Sunday, September 02, 2007

ब्लागिंग छोड़ने के चंद फ़ायदे

http://web.archive.org/web/20140419212940/http://hindini.com/fursatiya/archives/330

ब्लागिंग छोड़ने के चंद फ़ायदे

आज ज्ञानजी अपने वजन से कुछ चिंतित से दिखे। अपना वजन पोस्ट पर रख दिया। जीतेंन्द्र के यहां भी कुछ धमकी मिली होगी सो हमारा कंधा लेकर बयान कर दी।
उधर आलोक पुराणिक का भी शटर आज डाउन है। ज्ञानजी तो कल से ही कुछ आशंकित थे कि गंजपुराण के आगे ज्ञानचर्चा कैसे होगी।
इन सब महानुभावों को हम ब्लाग के ही माध्यम से जानते हैं।(आलोक पुराणिकजी से थोड़ा सा हेलो-वेलो पहले से था) । अब उसी में कमी की साजिश ये लोग कर रहे हैं। कालिदास बनने का प्रयास। :)
बहरहाल, संभव है ज्ञानजी यह बात समझाने में सफ़ल हो जायें कि ब्लागिंग बंद करने से वजन बढ़ना बंद हो जाता है तो वो दिन दूर नहीं कि हरेक जिम के बाहर एक-एक कैफ़े खुला हो। वजन कम करने के लिये पहले ब्लागिंग सिखाई जाये। महीने भर करायी जाये फ़िर बंद करा दी जाये। वजन में कमी दिखाई जाये। यह भी हो सकता है कि जिम वाले कहें कि वजन कम कराने में सर्वोत्तम परिणाम के लिये पहले ब्लागिंग का प्रमाणपत्र लाइये। नारद, चिट्ठाजगत, ब्लागवाणी याफिर प्रतीक पाण्डेय से प्रमाणपत्र लाइये कि आप कम से कम लगातार दो महीन ब्लागिंग करते रहे। प्रतीक जिस दिन क्लास में लेट हो जायें, टीचर से कहें सरजी,आज फ़िर लेट हो गये, ब्लागिंग सर्टिफ़िकेट बांट रहे थे।
हालांकि आलोक पुराणिक का मानना है कि ब्लागर,आशिक, सिपाही, स्मगलर-ये धंधे ऐसे हैं कि एक बार जो बन गया , सो बन गया, फिर पूरी जिंदगी नहीं छूटता लेकिन ऐसा संभव है कि लोग कहें कि अब बस ब्लागिंग बंद। आज से नयी जिंदगी शुरू। ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिये ब्लागिंग छोड़ने के कुछ फ़ायदे यहां बताये जा रहे हैं। इनमें फ़ायदे की मात्रा इस पर निर्भर करती है कि आप ब्लाग नदी में कितना गहरे उतरे हुये हैं। आप ब्लागिंग में जितना गहरे उतरे होंगे ब्लागिंग छोड़ने पर आपको उतने ही अधिक फ़ायदे उतराते दिखेंगे। तो न हो तो बता ही दें कुछ फ़ायदे। इनको हड़बड़ा कर पढ़ने के पहले आप ब्लाग-ब्लागर-ब्लागिंग से संबंधित कुछ जानकारी हासिल करते चलें तो बेहतर होगा। आइये अब बताते हैं आपको कुछ ब्लागिंग छोड़ने के फ़ायदे!
