Thursday, October 23, 2008

मैं कहीं कवि न बन जाऊं …

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32 responses to “मैं कहीं कवि न बन जाऊं …”

  1. Lovely
    बेचारा कवि किस-किस के बारे में लिखे ..वैसे हमने आज ही जाना गाना इतना जरुरी होता है प्रेम में :-)
  2. विवेक सिंह
    आप सोचकर लिखते हैं कि क्या लिखूँ ? या लिखकर सोचते हैं कि क्या लिख गया ?
  3. दिनेशराय द्विवेदी
    हर कवि को महीने में एक घंटे के लिए प्रेमिका दिलवा दो। मंदी में निहाल हो जाएगा। मुश्किल से न जाने कितनी तिकड़में कर के एक दो मुंसीपेलटी के कवि-सम्मेलन कबाडते हैं। वहाँ कविता हूट हो जाती है। चुटकुले हिट हो जाते हैं।
  4. Abhishek Ojha
    काफ़ी हंसते हुए गोल-गोल घुमने के बाद लग रहा है की अकल पादुका उतार के पहले प्रेम से ही शुरुआत करनी पड़ेगी वरना इस नैनो दिल से क्या होगा ! और इ कबीईईईता बड़े काम की चीज लग रही है कल को कौनो उद्योगपति कारखाना न बैठा दे कवि बनाने का :-)
  5. अजित वडनेरकर
    प्रेम में जब तक कोई बेवकूफ़ी न हो तब तक मजा नहीं आता।
    आपकी ये उक्ति रास आ गई है। स्वानुभूत जान पड़ती है….
  6. राज भाटिया
    अजी तीस पेंतीस साल पहले लिखते तो हम भी जुते चप्पल उत्तार कर डुबकी ओर गोते खा लेते , भई अब तो ऎसा किया तो हमारे उतारे जुते हमारे ही सर पर पढेगे, ओर कविता या गीत तो समझ मै नही आता तो गायेगे केसे??? चलिये थोडा हंस लू फ़िर चलता हुं.
    धन्यवाद एक सुंदर लेख के लिये.
  7. मानोशी
    ये क्या था??? विवेक से सहमत हूँ, आप सोच कर लिखते हैं कि लिख जाते हैं फिर सोचते हैं क्या लिखा। हमेशा की तरह हँसाने वाला पोस्ट…
  8. कविता वाचक्नवी
    मध्ययुगीन प्रेमाख्यान काव्य- परम्परा से अब आप समकालीन प्रेमाख्यान काव्यों तक आ गए हैं। अब आगे इनकी शाखाओं व प्रतिशाखाओं की बारी लगती है।
  9. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    बहुत कठिन परिस्थितियां हैं सैनिकों की इत्ती कि घबरा कर बड़े अफ़सर घोटाला तक कर बैठते हैं। :)
    वाह, मजा आ गया…। कैसे-कैसे खयाल आ जाते हैं आपके मन में…। लगता है बहुत जल्दी यह कवि-कर्म सिर चढ़कर बोलने वाला है। कवि बनना ही है तो जल्दी बन जाइये जी…। हमने ताली बजाने के लिए हाथ खाली कर लिए हैं। :)
  10. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    कविता का नॉन-प्लूटॉनिक प्रेम में योगदान और उसके अर्थशास्त्र की सम्भावनायें! — मुझे कभी पी.एच.डी. करनी पड़ी तो बड़ा सुन्दर विषय बन जायेगा। और शोध में ज्यादा कुछ नहीं करना होगा – हवाई गुब्बारे फुलाने से काम बन जायेगा!
    इस पोस्ट की जय हो!
  11. समीर लाल
    ये कवि तो कुछ हमारे टाईप लग रहा है// थोड़ा व्यस्त टाईप..हा हा!!! :)
  12. समीर लाल
    सबको पता है कि कवि की हालत मेहतर से भी बदतर होती है।
    —सारे कवियों की तरफ से…घोर आब्जेक्शनेबल!!! हद हो गई.
    वैसे बात है तो सही!! :)
  13. ताऊ रामपुरिया
    “मैं कहीं कवि न बन जाऊं तेरे प्यार में वो कबीईईईता।”
    भाई शुक्ल जी ! आप क्यूँ पुराने दिल के छाले हमारे उघाड़ रहे हैं ? ई धर्मेन्द्र-वैजंतीमाला का गाना याद दिलवा के ? शुक्रिया आपका उन दिनों की याद दिलाने के लिए ! आख़िर पुरानी यादे भी अच्छी तो लगती ही हैं ! :) पर आप गजब का लिखते हैं ! बहुत शुभकामनाएं !
