Tuesday, October 28, 2008

दीपक से साक्षात्कार

http://web.archive.org/web/20140419220213/http://hindini.com/fursatiya/archives/551

37 responses to “दीपक से साक्षात्कार”

  1. ghughutibasuti
    वाह, दीये का दुख सुनकर तो हम भी दुखी हो गए । परन्तु पहले दीये जलाने की तैयारी कर लें फिर अगले साल तक के लिए उनके लिए दुखी भी हो लेंगे ।
    आपको व आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।
    घुघूती बासूती
  2. दिनेशराय द्विवेदी
    बहुत सुंदर साक्षात्कार! आज दीवाली के दिन इस से अच्छा हो ही नहीं सकता कुछ भी।
  3. VIVEK SINGH
    इमोशनल कर दिया . आप पर्याप्त सफल रहे अपने उद्देश्य में .
  4. ताऊ रामपुरिया
    बहुत दिल को छूने वाली रचना ! शुभकामनाएं !
  5. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'
    दीपावली के शुभ अवसर पर श्री दीपक जी के साथ आपका और मिर्जा का इंटरव्यू पढ़ कर आँखे नम हो आईँ, गला रौंध सा गया. किसी तरह बस आपके संवेदनशील हृदय को दाद देने टिप्पणी लिख पा रहे हैं ताकि जितने दिन यह संवेदनशीलता खींच पाये, खिँचती रहे..भले ही घसीट घसीट कर.
    इस विशेष मौके पर मंच से इस बेहतरीन शेर के लिए भी दाद देना चाहूँगा:
    जो सुमन बीहड़ों में, वन में खिलते हैं
    वे माली के मोहताज नहीं होते,
    जो दीप उम्र भर जलते है
    वे दीवाली के मोहताज नहीं होते।
    जिसने भी कही है, बहुत उम्दा बात कही है.
    मौके के अनुरुप आपको और आपके परिवार को पुनः दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.
  6. Prabhat Tandon
    बेहतरीन अभिव्यक्ति , दीपवली की बहुत-२ शुभकामनायें !!.
  7. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    वाह, इतनी सुन्दर पोस्ट पर – दिवाली के दीये तुम्हें भेजता हूँ; अन्धेरे में अपना गुजारा चलेगा!
    ग्रेट पोस्ट सारे दीये डिजर्व करती है।
  8. VIVEK SINGH
    Prabhat Tandon जी का फोटू दिखा रहे हैं और बाकी सबको हुडुकचुल्लू बना दिया . अन्याय .
  9. - लावण्या
    अनूप भाई साहब हमेँ तो मिट्टी का दीपक ही बहुत भाता है – आपको दीपावली की शुभकामनाएँ – परिवार के सँग खूब आनँद करेँ -
  10. राज भाटिया
    दीपावली पर आप को और आप के परिवार के लिए
    हार्दिक शुभकामनाएँ!
    धन्यवाद
  11. siddharth shankar tripathi
    वाह! क्या बात है…। बहुत मजेदार पोस्ट रही ये भी।
    ============================
    !॥!दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!॥!
    ============================
  12. kanchan
    चाँद से कह दो अभी मत निकल,
    ईद के लिए तैयार नहीं हैं हम लोग।
  13. sumant mishra
    बन्धु,तीन व्यक्ति आप का मोबाइल नम्बर पूँछ रहे थे।मैनें उन्हें आप का नम्बर तो नहीं दिया किन्तु आप के घर का पता अवश्य दे दिया है।वे आज रात्रि आप के घर अवश्य पहुँचेंगे।उनके नाम हैं सुख,शान्ति और समृद्धि।कृपया उनका स्वागत और सम्मान करें।मैने उनसे कह दिया है कि वे आप के घर में स्थायी रुप से रहें और आप उनकी यथेष्ट देखभाल करेंगे और वे भी आपके लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे।प्रकाश पर्व दीपावली आपको यशस्वी और परिवार को प्रसन्न रखे।
  14. विजय गौड
    आपका अंदाज खूब है।
  15. Tarun
    मिट्टी के दिये के बुरे दिन इंडिया में आये होंगे, यहाँ तो हमने मिट्टी के ही दिये जलाये हैं।
    हमारी सहमति–असहमति को तवज्जो दिए बग़ैर मिर्ज़ा हमको टाँग के वैसे ही चल दिए जैसे अमेरिका ब्रिटेन के साथ चलता है।
    ऊपर की लाईन में कुछ तो मीसिंग है, अगर ऐसे कहा जाता तो कैसा होता – “हमारी सहमति–असहमति को तवज्जो दिए बग़ैर मिर्ज़ा हमको टाँग के वैसे ही चल दिए जैसे अमेरिका ब्रिटेन को साथ लिये चलता है। “
  16. gagansharma09
    आपको सपरिवार दीपोत्सव की शुभ कामनाएं। सब जने सुखी, स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें। यही प्रभू से प्रार्थना है।
  17. SHUAIB
    सच्चे मन से दिल की बातें लिखने मे आप कमाल रखते हैं
    आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
  18. प्रियंकर
    ‘वह रोशनी में रोशनी का झंडा फहराता है। हमारी तरह अंधेरे से नहीं लड़ता।’
    क्या बात है . दीपक का काम अंधेरे से लड़ना है,रौशनी में रौशनी का झंडा फहराना नहीं . बहुत सही लिखा है आपने .