१. ब्लागिंग छोड़ते ही आपके अपने बारे में तमाम भ्रम दूर हो जायेंगे। अगर अभी तक आपको यह लगता रहा कि आपका ब्लाग पढ़े बिना लोगों का खाना नहीं पचता तो आपका यह भ्रम दूर हो जायेगा। आप देखेंगे कि आपका ब्लाग बंद होने के बावजूद न तो पेट के डाक्टरों के यहां मरीज बढ़े और न ही हाजमोला की बिक्री बढ़ी।
२. ब्लागिंग बंद करते ही आपके जीवन में सत्य की मात्रा बढ़ जायेगी। ब्लागिंग के दौरान आप सच्चे-झूठे कमेंट करते रहे। जिन पोस्टों को पूरा पढ़ते तक नहीं उनके लिये भी बहुत अच्छा, क्या खूब लिखा है लिख मारते हैं। इस झूठ में कटौती होगी। साथी लोगों में भी आपके ब्लाग के लिये झूठ बोलने में कमी आयेगी। आप अनजाने ही सत्यवादी हरिशचन्द्र के नजदीक हो जायेंगे। आपको भारत में चौतरफ़ा बढ़ते मालों की तरह अपने चारो तरफ़ सच्चाई का बोलबाला दिखने लगेगा।
३. अगर आप नियमित ब्लागर हैं तो नयी पोस्ट के लिये आइडिया की खोज में करवटें बदलते रातें बीतती होगी। नया आइडिया आते ही आप उसे डायरी में भरने के लिये वैसे ही भागते होंगे जैसे नल में पानी आते ही उसे बाल्टी भरने के लिये भागते हैं। इस चक्कर में कई बार आप गिरे-पड़े भी होंगे। तमाम हड्डी के डाक्टरों से घनिष्ठता हो गयी होगी। डरते रहने के बावजूद जीवन साथी से लड़े भी होंगे। ब्लागिंग छोड़ते ही आप निश्चिंत होकर सो सकते हैं।
४. ब्लागिंग के दौरान आपके पास तमाम आइडिये आते होंगे। उनको पोस्ट करने के चक्कर में आप हलकान रहते होते होंगे। आइडिया भारत देश की जनसंख्या से मुकाबला करते होंगे और उनका पेट पोस्ट से न भर पाते होंगे। अपने प्यारे आइडियों को आप उसी तरह असहाय दम तोड़ते देखते रहेंगे जैसे सरकार विदर्भ मे किसानों की तरह पटापट मरते असहाय देखती रहती है। आइडियों की अकाल मौत का दुख आपके दिल में बोझ बनकर बैठा डसता रहेगा। ब्लागिंग बंद करते ही आप इन तमाम दिल के झमेलों से मुक्त हो जायेंगे।
५. ब्लागिंग सफ़र के दौरान आपने देखा होगा कि आप अपनी नयी पोस्ट करते ही उजबक की तरह टिप्पणी की राह देखते रहते हैं। हर दूसरे ब्लाग पर बेमतलब अच्छा, बहुत सही जैसी बाते लिखने लगते हैं जिससे कि उसमें भी बदले की भावना जागे। तमाम ऐसे-वैसे लोगों को नमस्ते, प्रणाम, क्या हाल हैं, क्या हो रहा है जैसी बातें करने लगते हैं जिनसे आप सामान्य स्थिति में बात भी न करना चाहते हों। ब्लागिंग बंद करते ही आपकी असामान्य स्थिति में तुरन्त सुधार हो जायेगा।
६. नियमित ब्लागिंग करते हुये आप सबसे पहला बनने के चक्कर में तमाम ऐसी बातें लिख जाते हैं जिनके कारण आप बाद में शर्मशार होते हैं। कभी अचकचाकर माफ़ी-वाफ़ी भी मांगने लगते हैं ताकि लोग आपको शरीफ़ जैसा समझें और दूसरे को सामान्य। ब्लागिंग बन्द करते ही आप इन तमाम दिखावटी चोंचलों से मुक्ति पा जाते हैं।
७. ब्लाग बंद करते समय की आपकी पोस्ट ऐतिहासिक पोस्ट जैसी मान ली जाती है। देखा गया है कि जिस पोस्ट में ब्लागर अपनी ब्लागिंग बंद करने की घोषणा करता है उसमें सबसे ज्यादा टिप्पणियां होती हैं। जीवन के सबसे मार्मिक उपदेश अगर आपको देखने हों तो आप किसी ब्लागर के ब्लाग बंद करने की घोषणा वाली पोस्ट में देखिये। प्रेम के भूखे व्यक्ति को कहीं संतोष न मिले तो आप उसका ब्लाग खुलवा कर बंद करवा दीजिये। जिन ब्लागों पर टिप्पणियों का अकाल रहता है उसके तक बंद होने पर कमेंट-सुनामी आ सकती है। आप अपना ब्लाग बंद करते ही जीते जी ऐतिहासिक महत्व की वस्तु बन सकते हैं।
