Friday, August 19, 2005

उनका डर



वे डरते हैं
किस चीज से डरते हैं वे
तमाम धन -दौलत
गोला-बारूद-पुलिस-फौज के बावजूद?
वे डरते हैं
कि एक दिन
निहत्थे और गरीब लोग
उनसे डरना बंद कर देंगे।
-गोरख पांडेय

7 responses to “उनका डर”

  1. अनाम
    छोटी परन्तु बहुत तीखी कविता है| पान्डेय जी का नाम सुना है पहले| इनके बारे में कुछ बताइये|
  2. सुनील
    वाह, बहुत अच्छा. मैं इसका इतालवी में अनुवाद करने की कोशिश करुँगा. सुनील
  3. kali
    I have read this one before in English ! (basically same thought, different translation). Humm that makes it rather interesting, will try to find out where i read it. You are sure this was not plagarized, correct :) Even if it was who cares sounds good by itself.
  4. रवि कामदार
    अरे इन लोगो को तो इस जनता का कोइ डर नही होगा क्योकि वह जानते हे कि गरीब लोग और वह भी इस देश के, कभी भी नहि जागेन्गे. इसि लिये तो इन्दिरा गान्धी तक ने गरीबो कि भावना ओ से खेल लिया और शाशन भी कीया…मगर कविता बढिया है. अछ्ह्छ्ही कल्पना..
  5. फ़ुरसतिया » आशा का गीत
    [...] /www.flickr.com/photos/94063381@N00/36277299/” title=”Photo Sharing”> पिछली पोस्ट में गोरख पांडेय के बारे में पूछा था-� [...]

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