Monday, September 17, 2007

मटरगस्ती के लिये निकले


http://web.archive.org/web/20140419213820/http://hindini.com/fursatiya/archives/342

मटरगस्ती के लिये निकले

हम लगातार पढ़ते रहते और मजे में रहते अगर ये हफ्ता खतम बीच में न आ जाता। हम सोचे कि पढ़ने का काम अकेले करते रहे सो थोड़ा सामाजिक भी हो जायें। हफ्ता खतम होते ही हम अपना झोरा-झंडा उठा के पहुंच गये आशीष के यहां। आशीष आजकल पुणे में ही हैं। विप्रो कम्पनी को चूना लगा रहे हैं। पिछले दिनों ये कनाडा जाकर समीरलाल को चूना लगा के आये हैं सो हमें लगा कि बबुआ से बदला चुकाने के मौका मुफीद है।
हम पहुंचे तो आशीष हमारा इंतजार कर रहे थे। जिस जगह का पता बताया था वहां तक आ गये लेने भी। घर पहुंचे
तो चाय-साय भी हो गयी। इसके बाद बतकही का दौर चला तो आशीष ने रविरतलामी और समीरलाल के तमाम
लाल-गुलाबी किस्से सुनाये। जिसे हम मौका मुफीद जानकर आपको भी सुनायेंगे। चाय पीते-पीते हम एक किताब पढ़ने लगे कि आशीष ने जाने कौन सा जादू किया कि हमारे चश्में की कमानी पर हमारा ही पैर पड़ गया और कमानी चश्मे से बोली-कर चले हम फिदा जानो तन साथियों।
इस बीच आशीष ने अपनी पाक कला के जौहर दिखाने शुरू कर दिये। यह भी बताया कि वे चार मिनट में आटा माड़ने से शुरू करके दस रोटियां सेकने का रिकार्ड बना चुके हैं। दाल,चावल, सब्जी बना लेने के बाद आशीष ने कुछ समा ऐसा बांधा कि हम रोटियां बेलने के लिये खुद खड़े हो गये। हमें लगा कि बालक हमसे उट्घाटन कराके अरे,अरे आप रहने दीजिये करके खुद रोटियां बेलने लगेगा। लेकिन जो सोचा वो हुआ नहीं और आशीष ने पूरी बेशर्मी से हमसे पूरी बारह रोटियां बेलवा लीं और खिलखिलाते हुये सेंकते रहे।
आशीष के साथ रहने वाले साथी युवराज ने बताया कि बताया कि उन लोगों को बहुत दिन बाद रोटियां नसीब हो रहीं
थीं। हमारी कृपा से।
इस बीच आशीष की होने वाली पत्नी के फोन भी आये तो उसके यह पूछने पर कि क्या कर रहे हो आशीष ने कमरे की दीवार को ताकते हुये बताया कि बालकनी में खड़ा लड़कियां ताक रहा हूं।
खा-पीकर हम लोग सो गये। यह तय हुआ कि सबेरे रचना बजाज और उनके घर वालों से मिलने के लिये नासिक
की यात्रा की जायेगी।
हमारे पास इस सब बातों के प्रमाण फोटो भी हैं जो कि हम आपको दिखायेंगे। आप संतोष करिये। जब हम कर रहे हैं तो आप भी करिये न!
मुंबई में रहने के दौरान जन्मदिन भी धूम-धाम से मनाया। खूब मजे किये उसके किस्से सुनायेंगे। अभयजी ने तो
लिखा है वो आधा सच है आधे से ज्यादा गप्प। हम आपको बतायेंगे असल बात।

12 responses to “मटरगस्ती के लिये निकले”