८. आपको ब्लागिंग के दौरान तमाम लोगों के लेखन, कविताई, तकनीकी लटके-झटके देखकर ऐसा लगता होगा कि हाय, हम ये क्यों न कर पाये। कभी -कभी हीन भावना का भी शिकार भी होते होंगे। जीतेंन्द्र को शुरुआती दिनों में यह अफ़सोस होता था कि काश हम भी महिला ब्लागर होते। (सही भाई टिप्पणी की है।) इस तरह की तमाम हीन भावनाओं से आप उसी क्षण मुक्ति पा लेते हैं जिस क्षण आप अपनी ब्लाग-चदरिया जस की तस धर देते हैं।
९.ब्लागिंग छोड़ते ही घर वालों की निगाह में आप अचानक बेहद शरीफ़ इन्सान बन जाते हैं। आप अपने जीवन साथी से ऐंठ के कह सकते हैं- तुम्हारे लिये हम जान क्या ब्लागिंग तक छोड़ सकते हैं। पत्नियां अपने पति के प्यार के बारे में डींगें हांकते हुये कह सकती हैं देखो जी, ये हमको अब भी इत्ता चाहते हैं कि हमारे कहने पर इन्होंने ब्लागिंग तक छोड़ दी। उस ब्लाग की तरफ़ अब आंख उठा के भी नहीं देखते जिसमें पोस्ट लिखने के बाद तमाम-तमाम नामों से खुद कमेंट लिखते थे। अनाम टिप्पणियां तक करते थे। गाली-गलौज तक पर उतर आते थे। पति भी इसी तरह के कुछ डायलाग बोलते पाये जायेंगे। :)
१०. कुंवारे ब्लागर लैला -मजनू टाइप लाइन फ़ालो करते हुये एक दूजे के लिये बलिदान योजना पर गुफ़्तगूं करते हुये कसमे-वादे कर सकते हैं ये करेंगे, वो करेंगे और करने में अगर कभी कमी महसूस हुयी तो तुम्हारे लिये ब्लागिंग तक छोड़ देंगे।
११. ब्लागिंग छोड़ते ही आप अपने तमाम दोस्तों से अपनी नयी पोस्ट के चर्चे करने बंद कर देंगे। दोस्तों की निगाहों में आपका कद ऊंचा हो जायेगा। जो दोस्त आपको देखते ही कटने लगते थे, सटने लगेंगे। आपकी हर बात पर भड़कने वाले साथी आपकी बेमतलब की बात पर भी पटने लगेंगे।
१२. ब्लागिंग के दौरान आपने पाया होगा कि आप बेमतलब ग्लोबल होते गये। घर में बीबी को जुकाम है और आप सोमालिया के अकाल पर च्च्च्च्च्च, अफ़सोस कर रहे हैं। न वहां का पेट भर पाये न घर में कायदे के पति बन पाये। ब्लागिंग बंद करते ही इस दुविधा जनक स्थिति से उबरेंगे। ग्लोबल से लोकल बनेंगे। औकात में आते ही आप अपने को सुविधा जनक, सुकून देह स्थिति में पायेंगे।
१३.नियमित ब्लागिंग करते हुये आप न मनचाहा ,सुकूनदेह पढ़ पाते हैं (जो पोस्ट हुआ वही तो पढ़ेंगे) न अच्छा लिख पाते हैं (सच है भाई ये तो आप भी मानेंगे)। ब्लागिंग से मुक्ति पाते ही आपको तमाम सारे अरमान पूरे करने का समय मिल जाता है। तमाम सारा अच्छा लेखन पढ़ने की संभावनायें बन जाती हैं। अब यह बात अलग है कि बाद में आप पायें समय वैसे ही बरबाद हो रहा हैं।
१४. आप अगर नियमित ब्लागर हैं तो निश्चित तौर पर आप कुछ लोगों को कम पसन्द करते होंगे कुछ लोगों को ज्यादा। ब्लागिंग बंद करते हुये आप अपने ब्लागिंग बन्द करने का कारण उन लोग ठहरा सकते हैं जिनको आप कुछ कम पसन्द करते हैं। किसी ब्लाग संकलक की हरकतों को भी आप अपने ब्लाग को बंद करने का कारण बता सकते हैं। आप बिना उंगली कटाये शहीदाना गौरव पा जायेंगे।
