Friday, December 19, 2008

फ़ौजियों के साथ एक दिन

http://web.archive.org/web/20140419212902/http://hindini.com/fursatiya/archives/564

29 responses to “फ़ौजियों के साथ एक दिन”

  1. प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह
    हमारे पडोस में एके-47, हैंडग्रेनेड मिले है आइये निशाना लगा लीजिए :)
    सुन्‍दर यात्रा वर्णन, फोटो भी फब रही है।
    महाशक्ति
  2. Arvind Mishra
    रोचक रही यात्रा !
  3. दिनेशराय द्विवेदी
    पाँच में से एक तो अच्छी सफलता है। यहाँ तो पचास में से एक भी मु्श्किल होता।
  4. विवेक सिंह
    निशाना आप शौक से लगाइए . पर यह भी तो देखिए कि हम सामने ही बैठे हैं . आपकी गोली चल गई तो कम्प्यूटर स्क्रीन को फोडती हुई हमारे बगल से जाएगी :)
    वैसे जैकिट तो अच्छा है . जैकिट पहनने वाले वाले के बारे में क्या कहें . फ़ोटू में आपके ऊपर बर्फ सी जमी लगती है . काफी देर से बैठे हैं लगता है :)
  5. seema gupta
    जरा नजरों से कह दो कि निशाना चूक न जाये दोहराते हुये पांचो फ़ायर कर डाले।
    ” अरे वाह का का करतब दिखाई रहे आप ….”
    regards
  6. ताऊ रामपुरिया
    बहुत बढिया रहा जी ! पहली बार मे एक निशाना मार दिया टारगेट पर ! आपको तो गोल्ड मैडल दिया जाना चाहिये ! हमसे निशाना और फ़ायर करना दूर ससुरी बन्दूक ही नही ऊठाई जाती ! :)
    जैकेट बडी जंच रही है ! ये ब्लागर की नजर से नही कैमरे की कि नजर से बोल रहे हैं !:)
    वैसे आप सोच रहे होंगे कि ताऊ १२ बजे आता है आज सुबह सबेरे कैसे टपक गया ? तो राज की बात ये है कि ताऊ की नजर कमजोर हो चली है ! आपका टाईटल है – फ़ौजियों के साथ एक दिन — और हमको दिखा.. फ़ौजिया के साथ एक दिन… अब हम इसी चक्कर मे दुसरे ब्लाग छोड के आपके यहां टपक लिये कि शुकल जी ने ये क्या गुल खिला दिये ! :) पर यहां तो भाई करनलसिन्ह और जनरलसिन्ह दिखे सो चुपचाप वापस जा रहे हैं !
    राम रम !
  7. अरूण अरोरा
    नैनीताल में कक्षा रगड़ाई के बाद चाहे कितनी रगडाई करलो पर बूढे तोते कही पढते है क्या ? :)
    बाद में जाकर देखा कि पांच में से केवल एक निशाना ठीक लगा था। देख लो कैसे हथियार बनाते हो . वो तो हमारे फ़ौजी है जो इन हथ्यारो से सही निशाना लगा लेते है . तुरंत कम से कम गुणवत्ता तो सुधार ही लो जनाबे आली :)
  8. Ghost Buster
    फ़ुरसतिया जी अचूक निशानेबाज और विकट बन्दूकबाज हैं, आज तक कभी चूकते नहीं देखे गये, जरूर इस वाली बन्दूक में ही कुछ गड़बड़ी रही होगी.
    कानपुर से बाहर निकलें तो सूचना यहां ब्लॉग पर देना बेहतर होगा, दूसरे शहर में किस-किस ब्लॉगर से मिलेंगे? जहां रुकें, वहां का पता दे दें तो उस शहर के ब्लॉगर ही आपसे मिल लेंगे, अब आप तो सेलेब्रिटी ब्लॉगर हैं ना. शायद कभी हमें भी आपके दर्शन का सौभाग्य मिल जाए.
    सर्दियां अपने शबाब की ओर अग्रसर हैं, ताऊ के साथ हमारी ओर से भी रम रम!
  9. Dr.Anurag
