Friday, October 31, 2008

हर फ़टे में टांग अड़ाना सीखिये

http://web.archive.org/web/20140419214302/http://hindini.com/fursatiya/archives/552

43 responses to “हर फ़टे में टांग अड़ाना सीखिये”

  1. manvinder bhimber
    न जाने कब बेचारा बुश उधार मांग बैठे,
    कभी तो दो-चार पैसे बचाना सीखिये।
    लैला-मजनू में पट नहीं रही आजकल,
    उनको लिव-इन के फ़ायदे गिनाना सीखिये।
    bahut achchi lagi aapki ye panktiyan
    bahut sunder
  2. अफ़लातून
    कानपुर कनकौव्वा,ऊपर चले रेल का पहिया,नीचे बहती गंगा मैय्या , चना जोर गरम !
  3. दिनेशराय द्विवेदी
    बहुत मौजूँ है। पर यह तो पाठ सूची लगती है। एक एक पाठ को सीखने में कुछ समय तो लगेगा। हो सकता है, तब तक मंदी निपट ले। हालांकि आसार कम हैं। पर आस पर तो दुनियाँ कायम है।
  4. विवेक सिंह
    आपने नीरज गोस्वामी जी से प्रभावित होकर हमको प्रभावित कर कर दिया . नकल (सॉरी गजल) अच्छी है . आभार !
  5. Shiv Kumar Mishra
    अच्छी तहरीर है.
    मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिए
    टांग फटने से बचाना सीखिए
    सर्दियों की शाम में पानी गरम कर
    टांग को बस गुनगुनाना सीखिए
    फिर भी गर फट जाए तो मुश्किल नहीं
    क्रीम बढ़िया सी लगाना सीखिए
    क्रीम से भी काम गर जो न बने
    मोजों में रुई घुसाना सीखिए
  6. ताऊ रामपुरिया
    अपने पैसे से ऐश किये तो क्या किये,
    गैर के पैसे को हिल्ले से लगाना सीखिये।
    बहुत बढिया है जी ! आपके आदेश का पालन करते हुए हम तो पहले ही लट्ठ छोड़ कर फटे में टांग उलझाने को तैयार रहते हैं !:)
  7. seema gupta
    लैला-मजनू में पट नहीं रही आजकल,
    उनको लिव-इन के फ़ायदे गिनाना सीखिये।
    जलवे हैं आशिकों के आजकल बहुत,
    न मिले कोई तो खुद लटपटाना सीखिये।
    “ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha kya kmaal kee class lee hai aaj aapne, bhut kuch seekha diya….. or han vo apkee janch ka kya hua, koee inquery vgerh beethaee kya…report aa jaye to ek photopocy humko bhee dejega”
    Regards
  8. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    फटे में टांग अड़ाना तो हिन्दी ब्लॉगरी का च्यवनप्राश है! खूब खाया खिलाया जाता है।
    कैसे न अड़ाया जाये फटे में टांग, वह संयम सिखाने का यत्न करें महामहिम ब्लॉगर जी! :-)
    लिखा (ऐज यूजुअल) बहुत बढ़िया है!
  9. anil pusadkar
    वाह भैय्या वाह ।
  10. P.N. Subramanian
    बहुत अच्छे. मज़ा आ गया. सुखी जीवन के कारगर नुस्खे. आभार.
  11. जि‍तेन्‍द्र भगत
    क्‍या खूब लि‍खा है आपने-
    देश के हालत बड़ी खराब है दोस्तों,
    तसल्ली से इस पर बहसियाना सीखिये।
  12. SHUAIB
    वाह वाह वाह वाआह :)
    मज़ा आगया।
  13. Dr .Anurag
    छोडिये ये कागज कलम जनाब
    थामिये कम्पूटर ओर फुरसतियाना सीखिये
    लगता है ….दीवाली के बाद अभी भी छुट्टियों का खुमार है….टांग अडा ही दी !
  14. अजित वडनेरकर
    नसीहतों की ग़ज़ल…वाह !!
  15. Abhishek Ojha
    शायरी गजल तो सब कह लेते हैं,
    फुरसतिया की तरह जमीनी बातें करना सीखिए !
  16. डा.अमर कुमार
    भाई जी, यह करवा के एक बार तो पिटवा चुके हो…
    अब और क्या चाहते हो, इस मासूम से ?