१५. ब्लागिंग छोड़ते ही आपको अपने ऊपर गर्व होगा। आत्मविश्वास में बहुगुनी बढ़ोत्तरी होगी। किसी जगह जब त्यागचर्चा करते आप अपने बारे में डींग हांकते हुये कह सकते हैं- मैंने ब्लागिंग छोड़ दी भाई। जो आदमी ब्लागिंग छोड़ सकता है वह क्या नहीं छोड़ सकता है।
१६.किसी बीमारी के लिये जब आप डाक्टर के पास जाते हैं तो वह पूछता है- कोई नशा-वशा तो नहीं करते! पहले आपको किसी नशे की गिरफ़्त में न होने का अपराध बोध सालता होगा। ब्लागिंग छोड़ते ही आप चहककर बता सकते हैं -करते थे जी, ब्लागिंग की भयंकर लत थी, सोहबत का असर था लेकिन अब सब छोड़ दी। यह चहकन इतनी खुशनुमा होगी कि कभी-कभी आप बिना बीमारी के डाक्टर के यहां चलते चले जायेंगे।
१७. अगर आप अपने को कुछ खास टाइप का, महिमावान आइटम मानते हैं तो ब्लागिंग के दौरान आपको इस महिमा में बट्टा लगता नजर आयेगा। यहां बराबरी का माहौल होने के कारण आप कुछ साथी ब्लागरों की संगति के कारण अपनी महिमा की गेंद को किसी मीनार की चोटी से नीचे गिरते हुये देखते रहते होंगे। असहाय। समुद्र की तरह- महिमा घटी समुद्र की, रावण बसा पड़ोस। ब्लागिंग को तलाक देते ही आपकी महिमा का सेंसेक्स उचकने लगेगा। आपको लगेगा कि आप पुन: महिमा मंडित हो गये।
१८. ब्लागिंग के दौरान आपकी सारी कमियों का ठीकरा ब्लागिंग के सिर फोड़ा जाता रहा होगा। वे क्या करेंगे उनको तो ब्लागिंग से ही फ़ुरसत नहीं है। ब्लागिंग के आगे इनको कुछ सूझता ही नहीं है। ब्लागिंग ही इनका ओढ़ना-बिछौना हो गया है। सपने तक में बड़बड़ाते हैं आपकी टिप्पणी अभी तक नहीं आई भाईसाहब, मैंने तो कर दी अभी-अभी। आदि-इत्यादि। गरज यह कि आपके व्यक्तित्व के तमाम दूसरे दुर्गुण ब्लागिंग की चकाचौंध में दिखाई देने बंद हो जाते हैं। खाद-पानी के अभाव में मुर्झाने लगते हैं। रणथम्भोर के बाघों की तरह विलुप्ति की कगार पर पहुंचे ये हाशिये पर पड़े ये आपके दुर्गुण आपके ब्लागिंग बंद करते ही सामने आकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगते हैं।आपकी दुर्गुण-फ़सल फ़िर से लहालहा उठती है। आप आशावादी परचम लहराते हुये और गुनगुनाते हुये( मन करे तो इठलाते भी लें कौन रोकेगा) कह सकते हैं- जरा सा पानी मिटी और जमीन जाग उठी/ लगता है मिट्टी में अभी जान बाकी है।
१९. ब्लागिंग के दौरान आपके अजीज कहलाने वाले भी आपके चरित्र हनन (अगर कभी रहा हो) का प्रयास करने लगते हैं। अपनी तमाम हरकतें आपके ऊपर थोपकर कहते हैं भाभी को बता देंगे। अपने इस हथियार को ये इतना कारगर मानते हैं कि अगर ये बुश की जगह होते तो सद्दाम से कहते बता दो हथियार कहां रखे हैं वर्ना हम भाभी को बता देंगे। क्या पता आस्टेलिया वाले स्लेजिंग को कारगर न पाकर सचिन से कहते होंगे- आउट हो जाओ भैये वर्ना अंजलि भाभी को बता देंगे। ये तो कहो ये आजादी के बाद डिलीवर हुये वर्ना आजादी की लड़ाई दो मिनट में निपटा देते। जाते माउंटबेटन के पास। बोलते आजाद करते हो या जाऊं भाभी के बताने! :) ये तो कहो यह