Friday, September 04, 2026

जेन जी आंदोलन और संसद


 जंतर-मंतर पर जेन Z का आंदोलन हुआ। दिल्ली पुलिस द्वारा आंदोलन में आपराधिक तत्वों के शामिल होने की बात कहीं गई। शुरुआत में बताया गया -' चेहरों के पहचान करने की तकनीक के द्वारा 2500 लोगों के चेहरों की पहचान की गई। अपराधी तत्वों की पहचान की जा रही है।'

इस सूचना से आंदोलन में शामिल होने जा रहे लोगों में जरूर कुछ घबराहट हुई होगी। भले ही वे अपराधी न रहे हों लेकिन ख़बर से उनको डर ज़रूर लगा होगा कि चेहरे पहचान के कहीं बाद में उत्पीड़न की कार्यवाही न हो। लेकिन इस सूचना के बावजूद आंदोलन जारी रहा। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद खतम हुआ।
बाद में ख़बर आई कि दिल्ली पुलिस के दावे के अनुसार, जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुल 2,873 लोग शामिल हुए थे, जिनमें से 989 लोगों का पुराना और गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड पाया गया है।
एक अनुमान के अनुसार जंतर-मंतर के आंदोलन में करीब सवा लाख लोग शामिल हुए थे। दिल्ली पुलिस का दावा अगर सही है तो उनमें से 989 लोग पुराने और गंभीर आपराधिक रिकार्ड वाले थे। उनके ऊपर क्या कार्यवाही होगी यह आने वाला समय बताएगा। दिल्ली पुलिस आपराधिक रिकार्ड वालों पर कार्यवाही के जंतर-मंतर आंदोलन का इन्तज़ार कर रही थी।
सवा लाख लोगों में 989 लोग आपराधिक रिकार्ड वाले मतलब करीब 0.8% लोग जंतर-मंतर पर ऐसे आए जिन पर पुराने और गंभीर आपराधिक रिकार्ड थे। अभी यह तय नहीं कि ये लोग जंतर-मंतर पर दर्शक की हैसियत से आए थे या आंदोलन में शिरकत के लिए या फिर कोई नया अपराध करने के लिए। यह बात जांच के बाद पता चलेगी।
एक जानकारी के अनुसार 18वीं लोक सभा (2024 चुनाव) में कुल 543 सांसदों में से 251 सांसदों (46 प्रतिशत) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 170 सांसदों (31 प्रतिशत) पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
इनमें से गंभीर भाजपा और कांग्रेस के क्रमश: 63 और 32 सांसद गंभीर आपराधिक मामले वाले हैं। सांसदों के मामले में दिल्ली पुलिस असहाय है। 46 प्रतिशत आपराधिक रिकार्ड वाले सांसदों ( जिनमें से 31 गंभीर आपराधिक मामले हैं) का कुछ बिगाड़ नहीं सकती। इसलिए वह आंदोलन में शामिल होने वाले 0.8% आपराधिक रिकार्ड वालों का डाटा जुटा रही है। बहुसंख्यक अपराधियों को छोड़कर अल्पसंख्यक अपराधियों पर कार्रवाई करने का प्रयास कर रही है।
इस प्रयास में भी वह कितना सफल होगी यह आने वाला समय बताएगा। हो सकता है पापुलर मेरठी की समझाईश उनको अपने कदम वापस खींचने के लिए मजबूर कर दे :
"मवालियों को न देखा करो हिकारत से
न जाने कौन सा गुंडा वजीर हो जाए।"
लोक सभा में 46 प्रतिशत आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की संख्या से अंदाज़ लगता है कि हमारे प्रतिनिधि कैसे हैं? जनता के लिए कानून बनाने के काम में कितने लोग ऐसे शामिल हैं जो ख़ुद ग़ैर क़ानूनी काम में लिप्त हैं।
लोक सभा में आपराधिक रिकार्ड वाले लोगों की संख्या देखकर कानपुर के भगवती प्रसाद दीक्षित 'घोड़े वाला ' की बात याद आती है।
भगवती प्रसाद दीक्षित कानपुर में तो घोड़े वाला के नाम से ही मशहूर थे । कुछ अखबार उनके लिये 'राबिनहुड आफ़ इंडिया' लिखते। कुछ 'डान्क्विजोड आफ़ इंडिया।' दीक्षितजी शहर में होने वाले हर लोकसभा हर चुनाव लड़ते। निर्दलीय। हर चुनाव हारते। जमानत जब्त होती। लेकिन अगला चुनाव फ़िर लड़ते।
दीक्षित घोड़े चुनाव प्रचार के लिए घोड़े पर चलते थे। वे कहते थे :
"देश में आज लल्लू, जगधर छाये हुये हैं। ये जनता को धोखा दे रहे हैं। जनता सब समझती है लेकिन कुछ बोलती नहीं है। इसीलिये ये जनता को लूट रहे हैं।
चुनाव में आदमी नहीं पैसा जीतता है। नोट से वोट खरीदे जाते हैं। जब तक देश में घोड़ेवाले की तरह के आम आदमी के चुनाव जीतने के हालात नहीं बनते तब तक देश की हालत नहीं सुधर सकती।"
दीक्षित जी की पार्टी के दो स्थायी सदस्य थे। एक वे खुद दूसरा उनका घोड़ा। वे कहते कि अगर वे चुनाव जीते तो घोड़े के साथ लोकसभा में जायेंगे। लोग पूछते कि लोकसभा में उनका घोड़ा कैसे रहेगा! इसपर वे जबाब देते:
"जिस संसद में सवा पाँच सौ गधे जा सकते है वहां मेरा एक घोड़ा क्यों नही रह सकता है!"
दीक्षित जी तो अब रहे नहीं । लेकिन उनकी बात अक्सर याद आती है। लोक सभा में बहुतायत कैसे लोगों की है यह वहाँ की कार्यवाही और बहस का स्तर देखकर समझी जा सकती है।
भगवती प्रसाद दीक्षित 'घोड़े वाला' के बारे में लिखी पोस्ट का लिंक टिप्पणी में। तस्वीर AI से बनाई।