    दीपक की मिट्टी और जिस मिट्टी से हम बने हैं उस मिट्टी में बहुत गहरा रिश्ता है . इसीलिए तो तमाम सोडियम-लैम्प और सीएफ़एल के बावजूद मन मिट्टी के दिये की ओर ही झुकता है . उसी के लिए अकुलाता है .
  19. Shiv Kumar Mishra
    शानदार..
  20. Ghost Buster
    हम समझ गए. यहाँ दीया भी है, मिर्जा भी और सुन्दरी भी. तो दीपावली पर ‘सुन्दरी दीया मिर्जा’ की जगमगाहट युक्त ये अनूप पोस्ट तो अव्वल नंबर पाना ही हुई. हप्पी दीवाली.
  21. डा. अमर कुमार
    बेहतरीन… बस और क्या ?
    सिम्पली नथिंग बट बेहतरीन !
  22. Pramendra Pratap Singh
    जलाओं दिये पर रहे ध्यान इतना अधेरा ब्लागिंग में रह न पाये जरा सा। :)
  23. Abhishek Ojha
    दीये के दर्द को अच्छा समझा आपने वरना इतने मसाला साक्षात्कार और तड़क-भड़क खबरों में कौन पूछता !
  24. anitakumar
    अनूप जी बहुत ही संवेदनशील लेकिन आप के खिलंदड़े अंदाज में लिपटी बेहतरीन पोस्ट है। एक ही पोस्ट में अपने प्रतिबिम्बों से कितनी बातें कह गये। दिवाली के दिन मिर्जा का आना सौहार्दय का प्रतीक है। वातावरण के प्रति संवेदना तो है ही। वैसे हैरान हूँ क्या सच में कानपुर में लोग मिट्टी के दिये नहीं जलाते। यहां तो खास मिट्टी के दिये ही जलाये जाते हैं और इतने सुंदर सुंदर डिजाइन के दिये मिलते हैं कि उन्हें फ़ेंकने का तो मन ही नहीं होता। हमने तो रोजमर्रा की दिया बाती के लिए भी मिट्टी का दिया रख छोड़ा है, पीतल को चमकाने की जहमत से बच जाते हैं और मिट्टी के दिये को देख भक्ति जो जगती है वो तो अलग ही अहसास है। इतनी सुंदर संवेदनशील, काव्यात्मक पोस्ट के लिए बधाई
  25. anitakumar
    नववर्ष की शुभकामनाएं
  26. कविता वाचक्नवी
    सर्जनात्मक और बढि़या
  27. Dr.Arvind Mishra
    भरपूर संवेदना !
  28. sameer yadav
    वाह….अभिव्यक्ति, भाव अपने चरम पर हैं…पाठक को अपने रौ में बहा ले जाता है….. सबकुछ है इस लेख में. आभार.
  29. seema gupta
    सवाल : दीपावली पर आप दीये लोग कैसा महसूस करते हैं?
    जवाब : इस दिन हमारी पूछ चुनाव के समय में स्वयंसेवकों की तरह बढ़ जाती है।
    ” great inteview, vaise ye deepak hain bhut kmal ke kya roshnee krtyn hain khud jal kr ..”
    Regards
  30. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] दीपक से साक्षात्कार [...]
  31. Padm Singh पद्म सिंह
    अति सुंदर —-
    जिसने अपना खून जला कर
    अँधियारा उजियार किया …
    जिसने अपनी ज्योति शिखा से
    ऊर्ध्वगमन संदेश दिया …
    जिसने दुख अनदेखा कर के
    तिमिर मिटा जग सुखी किया
    उस दीपक की दयनीय दशा ने
    दीवाली पर दुखी कर दिया
    …..पद्म सिंह
    Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ
  32. Alpana
    वाह!
    चार साल पुराना लेख आज भि उतना ही सामायिक..
    ”यहाँ तो सब कुछ कूड़ा है”
    अफ़सोस इतने सालों में भी दीपक ‘ का दुःख कुछ कम न हुआ !
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..बुरा न मानो …दीवाली है !
  33. Alpana
    वाह!
    चार साल पुराना लेख आज भी उतना ही सामयिक..
    ”यहाँ तो सब कुछ कूड़ा है”
    अफ़सोस इतने सालों में भी दीपक ‘ का दुःख कुछ कम न हुआ !
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..बुरा न मानो …दीवाली है !
  34. mahendra mishra
    सुन्दर प्रस्तुति … दीवाली पर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं …
  35. वीरेन्द्र कुमार भटनागर
    आपकी ४ साल पुरानी पोस्ट पढ़ी। आप की नज़र तो बेमिसाल है ही आप का अन्दाज़े-बयाँ भी अद्भुत है। आप कोई भी विषय चुनें, उसे जबर्दस्त रोचक बना देते हैं। दीपक की लोकप्रियता भले ही घट रही हो, ऐसा ही लिखते रहे तो आपकी लोकप्रियता ज़रूर एक दिन हास्य-व्यंग का शीर्ष छुयेगी। दीपक के आलोक में जो शीतलता है, सुकून है वह अन्यञ कहाँ। दीपक प्रतीक है आशा का, जीवन का, तिमिर से संघर्ष का, वह अब भी मौजूद है आरती की थाली में, गंगा के घाटों पर। दीपक हमारी संस्कृति का अंग है।
  36. वीरेन्द्र कुमार भटनागर
    दीवाली पर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
  37. sanjay jha
    (:(:(:
    प्रणाम.

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