हथियार अभी लोगों को पता नहीं चला है वर्ना लोग भाभियों को बता के दुनिया के सारे झगड़े निपटाने लगते। शायद मशर्रफ़ से नवाज शरीफ़ कहते- छोड़ते हो गद्दी या भाभी को बताऊं। (भाभियों के ऐसे नठिया देवरों से भगवान बचाये।) बहरहाल, ब्लागिंग छोड़ते ही आप इन सब झमेले से मुक्त हो जायेंगे। आप ब्लागिंग छोड़ते ही जो अगली सांस लेंगे उसमें चैन ही चैन भरा होगा। रेलवे के सामान्य डिब्बों में भरे यात्रियों की तरह। :)
२०. ब्लागिंग छोड़ते ही आपको जैसा भी महसूस हो आप उसको स्वर्गिक सुख कह कर बैठे ढाले बिना स्व्रर्गवासी हुये स्वर्गिक सुख लूट सकते हैं। ब्लागिंग छोड़ने की तपस्या की पर इत्ते पर तो आपका कह बनता है। आप इस सुख का व्यवसायिक उपयोग भी कर सकते हैं। आप स्वर्गिक सुख का अहसास कराने की दुकान खोल सकते हैं। पैसा हो तो चैनेल चला लें। सबेरे-सबेरे आप इंडीब्लागिस वाली टी शर्ट पहने हुये प्रवचन दे सकते हैं -स्वर्गिक सुख कैसे प्राप्त करें। ब्लागस्पाट का स्वर्ग ऐसे प्राप्त करें, वर्डप्रेस में ऐसे धंसे। अपना खुद का स्व्रर्ग ऐसे बनाये!

२१. एक
 बार आपकी ब्लागिंग छोड़ने से फ़ायदे की बात को लोगों ने मान लिया तो फ़िर तो आप दुनिया की कोई भी चीज छोड़ने के बारे में आत्मविश्वास से लोगों को सीख देते रह सकते हैं। जैसे अपने देश में जो भी तकनीकी समस्या होती है उसका इलाज आई.आई.टी. वाले ही कर पाते हैं। दुनिया में कहीं भी लफ़ड़ा करवाना हो अमेरिका की सेवायें ली जाती हैं वैसे ही आपकी ख्याति भी किसी भी चीज को छुड़ाने वाले के रूप में फ़ैलती जायेगी।
ये कुछ फ़ायदे हैं जो आपको ब्लागिंग छोड़ने के बाद तुरन्त मिल जायेंगे। लेकिन फ़ायदे और भी हैं जिनको हम अभी बता नहीं रहे हैं।लेकिन हम आपसे एक बात कहना चाहेंगे कि आप इन पर अमल करने से पहले यह समझ लें कि इनसे होने वाले फ़ायदों की हमारी कोई गारण्टी नहीं है। फ़ैशन की दौर में वैसे भी कोई गारण्टी नहीं दी जा सकती। आप यह लेख पढ़कर फ़ायदों के लालच में आने से बचने का प्रयास करते हुये अपनी बची -खुची बुद्धि का इस्तेमाल करते हुये सोचे कि ये फ़ायदे जिसने गिनाये हैं वह खुद नियमित ब्लागर है और निकट भविष्य में ब्लागिंग बंद होने के फ़ायदे उठाने के सहज लोभ से बहुत दूर है।
इसके बाद भी आप ब्लागिंग बंद करने का फ़ायदा उठाना ही चाहते हैं तो आपके फ़ायदेमंद भविष्य की हम मंगलकामना करते हैं।

13 responses to “ब्लागिंग छोड़ने के चंद फ़ायदे”

  1. प्रेम पीयूष
    अनूप जी उर्फ सुत्रधार,
    जो लोग सोयें रहें हमारी तरह, तो आप बोले प्रेम से – भाई जाग जाओ । जो भाग रहे तो उन्हें अब भागने का गुण बता रहे – हा हा ।
    जीतू जी से एक बार जब मिला था तो ऐसी ही बातें बता रहे थे – दोष “ब्लागिंग के नशा” में नहीं बल्कि यह समझने में है कि फुरसत के समय में अभिव्यक्ति की इस उत्तम माध्यम (नशे) को कैसे उपयोग किया जाए ।
    आपके केस में, दो साल से देख रहा हूँ, आपकी फुर्सत की ब्लांगिग से अब तो हमें चिढ़ सी हो रही है ।
  2. अजित वडनेरकर
    ग़जब है साहब ! इतनी सारी बातें जानते हैं आप ब्लागिंग छोड़ने के फायदों के बारे में ?