  17. parul
    badhiyaa hai….ekdum kanpuriyaa
  18. Shiv Kumar Mishra
    टांग गर छोटी हो औ फटहा बड़ा
    फिर वहां से भाग जाना सीखिए
    लैला बेचारी है रोये जार-जार
    मंजनू से उसको रुलाना सीखिए
    बुश की हालत देखकर हैं सब खुशी
    कुछ तो उसपे तरस खाना सीखिए
    आपने पिटवा दिया मासूम को
    थोड़ा मरहम भी लगाना सीखिए
  19. सतीश सक्सेना
    क्या गज़ब की रचना है अनूप भाई, आपकी इस रचना और भाई शिव कुमार जी की पूरक रचना को जोड़कर एक विमोचन समारोह का इंतजाम करें ! और हो सके तो चिटठा चर्चा पर लायें …मज़ा आजायेगा हँसते हँसते …
  20. Kuldeep
    क्या कहू अब मै कहने को क्या रह गया,
    बस ….मजा आ गया
  21. डा. अमर कुमार 'मासूम'
    जो डबलरोटी पर ही मरहम लगा तिबल बनाकर खा लेते
    उनको सही जगह मरहम लगाने की जगह दिखाना सीखिए

  22. preeti barthwal
    लैला-मजनू में पट नहीं रही आजकल,
    उनको लिव-इन के फ़ायदे गिनाना सीखिये।
    जलवे हैं आशिकों के आजकल बहुत,
    न मिले कोई तो खुद लटपटाना सीखिये।
    गैर की तारीफ़ तो फ़िजूल है यार,
    अपनी तारीफ़ों के कनकौवे उड़ाना सीखिये।
  23. preeti barthwal
    बहुत बढ‍िया, मजा आ गया
  24. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'
    सीख लिया है तुमने गज़ल का लिखना
    अब इसे तर्रन्नुम में सुनाना सीखिये.
    अपना लिखा तो सभी पढ़वाते हैं, मियाँ
    आप गैरों को पढ़ कर टिपियाना सीखिये. (ये दूसरों के लिए है, आप तो सीखे सिखाये हो. :))
    -बहुत उम्दा!! वाह वाह!!
  25. दीपक
    अभी सीखते है।
  26. subhash bhadauria
    ग़ज़ल नीरज की चुराना सीखिये.
    गाहे गाहे हिनहिनाना सीखिये.
    नक्ल में भी अक्ल लाज़िम है जनाब,
    यो हीं मत भोंपू बजाना सीखिये.
    दिल भी मिल जायेंगे इक दिन देखना,
    हाथ तो पहले मिलाना सीखिये.
    आप लिखती हो ग़जब की शायरी
    मछलियाँ ऐसे फँसाना सीखिये.
    हम अछूतों से रखे हो दूरियाँ,
    पांव बुलबुल के दबाना सीखिये.
    वज़्न से गिरते हो फुरसतिया चचा,
    ग़ज़ल पहले गुनगुना सीखिये.
  27. बोधिसत्व
    हम तो मुंबई के पचहा हैं…टाँग किसकी है…
  28. gagansharma09
    या वज्जीवेत सुखं जीवेत, ऋण कृत्वा घृतं पीवेत।
    चार्वाक जिंदाबाद।
  29. varsha
    दूसरों के फटे में टांग अड़ाना, हर चलते-फिरते को सलाह देना और मुश्किलों में मुस्कुराना। ऐसी बातें तो अपन लोगों की आदत में शामिल है।
  30. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
    बहुत कागज कुण्डली में रंग दिया।
    अब ग़जल को आजमाना सीखिए॥
    हैं ग़जलगो ब्लॉग में बिखरे हुए।
    अब इन्हें पहचान जाना सीखिए॥
    काफिया जो तंग हो कम वज्न भी।
    तो बहर को भी भुलाना सीखिए॥
    मौका-ए-फुरसत अगर मिल जाय तो।
    ग़जल की कक्षा में जाना सीखिए॥
  31. रवि
    बेवजन, बेबहर, बिना काफिया और रदीफ रहित
    हमने सीख ली, आप भी फुरसतिया ग़ज़ल कहना सीखिए
    भाई वाह क्या व्यंज़ल है!
  32. राज भाटिया
    दूसरों के फटे में टांग अड़ाना,अरे भाई कही टांग आडते आडते गिर गये तो बत्तीशी के पेसे कोन देगा, ना बाबा ना.
    धन्यवाद इस टांग अडाई की नसीयत के लिये,
  33. anitakumar
    :) excellent as usual
    अपने पैसे से ऐश किये तो क्या किये,
    गैर के पैसे को हिल्ले से लगाना सीखिये।
    गैर की तारीफ़ तो फ़िजूल है यार,
    अपनी तारीफ़ों के कनकौवे उड़ाना सीखिये।
    waah
  34. Rewa Smriti
    अपने पैसे से ऐश किये तो क्या किये,
    गैर के पैसे को हिल्ले से लगाना सीखिये।
    Wah wah…
  35. राहुल सिद्धार्थ्
    बढिया लिखा है जनाब .ऐसे ही लिखते रहे.
    शुभ्कामनाए
  36. Pramendra Pratap Singh
    प्रभावित होकर बहुत कुछ अच्छा लिखा है, अच्छा लगा।
  37. neeraj
    वाह जनाब वाह…आप ने मेरी ग़ज़ल को जो इज्ज़त बक्शी है उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया…मैंने देखा की आप की ग़ज़ल के सामने मेरी वाली तो बेचारी पानी सी भरती दिखाई देती है…इतने सारे लोगों ने इस में शिरकत की है की देख कर मजा आ गया…उम्मीद है आईन्दा भी मेरी ग़ज़लों पर आप नजरे इनायत करते रहेंगे…इतनी रोचक पैरोडी पढ़ कर हमारा तो ग़ज़ल लिखना सार्थक हो गया बंधू….सच कहते हैं.
    नीरज
  38. प्रभात टन्डन
    सब सीख गये , गुरुजी :)
  39. Ashutosh Dixit
    ek dam kanpuriya andaz hai … maza aa gaya.
  40. अब तो कुछ कर गुजरने को दिल मचलता है
    [...] कर चुके हैं। तब उन्होंने हमें आदेश भी दिया था कि ऐसा मैं अक्सर करता रहूं। लेकिन [...]
  41. Balram Parmar
    bahut khoob..
  42. फ़ुरसतिया-पुराने लेख
    [...] हर फ़टे में टांग अड़ाना सीखिये [...]
  43. mahendra mishra
    वाह क्या बात है … मस्त