  1. समीर लाल
    आगे क्या क्या आने वाला है उसकी ट्रेलरनुमा सूचना अच्छी लगी. पता नहीं आशीष ने क्या क्या बताया है मगर लगता तो नहीं था कि बालक झूठ बोला होगा. :)
    इन्तजार है!!
  2. श्रीश शर्मा
    आपके खुलासे का इंतजार कर रहे हैं जी। :)
  3. नीरज दीवान
    बहुत अच्छा किए आशीष भाई. फुरसतिया जी को पुराने दिन याद दिला दिए. अभय जी की तो सुन ली.. बाक़ी की गप्प आप सुनाओ, इंतज़ार रहेगा.
  4. राजीव
    इस बीच आशीष की होने वाली पत्नी के फोन भी आये तो उसके यह पूछने पर कि क्या कर रहे हो आशीष ने कमरे की दीवार को ताकते हुये बताया कि बालकनी में खड़ा लड़कियां ताक रहा हूं।
    अरे भाई, संजय को भूल गये क्या? महाभारत वाले संजय को! शायद ऐसी ही दिव्य दृष्टि पायी हो आशीष जी ने!
  5. अनिल रघुराज
    आप रोटी बनाने को लेकर खामखां दुखी हो रहे हैं। अरे सोचिए कि आपको आशीष और युवराज, दो-दो आत्माओं की तरफ से दुआएं मिली हैं।
  6. संजय बेंगाणी
    फोटो व पूर्ण-विवरण की प्रतिक्षा है. आशा है अगली मटरगश्ती से पहले निपटा देंगे. :)
  7. alokpuranik
    बढ़िया है फुरसतियाजी मजे की छन रही है। अईसा न हो कि बाहर के पेस्ट्री काजू इतने अच्छे लगने लग जायें कि कान ही पुर वापस आने का मन ना बने।
  8. रवि
    आशीष ने रविरतलामी और समीरलाल के तमाम
    लाल-गुलाबी किस्से सुनाये….जिसे हम मौका मुफीद जानकर आपको भी सुनायेंगे।
    ???? लाल-गुलाबी किस्से …
    बिलकुल. हमें भी तो पता चले कि वे किस्से क्या हैं… :)
  9. Sanjeet Tripathi
    मजे के किस्से कब सुना रहे हैं। चलिए घर में रोटियां बेलने की आपकी प्रेक्टिस से आशीष और उसके दोस्तों का भला हुआ !
    असल बात सुनने का इंतजार रहेगा
  10. पुनीत ओमर
    बड़े दिनों से कसम खाये बैठा था कि जब भी कमेण्ट मारूँगा तो वो पहला ही होना चाहिये वरना नहीं। दो महीने से आपका चिट्ठा पढ़ रहा था पर सुबह जल्दी उठ नहीं पाता तो कभी पहली टिप्पणी मारने का मौका मिला नहीं क्योंकि 10 या 11 बजे तक तो बाकायेदा कई आ ही जाते थे। आज मिला है और वो भी शाम के 6 बजे।
    फ़ुरसतिया जी, मेरा भी प्रणाम स्वीकार करें। आपकी साहित्यिक ब्लॉगरी की महान प्रतिभा को मेरा कोटि कोटि नमन।
  11. विवेक सत्य मित्रम्
    ब्लागवा्णी के जरिए आप तक पहुंचा। आपको नियमित रुप से ब्लागवाणी पर देखना वाकई बेहद सुखद अनुभव है। हम लोगों ने एक कम्यूनिटी ब्लाग बनाया है, अभी बहुत लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। हम चाहते हैं कि इस ब्लाग से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें ताकि अपनी बात कहने सुनाने का एक पब्लिक प्लेटफार्म बनाया जा सके। अगर आप चाहें तो http://www.batkahee.blogspot.com पर क्लिक कर इस ब्लाग तक पहुंच सकते हैं। और अगर आपको ठीक लगे तो आपका स्वागत है…। अपने बारे में एक संक्षिप्त परिचय लिखकर…इस ब्लाग को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें। इनविटेशन लिंक http://www.blogger.com/i.g?inviteID=7959074924815683505&blogID=1118301555079880220 पर क्लिक करते ही आप इस ब्लाग ‘आफ द रिकार्ड’ के सदस्य बन सकते हैं। आपका स्वागत है…।
    विवेक सत्य मित्रम्
  12. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
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