    इनमें से एक भी बात ऐसी नहीं जिस पर बाल की खाल निकालने वाली टिप्पणी की जाए। पुऱाने खिलाड़ी हैं सो सबकुछ पहले ही समझे बैठे हैं आप। सही कहा आपने , लागी नाही छूटे वाला मामला ही है यह। मैने तो इसे सिर्फ समय की कमी की वजह से छोड़ने की बात कही वर्ना एक फायदा तो मुझे हुआ कि शब्दों के सफर की जिस मुहिम में मैं लगा हूं पहले आमतौर पर हफ्ते में एक या दो कड़ियां बन पाती थीं मगर अब हफ्तेभर लिखना चलता है। जाहिर है अखबार के कॉलम में तो सप्ताह में एक ही काम आना है। मगर अब लगता है कि पुस्तकाकार निकालने की बात जल्दी पूरी हो जाएगी। बाकी बतरस, छींटाकशी , नुक्ताचीनी वाली चकल्लस से दूर हूं ( टाइम ही नहीं है। ) इसलिए कुछ दूसरी परेशानियों से भी बचा हुआ हूं। हां, ब्लागिंग छोड़ने की बात कहने के पीछे एक वजह इस बात का मलाल भी है कि जिन साथियों की टिप्पणियां अक्सर मिलती रहती हैं उनसे भी नियमित संवाद नहीं बना पाता। दुःख होता है इसका। अपनी पोस्ट नक्की कर दी और छुट्टी। ऐसा नहीं होना चाहिये न !
  3. समीर लाल
    यह सब बातें वैसी ही हैं जैसे कोई किसी दलदल में फंसे आदमी को देख किनारे बैठकर सीख दे रहा हो कि दलदल में न फंसने के फायदे.
    अरे भाई, पहले निकलने का रास्ता तो बताओ फिर तो सारे फायदे खुद ब खुद जान जायेंगे.
    कौन निकल पाया है इस घोर दलदल से आजतक. एक एक सुरमा को घोषणा करते देखा है..मगर कितने सफल हुये. रोज रात चुरखी बांध कर सोते है कि बस आज आखिरी पोस्ट कर ली, अब कल से तौबा कर लेंगे-माने न माने वो ही चुरखी जगाती है आधी रात में चैक करने कि कोई टिप्पणी आई कि नहीं. :)
    वैसे फायदे तो सभी एक से एक हैं.बधाई.
  4. ज्ञान दत्त पाण्डेय
    यह पोस्ट तो नोट कर ली है. जिस दिन छोड़ेंगे, उस दिन लास्ट पोस्ट लिखने में इससे कुछ/बहुत टीपा जा सकता है.
