Wednesday, June 25, 2025

काली चाय , हरी चाय और सफ़ेद चाय


 चाय का शौक बचपन से रहा है।चाय का मतलब हमारे लिए चाय की पत्ती, दूध, चीनी और साथ में अदरख से रहा है। इसके अलावा और कुछ साज-सिंगार हो गए चाय के कभी-कभी वो बात अलग। लेकिन बिना दूध की चाय कभी जमी नहीं अपन को।

दफ़्तर में भी साथ के लोग सीनियर होने के साथ ग्रीन टी पीने लगे। शायद उनको डर था कि अगर ग्रीन टी नहीं पियेंगे तो सीनियरिटी चली जायेगी। लेकिन इस मामले में अपन ने कभी दूध वाली चाय का साथ नहीं छोड़ा। ग्रीन टी या बिना दूध वाली चाय को अपन वीआईपी टी या एस.ए.जी. (सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव टी) कहते थे। कोई ग्रीन टी या काली चाय पिलाता तो कहा -"हमको भाई नार्मल चाय ही पिलाओ।" दूध मंगाया जाता , चाय पिलाई जाती।
ऐसे में कोई चाय कंपनी वाला कहे -"हम तो बिना दूध की चाय ही पिलायेंगे" तो कैसा लगेगा? वह लाख कहे हमारी चाय बहुत अच्छी है लेकिन हम तो न मानेंगे। दूध को तलाक़ देकर भला कहीं चाय का घर बस सकता है?
लेकिन हमारे साथ ऐसा हुआ। श्रीलंका में सीता माता का मंदिर देखने के बाद हम एक चाय कंपनी देखने गए। दमारो टी कंपनी (Damro Tea Company) श्रीलंका की सबसे पुरानी चाय कंपनियों में से एक है। श्रीलंका में कई जगह इनके प्लांट हैं। नुआरा एलिया पहाड़ी क्षेत्र के चाय के बागान हैं।
श्रीलंका विश्व का प्रमुख चाय उत्पादक देश है। यहाँ की चाय विदेशी मुद्रा का प्रमुख स्रोत है। श्रीलंका में चाय का उत्पादन 1867 से शुरू हुआ। भारत में चाय की खेती श्रीलंका से तीस साल पहले 1836 में शुरू हुई थी। पहले चाय अंग्रेजों के लिए उगाई जाती थी। बाद में तो यहाँ के लोग भी चाय के आदी हो गए। चाय यहाँ का सबसे ज़्यादा लोकप्रिय पेय बन गया।
जिस प्लांट को हम लोग देखने गए थे वहाँ सामने ही चाय के बागान के बीच Damro Tea Company का बोर्ड लगा था। तमाम लोग प्लांट देखने आए थे। हम भी पहुँच गए।
प्लांट में बाग में लाई गई पत्तियों से चाय बनाई जा रही थी। हमारे साथ के गाइड ने अलग-अलग तरह की चाय बनाने के तरीके बताये। चाय सुखाने, ऑक्सीकरण और अलग-अल्ला तरह साइज में कैसे तैयार की जाती है सब विस्तार से बताया। पहली मंजिल से हम लोग नीचे बड़े हाल में बनती चाय देखते रहे। बड़ी मेज में चाय की पत्तियाँ पसरी हुई थी और सुखाई जा रही थी।
हमको चाय की दो क़िस्में ही पता थीं काली चाय और ग्रीन टी। लेकिन वहाँ पता कि चाय की एक तीसरी कैटेगरी भी होती है -सफेद चाय। सफेद चाय सबसे महंगी होती है। सभी चाय में अंतर उसके आक्सीकरण के लेवल का होता है। सफेद चाय सीधे बागान में सुखाई जाती है, ग्रीन टी में ऑक्सीकरण नहीं होता है, काली चाय जो सबसे ज़्यादा प्रयोग की जाती है वह सुखाने, ऑक्सीकरण और प्रोसेसिंग के बाद अलग-अलग साइज में पैक की जाती है। जैसे-जैसे चाय की पत्तियों का साइज कम होता है वैसे-वैसे उसका कड़कपन बढ़ता जाता है , कीमत कम होती जाती है।
प्लांट घूमने के बाद हम लोग वहाँ आए जहाँ चाय का काउंटर था। अलग-अलग तरह की चाय अलग-अलग पैकेट में बिक रही थी। वहीं तरह-तरह की चाय टेस्ट के लिए भी उपलब्ध थे। छुटके-छुटके कप में लोग चाय पी रहे थे। हमने कहा -"दूध वाली चाय पिलाओ।" लेकिन वहाँ बताया गया -"यहाँ दूध प्रयोग नहीं करते।" हमने कहा-"बिना दूध की चाय का क्या मजा? दूध मिलाओ। उसका पैसा हम दे देंगे।" वाहन बताया गया -"हम दूध रखते ही नहीं।"
बिना दूध की चाय बेमन से पी। सोचते हुए कि कानपुर में होते तो अपने घर से दूध लाकर चाय में डाल लिए होते। लेकिन सोचने से क्या होता है। सच्चाई तो यही थी कि हम श्रीलंका में थे, कानपुर में नहीं।
थोड़ी देर वहाँ रहकर हम लोग वापस कोलंबो के लिए चल दिए।

https://www.facebook.com/share/v/1DpuaTQuBX/


No comments:

Post a Comment