादसा हुआ तो फैक्ट्री पर जिम्मेदारी आएगी। उन्होंने तुरन्त सुरक्षा रिपोर्ट लेकर रामलीला मैदान पर कम्बल कैम्प की अनुमति निरस्त कर दी।
लोगों से पूछा तो हर आदमी कहता पाया गया कि उसको तो फायदा नहीं हुआ लेकिन इतने लोग आये हैं तो कुछ तो होगा। कुछ लोगों ने यह भी कहा-'जब फैक्ट्री ने अनुमति दी है तो कुछ तो सच्चाई होगी।' फैक्ट्री ने अनुमति निरस्त कर दी लेकिन मजमा जारी है।

एक आदमी चाय पीने के बाद लाठी टेकते हुए वापस जा रहा था। उसको दिखाई नहीँ देता। वह लाठी दायें-बाएं हिलाते हुए सड़क को ठोंकता हुआ आगे जा रहा था। उसके द्वारा सड़क को ठोंकते हुए देखकर लगा कि वह अपना अंधे होने का गुस्सा सड़क पर उतार रहा हो।

मंदिर पर लोग आने लगे थे। मागने वाले जम गए थे। कुल 14 लोग थे मागने वाले। कोई 10 साल से आ रहा था कोई 15 साल से। कोई केवल यहीं माँगता है कोई साईं मंदिर या दूसरी जगह भी जाता है। एक महिला भिखारी ने बताया कि वह फैक्ट्री के गेट नंबर 3 पर भी जाती है। जो मिल जाता है उससे गुजर हो जाती है।

वहीँ एक महिला भिखारी से बात होने लगी। नाम बताया उन्होंने पांचो बाई। उनका आदमी था। सीआईएसएफ में नौकरी करता था। एक औरत के साथ भाग गया। पांचो बाई के डर से शहर-शहर भागता रहा। नौकरी छोड़कर अब उस महिला के साथ रीवां के किसी गाँव में रहता है। तीन बच्चे हैं उस महिला से।

'कचहरी में बचा लिया पुलिस ने उसको वरना हम उसको पकड़कर पीटने वाले थे। अभी नौकरी करता तो बढ़िया तनख्वाह मिलती। पेंशन पाता। भाग गया बदमाश।'- पांचो बाई बोली।

पाँचों बाई के एक बिटिया है। नाती-पोते हैं। जब आदमी भगा था तब बिटिया छोटी थी। उसको पाल-पोसकर बड़ा किया। ईंटे पाथने का काम किया। बजरंगनगर में खुद का मकान बनाया। अब वहाँ रहती हैं अकेले। नाती-पोते भी आते हैं। घर में गैस नहीं है। लकड़ी बीनकर खाना चूल्हे में बनाती हैं।


मकान बनाने का किस्सा बताते हुए बोली-' हफ्ते भर ईंटे पाथ लेते थे। फिर लेबर लगाकर ईंट चिनवा लेते थे। मकान बना लिया तो ठाठ से रहते हैं वरना किराये के मकान में मारे-मारे ठोकर खाते घूमते।

हमने उम्र पूछी तो बोली-'तुम बताओ। तुम तो पढ़े-लिखे हो।' हमने कहा-' होयगी यही कोई 30-35 साल। खूबसूरत हो। पिक्चर में काम करो तो खूब हिट होगी।' इस पर वो खूब जोर से हंसने लगी और सच में खूबसूरत लगीं। दांत देखकर ऐसा लगा मानों प्रकृति ने ऊपर-नीचे के दांत सम-विषम करके तोड़े हों।

कम्बल वाले बाबा के पास पांचो बाई भी गयी थीँ। घुटने दर्द करते हैं। 10 रूपये का ताबीज खरीदा। फायदा लगा नहीं। किसी बात पर सरकार को कोसते हुए बोलीं-' सरकार दारु,गांजा बिकवाती है। पैसा कमाती है। लोग पीकर उत्पात करते हैं।'

हमने सबके लिए एक रूपये के हिसाब से उनको दिए। यह भी कहा कि वैसे हम कभी भीख देते नहीं पर उनसे बात करके दे रहे हैं। इस पर पांचो बाई बोली-'अरे आदमी प्रेम से दे बस यही बहुत है।'

हमने पूछा-'घर आयेंगे तो चाय पिलाओगी?' बोली-'काहे नहीं पीआयेंगे।'फोटो देखकर बोलीं-'बढ़िया तो आई है। एक अंग्रेज भी खींचा था हमारा फ़ोटो।'

इस भीड़ से अलग मन्दिर के दूसरी तरफ भी एक महिला अकेली बैठी थी। नाम बताया - जोगतिया बाई। उम्र बताई करीब 35-40 साल। शादी की नहीं। भाई के साथ रहती हैं। भतीजे-भतीजी हैं।

उनसे बात कर रहे थे तब तक वहां सुरक्षा दरबान गस्त करते हुए आये। बोले-'एक आदमी पाइप लाइन चुराते पकड़ा गया।लकड़ी भी चोरी हो रही है।'

हमने पांचो बाई से कहा-'तुम भी लकड़ी ले जाती हो सड़क से। कभी पुलिस पकड़ ले गई तो क्या करोगी?
वो बोली-'ले जायेगी तो ले जायेगी। खाने का तो वहां भी मिलेगा।'

लौटकर आये कमरे पर। चाय पीते हुए पोस्ट लिखी। सूरज भाई पूरी शान से चमक रहे हैं। कानपुर से भाई ने फोन किया और बताया -'यहां तो भयंकर कोहरा है'। हम दुष्यंत कुमार को याद करने लगे।

मत कहो आकाश में कोहरा घना है
यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है।


पिछले दिनों टहलने नहीं गए। आज गए तो लगा कि बहुत कुछ छूट रहा था। अकेलेपन का भाव हावी था। आज लोगों से बात करके लगा कि निकलना कितना सुकूनदेह होता है। आप भी अकेले मत रहिये। जब भी मौका मिले निकल लीजिये। अच्छा लगेगा।

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