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Tuesday, October 28, 2008

दीपक से साक्षात्कार

http://web.archive.org/web/20140419220213/http://hindini.com/fursatiya/archives/551

37 responses to “दीपक से साक्षात्कार”

  1. ghughutibasuti
    वाह, दीये का दुख सुनकर तो हम भी दुखी हो गए । परन्तु पहले दीये जलाने की तैयारी कर लें फिर अगले साल तक के लिए उनके लिए दुखी भी हो लेंगे ।
    आपको व आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।
    घुघूती बासूती
  2. दिनेशराय द्विवेदी
    बहुत सुंदर साक्षात्कार! आज दीवाली के दिन इस से अच्छा हो ही नहीं सकता कुछ भी।
  3. VIVEK SINGH
    इमोशनल कर दिया . आप पर्याप्त सफल रहे अपने उद्देश्य में .
  4. ताऊ रामपुरिया
    बहुत दिल को छूने वाली रचना ! शुभकामनाएं !
  5. समीर लाल 'उड़न तश्तरी वाले'
    दीपावली के शुभ अवसर पर श्री दीपक जी के साथ आपका और मिर्जा का इंटरव्यू पढ़ कर आँखे नम हो आईँ, गला रौंध सा गया. किसी तरह बस आपके संवेदनशील हृदय को दाद देने टिप्पणी लिख पा रहे हैं ताकि जितने दिन यह संवेदनशीलता खींच पाये, खिँचती रहे..भले ही घसीट घसीट कर.
    इस विशेष मौके पर मंच से इस बेहतरीन शेर के लिए भी दाद देना चाहूँगा:
    जो सुमन बीहड़ों में, वन में खिलते हैं
    वे माली के मोहताज नहीं होते,
    जो दीप उम्र भर जलते है
    वे दीवाली के मोहताज नहीं होते।
    जिसने भी कही है, बहुत उम्दा बात कही है.
    मौके के अनुरुप आपको और आपके परिवार को पुनः दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.
  6. Prabhat Tandon
    बेहतरीन अभिव्यक्ति , दीपवली की बहुत-२ शुभकामनायें !!.
  7. ज्ञानदत्त पाण्डेय
    वाह, इतनी सुन्दर पोस्ट पर – दिवाली के दीये तुम्हें भेजता हूँ; अन्धेरे में अपना गुजारा चलेगा!
    ग्रेट पोस्ट सारे दीये डिजर्व करती है।
  8. VIVEK SINGH
    Prabhat Tandon जी का फोटू दिखा रहे हैं और बाकी सबको हुडुकचुल्लू बना दिया . अन्याय .
  9. - लावण्या
    अनूप भाई साहब हमेँ तो मिट्टी का दीपक ही बहुत भाता है – आपको दीपावली की शुभकामनाएँ – परिवार के सँग खूब आनँद करेँ -
  10. राज भाटिया
    दीपावली पर आप को और आप के परिवार के लिए
    हार्दिक शुभकामनाएँ!
    धन्यवाद
  11. siddharth shankar tripathi
    वाह! क्या बात है…। बहुत मजेदार पोस्ट रही ये भी।
    ============================
    !॥!दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!॥!
    ============================
  12. kanchan
    चाँद से कह दो अभी मत निकल,
    ईद के लिए तैयार नहीं हैं हम लोग।
  13. sumant mishra
