

आज 21 मई है । आज के ही दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु हुई थी। इंदिरा गांधी जी के मौत के बाद हुए चुनावों के बाद बंपर बहुमत से जीती थी उनकी पार्टी। 415 सांसद थे उनकी पार्टी के लोकसभा में। राजीव गांधी अनिच्छा से राजनीति में आए थे। राजनीति का अनुभव नहीं था उन्हें। उनके कार्यकाल में सबसे उल्लेखनीय काम देश का कम्प्यूटर के क्षेत्र में शुरुआत करना रहा। इसका फ़ायदा देश के हर क्षेत्र में हुआ। आज अमेरिका और दूसरे तमाम देशों में जो प्रवासी हैं उसके पीछे भी कहीं न कहीं भारत के कम्प्यूटराइजेशन का योगदान है। और भी कई काम हुए उनके समय ।
उनके प्रधानमंत्री रहते तमाम गलतियाँ भी हुईं। उनके साथी वित्तमंत्री ही उनके ख़िलाफ़ पर्चा लहराते रहे। बोफोर्स प्रकरण , जिसे भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी दारोग़ा के लेवल का केस कहते थे , उनकी सरकार के लिए भारी पड़ा और अगले चुनाव में पहले की आधी सीटें भी नहीं पाई उनकी पार्टी। 197 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उन्होंने सरकार बनाने का दावा नहीं पेश किया । विपक्ष में बैठे। यह बात 35 साल पहले की है। आज इतनी सीटों पर तो लोग कैसे भी लोग सरकार तो बनवा ही लेते , बाद में पांच साल चलाने के लिए मैनेज भी कर लेते । लेकिन तब यह चलन शुरू नहीं हुआ था ।
संयोग से आज हिंदी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार शरद जोशी जी का जन्मदिन भी है । शरद जी का हिन्दी व्यंग्य में विशिष्ट योगदान है। उनके 'प्रतिदिन' स्तंभ की चर्चा अक्सर होती है। मैंने प्रतिदिन के संकलन के पंच शुरू किए थे (लिंक टिप्पणी में )। 22 पोस्ट में 220 पंच लिखे थे । फिर रुक गया काम । जल्द ही फिर शुरू करेंगे ।
शरद जी ने राजीव गांधी जी के प्रधानमंत्री रहते हुए उन पर कई व्यंग्य लेख लिखे थे उनमे से एक 'पानी की समस्या' पर था । कवि सम्मेलनों में जब इसे पढ़ते थे तो लोग बहुत पसंद करते थे ।
राजीव गांधी की आतंकवादियों द्वारा हत्या हो जाने के बाद शरद जी ने कभी इस व्यंग्य का पाठ नहीं किया। एक बड़े संवेदनशील लेखक और एक घटिया राजनीतिज्ञ में अंतर होता है।
राजीव गांधी जी और शरद जोशी जी को नमन।
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