  14. Tarun
    अगर आप कवि बन गये तो सारे कवि कवियत्री भाग खड़े होंगे, ब्लोगर जगत आधा विरान हो जायेगा इसलिये ये जुल्म मत करिये। कबीईईईईता को छोड़िये बाजार जाईये पपीईईईईईता लाईये खाईये और फिर से फुरसतिया हो जाईये ;)
  15. seema gupta
    ” ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha hahaha ha ha ha ha hah aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa,ha ha ha ha ha ha haha ha ha ha ha ha ha ha ha haha..iske aagey kuch smej nahee a rha, dil deemag sub chakkar kha gya hai, khan ka sira khan jakr mila…… pr ek baat to ptta chlee ke love song kitna jrure hotta hai, pehle ptta hotta to ek adh hum hee yaad kr laite ha ha ha ha haha ha ha…… ab kitna hanse….”
    Regards
  16. anil pusadkar
    अनूप भैय्या पहले नही बताना था,प्रेम के लिये अकल पादूकायें उतारना जरुरी होता है।जबरन हम अपनी खडूस सूरत पर डाऊट करते आ रहे थे।उसी चक्कर मे अकेले रह गये। वर्ना प्रेम विवाह करवाने का रिकार्ड हम बना चुके हैं,मगर प्रेम जैसी बेवकूफ़ी नही कर पाये। अब बता रहे हो भैय्या, इच्छा हुई भी तो भाटिया साब डरा रहे हैं।जाने दिजीये ,गाना तो आता है,ये प्रोब्लेम तो नही आयेगा। निर्मल आणंद आ गया ।
  17. डा. अमर कुमार
    ऎ फ़ुरसतिया जी, कभि विरह का गाना.. वियोग गित पर भि दू लाइन लीखिये न !
    ई तो आप जो लीखे हैं, सो बहुतै अच्छा लीखे हैं.. तनि विरह पिड़ा से पिड़ीत लोग
    का भी ध्यान रखीयेगा माने अभि नहिं लेकीन भविश्य में..
    मेरे दिमाग में एक शैतानी आइडिया आया है,
    सार्वजनिक रूप से ऎलान कर दूँ… ?
    क्यों न आपका अपहरण करके आपसे ही अपनी पोस्ट लिखवाया करूँ ?
    कोख में गड़ते रमपुरिया से उपजा गान क्या गज़ब की चीज होगी, जरा सोचिये ?
    लिखेंगे तो खुशी होगी, नहीं लिखेंगे तो अपना रमपुरिया तो है ही.. वह लिखवा लेगा !

  18. संजय बेंगाणी
    जब आपने लिखा है तो मजेदार होगा ही….मगर कोई बता रहा था, यहाँ टिप्पियाने वाले हरेक को एक एक कविता सुननी पड़ेगी :(
    समीरलालजी बूरा मान गए दिखे है.
  19. दीपक
    दीपक उवाच: अर्थात कोई आपसे भी बेसुरा गाने वाला इस दुनिया मे है जिसने चाँद की सेहत बिगाड दी !!रहा सवाल कविता का
    तो लोग कविता इसलिये लिखते है कि उन्हे कुछ पाना है जब्की यथार्थ कविता कुछ पा लेनेके बाद ही जन्मती है!!
  20. प्रियंकर
    अरे ज्ञान जी !
    प्रेम चाहे प्लैटोनिक हो या नॉन-प्लैटिनिक ,उसमें कविता का योगदान हो या उम्र की अपने आपसे शुरुआती पहचान का ,उसे बाज़ार में काहे ले जाते हैं . वह तो वैसे ही तेजी से सब कुछ ग्रसता हुआ हमारी ओर बढा चला आ रहा है . कुछ विषयों को तो अर्थशास्त्र से बाहर रहने दीजिए . कुछ संभावनाएं अर्थशास्त्र के बाहर भी हैं . अब तक .
    पर इधर तो प्रेम और विवाह दोनों में ही अर्थशास्त्र की भूमिका है . सो आप उसी पर शोध की बात कह रहे हैं जो आसपास देख रहे हैं .
    और ये जो अपने फ़ुरसतिया हैं न, नितान्त प्रेमविरोधी जीव हैं . मौजिया घराने के औरंगजेब . अभी एक-दो दिन हुए मजनू बिचारे को पछीट के धर दिया . लैला को फ़्रांसिस बेकन नुमा नुस्खे दे दे कर . और आज प्रेमी-प्रेमिका की चिकाही कर रहे हैं . लगता है प्रेम का फिचकुर निकाल के मानेंगे .
    दुनिया भर की चर्चा करेंगे ये अपने फुरसतिया पर अपनी साइकल की पहली घंटी प्रेम गली में ही मारेंगे . कबीरदास कह गए हैं कि ‘प्रेम गली अति सांकरी’ , लगता है उन्हें इस कनपुरिया प्रेम गली का पता कौनो नहीं बताया रहा . पछांह से लेकर बनारस-मगहर मंझाते रहे और कलट्टरगंज के नगीच के ई प्रेम मार्ग का कौनो जुगराफ़िया नहीं ताड़ पाए . ऊ तो हम लोगन के भाग से फुरसतिया बने हुए हैं . नहीं तो कौन बतलाता जगत-गति वाया प्रेम-मार्ग उर्फ़ बीच बजरिया खटमल काटे .
    जय हो !