    बन्धु,तीन व्यक्ति आप का मोबाइल नम्बर पूँछ रहे थे।मैनें उन्हें आप का नम्बर तो नहीं दिया किन्तु आप के घर का पता अवश्य दे दिया है।वे आज रात्रि आप के घर अवश्य पहुँचेंगे।उनके नाम हैं सुख,शान्ति और समृद्धि।कृपया उनका स्वागत और सम्मान करें।मैने उनसे कह दिया है कि वे आप के घर में स्थायी रुप से रहें और आप उनकी यथेष्ट देखभाल करेंगे और वे भी आपके लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे।प्रकाश पर्व दीपावली आपको यशस्वी और परिवार को प्रसन्न रखे।
  14. विजय गौड
    आपका अंदाज खूब है।
  15. Tarun
    मिट्टी के दिये के बुरे दिन इंडिया में आये होंगे, यहाँ तो हमने मिट्टी के ही दिये जलाये हैं।
    हमारी सहमति–असहमति को तवज्जो दिए बग़ैर मिर्ज़ा हमको टाँग के वैसे ही चल दिए जैसे अमेरिका ब्रिटेन के साथ चलता है।
    ऊपर की लाईन में कुछ तो मीसिंग है, अगर ऐसे कहा जाता तो कैसा होता – “हमारी सहमति–असहमति को तवज्जो दिए बग़ैर मिर्ज़ा हमको टाँग के वैसे ही चल दिए जैसे अमेरिका ब्रिटेन को साथ लिये चलता है। “
  16. gagansharma09
    आपको सपरिवार दीपोत्सव की शुभ कामनाएं। सब जने सुखी, स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें। यही प्रभू से प्रार्थना है।
  17. SHUAIB
    सच्चे मन से दिल की बातें लिखने मे आप कमाल रखते हैं
    आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
  18. प्रियंकर
    ‘वह रोशनी में रोशनी का झंडा फहराता है। हमारी तरह अंधेरे से नहीं लड़ता।’
    क्या बात है . दीपक का काम अंधेरे से लड़ना है,रौशनी में रौशनी का झंडा फहराना नहीं . बहुत सही लिखा है आपने .
    दीपक की मिट्टी और जिस मिट्टी से हम बने हैं उस मिट्टी में बहुत गहरा रिश्ता है . इसीलिए तो तमाम सोडियम-लैम्प और सीएफ़एल के बावजूद मन मिट्टी के दिये की ओर ही झुकता है . उसी के लिए अकुलाता है .
  19. Shiv Kumar Mishra
    शानदार..
  20. Ghost Buster
    हम समझ गए. यहाँ दीया भी है, मिर्जा भी और सुन्दरी भी. तो दीपावली पर ‘सुन्दरी दीया मिर्जा’ की जगमगाहट युक्त ये अनूप पोस्ट तो अव्वल नंबर पाना ही हुई. हप्पी दीवाली.
  21. डा. अमर कुमार
    बेहतरीन… बस और क्या ?
    सिम्पली नथिंग बट बेहतरीन !
  22. Pramendra Pratap Singh
    जलाओं दिये पर रहे ध्यान इतना अधेरा ब्लागिंग में रह न पाये जरा सा। :)
  23. Abhishek Ojha
    दीये के दर्द को अच्छा समझा आपने वरना इतने मसाला साक्षात्कार और तड़क-भड़क खबरों में कौन पूछता !
  24. anitakumar
    अनूप जी बहुत ही संवेदनशील लेकिन आप के खिलंदड़े अंदाज में लिपटी बेहतरीन पोस्ट है। एक ही पोस्ट में अपने प्रतिबिम्बों से कितनी बातें कह गये। दिवाली के दिन मिर्जा का आना सौहार्दय का प्रतीक है। वातावरण के प्रति संवेदना तो है ही। वैसे हैरान हूँ क्या सच में कानपुर में लोग मिट्टी के दिये नहीं जलाते। यहां तो खास मिट्टी के दिये ही जलाये जाते हैं और इतने सुंदर सुंदर डिजाइन के दिये मिलते हैं कि उन्हें फ़ेंकने का तो मन ही नहीं होता। हमने तो रोजमर्रा की दिया बाती के लिए भी मिट्टी का दिया रख छोड़ा है, पीतल को चमकाने की जहमत से बच जाते हैं और मिट्टी के दिये को देख भक्ति जो जगती है वो तो अलग ही अहसास है। इतनी सुंदर संवेदनशील, काव्यात्मक पोस्ट के लिए बधाई