    समीर जी की टिप्पणी में सशोधन मांगता – यह तो दलदल में आकण्ठ फंसा व्यक्ति दूसरे दलदल में फंसे को सलाह दे रहा है कि दलदल से निकल लो, जिससे सारे दलदल पर आकण्ठ फंसे की मिल्कियत रहे! :)
    बहुत बढिया लिखा है. आप दलदल में शोभायमान रहें! :)
  5. आलोक पुराणिक
    झक्कास च बिंदास।
    ब्लागिंग छोड़ने का एक फायदा यह भी है कि बंदा ज्यादा क्रियेटिव हो जाता है। ब्लागिंग छोड़कर वह फिर टाइम वेस्ट करने के नये तरीके तलाशता है। यह खोज उसे ज्यादा क्रियेटिव बनाती है।
  6. प्रत्यक्षा
    अपने ज्ञान पर खुद अमल मत करने लगियेगा । ब्लॉगिंग ज़ारी रहे फुरसत से ।
  7. aroonarora
    ये टिपियाना छोडने के फायदे भी बता दो जी..वरना हमे आपके घर का नंबर पता है भाभी से बतियाने मे देर भी नही लगेगी..बाकी आप आरकुट पर कहा कहा क्या टिपियाते है स्क्रेच लिख डाल रहे है हमे तफसीस करनी पड जायेगी..अप समझ रहे है ना..वैसे अब जब आप ब्लोगिंग छोड ही रहे हो तो फुरसत मे क्या करोगे..? खाम्खा घर मे झगडा कर के समय पास करने से अच्छा आप भी समीर भाइ की श्रेणी मे आ जाओ .टिपियाने का कम भी बुरा नही है..? मेरे ब्लोग पर तो आप दिन मे आठ दस बार भी टिपियाओगे तो चलेगा..मै कतई बुरा नही मानूगा..:)खास आपके लिये एक शेर अर्ज है,जो आपने ही सुनाया था पिछले दिनो याद होगा..?
    “मैने फुरसत मे एक शाम गुजारी थी
    वो शाम भी कैसी थी हर शाम पर भारी थी
    कुछ ना करने की कोशिश भी बुरी है यारो
    हम मूड मे थे,वो लडने पे उतारू थी”
    तो अनूप भाइ जारी रखिये भाग कर कहा जायेगे..
  8. Sanjeet Tripathi
    शानदार!!
  9. सागर चन्द नाहर
    हम तो छोड़ने लगे थे दुई ठो बार परन्तु आपसे हमारा सुख नहीं सहन हुआ और फिर से हमें ले आये यहाँ और २१ फायदों का लाभ नहीं उठाने दिया। :(
    क्या करें २१ फ़ायदे उठाने की कोशिश करें क्या एक बार फिर….?
    २२वाँ फायदा मैं बता देता हूँ, आफ लेख में नीचे जोड़ दीजियेगा।
    २२.ब्लॉगिंग छोड़ते ही आप फुरसतिया ब्रांड लम्बे लम्बे लेख पढ़ने से बच जाते हैं, अगर आप ब्लॉगिंग नहीं छोड़ते तो टिप्प्णी की लालच में आपको फुरसतिया लेख पढ़ने पड़ते हैं ( भले ही आप लेख थोड़ा उपर से पढ़ें, बीच में से गुलटी मारकर और थोड़ा नीचे से पढ़तें हों)
    :) :)
    स्माईली लगा दी गई है अन्यथा ना लें।
  10. जीतू
    सही है, सारी व्यथा कथा एक ही बार मे झिला दिए हो। वैसे तो हमको पूरा पता है कि तुम ये झामा यूं ही मस्ती मस्ती मे ठेल रहे हो, कौनो छोड़ के जाने वाने का पिलान तो नही बनाए हो?
  11. श्रीश शर्मा
    धन्य है ये फायदे पढ़कर तो छोड़ने का मन कर रहा है, लेकिन कौनो तरीके भी बताते छोड़ने के तो बात बनती।
    वैसे बहुत गंभीर चिंतन कर के लिखा है, साधुवाद! :)
  12. avinash vachaspati
    जान भी जाएगी पर मुझसे
    ब्लॉगिंग छोड़ी नहीं जाएगी
    बीच बीच में ब्रेक जरूर
    लगाता रहूंगा चलाता रहूंगा
  13. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
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