    फुरसतिया के हाथ में बन्दूक ..आयला ……कौन है निशाने पे ठाकुर ???? गोया की जाकेटवा भी अच्छी है पर हमें लाल स्वेटर ज्यादा भाया……….बन्दूक तो नीचे रखो भाई अब !
  10. ranjana
    फोटोग्राफ और विवरण दोनों बहुत बढ़िया लगे…बड़ा अच्छा लगा पढ़कर.मुफ्त में सैर और जानकारियां मिल गई.
  11. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    जैकेट में आदमी सुख समृद्धि युक्त नजर आता है। और बन्दूक के साथ रोबदाब वाला। आज टू-इन वन दर्शन कर लिये।
    सुन्दर लिखा है – सतत लिखते रहें! :-)
  12. गौतम राजरिशी
    हाथ में इंसास उठाये बड़े फब रहे हैं आप अनूप जी….कभी कोई टि.डी. बना कर इधर देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी भी आईये निरिक्षण के लिये.इसी बहाने आपसे रूबरू मुलाकात हो जायेगी
  13. विष्‍णु बैरागी
    लगता है, यात्रा की थकान लिखने पर हावी हो गई है । वर्णन तो विस्‍तृत और सम्‍पूर्ण है किन्‍तु पोस्‍ट में कल वाली बात बिलकुल ही नदारद है । आज श्रीलाल शुक्‍ल की परछाई का आभास भी नहीं है ।
    बहरहाल, निरापद यात्रा के लिए बधाइयां और यात्रा वृतान्‍त निरन्‍तर उपलब्‍ध कराने के लिए धन्‍यवाद ।
  14. लावण्या
    रानी खेत मेँ फौजी भाइयोँ से मुलाकात की बातेँ बताईँ वे बहुत रोचक लगीँ – खास तौर से ये जान कर खुशी हुई कि फौजी लोग जलेबी खाते हैँ नाश्ते मेँ :) वाह जी वाह !
    और रास्ते मेँ फिल्मी गाने सुनकर आपको सही गीत याद आया
    “जरा नज़रोँ से कह दो जी, निशाना चूक ना जाये ”
    और ५/१ = ४ चूक गये !
    कोई बात नहीँ -
    अगली बारी, पाँचोँ ” बुल्ज़ आइ ” / रहेँगेँ :)
    और हाँ इस स्टोर का पता या वेब साइट हो सके तो बतलाइयेगा -
    हम भी खरीदारी करेँगेँ -
    अग्रिम, धन्यवाद सहित,
    (” युद्ध विधवा संस्थान द्वारा चलाये जा रहे शापिंग स्टोर से तमाम खरीदारी की। “)
    स स्नेह,
    - लावण्या
  15. cmpershad
    रानीखेत के चूज़े मशहूर हुआ करते थे। अब आपने दम्बूक तानी है तो निश्चय ही कुछ चूज़े अल्लाह को प्यारे हो गए होंगे। रही बात निशाने की तो पांच में से पांच भी सही हो सकते है- इसका उपाय है कि पहले गोली दाग दें और जहां बुलेट लगी उसके अतराफ सर्कल बना दें। लग गया ना तीर निशाने पर:)
  16. dhirusingh
    युद्ध विधवा सस्थान मे गर्म हैण्ड मेड शाल, ट्वीड बहुत ही अच्छे मिलते है . रानीखेत का सौन्दर्य स्विट्जरलैंड की टक्कर का है आपने क्या महसूस किया ?
  17. anitakumar
    वाह, अच्छा रहा वृतांत्। जैकेट भी अच्छी लग रही है अलबत्ता हमें तो आप के कंधे पर वो बर्फ़ नहीं दिख रही जिसका जिक्र किया जा रहा है।
  18. anupam agrawal
    waakai इस pooree post में बर्फ गायब है .
    ये सबसे achhaa huaa की इसी बहाने fauziyon kee कुछ dikkaton kaa pataa to चला.
  19. प्रवीण त्रिवेदी-प्राइमरी का मास्टर
    सेलेब्रिटी ब्लॉगर के यहाँ हमारी भी उपस्थिति लगा ली जाए!!!
    सुन्‍दर यात्रा वर्णन, फोटो भी गजब !!
  20. मसिजीवी