  25. anitakumar
    नववर्ष की शुभकामनाएं
  26. कविता वाचक्नवी
    सर्जनात्मक और बढि़या
  27. Dr.Arvind Mishra
    भरपूर संवेदना !
  28. sameer yadav
    वाह….अभिव्यक्ति, भाव अपने चरम पर हैं…पाठक को अपने रौ में बहा ले जाता है….. सबकुछ है इस लेख में. आभार.
  29. seema gupta
    सवाल : दीपावली पर आप दीये लोग कैसा महसूस करते हैं?
    जवाब : इस दिन हमारी पूछ चुनाव के समय में स्वयंसेवकों की तरह बढ़ जाती है।
    ” great inteview, vaise ye deepak hain bhut kmal ke kya roshnee krtyn hain khud jal kr ..”
    Regards
  30. : फ़ुरसतिया-पुराने लेखhttp//hindini.com/fursatiya/archives/176
    [...] दीपक से साक्षात्कार [...]
  31. Padm Singh पद्म सिंह
    अति सुंदर —-
    जिसने अपना खून जला कर
    अँधियारा उजियार किया …
    जिसने अपनी ज्योति शिखा से
    ऊर्ध्वगमन संदेश दिया …
    जिसने दुख अनदेखा कर के
    तिमिर मिटा जग सुखी किया
    उस दीपक की दयनीय दशा ने
    दीवाली पर दुखी कर दिया
    …..पद्म सिंह
    Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ
  32. Alpana
    वाह!
    चार साल पुराना लेख आज भि उतना ही सामायिक..
    ”यहाँ तो सब कुछ कूड़ा है”
    अफ़सोस इतने सालों में भी दीपक ‘ का दुःख कुछ कम न हुआ !
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..बुरा न मानो …दीवाली है !
  33. Alpana
    वाह!
    चार साल पुराना लेख आज भी उतना ही सामयिक..
    ”यहाँ तो सब कुछ कूड़ा है”
    अफ़सोस इतने सालों में भी दीपक ‘ का दुःख कुछ कम न हुआ !
    Alpana की हालिया प्रविष्टी..बुरा न मानो …दीवाली है !
  34. mahendra mishra
    सुन्दर प्रस्तुति … दीवाली पर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं …
  35. वीरेन्द्र कुमार भटनागर
    आपकी ४ साल पुरानी पोस्ट पढ़ी। आप की नज़र तो बेमिसाल है ही आप का अन्दाज़े-बयाँ भी अद्भुत है। आप कोई भी विषय चुनें, उसे जबर्दस्त रोचक बना देते हैं। दीपक की लोकप्रियता भले ही घट रही हो, ऐसा ही लिखते रहे तो आपकी लोकप्रियता ज़रूर एक दिन हास्य-व्यंग का शीर्ष छुयेगी। दीपक के आलोक में जो शीतलता है, सुकून है वह अन्यञ कहाँ। दीपक प्रतीक है आशा का, जीवन का, तिमिर से संघर्ष का, वह अब भी मौजूद है आरती की थाली में, गंगा के घाटों पर। दीपक हमारी संस्कृति का अंग है।
  36. वीरेन्द्र कुमार भटनागर
    दीवाली पर्व के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं
  37. sanjay jha
    (:(:(:
    प्रणाम.

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