  21. लाल कवि 'वियोगी'
    कवियों के ऊपर ऐसा कटाक्ष! कल ही हम कवि आपके द्वारे आकर विकट धरना देंगे. हम तो सरकार को ज्ञापन भी देंगे कि भारतीय दंड संहिता में एक धारा की खोज हो, जिसके तहत कवियों के ऊपर कटाक्ष करने वालों को सजा निर्धारित की जाए.
    लाल कवि ‘वियोगी’
    अध्यक्ष, अखिल भारतीय कवि महासभा
  22. ranjana
    अद्भुद……….लाजवाब……बहुत बहुत सुंदर………..और क्या कहूँ………
  23. Dr .Anurag
    जबसे ये मोबाइल ओर एस .एम् एस आये है …प्यार में न तो खतो खवात रहे …न वो कविताये…. कवि अब ओल्ड फैशन जो ठहरा ……
  24. anitakumar
    हा हा हा ही ही ही हा हा हा!!!
    “कवि विज्ञापन छपवायेंगे- कार के लिये प्रयाण गीत रचवायें। एक गीत में अस्सी किलोमीटर की गारन्टी। कम चलने पर एक गीत मुफ़्त। ”
    मेरा दो कवि का ऑर्डर अग्रिम रुप से बुक कर दिजिए, रिसर्च जब होगी तब होगी।
    कवि भाई नाहक हलकान हो रहे हैं, कित्ते तो फ़ायदे गिना दिये आप ने, लगता है मोबाइल के साथ एक एक कवि भी बैग में रख कर घूमना पड़ेगा, पता नहीं ये मास्टर चाबी कब काम आ जाए। सड़क छाप रोमियो परेशान करे तो लड़की फ़ट से बैग से कवि निकाल खड़ा कर दे रोमियो सर पर पैर रख भाग लेगा। रेलवे की रिजर्वेशन की लंबी लाइन में सबसे पीछे खड़ा ग्राहक बस कवि निकालेगा और लोग उसे सबसे आगे ठेल देगें। मिनिस्टरों की जेड सिक्युरिटी की भी जरुरत नहीं रहेगी जी । हम तो सोच सोच कर रोमांचित हो रहे हैं कि कविता विषय कित्ता पापुलर हो जाएगा, रोजगार के इत्ते आयाम जो खुल जायेगें। एक और बात जेहन में आ रही है। प्रेम विवाह तो हम भी किए, ये उस समय के प्रेमी ( अब के पति) से गाना सुनना तो रह ही गया, हाय हम भी कित्ते बुद्धु थे जी, अब जा के पता चला। चलो देर आये दुरुस्त आये, पहले बगल वाली झील साफ़ करवा लें फ़िर पति देव को पकड़ेगें गाना सुनाने के लिए। डर सिर्फ़ इस बात का है कि वो ये न कह दें कि अब तो समय निकल गया अक्ल की चप्पल उतारने का…।:)
  25. Dr.Arvind Mishra
    किसे बना रहे हैं -कवि तो आप पहले से है -कविता भी ये जानती है फिर भी मनुहार कर रही है -इनकी आदत ही ऐसयीच जो है !
    बदूक के परिवेश में ये कविताई उफान सचमुच एक इतिहास रच रहा है -और हम कितने फख्र के साथ उसके चश्मदीद बन रहे हैं ! !
  26. जीतू
    सच मे कलजुग आ गया दिख्खे है मने। एक कवि(तुम्हरे गद्य लेखों ने नीचे लिखी कविता ही है ना?) (भले ही पार्टटाइम कवि) ही दूसरे कवियों को धो रहा है। रामराम, कैसा जमाना आ गया है!
    बकिया, गाना अधूरा काहे गाए हो, कविता (वो पड़ोसन) के किस्से भी लिखो।
  27. - लावण्या
    बस ऐसी बातेँ होतीँ रहेँ
    बेचारे “तथाकथित प्रेमी ” व “कविगण” दोनोँ ही
    दुनिया की उपेक्षा ही झेलते आये हैँ :-(..
    और क्या चाहिये !!
    परिवार के सभी के सँग दीपावली का त्योहार खुशी खुशी सेलीब्रेट कीजै
    यही शुभकाँक्षा है
    स्नेह सहित -
    - लावण्या
  28. Manish
    jheel aur chaand ka rishta pasand aaya….
    :)
  29. Prabhat Tandon
    झील की बदबू और गंदगी से उकताकर फ़िर ऊपर आ गया लेकिन प्रेम गीत सुनकर दुबारा झील में कूद गया।
    कहीं यह मोती झील के आस पास की घटना तो नही है , फ़ोटू कुछ पहचानी-२ लग रही है :)
  30. Pramendra Pratap Singh
    :)
    (aaj likhane me hath tang hai)
  31. चलो बस हो चुकी चर्चा ना तुम खाली ना हम खाली : चिट्ठा चर्चा
    [...] चुपके-चुपके मिलकर फुरसतिया के ऊपर कवि होने का खतरा मंडरा रहा है। इसलिये समस्त [...]
  32. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
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