    ढेर भीड़ के कारण नैनीताल हमें कुछ खास प्रिय नहीं पर रानीखेत पसंद है। शादी के पिछले चौदह साल में पत्‍नी के लिए केवल दो शॉल खरीदने के गुनहगार हैं दोनों ही रानीखेत के इस शाल विक्रय केंद्र से ही खरीदीं।
    ‘लपूझन्‍ना वाले अशोक पांडेय’ ????
    बताने वाले को समझना चाहिए था कि फुरसतिया बातों को पचा जाने में कोई यकीन नहीं रखते बजाने में करते हैं। जब वे लपूझन्‍ना रहना चाहते हैं तो काहे आप उन्‍हें अशोक बनाने पर तुले हैं
  21. Anonymous
    लाजवाब सोच है आपकी अनुरोध है मेरे भी ब्लॉग पर पधारे
  22. SHUAIB
    बहुत अच्छा वक़्त बिताया आपने।
    वाह चहरे से लगता ही नहीं कि बंदूक़ थामे ज़रा भी डर खौफ़ मेहसूस नही हुआ आपको।
    आपकी ज़िन्दगी के ये यादगार दिन बहुत बहुत मुबारक हो।
  23. Anonymous
    अनूपजी नववर्ष की आपको बहुत-बहुत बधाई। ये पंक्तियां मेरी नहीं हैं लेकिन मुझे काफी अच्‍छी लगती हैं।
    नया वर्ष जीवन, संघर्ष और सृजन के नाम
    नया वर्ष नयी यात्रा के लिए उठे पहले कदम के नाम, सृजन की नयी परियोजनाओं के नाम, बीजों और अंकुरों के नाम, कोंपलों और फुनगियों के नाम
    उड़ने को आतुर शिशु पंखों के नाम
    नया वर्ष तूफानों का आह्वान करते नौजवान दिलों के नाम जो भूले नहीं हैं प्‍यार करना उनके नाम जो भूले नहीं हैं सपने देखना,
    संकल्‍पों के नाम जीवन, संघर्ष और सृजन के नाम!!!
  24. kapil.gzb
    नववर्ष की आपको बहुत-बहुत बधाई। ये पंक्तियां मेरी नहीं हैं लेकिन मुझे काफी अच्‍छी लगती हैं।
    नया वर्ष जीवन, संघर्ष और सृजन के नाम
    नया वर्ष नयी यात्रा के लिए उठे पहले कदम के नाम, सृजन की नयी परियोजनाओं के नाम, बीजों और अंकुरों के नाम, कोंपलों और फुनगियों के नाम
    उड़ने को आतुर शिशु पंखों के नाम
    नया वर्ष तूफानों का आह्वान करते नौजवान दिलों के नाम जो भूले नहीं हैं प्‍यार करना उनके नाम जो भूले नहीं हैं सपने देखना,
    संकल्‍पों के नाम जीवन, संघर्ष और सृजन के नाम!!!
  25. mahendra mishra
    फोटो में आपकी बन्दूक का रुख समझ में नही आ रहा है कि किस तरफ़ है ?. ढेर सारी यादे बांटने के लिए आभार .
  26. Abhishek
    गोली-बन्दूक ! बढ़िया है, ये जो आप चला रहे हैं वो इंसास है क्या? हमारे एक मित्र भी डीआरडीओ में थे अब एक अमेरिकन कंपनी के लिए काम करते हैं. उनकी यादें भी बड़ी अच्छी होती हैं लेकिन क्या करें बेचारे पैसा बीच में आ जाए तो …
  27. DR R K RAWAT
    It was nice to see you on blog and with sri rajeev kumar sir. regards to you both. will write some thing –after reading. thanks keep on posting.
    ( pehchan kaun)
    dr rawat
    hindi officer
    iit khargpur
  28. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] फ़ौजियों के साथ एक दिन [...]
  29. चंदन कुमार मिश्र
    दू-चार गो दुश्मनों पर भी लगता तब न…
    चंदन कुमार मिश्र की हालिया प्र

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